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क्या नवरात्रि -पूजन के 9 दिवस नवचक्रों के जागरण का समय है ?


नवरात्रि अथार्त नवचक्रों का जागरण ;-

08 FACTS;-

1-नवरात्रि हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण प्रमुख पर्व है ;जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। पौष, चैत्र, आषाढ,अश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है।नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों - महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और महाकाली के नौ स्वरुपों की पूजा होती है।

2-नौ देवियाँ है :-

1-शैलपुत्री - अथार्त पहाड़ों की पुत्री होता है।

2-ब्रह्मचारिणी - अथार्त ब्रह्मचारीणी।

3-चंद्रघंटा - अथार्त चाँद की तरह चमकने वाली।

4-कूष्माण्डा - अथार्त पूरा जगत उनके पैर में है।

5-स्कंदमाता - अथार्त कार्तिक स्वामी की माता।

6-कात्यायनी - अथार्त कात्यायन आश्रम में जन्मि।

7-कालरात्रि - अथार्त काल का नाश करने वली।

8-महागौरी - अथार्त सफेद रंग वाली मां।

9-सिद्धिदात्री - इसका अर्थ- सर्व सिद्धि देने वाली।

3-नवरात्रि उत्सव देवी अंबा (विद्युत) का प्रतिनिधित्व है। वसंत की शुरुआत और शरद ऋतु की शुरुआत, जलवायु और सूरज के प्रभावों का महत्वपूर्ण संगम माना जाता है। इन दो समय मां दुर्गा की पूजा के लिए पवित्र अवसर माने जाते है। त्योहार की तिथियाँ चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित होती हैं। नवरात्रि पर्व, माँ-दुर्गा की अवधारणा भक्ति और परमात्मा की शक्ति (उदात्त, परम रचनात्मक ऊर्जा) की पूजा का सबसे शुभ और अनोखा अवधि माना जाता है।

4-नवरात्रि के पहले तीन दिन देवी दुर्गा की पूजा करने के लिए समर्पित किए गए हैं। यह पूजा उसकी ऊर्जा और शक्ति की की जाती है। प्रत्येक दिन दुर्गा के एक अलग रूप को समर्पित

है।व्यक्ति जब अहंकार, क्रोध, वासना और अन्य पशु प्रवृत्ति की बुराई प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर लेता है, वह एक शून्य का अनुभव करता है। यह शून्य आध्यात्मिक धन से भर जाता है।नवरात्रि के चौथे, पांचवें और छठे दिन लक्ष्मी- समृद्धि और शांति की देवी, की पूजा करने के लिए समर्पित है। व्यक्ति बुरी प्रवृत्तियों और धन पर विजय प्राप्त कर लेता है, पर वह अभी शुद्ध ज्ञान से वंचित है।

5- इसलिए, नवरात्रि के सातवें दिन कला और ज्ञान की देवी, सरस्वती की पूजा की जाती है।

प्रार्थनायें, आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश के उद्देश्य के साथ की जाती हैं। आठवे दिन पर एक 'यज्ञ' किया जाता है। यह एक बलिदान है जो देवी दुर्गा को सम्मान देता है तथा उनको विदा

करता