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ब्रेनवेव थैरेपी क्या है?ब्रेनवेव का ध्यान से क्या सबंध है ?

क्या है सूक्ष्म शरीर?-

06 FACTS;-

1-इस ब्रहमांड को समझने के लिए दो दृष्टियों की आवश्यकता है। एक भौतिक दृष्टि और दूसरी आध्यात्मिक दृष्टि। भौतिक दृष्टि के संदर्भ में सभी पहले से ही अवगत हैं। अब आध्यात्मिक दृष्टि से इस ब्रहमांड को समझने का प्रयास किया जाए। हमारे संतों ने अपनी बौद्धिक शक्ति का प्रयोग किया, क्योंकि भौतिक शरीर से किसी खास सीमा तक ही ब्रहमांड को समझा जा सकता है, लेकिन सूक्ष्म शरीर से संपूर्ण ब्रहमांड को समझा जा सकता है।

2-सूक्ष्म शरीर पंच भौतिक पदार्थो से बाहर होता है। इसके लिए हमें स्वीकार कर लेना होगा कि हमारा भौतिक शरीर और सूक्ष्म शरीर अलग है।विज्ञान पहले तो सूक्ष्म शरीर को नहीं मानता था, लेकिन अब वैज्ञानिक भी कहने लगे हैं कि सूक्ष्म शरीर का फोटो भी लिया जा

सकता है।वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी स्वीकारा है कि हम जब अपनी स्थूलता छोड़ दें तो असीमित बन सकते हैं। उन्होंने ‘टाइम एंड स्पेस’ में इसकी चर्चा की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि हम पदार्थ से बंध गए हैं। जब हम इस स्थूलता को छोड़ दें तभी विराट प्रकृति का दर्शन कर सकते हैं।

3-अध्यात्म कहता है कि इस ब्रहमांड को समझने के लिए सूक्ष्म शरीर ही समर्थ हो सकता है, क्योंकि वह पदार्थ के साथ बंधा नहीं है। किसी दूसरे लोक में जाने के लिए हमें यान की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन सूक्ष्म शरीर को कहीं भी आने-जाने में यान की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसलिए हमारे संतों ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति से अपने सूक्ष्म शरीर के द्वारा इस ब्रहमांड का अनुभव प्राप्त किया। आज भी जब तक हम अपने सूक्ष्म शरीर की दिव्य शक्तियों का प्रयोग नहीं करेंगे तब तक कोई भी रहस्य समझ में नहीं आएगा।

4- यह संपूर्ण ब्रहमांड किसी दिव्य ऊर्जा का प्रत्यक्षीकरण है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस ब्रहमांड में केवल ऊर्जा है जो विभिन्न रूपों में दिखती है। विज्ञान भी मानता है कि पदार्थ की अंतिम इकाई ऊर्जा है, तरंग है और अध्यात्म बहुत पहले घोषणा कर चुका है कि यह संसार माया है, पानी का बुलबुला है, जो विभिन्न पदार्थ बनकर दिख रहे हैं।

5-लेकिन इन पांच तत्वों के मिलने भर से स्थूल तो निर्मित हो जाता है, प्राणवान नहीं हो सकता. मसलन कोई खिलौना बन जाएलेकिन वह चलायमान तब होता है जब उसमें बैटरी लगा दी जाए । ऐसे ही अस्तित्व में जो कुछ स्थूल है उसका प्राणतत्व शून्य है। शून्य यानी सूक्ष्म या फिर आज के वैज्ञानिक भाषा में जीरोपॉवर। इसी के संयोग से प्राण निर्मित होता है जो स्थूल को गतिमान कर देता है।जो सूक्ष्म में प्रवेश करना चाहते हैं वे अपने बाहरी इंद्रियों के ठीक विपरीत आंतरिक इंद्रियों पर केन्द्रित होना शुरू कर दें। सूक्ष्म की यात्रा विकट नहीं बल्कि स्थूल के बहुत निकट होती है। 6-हम हैं, कि यात्रा नहीं करते लेकिन स्थूल से सूक्ष्म को देखना चाहते हैं।स्थूल को छोड़ते जाओ सूक्ष्म अपने आप प्रकट हो जाएगा। बाहर की वाणी को विराम दो, अंदर का मौन उठना शुरू हो जाएगा। प्रकट स्थूल से अपनी आंतरिक इंद्रियों को हटाना शुरू कर दो, सूक्ष्म शरीर प्रकट हो जाएगा। लेकिन यह प्रयोग तभी करना जब सूक्ष्म से सामना करने का सामर्थ्य और संकल्प हो। नहीं तो स्थूल में रहो, बहुत आनंद है। नाहक भटक जाओगे और कहीं अटक गये तो वापस भी नहीं आ पाओगे।

क्या है मानव मस्तिष्क?-

04 FACTS;-

1-जिस प्रकार आंख, कान, नाक हाथ, पैर आदि शरीर के अंग हैं उसी प्रकार मन, बुद्धि, संस्कार आत्मा की सूक्ष्म शक्तियां हैं। मन में चार प्रकार के विचार चलते हैं सकारात्मक, नकारात्मक, आवश्यक और व्यर्थ।जहां मन विचार शक्ति, बुद्धि निर्णय शक्ति और संस्कार कर्म शक्ति है। मस्तिष्क विभिन्न चरणों में कुछ तरंगों का उत्सर्जन भी करता है जिसे मस्तिष्क तरंगों के रूप में जाना जाता है।

2-मानव मस्तिष्क ईश्वर की सर्वोत्तम आश्चर्यजनक रचनाओं में से एक है। लगभग दो किलोग्राम के वजन वाले मानव मस्तिष्क में असीमित क्षमताएं निहित हैं।न्यूरो-साइंस के अनुसार

मानव मस्तिष्क दो भागों में विभाजित है। मस्तिष्क का दायां हिस्सा शरीर के बाएं हिस्से को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क का बायां हिस्सा शरीर के दाएं हिस्से को नियंत्रित करता है। शरीर और मन के सुचारू क्रियान्वन के लिए यह जरुरी है कि हमारे मस्तिष्क के दोनों गोलाद्धों में सामंजस्य बना रहे।मस्तिष्क को फ्रिक्वेंसी (बीटा, अल्फा, थीटा, डेल्टा, गामा) से जोड़ते हैं जो चेतना की कुछ अवस्थाओं से जुड़े होते हैं।

3-आधुनिक शोधो से मानव मन के 2 प्रकार ज्ञात हुए हैं...चेतन व अवचेतन 3-1-चेतन;- चेतन या जागृत मन ,जिसका हम केवल 1 से 15% उपयोग करते हैं । इन्द्रिय नियंत्रण ,शरीर की हलचल , विचार एवं तर्क शक्ति ,बुद्धिमत्ता ,सही अवसर की पहचान एवं उसका सही फायदा उठाना ,अच्छे बुरे की पहचान , इच्छा की उत्पत्ति आदि सब जागृत मन की शक्तियां हैं ।ये सब मानवीय शक्तियां हैं । जो केवल 15% हैं ।चेतना की तीन अवस्था है ...जागृत, सुप्त और स्वप्नावस्था। 3-2-अवचेतन;- बाकी की 85% शक्ति अवचेतन मन के पास है ; जिसे हम दैवीय शक्ति, ईश्वरीय शक्ति या अलौकिक शक्ति भी कहते हैं। इन्द्रियों पर चेतन व अवचेतन दोनों मन का नियंत्रण होता है। टेलीपैथी ,याद शक्ति ,भावनायें । ज्ञान ,प्रज्ञा ,सही अवसर खड़े करने की क्षमता आदि ऐसी कई शक्तियां अवचेतन मन के पास हैं । इस मन के पास 1 नैसर्गिक घडी व कलेंडर भी है । इसके अलावा शरीर के स्व संचालित तंत्र पर काबू ,घाव भरना , इच्छा मृत्यु ,मनोबल आदि एवं आध्यात्मिक शक्तियां अवचेतन मन के पास होती हैं ।

4-चेतना की तीन अवस्थाओं –जागृत, सुप्त और स्वप्नावस्था की सर्वश्रेष्ठ तुलना प्रकृति से ही हो सकती है । प्रकृति सोती, जागती और स्वप्न लेती है ! यह सृष्टि में एक विशाल स्तर पर होता है और यह मानव शरीर में एक अलग स्तर पर होता है । जागना और सोना सूर्योदय और सूर्यास्त के सामान है, स्वप्न इनके बीच कि गोधूली कि बेला है ।और ध्यान इस बाहरी अंतरिक्ष में उड़ान के सामान है , जहां कोई सूर्योदय , कोई सूर्यास्त नहीं होता, कुछ भी नहीं !

ब्रेन वेव थैरेपी क्या है?

02 FACTS;-

1-हमारे सभी विचारो , भावनाओ , व्यवहार , सुख- दुःख की अनुभूति हमारे दिमाग में मौजूद neurons क्रिया की वजह से होते है ! इन neurons की गतिशीलता ही हमारी मनोदशा को निर्धारित करती है ! Brain waves therapy में इन ही neurons की गति को विभिन्न band width के साउंड की सहायता से जैसे – (तेज, सूक्ष्म, और सामान्य ) करके इस्तमाल किया जाता है।हम जो भी क्रिया करते है या जो महसूस करते है उसके हिसाब से हमारे दिमाग में Brain waves बदलती रहती है ! जब धीमी Brain waves हमारे दिमाग पर हावी होती है तब हम थका हुआ , धीमी, सुस्त, या नींद का अनुभव होता है ! और जब higher frequencies हावी होती है तब हम अति सावधान और सक्रिय महसूस करते है !

2-Brain wave therapy में तरंगो को दिमाग तक पंहुचाकर मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जाता है या यूँ कहे की मूड को बदला जाता है ! जैसे low frequency waves के लिए ड्रम बीट की साउंड का उपयोग किया जाता है और higher frequency Brain waves के लिए बांसुरी जैसे यंत्रो की ध्वनि का उपयोग किया जाता है ! अब इस प्रकार के और संगीत वाद्य यंत्रो की ध्वनियों को मिलाकर एक सम्पूर्ण Brain waves therapy बनाई जाती है!

Brain Waves Therapy में इस्तमाल होने वाली Waves कितने प्रकार की होती है ?-

02 FACTS;-

1-GAMMA WAVES ( 40 TO 100 HZ);-

03 POINTS;-

1-गामा high frequency waves होती है , ये बहुत तेजी से चलने वाली waves होती है जैसे बांसुरी की आवाज़ ये waves हमारे दिमाग में बहुत तेज़ी से सूचनाये पंहुचाती है ! गामा waves से बुद्धिमता , करुणा , मजबूत आत्म नियंत्रण , higher IQ level, स्मरणशक्ति , और ख़ुशी बढ़ाने में सहायता मिलती है !

2-यह हमारी संवेदनाओ Senses को बढाती है जिससे इनकी कार्यकुशलता बढ़ जाती है ! जब हमारा शरीर गामा waves के संपर्क में आता है तब तब हमारी देखने , सूंघने, सुनने और खाने में अच्छे स्वाद का अनुभव होता है !Brain waves therapy में gamma waves को ध्यान केन्द्रित करने में भी प्रयोग होता है ! जब हमारा दिमाग इन waves के संपर्क में होता है तब सवेंदन सम्बन्धी neurons ज्यादा क्रियाशील हो जाते है जिससे हमारे दिमाग को नयी- नयी सूचनाये याद रखने में सहायता मिलती है !

3-हम ऐसा क्या करे की जिससे हमारे दिमाग तक ये waves पंहुचे सके तो इसका सीधा और

सरल उत्तर है ध्यान ( Meditation).एक रिसर्च में यह पाया गया है की जब हम अपनी पसंद का कोई कार्य कर रहे होते है तब हमारा दिमाग अपने आप gamma waves पैदा करता है ! इसके अलावा आप मैडिटेशन करते समय gamma waves साउंड को सुनकर इस दिशा में आगे बढ़ सकते है !

Frequency range: 40 Hz to 100 Hz High levels: Anxiety, stress Low levels: Depression, ADHD, learning issues Optimal range: Information processing, cognition, learning, binding of senses

2-BETA WAVES (12 TO 40 HZ) –

बीटा तरंगों में हमारा ब्रेन पूरी तरह सक्रिय रहता है जिसमें हमारी दिमागी तरंगें 20 से 24 प्रति

मिनट तक चल रही होती हैं। यह पूर्ण जागरूक अवस्था है।यह waves बहुत तेज़ और गतिशील होती है ! जब हम बहुत सजग अवस्था में किसी गंभीर समस्या का समाधान खोज रहे होते है या कोई निर्णय ले रहे होते है तब हमारे दिमाग सेल्स में पैदा होती है ! ये higher frequency की waves होती है ! तथा बहुत ज्यादा उर्जा और उत्तेजना पैदा करती है इस प्रकार के साउंड को किसी ऐसे काम के दौरान सुनने से लाभ होता है जहा बहुत उर्जा की आवश्यकता होती है !

Frequency range: 12 Hz to 40 HzHigh levels: Anxiety, inability to feel relaxed, high adrenaline levels, stress

Low levels: Depression, poor cognitive ability, lack of attention

Optimal range: Consistent focus, strong memory recall, high problem solving ability

3-ALPHA WAVES (8 TO 12 HZ) ;–

ये waves हमारे दिमाग सेल्स में तब उत्पन्न होती है जब शांति से सोच रहे होते है! मैडिटेशन की अवस्था में अल्फ़ा को वर्तमान की शक्ति बताया गया है ! अल्फा waves दिमाग के आराम देने में सहायक होती है इसलिए Brain waves therapy में अल्फा waves को पूरे मानसिक समन्वय , शांति और शरीर के सभी अंगो को एकीकरण करने सीखने में इस्तमाल किया जाता

है।अल्फा तरंगों में हमारा चेतन मन थोड़ा शांत हो जाता है, इस समय हमारी दिमागी तरंगें 8 से 15 के बीच प्रति मिनट चल रही होती हैं। इसे हम आधी जागी और आधी सोई हुई अवस्था कहते हैं यानी अर्धसुप्त अवस्था।

Frequency range: 8 Hz to 12 Hz High levels: Too much daydreaming, over-relaxed state or an inability to focus Low levels: OCD, anxiety symptoms, higher stress levels Optimal range: Ideal relaxation

4-THETA WAVES (4 TO 8 HZ); –

02 POINTS;-

1-जब हम निंद्रा या गहरे ध्यान में होते है तब Theta Brain waves उत्पन्न होती है। ये waves कुछ नया सीखने और स्मृति ( memory ) को बढ़ने वाली होती है। जब हमारा दिमाग थीटा waves के संपर्क में आता है तब हमारे दिमाग का संपर्क बाहरी दुनिया से कम हो जाता है तथा हमारा ध्यान उस पर केन्द्रित हो जाता है जो संकेत उस समय उत्पन्न हो रहे होते है। जैसे कोई किताब पढना या गणित का कोई Mathematical Equations को सुलझाना । थीटा waves के साउंड को पढाई के दौरान इस्तमाल कर सकते है क्योकि ये waves धयान

केन्द्रित करने में सहायता करती है।

2-थीटा तरंगों में हमारा चेतन मन पूरी तरह शांत होकर निद्रा में चला जाता है। इसमें हमारी दिमागी तरंगें 4 से 8 के बीच प्रति मिनट हो जाती हैं। इसे हम पूर्ण निद्रा की अवस्था कह सकते हैं। इस अवस्था में हम खूब सपने देखते हैं और अपने गहरे अवचेतन मन के नजदीक होते हैं।थीटा वह चेतना है जहां दृश्य, प्रेरणा और रचनात्मकता शक्तिशाली होती है। ध्यान और योग को अक्सर फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह मस्तिष्क में इन थीटा आवृत्तियों को उत्पन्न करता है। थीटा के दौरान अधिक संवेदनशीलता के कारण कई लोगों को असाधारण अनुभव भी मिलता है।

Frequency range: 4 Hz to 8 Hz High levels: ADHD or hyperactivity, depressive states, impulsive activity or inattentiveness Low levels: Anxiety symptoms, poor emotional awareness, higher stress levels Optimal range: Maximum creativity, deep emotional connection with oneself and others, greater intuition, relaxation

5-DELTA WAVES (.5 TO 4 HZ) –

04 POINTS;-

1-Delta Waves ऊँचे स्वर की धीमी गति वाली होती है ये wave slow Frequency और मन के अंदर गहराई तक उतर जाने वाली होती है जैसे एक ड्रम की आवाज़ , ये बहुत गहरे ध्यान तथा गहरी नींद में पैदा होती है ! ये waves हमारे subconscious mind (अवचेतन मन ) को जागृत कर बाहरी दुनिया या conscious mind (सचेत मन) का सम्पर्क कम कर देती है ! जो दिमाग को पूरी तरह से आराम करने में सहायता देता है !

2-Waves का प्रयोग गहरी नींद, विश्राम, और मन की शांति को पाने के लिए किया जाता है ! हम delta waves साउंड को अच्छी नींद पाने के लिए भी इस्तमाल कर सकते है

डेल्टा तरंगों में हम गहरी निद्रा या गहरी समाधि जैसी अवस्था में पहुंच जाते हैं जहां हमारे दिमाग की तरंगें पूरी तरह शांत होकर 0 से 4 के बीच प्रति मिनट चल रही होती हैं। इस अवस्था में हम पूर्ण रूप से बेहोश होते हैं। यह गहरी निद्रावस्था - 8 घंटे की नींद में मुश्किल से घंटे के आसपास होती है। इसमें सपने और अवचेतन मन बिल्कुल शांत एवं निष्क्रिय हो जाते हैं।

3-डेल्टा के बैंडविड्थ में ब्रेनवेव्स का आयाम सबसे अधिक है और गहरी नींद में मनाया जाता है। ये आवृत्तियां रहस्यमय अनुभवों और सामूहिक अवचेतन के लिए एक उद्घाटन बनाती हैं। हम सभी जानते हैं कि रात में अच्छी नींद आती है, जो इन आवृत्तियों से जुड़ी है।अनुभवी योगी जो गहन ध्यान में सक्षम हैं, वे अपने अवचेतन से संपर्क करने में सक्षम हो सकते हैं। यह आत्म-चिकित्सा, उच्च अंतर्दृष्टि और जीवन के कई पहलुओं और हमारे अस्तित्व के बारे में ज्ञान जैसे मुद्दों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।

4-डेल्टा तरंगें जो मोस्ट पॉवरफुल तरंगें हैं, यह तब चलती हैं जब हम मेडिटेशन की गहराई में जाते हैं इसलिए यह साइंटिफिक तौर पर सिद्ध हो चुका है कि 20 मिनट के मेडिटेशन से 8 घंटे की थकान दूर हो जाती है। डेल्टा तरंगों की अवस्था हमारे नींद के 2 घंटे के चक्र के दौरान भी 20 मिनट के लिए होती है।

Frequency range: 0 Hz to 4 Hz High levels: Brain injuries, learning problems, inability to think, Low levels: Inability to rejuvenate body, inability to revitalize the brain, poor sleep Optimal range: Healthy immune system, restorative REM sleep

NOTE;-

पूर्व के विज्ञान ने फ्रीक्वेंसी और हार्मोन्स का सम्बन्ध ध्यान में रखकर महामृत्युंजय जैसे मंत्र की रचना की होगी।उस समय विज्ञान की समझ आज के विज्ञान से कही आगे थी ।उनको मालूम था किस तरह फ्रीक्वेंसी हमे प्रभावित करती है।ब्रेन वेव थैरेपी मानसिक शांति और शक्ति को बढ़ाती है ।इसलिये महामृत्युंजय मंत्र में अक्षर की ध्वनियाँ के द्वारा हार्मोनल स्राव हमे स्वस्थ और मुक्त करता है।

ब्रेनवेव का ध्यान से सबंध है?-

05 FACTS;-

1-योगसूत्र की धारणा के अनुसार मानव का अस्तित्व पाँच भागों में बंटा है जिन्हें पंचकोश कहते हैं। ये कोश एक साथ विद्यमान अस्तित्व के विभिन्न तल समान होते हैं। विभिन्न कोशों में चेतन, अवचेतन तथा अचेतन मन की अनुभूति होती है। प्रत्येक कोश का एक दूसरे से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। वे एक दूसरे को प्रभावित करती और होती हैं।

2-ये पाँच कोश हैं ..

2-1-अन्नमय कोश - अन्न तथा भोजन से निर्मित। शरीर और मस्तिष्क। 2-2-प्राणमय कोश - प्राणों से बना। 2-3-मनोमय कोश - मन से बना। 2-4-विज्ञानमय कोश - अन्तर्ज्ञान या सहज ज्ञान से बना। 2-5-आनंदमय कोश - आनन्दानुभूति से बना अर्थात आत्मा

3-योग मान्यताओं के अनुसार चेतन और अवचेतन मन के अनुभूति पर आधारित होते हुये ये कोष सूक्ष्म से सूक्ष्मत से सूक्ष्मतम हो जाता है अंत में एक ऐसी स्थिति आती है जब अन्तिम सीमा में पंहुच जाता है जंहा वो स्थूल शरीर के वंधन से मुक्त हो कर सर्वगामी बन जाता है।आधुनिक मनोविज्ञान में इसे अल्फा अवस्था कहते है।

4-ध्यान अ-मन की अवस्था है। ध्यान बिना किसी विचार के शुद्ध चेतना की स्थिति है।जब तुम कुछ भी नहीं करते तब ऊर्जा केंद्र की तरफ बढ़ती है, यह केंद्र की ओर एकत्रित हो जाती है। जब तुम कुछ करते हो तो ऊर्जा बाहर निकलती है। करना बाहर की ओर जाने का एक मार्ग है। ना करना भीतर की ओर जाने का एक मार्ग है। किसी कार्य को करना पलायन है।ध्यान है केवल स्वयं की उपस्थिति में आनंदित होना ; स्वयं में होने का आनंद । यह बहुत सरल है - चेतना की पूरी तरह से विश्रांत अवस्था जहां तुम कुछ भी नहीं कर रहे होते। जिस क्षण तुम्हारे भीतर कर्ता भाव प्रवेश करता है तुम तनाव में आ जाते हो; चिंता तुरंत तुम्हारे भीतर प्रवेश कर जाती है।

5-यह विरोधाभासी लगता है, लेकिन मस्तिष्क की तरंगें जितनी कम होती हैं, उतना आसान है 'सीखना'।जब हम क्रोध या तनाव की अवस्था में होते हैं तब बीटा प्लस व बीटा तरंगें पहुंचती हैऔर जब हम प्रतिदिन सकारात्मक विचार लेने लगते हैं तब हमारे मन की अवस्था अल्फा व थीटा तक पहुंचती है।अब हमारे काम के लिए बीटा और डेल्टा तरंगों का कोई उपयोग नहीं हैं। अवचेतन मन को सुझाव देने के लिए गहरी अल्फा स्थिति ही अपने आपमें पर्याप्त है। अल्फा की भी 2 तरह की सतह होती है, एक ऊपरी और एक गहरी। ऊपरी सतह में हमारा चेतन मन मामूली-सा सक्रिय रहता है। यह स्थिति आदतों को बदलने के लिए, मनोकामना- प्राप्ति के लिए, मानसिक परिवर्तन सहित शारीरिक कष्टों को नियंत्रित करने के लिए, सम्मोहित करने के लिए और किसी भी सुझाव को ग्रहण करने के लिए उपयोग में आता है।

अल्फा तरंगें क्यों महत्वपूर्ण है?-

07 FACTS;-

1-वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है की, ब्रह्माण्ड के समस्त ग्रह घटक परस्पर चुम्बकीय शक्ति के आधार पर एक दूसरे से जकड़े हुए अपनी नियत कक्षा में परिभ्रमण करतें हैं। पृथ्वी भी एक प्रकार का चुम्बक हैं जिसके दो सिरे उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव हैं। पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र सूर्य तथा अन्य ग्रहों से आने वाली आकाशीय -विकरणों को अपनी ओर खींचता हैं। इस चुम्बकीय क्षेत्र का परिवर्तन पृथ्वी पर प्रत्येक स्थान पर होता हैं कहीं कहीं प्रतिदिन कहीं कहीं लम्बे अंतराल पर।

2-वैज्ञानिकों ने विभिन्न परीक्षण द्वारा यह सिद्ध किया हैं की पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में होने वाले परिवर्तन हृदय और मस्तिष्क के क्रियाकलापों पर काफी प्रभाव डालतें हैं।

मानव खुद एक जीवित-चुम्बक हैं। विज्ञान के अनुसार आयनों के सतत प्रवाह से विद्युत बनती हैं। मानव शरीर के करोड़ों कोशिकाओं में व्याप्त कैल्सियम, पोटेशियम, सोडियम के आयन भी सतत प्रवाहित होकर निरंतर जीव-विद्युत का उत्पादन करते रहते हैं। मानव शरीर के

कुछ अवयव जैसे मस्तिष्क , हृदय और आखें प्रमुख जीव- विद्युत उत्पादन केंद्र हैं जिनका मापन electroencephalogram, echocardiogram और electroretinogram द्वारा संभव हैं। इन केन्द्रों में उत्पादित होने वाली विद्युत अनेक नाड़ियों द्वारा शरीर के प्रत्येक हिस्से तक पहुंचाई जाती हैं।

3-मानवीय रक्त में होने वाले परिवर्तन हमें रोगी या निरोगी बनातें हैं। रक्त में hemoglobin नामक लौह - तत्व सतत गतिशील होकर शरीर को एक चुम्बक बना देता हैं। अतः आकाशीय विद्युत चुम्बक का प्रभाव हमारे रक्त पर भी पड़ता हैं। इस प्रकार

ब्रह्मांडीय-विद्युत-चुम्बकीय तरंगों का असर जगह, समय और व्यक्ति विशेष के उपर अलग- अलग पड़ता हैं। एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से इन्हीं तरंगों की असमानता के कारन भिन्न-भिन्न होतें हैं।

4-चिकित्सकीय शोध में पाया गया है कि जब मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध संतुलित अवस्था में होते हैं ;तब मस्तिष्क से अल्फा तरंगें बहुलता से निकलती हैं, यह अल्फा तरगें 7 से 12 साइकिल/सेकंड की होती हैं। इन तरंगों से हमारा शरीर शिथिल हो जाता है और मस्तिष्क तरंगें पृथ्वी के चुम्बकीय स्पंदन शुमान-अनुनाद {Schumann resonance} जिसकी आवृति 7 से 12 साइकिल/सेकंड है, के बराबर हो जाती है। मस्तिष्क से निकलने वाले अल्फा तरंगें मस्तिष्क को सृजनात्मकता और अंतर्ज्ञान के प्रादुर्भाव के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान करती हैं। इस समय मस्तिष्क जानकारी ग्रहण करने या प्रसारित करने के लिए अत्यंत क्रियाशील हो जाता है और धीरे धीरे मस्तिष्क के सभी प्रणालियों में सामंजस्य आने लगता है।

4-What is the Schumann Resonance?

The base atmospheric electromagnetic resonant frequency is 7.83 Hz. This means our atmosphere is continuously resonating with a radio frequency of 7.83 Hz, along with progressively weaker harmonics at 14.3, 20.8, 27.3 and 33.8 Hz. These are what is known as the Schumann resonance.

5-यह ऐसी अर्धसुप्ता- वस्था है जहां आप अपने मास्टर के सुझावों का चेतन मन द्वारा उपयोग करते हुए, अवचेतन मन को प्रभावित करते हैं।इस अल्फा स्थिति में जाने के लिए शरीर को बहुत गहराई से शिथिल नहीं करना पड़ता। बस सामान्य-सा शिथिलीकरण इस अवस्था में जाने के लिए पर्याप्त साबित होती है। इस अवस्था में हमारा चेतन मन 50 प्रतिशत सक्रिय रहता है। अल्फा की गहरी सतह में हम अपने शरीर एवं चेतन मन से मुक्त हो जाते हैं। इस अवस्था में चेतन मन 10 प्रतिशत तक ही सक्रिय रहता है।

6--अल्फा अवस्था में हमारी तर्कबुद्धि- पूरी तरह सुप्त हो जाती है। इस अवस्था में हमारा सूक्ष्म शरीर यानी ‘एस्ट्रल बॉडी’ बाहर निकलकर समय और सीमा से परे ब्रहमांड के किसी भी कोने में, किसी भी युग में, अनंत भूतकाल में, अनंत भविष्यकाल में यात्रा कर सकता है और प्रत्यक्ष अपने मन की आंखों से सबकुछ चलचित्र की तरह स्पष्ट देखकर आ सकता है। इसे ‘ध्यान की गहरी अवस्था’ भी कहा जा सकता है।

अल्फा क्या होता है ?

7-अल्फा मस्तिष्क की तरंगें बीटा की तुलना में आवृत्ति में धीमी होती हैं और इसलिए स्वाभाविक रूप से एक अधिक आरामदायक चेतना प्रदान करती हैं।यह आवृत्ति कल्पना, स्मृति, एकाग्रता, रचनात्मकता को बढ़ावा देती है और तनाव को कम करती है, जिससे सीखने में लाभ होता है।ध्यान मस्तिष्क में अल्फा आवृत्तियों और रोजमर्रा की चीजों में इसे बनाए रखने की क्षमता में वृद्धि का कारण बनता है। बच्चों में, आमतौर पर वयस्कों की तुलना में अधिक अल्फा देखा जाता है।मस्तिष्क की तरंगों को सिंक्रनाइज़ करें क्योंकि बेहतर सिंक्रनाइज़ेशन वाले लोग भावनात्मक रूप से स्थिर होते हैं।

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अल्फा मैडिटेशन करने की प्रक्रिया(Alpha Meditation Techniques):-

अल्फा मैडिटेशन आपके दिमाग को पूरी तरह से रिलैक्स कर शांति प्रदान करता है। यह आपके अर्धचेतन मन को कण्ट्रोल करने में भी काफी सक्षम होता है। जिससे आप खुश और सेहतमंद रह सकते है। अल्फा मैडिटेशन सही तरीके से करने पर व्यक्ति अपने आप को नींद की अवस्था में पाता है। जिसके बाद शरीर में ज्यादा मात्रा में एनर्जी उत्पादन होता है।

09 POINTS;-

1-अल्फा मैडिटेशन करने के लिए पहले आसन पर बैठ जाए। 2-इसके बाद अपनी आँखों को बंद करे और गहरी तथा लम्बी साँस लें। 3-अपने मन को शांत रखें और ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें। 4-धीरे धीरे लम्बी लम्बी सांसे लेने के साथ साथ गहरी सांसे लेना शुरू करें। 5-अपना पूरा ध्यान अपनी सांसो पर केंद्रित करें। 6-अब अपने दिमाग से सभी चिंताओं को निकाल दें। 7-इसके बाद जब मैडिटेशन कम्पलीट हो जाए तो 1 से 15 तक उलटी गिनती शुरू कर दें। 8-अब अपनी आँखों को धीरे धीरे खोले। 9-साथ ही अपनी बॉडी के एक एक पार्ट पर ध्यान दें और धीरे धीरे आसपास के वातावरण को महसूस करें।

.....SHIVOHAM.....