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क्या रहस्य है प्राण और अपान का?PART 01

क्या अर्थ है इस वाक्य का?

''जो प्राण को ऊपर की ओर उठाता है और अपान को नीचे ढकेलता है ..शरीर के मध्य हृदय में बैठे हुए उस सर्वश्रेष्ठ भजने योग्य परमात्मा की सभी देवता उपासना करते हैं''।

18 FACTS;-

1-सबके भीतर एक ही आकाश है और एक ही आत्मा है। लेकिन इसे आप सिद्धात की तरह मानकर और जिंदगीभर दोहराते रहें, तो कुछ भी न होगा। इसे आप अनुभव की तरह भीतर जान लें-अपने घड़े से अलग होकर जान लें-तो आपको सारे घड़े मिट गए, सिर्फ घड़ों के भीतर एक ही आकाश रह गया। उस एक आकाश का नाम ही ब्रह्म है। वही है बाहर, वही भीतर, वही नीचे, वही ऊपर, वही सब जगह है। क्षुद्र में और विराट में, निम्न में और उच्च में, पर्वतो में और नदियों में, पृथ्वी में और आकाश में, सभी जगह वही है।

2-जो प्राण को ऊपर की ओर उठाता है और अपान को नीचे ढकेलता है शरीर के मध्य हृदय में बैठे हुए उस सर्वश्रेष्ठ भजने योग्य परमात्मा की सभी देवता उपासना करते हैं।

भारतीय योग की एक गहरी खोज इस सूत्र में छिपी है। पश्चिम का चिकित्साशास्त्र, मेडिकल साइंस अभी भी इस संबंध में करीब—करीब अपरिचित है। यह खोज है प्राण और अपान की।

भारतीय चिकित्साशास्त्र आयुर्वेद, योग, तंत्र, इन सबकी यह प्रतीति है कि शरीर में वायु की दो दिशाएं हैं। एक दिशा ऊपर की ओर है, उसका नाम प्राण। और एक दिशा नीचे की ओर है, उसका नाम अपान। शरीर में वायु का दोहरा रूप है और दो तरह की धाराएं हैं। जो मल -मूत्र विसर्जित होता है, वह अपान के कारण है। वह जो नीचे की तरफ वायु बह रही है, वही मल-मूत्र को नीचे की तरफ अपनी धारा में ले जाती है। और जीवन में जितनी भी ऊपर की तरफ जाने वाली चीजें हैं, वे सब प्राण से जाती हैं।

3-इसलिए जो जितना ज्यादा प्राणायाम को साध लेता है, उतना ऊपर उठने में कुशल हो जाता है। क्योंकि ऊपर जाने वाली धारा को विस्तार कर रहा है, फैला रहा है, बड़ा कर रहा है।

ये दो धाराएं हैं, दो करेंट हैं वायु के, शरीर के भीतर। और इन दोनों के मध्य स्थित है परमात्मा, या आत्मा, या चेतना, या जो भी नाम आप देना चाहें। वह जो अंगुष्ठ आकार का आत्मा है, वह इन दोनों धाराओं के बीच में उपस्थित ह