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श्री यन्त्र का मानव शरीर में चक्रों से क्या संबंध हैं ?क्या श्रीयंत्र ध्यान ही चक्रो का जागरण


क्या श्री यन्त्र का संबंध मानव शरीर में स्थित चक्रों से हैं?-

12 FACTS;-

1-श्री यंत्र रहस्यमय आरेख का एक रूप है, जो एक तांत्रिक अनुष्ठान चित्र है जिसका उपयोग ध्यान और एकाग्रता के लिए किया जाता है।श्री यंत्र पर ध्यान केंद्रित करके, आप तुरंत खुद को तनावमुक्त पा सकते हैं। यह ध्यान के लिए एक बहुत शक्तिशाली केंद्र बिंदु है। श्री यंत्र ध्यान का नियमित अभ्यास व्यक्ति के दिमाग को शांत करता है और मानसिक स्थिरता लाता है। यदि हम श्री यंत्र के प्रत्येक तत्व पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हमें ब्रह्मांड और मानव शरीर का गहरा ज्ञान प्राप्त होता है।

2-श्री यंत्र को ब्रह्मांड और मानव शरीर के सूक्ष्म स्तर का प्रतिनिधित्व करने के लिए भी माना जाता है।यन्त्र में सात बिंदु होते हैं जहाँ एक त्रिकोण का शीर्ष दूसरे त्रिकोण के आधार को छूता है।श्रीयंत्र 2816 शक्तियों अथवा देवियों का सूचक है। इसको ,त्रैलोक्य मोहन, अर्थात तीनों लोकों का मोहन यन्त्र, भी कहते है।श्री यंत्र में 9 त्रिकोण या त्रिभुज होते हैं जो निराकार शिव की 9 मूल प्रकृतियों के प्रतीक होते हैं। श्रीयंत्र ध्यान मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष सब कुछ प्रदान करता है ;मनुष्य को अष्ट सिद्धि व नौ निधियों की प्राप्ति होती है। श्री यंत्र ध्यान शरीर के सभी रोगों का नष्ट करके शरीर की कांति को देवताओं और गंधर्वों के समान उज्जवल कर देता है। इसकी ध्यान उपासना से शक्ति स्तंभन होता है व पंचतत्वों का ज्ञान मिलता है।इस ध्यान से दस महाविद्याओं की कृपा भी स्वयं ही प्राप्त हो जाती है। जिनकी अलग अलग उपासना अत्यंत कठिन और दुर्लभ है। श्री यंत्र ध्यान उपासना से साधक की शारीरिक और मानसिक शक्ति पुष्ट होती है।

3-संस्कृत वर्णमाला में 14 स्वर, 33 व्यंजन और 4 आयोगवाह ..ऐसे कुल मिलाकर के 50 वर्ण हैं ।प्रत्येक चक्र में बीजाक्षर के रूप में सभी 50 वर्ण हैं ।उदाहरण के लिए मूलाधार में 4,स्वाधिष्ठान में 6,मणिपुर में 10,अनहत में 12,विशुद्ध में 16,आज्ञा में 2=50 वर्ण।14 ‘माहेश्वर सूत्र’ है,जिसका ज्ञान महर्षि पाणिनि को भगवान् महेश्वर (शिव) से प्राप्त हुआ था । महर्षि के सम्मुख महादेव ने नृत्य किया जिसके समापन के समय उनके डमरू से उपरिलिखित सूत्रों की ध्वनि निकली और वे ही उनके द्वारा प्रस्तुत सूत्रबद्ध संस्कृत व्याकरण का आधार बने।50 वर्ण और 14 ‘माहेश्वर सूत्र’ =64।विशुद्ध चक्र में श्री यंत्र पूर्ण हो जाता है अथार्त आज्ञा चक्र तक 64 योगनियाँ विराजमान हो जाती है।

4-मंत्रमुग्ध आरेख में नौ त्रिकोण होते हैं जो विभिन्न बिंदुओं पर 43 छोटे त्रिकोण बनाते हैं। नौ में से पांच त्रिकोण नीचे की ओर इंगित करते हैं और शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो कि स्त्री शक्ति है। शेष चार ऊपर की ओर इंगित होते है और पुल्लिंग अर्थात शिव का प्रतिनिधित्व करते हैं।श्री यंत्र, जिसे श्री चक्र भी कहा जाता है ;तीन आयामी रूप में, ब्रह्मांड के केंद्र में मेरु का प्रतिनिधित्व करता है। यह गणितीय रूप से एक जटिल संरचना है जिसका आधार स्वर्ण अनुपात है।

5-''सौन्दर्यलहरी आदि शंकराचार्य द्वारा संस्कृत में रचित महान साहित्यिक कृति है। इसमें माँ पार्वती के सौन्दर्य, कृपा का 103 श्लोकों में वर्णन है।सौन्दर्यलहरी केवल काव्य ही नहीं है, यह तंत्रग्रन्थ है। जिसमें पूजा, श्रीयन्त्र तथा भक्ति की तांत्रिक विधि का वर्णन है। इसके दो भाग हैं''-आनन्दलहरी - श्लोक 1 से 41 सौन्दर्यलहरी - श्लोक 42 से 103 ।श्री यन्त्र का स्वरुप ज्योमितीय, मनोहर व् विचित्र है ।इसकी संरचना में बिंदु, त्रिकोण या त्रिभुज, वृत्त, अष्टकमल का प्रयोग होता है। इसके बी