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ll ॐ सत्- चित् -एकम ब्रह्म: ll ब्रह्ममंत्र/ ब्रह्मस्त्रोत विधि

ll ॐ सत्- चित् -एकमब्रह्म: llब्रह्ममंत्र उद्धार/कीलन तोड़ना ;-

03 FACTS;-

महानिर्वाण तंत्र में भगवान शिव कहते हैं..

1-''सर्वप्रथम परममंत्र के मंत्र का उद्धार बतलाता हूं। इसके प्रणव 'ओम'

का उच्चारण करके सच्चिद पद कहना चाहिए। इसके बाद 'एकम' पद ;तब 'ब्रह्म' पद कहने से मंत्र का उद्धार होता है। संधि क्रम से इन पदों को मिलाने से ''ॐ सत्- चित् -एकम ब्रह्म:''...यह सात अक्षरो का मंत्र बनता है।

हे देवी! जो साधक मंत्र का अर्थ और मंत्र चैतन्य नहीं जानता उसे 100 लाख मंत्र जप करने पर भी मंत्रसिद्धि नहीं होती। इसलिए मैं इस मंत्र का अर्थ और चैतन्य का वर्णन करता हूं। सुनो...

''अ ,ऊ, म'' इन तीन अक्षरो के सहयोग से पूर्ण मंत्र बनता है। अकार का अर्थ संसार का रक्षक होता है। ऊकार का अर्थ संहार करने वाला होता है। और मकार का अर्थ जगत की सृष्टि करने वाला होता है।'ओम 'का अर्थ यही कहा गया है।सत का अर्थ सदा विद्यमान रहने वाला है। चित 'का अर्थ चैतन्य है एवं एक शब्द का अर्थ अद्वैत है।''

2-''यह मंत्र सभी मंत्रों में श्रेष्ठ है। इससे चतुर वर्ग धर्म ,अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है।इस मंत्र को ग्रहण करने के लिए तिथि, नक्षत्र राशि, कुलाकुल, दिन आदि चक्रों की गणना आवश्यक नहीं है।यह मंत्र सिद्ध है। अत इसके संबंध में किसी प्रकार की विचार की अपेक्षा नहीं है।

यह ब्रह्म मंत्र रूपी महामणि जिनके कान में पहुंचता है, वही धन्य है। सभी वस्तुएं उसके लिए सुलभ हो जाती हैं ।ग्रह, बेताल ,ग्रह चेटक, भूत ,पिशाच,

डाकिनी, और मातृका आदि रुष्ट होकर भी उसका क्या कर सकते हैं? ब्रह्म के उपासक को देखकर ही मुड़कर पीछे भाग जाते हैं।

वह ब्रह्म मंत्र से रक्षित रहता है ;ब्रह्म तेज से आच्छादित रहता है।

अतः ग्रह आदि से उसे क्या भय होगा?वह कभी भी भयभीत नहीं होता।

हे देवि परब्रह्म का उपासक सबका हितैषी साधु होता है।सबो का प्रिय

करने वाला होता है। ऐसे महात्मा का अनिष्ट करके कौन मनुष्य शांति से रह सकता है?''

3-''हे देवी !स्त्रोत मंत्र से प्रणव को हटाकर उसके स्थान पर ''ऐं'' वाग्बीज ''ह्रीं'' माया , ''श्रीं'' लक्ष्मी को प्रारंभ में लगाने से क्रमशः विविध विद्याएं, विविध मायाएं और विविध प्रकार के लक्ष्मी मंत्र बनते हैं। मंत्र देने की विधि है कि ''ऐं सच्चिद एकम ब्रह्म: मंत्र से विद्या प्रदान करें।''ह्रीं सच्चिद एकम ब्रह्म:'' मंत्र से माया प्रदान करें तथा ''श्री सच्चिद एकम ब्रह्म:'' मंत्र से लक्ष्मी प्रदान करें।

अनेक जन्मों के पुण्य से अगर सदगुरु मिल जाए तो उसी गुरु के मुख से मंत्र को प्राप्त करके ग्रहण कर लेना चाहिए। इस मंत्र को प्राप्त करते ही

तत्काल जन्म सफल हो जाता है।मंत्र का मानसिक जप करके ;जप का समर्पण ब्रह्म को करने के उपरांत ब्रह्म का मानस पूजन करें।मानस पूजन में ब्रह्म को महाभूतत्वों को अर्पण करें। पृथ्वी तत्व को गंध ,आकाश तत्व को पुष्प, हवा तत्व को धूप ,अग्नि तत्व को दीप और जल तत्व को नैवेद्य के रूप में परमात्मा को समर्पित करें। इसके बाद ब्रह्म स्त्रोत का पाठ करें''।

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