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क्या ध्यान साधना बढ़ाने के लिए क्षमा और कृतज्ञता (Forgiveness &Gratitude) आवश्यक हैं?

क्षमा का अर्थ; -

03 FACTS;-

1-शरीर के तल पर सम्यक आहार स्वास्थ्यपूर्ण हो, अनुत्तेजनापूर्ण हो, अहिंसक हो और चित्त के आधार पर आनंदपूर्ण चित्त की दशा हो, मन प्रसन्न हो, और आत्मा के तल पर कृतज्ञता का बोध हो, धन्यवाद का भाव हो। ये तीन बातें व्यक्ति को सम्यक बनाती हैं।प्रत्येक इंसान में गुण और अवगुण दोनों ही होते हैं लेकिन जो इंसान अवगुण का मार्ग छोड़ कर सद्गुणों के मार्ग पर चलता हैं वह इन्सान महान बन जाता हैं और दूसरो के दिलो पर हमेशा राज करता हैं।तीन शक्तिशाली संसाधन आपके पास हमेशा उपलब्ध हैं: प्यार, प्रार्थना और क्षमा। क्षमा, पवित्रता का प्रवाह है,नफरत का निदान है।क्षमा का आधार धर्म होता है। क्रोध सदैव ही सभी के लिए अहितकारी है और क्षमा सदा, सर्वत्र सभी के लिए हितकारी होती है। वैदिक ग्रंथों में भी क्षमा की श्रेष्ठता पर बल दिया गया है। क्षमा प्रेम का अंतिम रूप है..क्षमा करने का अर्थ हैं,जो बीत गया उसे जाने देना..

2-बिना क्षमा के,कोई भविष्य नहीं है..जब आप किसी को क्षमा करते हैं तो, आप कभी बीते समय को नहीं बदलते लेकिन यकीकन आप भविष्य को बदल सकते हैं..क्षमा मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ तथा सर्वोच्च गुण हैक्षमा मांगने के लिए व्यक्ति को मजबूत होना पड़ता है,और एक मजबूत व्यक्ति ही क्षमा कर सकता हैजो क्षमा करता है और बीती बातों को भूल जाता है, उसे ईश्वर की ओर से पुरस्कार मिलता हैक्षमा एक ऐसा उपहार है,जो हम स्वयं को देते हैं

3-क्षमा पर सुविचार ;-

07 POINTS;-

1-क्षमा दंड देने के समान है...माफ़ करने जैसा,पूर्ण कोई बदला नहीं है....

2-क्षमा करना, एक मधुर प्रतिशोध है....रात में सोने से पहले,हर किसी को हर किसी बात के लिए,

क्षमा कर देना ही,एक लम्बे और सुखदायक जीवन का रहस्य है....क्षमा दंड से बड़ी है

3-क्षमा पर मनुष्य का अधिकार है, वह पशु के पास नहीं मिलती..

4-त्रुटि करना मानवीय है, परन्तु क्षमा करना ईश्वरीय

5-बेवकूफ व्यक्ति न तो क्षमा करता है,और न ही भूलता है,

भोला व्यक्ति क्षमा भी कर देता है,और भूल भी जाता है,

पर बुद्धिमान व्यक्ति क्षमा कर देता है,लेकिन भूलता नहीं है....

6-माफ़ी मांगने का मतलब यह नहीं है कि,

आप गलत हो और दूसरा सही है.

इसका अर्थ यह है कि,

आप अपने अहम् से ज्यादा,

अपने सम्बंधों की कदर करते हैं..

7-करुणा में बड़प्पन है, सहानुभूति में एक सुंदरता और क्षमा में एक अनुग्रह है।

ध्यान साधना में क्षमा का महत्व;-

04 FACTS;-

1-अपनी ध्यान साधना बढ़ाने के लिए यह एक आवश्यक कदम है।आंख बंद करके गुरु और ईश्वर को साक्षी रखकर खुद को क्षमा कर दो क्योंकि आप खुद को क्षमा कर पाए तो आप सभी से क्षमा मांग पाओगे या क्षमा कर पाओगे।सभी से क्षमा मांग

कर खुद को भी क्षमा करें अपनी आंतरिक क्षमता को पहचान कर सर्वप्रथम अपनी गलतियों के लिए अपने आप को माफ

करे ।संकल्प करे कि अगर जाने अनजाने में मेरे कर्म और व्यवहार द्वारा किसी को भी कोई दुख पंहुचा हो तो आज मैं उन सभी से सच्चे दिल से माफी मांगता हूं।जो गलती मुझसे हुई है उसके लिए तो मैं कुछ नहीं कर सकता परन्तु सच्चे दिल से माफी मांग कर मैं उसके प्रभाव को नष्ट कर सकता हूं।

2-बचपन से लेकर आज तक जो जो भी आपके द्वारा हुआ है उसे निकल जाने दो...मिट जाने दो।डीप सबकॉन्शियस माइंड में इन चीजों को पकड़कर मत बैठो और हर तरह से मुक्त हो जाओ। जो याद भी नहीं है, अपने उस व्यवहार के लिए भी सभी से क्षमा मांग कर स्वयं को माफ करें।दिल से माफी मांगे और दिल से माफ करें।ईश्वर को धन्यवाद दे।

माफी मांगने और भाव लाने के लिए हाथ जोड़ने हैं तो हाथ जोड़े।सबको गले लगाना है तो गले लगाए।खुद को प्यार से सिर पर हाथ घुमाना है तो जो भी मुद्रा आपकी मदद करती है, उसी मुद्रा का उपयोग करते हुए खुद को खाली करें .. मुक्त होने दे ।

3- 'मृत्यु के प्रति होश रखो। रात सोते समय आखिरी रात है। सब को धन्यवाद दे दो। जिनसे क्रोध किया हो, उनसे क्षमा मांग लो। जिन्होंने तुम्हारे लिए कुछ किया हो, उन्हें धन्यवाद दे दो। जिन्होंने कुछ भी न किया हो, कम से कम उन्होंने तुम्हारा कुछ बुरा नहीं किया, उन्हें भी धन्यवाद दे दो। जिन्होंने तुम्हारा बुरा किया हो, जिनके प्रति मन में द्वेष, घृणा, क्रोध हो, उनसे भी क्रोध, घृणा का संबंध तोड़ लो।क्योंकि जब शरीर ही न बचेगा, तो क्या नाता, क्या रिश्ता! अपने-पराये से मुक्त हो जाओ। और चुपचाप सो जाओ, जैसे यह आखिरी रात है। तुम्हारी रात का गुणधर्म बदल जायेगा।

4-शरीर सोया रहेगा, तुम्हारे भीतर कोई जागेगा। दीये के नीचे का अंधेरा जो है, वह धीरे-धीरे मिटने लगेगा। सुबह जब उठो तो पहला काम परमात्मा को धन्यवाद दो, कि एक दिन और तूने दिया। बस, प्रसन्नता से, इस अनुग्रह भाव से इसे स्वीकार कर लो। रात फिर आखिरी मान कर सो जाओ। प्रत्येक पल को धन्यवाद से स्वीकार करो और प्रत्येक पल को अंतिम मान कर विदाई का क्षण भी समझ लो। यह तुम्हारे जीवन का सूत्र बन जाए। तुम जल्दी ही पाओगे, तुम और हो गये, नये हो गये। तुम्हारे भीतर कोई दूसरा ही जन्म गया।

/////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////// Positive Thoughts have a high vibration .Positive thought wavelengths are more difficult to get because they take more prana.Negative thought wavelengths are easier to produce because they take less effort. That is why it is easier to be negative than positive as you can just relax and complain.There are some affirmations for self-forgiveness ..

05 POINTS;-

1-To err is human.But to forgive is divine.. 2-I trust myself to build a better future so forgive myself for my past decisions and actions. 3-I release negative, damaging patterns of thought and behaviour. 4-I have the courage to recognize the light within myself. So I am capable of healing. 5-I am learning and growing every day.So I approach myself with patience , understanding ,love, compassion, and peace.I release shame, anger, guilt, and embarrassment. //////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////

FORGIVENESS AFFIRMATIONS TO FORGIVE YOURSELF

10 POINTS;-

1-I acknowledge my faults and forgive myself completely.

2-The past is over. I move beyond my mistakes and focus on living in the NOW. I release the heavy burden of shame, guilt/अपराध बोध, self-hatred /आत्म घृणा and self-judgement/आत्म-निर्णय.

3-To err is human. I forgive myself for my imperfections and release all stress and criticisms towards myself and forgive.. 4- I am at peace with myself and let go of all self-judgment and shame. 5-Self-hatred does not serve .I treat myself with respect and kindness from today forward. 6-I approach myself with patience and understanding. 7-I forgive myself for any regrets that I have been holding and remind myself to focus on the present. 8-Self-forgiveness is a choice, it is a gift of freedom that I give myself.So I allow myself to be forgiven. 9-I exchange my shame and anger for self-love and self-compassion.As I forgive myself, it becomes easier to forgive others.

10- I forgive myself so that I can have inner peace again. I can only share my gift with the world if I first forgive myself. ////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////// FORGIVENESS AFFIRMATIONS TO FORGIVE Family Members and Others;-

11 POINTS;- 1-Forgive others ,not because they deserve Forgiveness but you deserve peace true and emotional mental freedom. 2-I release the past and forgive [name] for the perceived wrongs they have done to me. 3-Every day I have the power to choose, and today I choose to let go of grudge, frustrations and anger against [name of person] and choose to be happy. 4-The incident that happened between us is in the past forever. I wish the best for you. I hold you in the light of forgiveness. All is well between us. 5-I forgive everyone in my past for all perceived wrongs and release them into love. 6-I step away from the prison of resentment into freedom. 7-I see and treat my family through the eyes of love, even if we do not completely agree on everything. I love and accept my family members exactly as they are. 8-My parents did the best they could. I forgive them for any wrong that they unknowingly did and let go of any grudge against them.

10-I choose to uplift those who have hurt me' in prayer, sending them positive energy and intentions.I face negative and critical people with kindness, compassion/करुणा, forgiveness and positivity. 11-I choose to be free and happy and it depends on me not on others..I give up holding things against others.


कृतज्ञता का अर्थ; -

07 FACTS;-

1-कृतज्ञता अर्थात अपने प्रति की हुई श्रेष्ठ और उत्कृष्ट सहायता के लिए श्रद्धावान होकर दूसरे व्यक्ति के समक्ष सम्मान प्रदान करना और मन ही मन एक वचन लेना।इसलिए ये मानवता का बहुत ही विशेष गुण है जिसका पालन करना अनिवार्य है। आपके भीतर कृतज्ञता की भावना बढ़ने के परिणामस्वरूप आपको अधिक समृद्धि, संतुष्टि और मन की शांति की प्राप्ति होगी । कृतज्ञता प्रकट करने के लिए आपको आत्मा से वचन देना होता है कि जब भी कभी मुझे भी अवसर मिलेगा तो मै आपकी या आपके जैसे किसी भी व्यक्ति की कैसे भी सहायता करूँगा, उसके बाद धन्यवाद बोल सकते है।आज इस युग में लोग कृतज्ञता प्रकट तो करते है लेकिन सिर्फ "Thanks" के रूप।क्या धन्यवाद मात्र कहने से कृतज्ञता प्रकट हो जाती है।वास्तव में अपनी आत्मा और ह्रदय से समपर्ण करना ही कृतज्ञता प्रकट करना होता है, जिसे वाणी के द्वारा ही प्रकट किया जाता है और वचन दिया जाता है कि हम आपके कृतज्ञ है ।आपको अपने दिमाग को सचेत रूप से सोचते हुए “थैंक यू” कहने का अभ्यास करना चाहिए।

2-आभार (ग्रेटीट्यूड) वो डोर है जो मनुष्य को उसके वचन के रूप में निस्वार्थ भाव से एक सम्बन्ध स्थापित करती है।जीवन में आपके पास जो भी चीजें हैं, चाहे वे कितनी भी छोटी क्यों न हों, उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद कहें। यह चीजें प्रकृति, पौधों, जानवरों, लोगों, भोजन, भगवान और गुरु, ब्रह्मांड और पृथ्वी, स्वास्थ्य और फिटनेस, कार्य, व्यवसाय, कैरियर, वित्तीय और सामाजिक स्थिति, रिश्ते, जुनून, खुशी, प्रेम, जीवन, घर, भौतिक वस्तुओं, शिक्षा, ज्ञान, कौशल, योग्यता, मित्र और प्रौद्योगिकी

आदि से सम्बंधित हो सकती हैं।कृतज्ञता श्रेष्ठ आत्माओं का लक्षण है जो न केवल हृदय की स्मृति है बल्कि ईश्वर के प्रति उसके उपकारों के लिए हृदय की श्रद्धांजलि हैं ।जो भगवान ने हमें नहीं दिया है उसे उन्होने अपने प्रेम तथा ज्ञान के वश ही नहीं दिया है। फिर भी कभी कभी, जब हम हठ करते हैं तब, भगवान हमें विष पीने के लिये दे देते हैं जिसमें कि हम उससे मुंह मोड़ना सीख सकें तथा ज्ञानपूर्वक उनके दिव्य भोग और अमृत रस का आस्वादन कर सकें ।

3-हर सुबह की शुरुआत चेतना के साथ सोच-समझ कर करें और इसके लिए भगवान को धन्यवाद दें कि आप जीवित हैं।

जब भी आपका दिन खत्म हो, आपको उन सभी क्षणों, घटनाओं, संबंधों, चीजों और संपत्ति के लिए आभारी होना चाहिए जो उस विशेष दिन में अच्छी हुई थीं।जीवन में कई मौके आते हैं, जब हम किसी समस्याग्रस्त स्थितियों में फंसने से बच जाते हैं।

“नियर मिस” का मतलब किसी दुर्घटना या चोट से संयोग वश बच जाना होता है। जीवन में ऐसी तमाम नियर मिस के लिए आभारी होना चाहिए।आप हर दिन अपने भीतर एक बदलाव देखना शुरू कर देंगे।आपको जीवन के नकारात्मक भागों के लिए भी आभारी होना चाहिए।आप अभी जो कुछ भी हैं, जीवन में उन नकारात्मक घटनाओं, स्थितियों या क्षणों से मिली सीख के कारण हैं।

4-यदि वे नकारात्मक परिस्थितियां आपके जीवन का हिस्सा नहीं होती , तो आप अपने अंदर जरुरी बदलाव नहीं कर सकते थे और आज की सफलता के मुकाम तक नहीं पहुंच सकते थे । जीवन के नकारात्मक क्षणों से अपनी स्पॉटलाइट को स्थानांतरित करें और उन नकारात्मक भागों को सकारात्मक दृष्टिकोणों से देखें। ध्यान दें कि उन नकारात्मक घटनाओं का आपके जीवन में क्या प्रभाव पड़ा है और उससे हुए सकारात्मक परिणामो के लिए आभारी रहें।अगर आप किसी भी चीज का जानबूझकर

अभ्यास करते हैं, तो 21 दिनों के बाद यह एक आदत बन जाती है।कृतज्ञ और प्रसन्न हृदय से की गयी पूजा ईश्वर को भी सबसे अधिक प्रिय हैं और तब आप दिल से अपना आभार व्यक्त करते हैं ।हमें जिंदगी में जो भी चीजें प्राप्त हुई है उसके लिए अगर हम ईश्वर का, माता पिता का, गुरु का, अपने मालिक का आभार व्यक्त करते हैं तो वे चीजें हमारे पास सदैव सदैव रहती है, और बढ़ती ही रहती है। इसके विपरीत अगर हमारे पास आभार नहीं है तो जो हमारे पास है वह भी चला जाता है।

5-उदाहरण के लिए एक पहुंचे हुए फकीर थे जिनके बारे में कहा जाता था कि रोज उनकी मुलाकात भगवान से होती है। एक बार एक संपन्न, स्वस्थ व्यक्ति, फकीर के पास आए और कहा कि तुम भगवान से रोज मिलते हो, अब मिलो तो कहना की ''हे

प्रभु मैं तुम्हारा बहुत शुक्रगुजार हूं। तुमने मुझे बहुत कुछ दिया। तन, मन, धन, सब कुछ दिया।

मैं उसके लिए बहुत ही आभारी हूं, और अब मुझे कुछ नहीं चाहिए, मेरा यह संदेश पहुंचा देना'' ।

वहीं पर एक भिखारी भी खड़ा था। उसने कहा जब तुम रब के पास जा रहे हो, तो मेरा भी संदेश पहुंचा देना कि, हे प्रभु तुमने मुझे कुछ भी नहीं दिया। ना पेट भरने को अन्न दिया, ना तन ढकने को कपड़ा दिया। मुझे यह जीवन दिया है तो कुछ तो देते।

वह पहुंचे हुए फकीर जब भगवान के पास गए तो उन्होंने उस स्वस्थ और सुखी व्यक्ति की बात कहीं। तब भगवान ने कहा कि उस व्यक्ति से बोलना कि वह मेरा आभार, कृतज्ञता करना बंद कर दे, तब मैं उसे कुछ नहीं दूंगा।फिर फकीर ने भिखारी

की बात बोली, तब भगवान ने कहा कि उस भिखारी से कहना कि उसे जो भी मिला है, वह उसका आभार व्यक्त शुरू कर दे।

6-फकीर वापिस आकर उस सुखी संपन्न व्यक्ति से बोले, कि भगवान ने कहा है कि तुम आभार, व्यक्त करना बंद कर दो तब उस व्यक्ति ने हाथ जोड़कर कहा कि, मैं तो ऐसा कर ही नहीं सकता। जिस ईश्वर ने मुझे सब कुछ दिया है ,उसके प्रति में कृतज्ञता ना करूं, यह संभव नहीं है। तब फकीर ने कहा कि फिर तो ईश्वर तुम्हें और ज्यादा देते रहेंगे।फिर भिखारी से कहा

कि तुम ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करो तब भिखारी बोला कि," मुझे भगवान ने दिया ही क्या है, जो मैं उनका आभार व्यक्त करूं" कुछ भी तो नहीं दिया मुझे, ऐसा उनका बोलना था कि उसके शरीर पर जो पतला कपड़ा था वह

भी उड़ गया। तो ऐसी है कृतज्ञता की महिमा। ईश्वर के दिए हुए इस अनमोल शरीर ,मस्तिष्क, और स्वास्थ्य संपन्नता, बुद्धि

,सभी का आभार व्यक्त करें ।ईश्वर, माता, पिता, गुरु, और हमारे बड़े जिसे हमारा जीवन चलता है। उन सब का आभार व्यक्त करते रहेंगे तो जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होगी।हदय से कहा गया “धन्यवाद” आपकी उदारता को दर्शाता हैं

7-भोजन हम कर रहे हैं, पानी हम पी रहे हैं, श्वास हम ले रहे हैं, इस सबके प्रति अनुग्रह का बोध होना चाहिए। समस्त जीवन के प्रति, समस्त जगत के प्रति, समस्त सृष्टि के प्रति, समस्त प्रकृति के प्रति, परमात्मा के प्रति एक अनुग्रह का बोध होना चाहिए कि मुझे एक दिन और जीवन का मिला है। मुझे एक दिन और भोजन मिला है। मैंने एक दिन और सूरज देखा। मैंने आज और फूल खिले देखे। आज मैं और जीवित था।जरूरी नहीं था कि मैं आज जीवित होता। लेकिन आज मुझे फिर जीवन मिला है। और जीवन पाने को मेरे द्वारा कुछ भी कमाई नहीं की गई है... मुझे मुफ्त में मिला है। इसके लिए कम से कम धन्यवाद का, मन में अनुग्रह का, ग्रेटिटयूड का कोई भाव होना चाहिए।

8-रवींद्रनाथ की मृत्यु आई, उसके दो दिन पहले उन्होंने कहा '' हे परमात्मा, मैं कितना अनुगृहीत हूं कैसे कहूं! तूने मुझे जीवन दिया, जिसे जीवन पाने की कोई भी पात्रता न थी। तूने मुझे श्वासें दीं, जिसके श्वास पाने का कोई अधिकार न था। तूने मुझे सौंदर्य के, आनंद के अनुभव दिए, जिनके लिए मैंने कोई भी कमाई न की थी। तो मैं धन्य रहा हूं और तेरे बोझ से, अनुग्रह के बोझ से दब गया हूं। और अगर तेरे इस जीवन में मैंने कोई दुख पाया हो, कोई पीड़ा पाई हो, कोई चिंता पाई हो, तो वह मेरा कसूर रहा होगा। तेरा जीवन तो बहुत -बहुत आनंदपूर्ण था। वह मेरी कोई भूल रही होगी। तो मैं नहीं कहता हूं तुझसे कि मुझे मुक्ति दे दे जीवन से। अगर तू मुझे फिर से योग्य समझे तो बार—बार मुझे जीवन में भेज देना। तेरा जीवन अत्यंत आनंदपूर्ण था और मैं अनुगृहीत हूं।यह जो कृतज्ञता का भाव है, वह समस्त जीवन के साथ संयुक्त होना चाहिए।

7--कृतज्ञता पर सुविचार ;-

12 POINTS;-

1-हर एक व्यक्ति को अपने जीवन में, अपने द्वारा की गयी गलतियों को धन्यवाद देना चाहिए

2-हे ईश्वर धन्यवाद… जीवन में दुःख, मुसीबत, जोखिम और चुनौतियों को देने के लिए, क्योंकि मैंने अपने जीवन में सबसे अधिक ऐसे ही हलातों में सीखा हैं

3-मैं शुक्रगुजार हूँ…उन तमाम लोगो का जिन्होंने बुरे वक्त में मेरा साथ छोड़ा क्योकि उन्हें भरोषा था कि मैं मुसीबतों से अकेला ही निपट सकता हूँ

4-हम अपने जीवन के लिए माता-पिता के कृतघ्न होते हैं लेकिन एक अच्छे व्यक्तित्व के लिए हम एक शिक्षक के कृतघ्न होते हैं

मैं तो कांच का टुकड़ा था तुमने ही हीरा बनाया, कैसे शुक्रिया अदा करूँ तूने जो जीना सिखा दिया

5-जब जिन्दगी दूसरा मौका दे तो ईश्वर को धन्यवाद जरूर कहें प्रेम से बात करने वाला या प्रेम देने वाला हमेशा धन्यवाद का प्रात्र होता हैं

6-हर एक मुस्कुराहट के लिए और जिन्दगी में बितायें हर ख़ुशी भरे पल के लिए अपने आप को धन्यवाद जरूर दे, क्योकि हर ख़ुशी और हर मुस्कुराहट आपकी सोच पर निर्भर करती हैं कि आप कैसा सोचते हैं

7-"खुशी कृतज्ञता का सबसे सरल रूप है और महान आत्माओं की निशानी है।"

8-“जब आप आभारी होते हैं, तो डर गायब हो जाता है और बहुतायत प्रकट होती है।”

9-क्या निराशाजनक है, उसे देखने के बजाय, यह देखें कि आशीर्वाद क्या है।कृतज्ञता आपकी आंखों को ब्रह्मांड की असीम क्षमता के लिए खोलती है, जबकि असंतोष आपकी आंखों को बंद कर देता है यदि आप खुशी पाना चाहते हैं, तो आभार खोजें।

10-कृतज्ञता खुशी के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक है। यह वह चिंगारी है जो आपकी आत्मा में खुशी की आग जलाती है।

11-सभी अच्छाई की जड़ें अच्छाई के लिए कृतज्ञता की मिट्टी में निहित हैं।शिकायत आपको ईश्वर से दूर ले जाती है और धन्यवाद आपको ईश्वर तक पहुंचाता है।इसीलिए शुक्र करना सीखो शिकायत तो सारी दुनिया करती है

12-खुशी का रहस्य काफी सरल है, कुछ की भी उम्मीद नहीं करें और सब कुछ की

सराहना करें।कृतज्ञता को अपनी दैनिक प्रार्थना बना ले।

05 GRATITUDE Affirmations for Deep Happiness

1-I am learning to be eternally grateful for what for the love I am capable

of giving, and for the love I have yet to receive and that is keeping the door open for more blessings.

2-I welcome all the ways the universe wants to bless me. I am grateful for the helpful guides because even devastation is an opportunity for transformation . If I approach this situation/experience/person with appreciation, I will be held in the arms of abundance.

3 -My thanksgiving extends far beyond my thoughts; I bring a grateful spirit to each step and action I take. For the rocks and the diamonds, I am thankful, because life is a rich experience that includes everything. I can relax a little and be thankful for what I have now.

4- I accept my burdens and I accept my blessings, and so I transform my burdens into my blessings.

5-I choose to see peace instead. I am willing to trust that my life is exactly as it’s meant to be.

...SHIVOHAM...