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जय शिव शम्भू PART-03

"प्रेम का सागर"

मेरी चाहत थी गंगा सी, वो सागर में समाँ जाती,,

मगर मैं ढूंढती कब से, कि सागर कौन है मेरा,

मुझे आवाज सी आती, मैं उसकी धुन में खो जाती,

सुनो प्रियतम, सुनो मोहन, सुनो प्रभु ,

प्रेम का सागर, मेरी आँखों मे है...

प्रभुवर तुम्हारी एक सुरतिया सी,

ना "मोहन" हो मेरे प्यारे ,ना तुम "शिव" से ही लगते हो,

ना जाने फिर भी क्यों हमको, तुम्ही तुम सबमे दिखते हो,

कदम जब तुम उठाते हो, मेरे भी पैर चलते है,

मुझे महसूस होता है, कहीं घूँघरू से बजते है,

मैं देखूँ जब मेरे आगे ,ना दिखता कुछ भी है पीछे,

ना जाने तुम कहाँ से, हे प्रभु बस आ ही जाते हो,,

मेरी तुम बंद आँखों में ,बहुत सुन्दर से लगते हो.,

मगर जब आँख खुलती है, कहीं तुम खो से जाते हो,,

मैं चाहूँ बस यही प्यारे, खुली जब आंखें हो मेरी,

तुम मेरे पास रह जाओ..,

मुझे ना फ़िक्र हो तन की, ना मेरा मन यें बिचलित हो,,,

मेरे तुम पास बैठें हो, मुझे महसूस हो हरदम,,.....

मेरे तुम हर अकेलेपन की ,एक घूँटी सी बन जाओ,,,

मै जब सोचूँ मैं तन्हा हूं, तुम मेरे पास आ जाओ,,

जहाँ मैं ख्वाहिशेँ टांगू, तुम वो खूंटी सी बन जाओ,,,

मेरी आँखों से जो निकले, वो आँसू पोंछ दो आकर,,,

नहीं सुनता कोई मेरी.. मुझे तुम सुनलो आकर के...

मैं रोती हूं अकेले में, मगर साथ सबके हंसती हूँ...

मेरे होठों को मत देखो, हंसी यें झूठी लगती है,,,.....

मेरी आँखों में बस झांको, जो कभी ना झूठ कहती है,,

जो सागर है तेरे अंदर, मुझे उसमे बहा ले जा,

तू आना एक दफा हमदम, मैं सब कुछ छोड़ चल दूंगी..

🙏 "शिवोहम "🙏 जय शिव शम्भू 🙏

"बंधन" .........Written by Neeha Shukla!

ना बांधो बंधनों मे अब, मुझे अब खोजना "शिव" है,

मुझे है जानना सब कुछ, कहो मैं कौन हूं प्यारे,

कहाँ से आ गयी हूं मैं, मुझे सब कुछ बताओ तुम,

मैं जानूँ सिर्फ इतना ही,

मैं तो हूँ एक ज्योति ,जिसको ज्वाला मे मिलना ही है..,

मगर मैं राह क्या चुन लूँ, मुझे इतना तो समझाओ,

मैं पहले से ही उलझी हूं, मुझे अब और ना बांधो,

नहीं बंधन से भागूँगी अगर तुम हाथ थामोगे,

मुझे वो सब बताओ ना, जो तेरे पास ले आये,

सभी कहते है तुम कण - कण मे बसते हो,,

मेरे अंदर भी रहते हो, मेरे बाहर भी रहते हो ,

मुझे अंदर तो मिलते हो,मगर बाहर नहीं मिलते,,

मैंने एक राह थामी है ,वहाँ हर पल नहीं दिखते,,

मैं कैसे हर कदम समझूँ ,तुम्हारे साथ ही तो हूं,

ना ही कंगन मे बजते हो, ना ही पायल कि धुन मे हो,

मगर है शुक्र फिर भी प्रभु,

मेरी साँसो कि सरगम मे, तुम्ही तुम ही तो बस्ते हो,,,

सच है सदा से एक ही,..ना रंग ना कोई रूप है..

ईश्वर सभी का एक ही,.नजरों से क्यों फिर दूर है,.

है ढूंढना, मिलना तुम्हे,. हर दिल यहाँ मजबूर है,,,

🙏 "शिवोहम "🙏 जय शिव शम्भू 🙏

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🙏"""मेरे साथ चल"""🙏 .......Written by Neeha Shukla!

मेरे साथी सुनो मेरी, मेरे तुम साथ चल दो अब,...

वहाँ पर ले चलूँ तुमको जहाँ सब एक ही तो है,...

जहाँ नदिया का जल भी तुम, वहाँ पूनम की लाली तुम,

वहाँ मौसम बदलते तुम, वहाँ की हर अदा मे तुम.,,

नहीं कुछ भेद चेहरों मे वहाँ, सब आत्मायेँ है ,....

मगर प्यारे सुनो मेरी ...मेरी एक बात मानो तुम,,

उड़ा दो सब गमों को तुम, वो जैसे आसमानों पर धुँआ हो उड़ गया,....

फिर मेरे साथ चलने को ,वो जनम बैन्गनी सी तुम चुनरिया ओढ़ लो,.....

और मेरी ओर देखो तुम, मुझे पहचान लो....

जला दो बंधनों को तुम ह्रदय थाम के,

फिर समझ आएगा ,क्यों थे तुम बंधे,.....

भूलकर खुद को ,मेरी तुम ओर देखो,....

नहीं आये थे तुम इनके लिए, जिनके लिए तुम मर रहे,...

तुम तो सदा से हो मेरे, मेरे लिए ही आये हो,,.....

पूछते रहते हो हरदम क्यों जिस्म हमको दे दिया,,

तो सुनो पूरी करो वो दास्तां, जो थी अधूरी रह गयी,.....

फिर बह चलो तुम सँग मेरे,...

मैं चाहता हूँ आजकल, दुनिया यें दूनती रहे,

और तुम गंगा सी, सागर मे समा जाओ,..

मेरे साथ चलते- चलते,, मेरे साथ चलते - चलते

🙏 "शिवोहम "🙏 जय शिव शम्भू 🙏

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🙏""""""मेरा चाँद"""""🙏

जिद है मेरी बस एक ही, पाना मुझे वह चाँद है,

दूर हाथो से मेरे, दिल के बहुत ही पास है,

देखूँ मैं उसको रोज ही, पाना मगर एक ख्वाब है,

वह तो सांसों से जुड़ा, फिर मैं गिला किससे करूँ,

खुद से शिकायत जब करूँ, दिल यह कहे उसे भूल जा,

बेचैन धड़कन फिर कहे, तू जा निकल और पा ले उसको,

जो तेरा एक ख्वाब है,

जिद है जरुरी जानें जा ,जीने कि यह एक आस है,

जिन्दा हो तुम यह जान लो, जिद को पकड़ कुछ ठान लो,

पाना है गर उस चाँद को, तो चांदनी को जान लो,

वह बंद हो पहरों में ,फिर भी जाओ और पहचान लो,

जीने की एक ही वजह काफी है, गर उसमे वफ़ा,

पर वफ़ा किसके लिए, पहले तो तुम यह जान लो,

तुमने जो ठाना, एक ठिकाना वो है,

सही या है गलत, यह जान लो,,

मरना तो सबको एक दिन ,जीना बड़ा मुश्किल यहाँ,

जीने कि जिद पकड़ो यहाँ, चलते रहो - चलते रहो,

जाना कहाँ यें जानकर,,,,,,,

रास्ते कठिन यह मान लो, पर चाँद, की खातिर तुम्हे सूरज,

में जलना ही होगा, तो ठान लो, फिर जान लो होगा मिलन,,

"पृथ्वी" का अब उस "क्षितिज" से,

🙏 "शिवोहम "🙏 जय शिव शम्भू 🙏