Recent Posts

Archive

Tags

No tags yet.

क्या दर्शन एक है और अभिव्यक्ति अनेक ?क्या जब तक दृष्टि शेष है तब तक दर्शन न होगा?


क्या दृष्टि मुक्त होते ही दर्शन उपलब्ध होता है ;-

17 FACTS;-

1-जीवन एक समस्या नहीं है, अन्यथा उसका समाधान हो जाता । जीवन न प्रश्न है,न पहेली... केवल एक रहस्य है; जिसे बूझने का कोई उपाय नहीं। केवल जीने का उपाय है, समझने का कोई उपाय नहीं है। इसलिए दर्शनशास्त्र की खोज व्यर्थ खोज है ;वह हार जाता है।न

तो कोई प्रश्न जीवन की गहराई को छूता है और न ही कोई उत्तर जीवन की गहराई को छूता है।यहीं दर्शन और धर्म का भेद है।धर्म डुबकी लगाने का उपाय है और दर्शन किनारे पर बैठकर विचार करता है। धर्म सागर में नाव छोड़ देता है जो तूफानों से टकराता है, चुनौतियों को स्वीकार करता है और उन्हीं चुनौतियों, उन्हीं आंधियों से आत्मा का , अनुभव का जन्म होता ह