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साधना मे सप्त चक्र भेदन का क्या रहस्य है ?PART-02

सातों चक्रों में 'निद्रा' की स्थिति ;-

10 FACTS;-

1-निद्रा का अपना एक अलग चक्र नहीं है। लेकिन सूक्ष्म शरीर में सहस्‍त्रार के अतिरिक्‍त प्रत्‍येक चक्र में इसका अपना स्‍थान है।जैसे-जैसे तुम ऊपर के चक्रों में प्रवेश करते जाओेगे तुम्‍हारी नींद की गुणवता बेहतर होती जाएगी क्‍योंकि प्रत्‍येक चक्र में गहरी विश्रांति का गुण है।

मूलाधार चक्र में जब तुम्‍हें भूख लगती है तो भूख का चक्र जाग्रत हो जाता है। यदि आपने कभी उपवास किया तो आप चकित हुए होंगे कि शुरू में पहले दो या तीन दिन भूख लगती है और फिर अचानक भूख खो जाती है।लेकिन यदि तुम बेचैन नहीं होते हो तो यह समाप्‍त हो जायेगी।चक्र सो गया है। दिन में फिर एक समय आएगा जब यह जगेगा। और फिर सो जायेगा।जो व्‍यक्‍ति मूलाधार चक्र पर केंद्रित है उसकी नींद गहरी न होगी। उसकी नींद उथली होगी क्‍योंकि वह दैहिक तल पर ;भौतिक स्‍तर पर जीता है।

2-स्वाधिष्ठान चक्र/काम केंद्र में भी ऐसा ही होता है।काम-वासना जगती है और संपूर्ण वासना तिरोहित हो जाती है। चक्र सो गया है।यदि तुम काम वासना का दमन न करो और केवल साक्षी रहो....तीन महीने के लिए यह प्रयोग करो कि जब काम वासना उठे, शांत बैठ जाओ। इसे उठने दो। इसे द्वार खटखटाने दो, आवाज सुनो, ध्‍यान में सुनो लेकिन इसके साथ बह मत जाओ। इसे उठने दो ,इसे दबाओ मत ,इसमें लिप्‍त मत होओ ;साक्षी बने रहो।और फिर स्‍वय: ही तिरोहित हो जाएगी। जैसे कभी थी ही नहीं। वह फिर लौटेगी, फिर चली जाएगी।

3-चक्र चलता रहता है और सातवें चक्र के नीचे सब छ: चक्रों में ऐसा ही होता है।जैसे-जैसे