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क्या है मेटा ध्यान?


क्या है मेटा ध्यान/METTA/LOVING KINDNESS MEDITATION? -

05 FACTS;-

1-मेटा यह शब्‍द पाली शब्‍द से लिया गया है।इसका मतलब दया (kindness), परोपकार (benevolence) और साख (good will) होता है। मेटा मेडिटेशन की उत्‍पत्ति या ये कहें कि इसे करने की शुरूआत बौद्ध परंपराओं से हुई है।वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस मेडिटेशन को बहुत ही प्रभावकारी माना गया है।आज के दौर मे हम मे ज़्यादातर लोग एक समस्या का सामना कर रहे है और वो है हर बात पर judgmental हो जाने की समस्या। ऐसे मे हम हर चीज को तोलने का काम करना शुरू कर देते है और इतना ज्यादा कर देते है की हर काम मे सिर्फ negativity ही दिखाई देने लगती है। खुद को या दूसरों को criticize करना एक हद तो ठीक है लेकिन जब यह हमारे व्यवहार का हिस्सा बन जाता है तो inner peace से उतनी ही दूरी बनती रहती है जो जन्म देती है doubts को।

2-यह doubts न सिर्फ हमारे सेल्फ कॉन्फिडेंस को कम करता है बल्कि हमारे नजरिए को भी काफी प्रभावित करता है।मन की शांति यानि inner peace जाने से शुरुआत होती है मानसिक समस्याओ की, रिश्तो मे खटास की और ज़िंदगी मे नीरसता की। ऐसे मे स्ट्रैस, डिप्रेशन और अन्य रोग हम पर हावी होने लगते है और ज़्यादातर कामो मे असफलता ही हाथ लगती है फिर चाहे वो आपके गोल्स हो, पढ़ाई हो या रिलेशनशिप। इस judgmental या criticism की ज्यादा भावना को दूर करने के लिए प्राचीन समय से ही Buddhist एक meditation technique पर ज़ोर देते आए है और वह है Loving-kindness meditation जिसके अभ्यास से आपको अपने चारो ओर केवल सकारात्मकता की दिखाई देगी।

3-Loving-kindness meditation अपने और दूसरों के प्रति प्यार और दयालुता का दृष्टिकोण बनाने पर केंद्रित है। कई रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग इस तरह के ध्यान का अभ्यास करते हैं, उनमें डिप्रेशन होने के चांस कम होते है, सोच पॉज़िटिव रहती है और नकारात्मक भावनाएं मन मे नहीं आती जिससे दुनियाँ को देखने का नजरिया सकारात्मक रहता है ।

Loving-kindness meditation से criticism की भावना कम होती है , जो विभिन्न मानसिक विकारों से हमे बचाता है। यह एक self-psychotherapy की तरह है जो मन को शांत और भ्रम से मुक्त करने का एक तरीका है ।Loving-kindness meditation अपने और दूसरों के प्रति प्यार और दयालुता का दृष्टिकोण बनाने पर केंद्रित है।

4-मेटा ध्यान को आमतौर पर लविंग काइंडनेस मेडिटेशन के रूप में भी जाना जाता है। इस ध्यान को करने से खुशी और दया का भाव जागृत होता है और दूसरों के प्रति अच्छे विचार उत्पन्न होते हैं। इस ध्यान को करने से आपके व्यक्तित्व का विकास होता है और आप भीड़ में एक अलग पहचान बना पाते हैं।क्‍योंकि किसी के प्रति प्‍यार और दया की भावना रखने से आप दूसरों को खुश रखते हैं और खुद भी अच्‍छा महसूस करते हैं।मेटा ध्यान का अभ्यास करके आप खुद से बिना शर्त के प्रेम करना सीखते हैं और फिर आप सीखते हैं कि अपने आसपास के सभी लोगों के लिए निश्छल और निस्वार्थ प्रेम को कैसे विकसित किया जाए। साथ ही आप यह भी सीखते हैं कि उन लोगों के लिए भी करुणा कैसे महसूस करें, जिन्होंने आपको गहराई से चोट पहुंचाई हो या जिनके साथ आपका टकराव हुआ हो। 5-मेटा ध्यान को लोग प्रेम जागृत करने वाली ध्यान साधना भी कहते हैं। इस के नाम से ही पता चलता है -दूसरों की प्रति दया , प्रेम और आदर की भावना।दया और प्रेम की भावना की ताकत केवल परिवार, धर्म या सामाजिक वर्ग तक सीमित नहीं है। हम अपने स्वयं के साथ शुरू करते हैं और धीरे-धीरे सभी प्राणियों को खुशहाली की खुशी प्रदान करते हैं।इसके लिए Metta Meditation एक अच्छा माध्यम होता है और यह करने में भी बहुत ही आसान होता है।दलाई लामा के अनुसार ''हमारे जीवन का लक्ष्य दूसरों की प्रति दयावान रहना है।'दूसरों के प्रति प्रेम और दया भाव रख ने से हमारी बहुत प्रकार की मानसिक बिमारियां दूर होती है।

मेटा मेडिटेशन के लाभ ;-

09 POINTS;-

1-मेटा ध्यान करने हमारे अंदर प्रेम भावना ,दया और कई सकारात्मक भावनाओ का विकास होता है।

2-दूसरों की प्रति प्रेम , दया उत्पन्न होने से हमारे रिश्तों में मिठास आती है और लड़ाई -झगडे बिलकुल खत्म हो जाते हैं।

3-मानसिक शांति प्राप्त होने लगती है और शरीर के रोगों से भी छुटकारा मिलने लगता है।मेटा ध्यान (Metta Meditation) माइग्रेन दर्द को कम करने में मदद करता है और पुराने माइग्रेन से जुड़े भावनात्मक तनाव को कम करता है।

4-मेटा ध्यान से आपके अवचेतन मन का विकास होता है। शारीरिक और मानसिक रूप से प्रबल बनाता है।

5-मेटा मेडिटेशन करने से ईष्या और द्वेष जैसी भावनाओं का नाश होता है और सकारात्मक विचारों का विकास होता है।

6-यदि मेटा मेडिटेशन को रोज करते है तो इससे आत्म स्वीकृति का विकास होता है।अवसाद को दूर करता है।अपनी आत्म-आलोचना को बंद कर देता है।

7-मेटा मेडिटेशन से लोगों के प्रति प्रेम और दया की भावना पैदा होती है और आपके अंदर दूसरों के प्रति सहानुभूति में वृद्धि होती हैIइसको नियमित रूप से करने पर जीवन के उदे्श्य समझने में मदद मिलती है|

8-ह्रदय को सुरक्षित और स्वस्थ रखता हैं।यह आत्म-करुणा और सकारात्मक भावनाओं में सुधार करता है।

9-इस ध्यान को करने से जब आप अपने और दूसरों के प्रति प्यार और दया की भावनाओं के साथ सोते हैं, तो आपको शून्य तनाव होगा और आप अधिक शांति से सो पाएंगे।

सावधानी:-

03 POINTS ;-

1-मेटा में ज्ञान का उपयोग करना बेहद जरूरी है, जब आप इसका अभ्यास कर रहे है तब भी और जब आप इसे विकसित कर रहे है तब भी| क्योंकि इसमें कुछ ऐसे पहलू हैं, जो आपके जीवन को कठिन बना सकते है|

2-आपको इसे अपने व्यवहार में थोड़ा बहुत शामिल करना है तो यह सही होगा क्योंकि यदि आप अपना दिल बहुत ज्यादा खोलते हैं, तो आप निराधार या थका हुआ महसूस कर सकते हैं। मेटा को करते वक्त संतुलित तरीके से काम करना पड़ता है। 3-मेटा हमारे सभी रिश्तों में जैसे कि हमारे परिवार, दोस्तों, परिचितों, सह-कार्यकर्ताओं के साथ रिश्ते में धैर्य और सही बातचीत लाता है| साथ ही यह हमें बेहतर तरीके से रहना भी सिखाता है|

मेटा ध्यान कैसे करें?-HOW TO DO LOVING-KINDNESS MEDITATION?

1-सबसे पहले अपने आप को accept करे और अपने आप से प्यार करना सीखे। यदि प्रतिरोध का अनुभव होता है तो यह इंगित करता है कि आपमे नकारात्मक भावनाएं मौजूद हैं। हम मे से ज़्यादातर लोग अपने आप को काफी criticize करते है जिससे self confidence और positivity धीरे धीरे कम होती रहती है। ऐसे मे हम दुनियाँ को भी उसी चश्मे से देखते है जिससे चारो तरफ negativity ही दिखती है और मन परेशान होने लगता है जो हमे स्ट्रैस और डिप्रेशन की ओर दखेलता है।

इसके लिए अपने लिए कुछ समय निकालें (कुछ मिनट) और आराम से बैठें। अपनी आँखें बंद करें, अपनी मांसपेशियों को आराम दें, और कुछ गहरी साँस लें।आप पूरी तरह से physical और emotional wellness और आंतरिक शांति का अनुभव करने की कल्पना करें। अपने लिए प्यार महसूस करने की कल्पना करें, अपने आप को धन्यवाद दें कि, यह जानते हुए कि आप जैसे हैं वैसे ही सही हैं। आंतरिक शांति की इस भावना पर ध्यान दें, और कल्पना करें कि आप तनाव को दूर कर रहे हैं और प्यार की भावनाओं में सांस ले रहे हैं।

2-अपने लिए तीन या चार सकारात्मक वाक्य दोहराएं जैसे....

मैं खुश हूँ और मुझे खुश ही रहना है

मैं हर तरह से सुरक्षित हूँ

मैं स्वस्थ, शांतिपूर्ण, और मजबूत हूँ

मै हर समस्या का सामना करने मे सक्षम हूँ

मै अपने सभी goals और targets पूरा करने मे सक्षम हूँ

3-कुछ पल के लिए उस एहसास में डूब जाइए । यदि आपका ध्यान किसी और चीज़ पर जाता है, तो धीरे-धीरे उसे प्यार भरी सकारात्मक भावनाओं की ओर दुबारा ध्यान लगाएँ । इन भावनाओं को अपने आप पर छा जाने दें।आप चाहे तो यह शब्द किसी दूसरे इंसान के लिए भी दोहरा सकते है । किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जो आपके बहुत करीब हैं – जैसे पति या पत्नी, बच्चे, माता-पिता या सबसे अच्छा दोस्त। उनके प्रति अपना आभार और प्यार महसूस करें। उस भावना के साथ रहे ।

एक बार जब आप उस व्यक्ति के प्रति इन भावनाओं को रखते हैं, तो अपनी ज़िंदगी के अन्य महत्वपूर्ण लोगों को अपनी awareness में लाएं, एक-एक करके, और उन्हें आंतरिक शांति के साथ कल्पना करें। फिर दूसरे दोस्तों और परिवार, फिर पड़ोसियों और परिचितों, यहां तक ​​कि दुनिया भर के लोगों की कल्पना करे । आप इनके प्रति प्यार की इन भावनाओं को बढ़ा सकते हैं और इस सकारात्मक भावना पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। आप उन लोगों को भी शामिल कर सकते हैं जिनके साथ आपका मनमुटाव रहा हो, कोई ऐसा व्यक्ति जिसके प्रति आप नाराजगी या गुस्सा महसूस करते हैं। इससे आप उसे क्षमा करके मन की मैल और नकरात्मक विचारो से आंतरिक शांति पा सकते है।जब आपका ध्यान पूरा हो जाए (जब भी आप निर्णय लें), अपनी आँखें खोलें और याद रखें कि आप दिन भर में उस अद्भुत भावना को फिर से प्रकट कर सकते हैं। आप ये रोजाना कर सकते है इन पॉज़िटिव बातों से आपमे सकरात्मक ऊर्जा का संचार होगा और किसी भी तरह की negativity आपको परेशान नहीं कर पाएगी। ऐसे होने होने न सिर्फ आप डिप्रेशन, तनाव जैसे मनोवैज्ञानिक रोगो से दूर रहेंगे बल्कि मजबूत आत्मविश्वास के साथ हर समस्या का सामना कर पाएंगे और अपने लक्ष्यो मे आने वाली रुकावटों को आसानी से दूर करके उन्हे हासिल कर पाने की क्षमता विकसित करेंगे।

मेटा ध्यान करने का तरीका;-

04 POINTS ;-

इस ध्यान को करने के लिए भी सामान्य ध्यान नियमो का पालन करना पड़ता हैं ....

1-इस ध्यान को करने के लिए किसी शांत और स्वच्छ वातावरण वाली जगह का चुनाव करे और हो सके प्रकृति के करीब वाली जगह का चुनाव करे जहाँ पर स्वच्छ हवा, चिड़ियों की मधुर आवाजे और हरियाली हो।जगह का चुनाव करने के बाद किसी भी ध्यान मुद्रा में बैठ जाए जो आपको आरामदायक लगे।

2-अब इस बात का ध्यान रखे की चेहरे पर किसी भी प्रकार का खिचाव ना बिलकुल ऐसे बैठे जैसे आप इस प्रकृति को धन्यवाद दे रहे हो और चेहरे पर हलकी सी मुस्कराहट लाये। मेटा ध्यान का एकमात्र उद्देश्य आपके मन में दूसरों के प्रति और इस प्रकृति के प्रति प्रेम भावना उत्पन्न करना हैं।

3-इसे करने के लिए सबसे पहले एक शांत जगह पर शांतिपूर्वक एक आसन पर बैठ जाये और बैठने के बाद अपनी आँखे बंद कर ले।अपनी मांसपेशियों को आराम दें और गहरी श्वास लें।कल्पना करें कि आप अपने भीतर पूर्ण शारीरिक और भावनात्मक शांति का अनुभव कर रहे हैं।आंतरिक शांति की इस भावना पर ध्यान केंद्रित करें और कल्पना करें आपके अंदर प्यार, दया और परोपकार की भावना पैदा हो रही है।साथ ही आप कुछ सकारात्मक वाक्यांशों का उच्चारण कर सकते हैं। जैसे -मैं खुश हूँ और मुझे खुश ही रहना है। मैं हर तरह से सुरक्षित हूँ। मैं स्वस्थ, शांतिपूर्ण, और मजबूत हूँ। मैं हर समस्या का सामना करने मे सक्षम हूँ। मैं अपने सभी लक्ष्यों और उद्देश्यों को पूरा करने मे सक्षम हूँ। इसके बाद इन वाक्यांशों को दूसरों की ओर अग्रसारित करें।

4-इसके बाद किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचें जिसे आप पसंद करते हैं या जो आपके प्रति दयालु है। उनके प्रति दया, प्रेम और परोपकार की भावना को महसूस करें। इसके अलावा उन लोगों को भी शामिल करें जिनके साथ आपका मनमुटाव या नाराजगी चल रही है। इस ध्यान से आप उन्हें क्षमा कर देंगे और आपके मन उनके प्रति उत्पन्न हुए नकरात्मक विचारों का अंत हो जाएगा।जब आपको लगे कि आपका ध्यान पूरा हो गया है, तो धीरे से अपनी आँखें खोलें। याद रखें कि प्रेमपूर्ण ध्यान की भावनाओं को दिनभर फिर से प्रकट कर सकते हैं।इस ध्यान को आप नियमित कर सकते हैं।इस ध्यान तकनीक का अभ्यास विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है।

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EXERCISE ONE;-

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

MEANING IN HINDI;-

हे जगत के परम सत्ता परब्रहम परमेश्वर ,

शांति स्थापित करे |

तीनो लोको में , जल में, धरती में और आकाश में अन्तरिक्ष में, अग्नि में , पवन में, औषधि में , वनस्पति वन में , उपवन में सम्पूर्ण विश्व में ,अवचेतन मे शांति करे |

जीवमात्र के ह्रदय में , मुझमे , तुझमे शांति |

जगत के कण कण में , ॐ शांति शांति शांति भव |

MEANING IN ENGLISH;- May peace radiate there in the whole sky as well as in the vast ethereal space everywhere. May peace reign all over this earth, in water and in all herbs, trees and creepers. May peace flow over the whole universe. May peace be in the Supreme Being Brahman. And may there always exist in all peace and peace alone. Aum peace, peace and peace to us and all beings!

EXERCISE TWO;-

Mantra from Upanishad ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः MEANING IN HINDI;- ॐ सब सुखी हों सब स्वस्थ हों । सब शुभ को पहचान सकें / सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें कोई प्राणी दुःखी ना हो/किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े। ।। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः MEANING IN ENGLISH;- May All Be Prosperous and Happy May All Be Free from Illness May All See What Is Spiritually Uplifting/May All See what is Auspicious, May No One Suffer In Any Way Om Peace, Peace, Peace..

NOTE-

अब अपने मनमें यह महसूस करे कि मेरा मन प्रेम भावना और दया से भर रहा हैं और मेरे अंदर की सारी बुराई मेरे सांसो के माध्यम से बाहर निकल रही है। इस प्रक्रियां को प्रतिदिन कम से कम 20 मिनट के लिए अवश्य करे। आप अनुभव करेंगे की आप पहले से बेहतर बन रहे हैं।



EXERCISE OF SENDING LOVING -KINDNESS TO ONESELF;-

02 POINTS;-

1--To practice loving-kindness/ Metta meditation, sit in a comfortable and relaxed manner. Take two or three deep breaths with slow, long and complete exhalations. Let go of any concerns or preoccupations. For a few minutes, feel or imagine the breath moving through the center of your chest - in the area of your heart.

2-Metta is first practiced toward oneself, since we often have difficulty loving others without first loving ourselves. Sitting quietly, mentally repeat, slowly and steadily, the following or similar phrases:--

May I be happy. May I be well. May I be safe. May I be peaceful and at ease.

NOTE;-

1-While you say these phrases, allow yourself to sink into the intentions they express. Loving-kindness meditation consists primarily of connecting to the intention of wishing ourselves or others happiness.

2-However, if feelings of warmth, friendliness, or love arise in the body or mind, connect to them, allowing them to grow as you repeat the phrases. As an aid to the meditation, you might hold an image of yourself in your mind's eye. This helps reinforce the intentions expressed in the phrases.

EXERCISE OF SENDING LOVING -KINDNESS TO OTHERS;-

03 POINTS;-

1-After a period of directing loving-kindness toward yourself, bring to mind a friend or someone in your life who has deeply cared for you. Then slowly repeat phrases of loving-kindness toward them:

May you be happy. May you be well. May you be safe. May you be peaceful and at ease.

2--As you say these phrases, again sink into their intention or heartfelt meaning. And, if any feelings of loving-kindness arise, connect the feelings with the phrases so that the feelings may become stronger as you repeat the words.

3-As you continue the meditation, you can bring to mind other friends, neighbors, acquaintances, strangers, animals, and finally people with whom you have difficulty. You can either use the same phrases, repeating them again and again, or make up phrases that better represent the loving-kindness you feel toward these beings.

NOTE;-

1--In addition to simple and perhaps personal and creative forms of metta practice, there is a classic and systematic approach to metta as an intensive meditation practice. Because the classic meditation is fairly elaborate, it is usually undertaken during periods of intensive metta practice on retreat (retire).

2-Sometimes during loving-kindness meditation, seemingly opposite feelings such as anger, grief, or sadness may arise. Take these to be signs that your heart is softening, revealing what is held there. You can either shift to mindfulness practice or you can—with whatever patience, acceptance, and kindness you can muster (collect) for such feelings—direct loving-kindness toward them. Above all, remember that there is no need to judge yourself for having these feelings.


EXERCISE OF RECEIVING LOVING -KINDNESS ;-

04 POINTS;-

1-Keeping your eyes closed, think of a person close to you who loves you very much. It could be someone from the past or the present; someone still in life or who has passed; it could be a spiritual teacher or guide. Imagine that person standing on your right side, sending you their love.

2-That person is sending you wishes for your safety, for your well-being and happiness. Feel the warm wishes and love coming from that person towards you.

3-Now bring to mind the same person or another person who cherishes you deeply. Imagine that person standing on your left side, sending you wishes for your wellness, for your health and happiness. Feel the kindness and warmth coming to you from that person.

4-Now imagine that you are surrounded on all sides by all the people who love you and have loved you. Picture all of your friends and loved ones surrounding you. They are standing sending you wishes for your happiness, well-being, and health. Bask in the warm wishes and love coming from all sides. You are filled, and overflowing with warmth and love.

EXERCISE OF SENDING LOVING -KINDNESS TO LOVED ONES ;-

07 FACTS;-

1-Now bring your awareness back to the person standing on your right side. Begin to send the love that you feel back to that person. You and this person are similar. Just like you, this person wishes to be happy. Send all your love and warm wishes to that person.

2-Repeat the following phrases, silently:--

May you live with ease, may you be happy, may you be free from pain.

May you live with ease, may you be happy, may you be free from pain.

May you live with ease, may you be happy, may you be free from pain.

3-Now focus your awareness on the person standing on your left side. Begin to direct the love within you to that person. Send all your love and warmth to that person. That person and you are alike. Just like you, that person wishes to have a good life.

4-Repeat the following phrases, silently:

Just as I wish to, may you be safe, may you be healthy, may you live with ease and happiness.

Just as I wish to, may you be safe, may you be healthy, may you live with ease and happiness.

Just as I wish to, may you be safe, may you be healthy, may you live with ease and happiness.

5-Now picture another person that you love, perhaps a relative or a friend. This person, like you, wishes to have a happy life. Send warm wishes to that person.

Repeat the following phrases, silently:

May your life be filled with happiness, health, and well-being.

May your life be filled with happiness, health, and well-being.

May your life be filled with happiness, health, and well-being.

Sending Loving-Kindness to Neutral People

6-Now think of an acquaintance, someone you don’t know very well and toward whom you do not have any particular feeling. You and this person are alike in your wish to have a good life.

Send all your wishes for well-being to that person, repeating the following phrases, silently:

Just as I wish to, may you also live with ease and happiness.

Just as I wish to, may you also live with ease and happiness.

Just as I wish to, may you also live with ease and happiness.

7-Now bring to mind another acquaintance toward whom you feel neutral. It could be a neighbor, or a colleague, or someone else that you see around but do not know very well. Like you, this person wishes to experience joy and well-being in his or her life.

Send all your good wishes to that person, repeating the following phrases, silently:

May you be happy, may you be healthy, may you be free from all pain.

May you be happy, may you be healthy, may you be free from all pain.

May you be happy, may you be healthy, may you be free from all pain.

EXERCISE OF SENDING LOVING -KINDNESS TO ALL LIVING BEINGS;-

02 POINTS;-

1-Now expand your awareness and picture the whole globe in front of you as a little ball.

2-Send warm wishes to all living beings on the globe, who, like you, want to be happy:

Just as I wish to, may you live with ease, happiness, and good health.

Just as I wish to, may you live with ease, happiness, and good health.

Just as I wish to, may you live with ease, happiness, and good health.

EXERCISE OF SENDING LOVING -KINDNESS TO UNIVERSE;--

EXERCISE ONE;-

(Mantra ONE from Upanishad in sanskrit with meaning) --

1-Om Dyauh Shaantir-Antarikssam Shaantih

2-Prthivii Shaantir-Aapah Shaantir-Ossadhayah Shaantih |

3-Vanaspatayah Shaantir-Vishve-Devaah Shaantir-Brahma Shaantih

4-Sarvam Shaantih Shaantireva Shaantih Saa Maa Shaantir-Edhi |

5-Om Shaantih Shaantih Shaantih ||

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः

पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः ।

वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः

सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Now expand your awareness and picture the whole globe in front of you as a little ball. Send warm wishes to all living/non living beings on the globe,

1: Om, May there be Peace in Heaven, May there be Peace in the Sky,

2: May there be Peace in the Earth, May there be Peace in the Water, May there be Peace in the Plants,

3: May there be Peace in the Trees, May there be Peace in the Gods in the various Worlds, May there be Peace in Brahman,

4: May there be Peace in All, May there be Peace Indeed within Peace, Giving Me the Peace which Grows within Me,

5: Om, Peace, Peace, Peace.

EXERCISE TWO;-

(Mantra ONE from Upanishad

(Mantra from Upanishad in sanskrit with meaning);--

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।