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कैसे करे ब्लू लाइट मैडिटेशन(BLUE  LIGHT MEDITATION)?


ब्लू लाइट मैडिटेशन;-

FIRST METHOD;-

NOTE;-

यह एक घंटे का ध्यान है और इसमें दस-दस मिनट के चरण हैं।

पहला चरण ;-

सुरक्षा कवच धारण विधि ;- 05 POINTS;- 1-ध्यान के लिए बैठने में दो-तीन बातें ख्याल में लें।शरीर को सीधा रख कर बैठें..आराम से जितना सीधा हो सके;अकड़ाने की जरूरत नहीं है। रीढ़ सीधी हो, जमीन से नब्बे का कोण बनाती हो, इतना भर ख्याल कर लें।पद्मासन /या सिद्धासन में बैठे । आंखें अधखुली, यानि आधी खुली आधी बंद। 2-ॐ/इष्टमंत्र/ गुरुमंत्र ..का जप करते हुए यह भावना करे की मेरे इष्ट की कृपा का शक्तिशाली प्रवाह मेरे अंदर प्रवेश कर रहा है और मेरे चारो ओर सुदर्शन चक्र जैसा एक इन्द्रधनुषी घेरा बनाकर घूम रहा है। 3-''इन्द्रधनुषी प्रकाश घना होता जा रहा है।वह अपने दिव्य तेज़ से मेरी रक्षा कर रहा है।दुर्भावनारूपी अंधकार विलीन हो गया है और सात्विक प्रकाश ही प्रकाश छाया है। सूक्ष्म आसुरी शक्तियों से मेरी रक्षा करने के लिए वह चक्र सक्रिय है और मै पूर्णतः निश्चित हूँ ,आश्वस्त हूँ।'' जितनी देर श्वास भीतर रोक सके.. उक्त भावना को दोहराये और मानसिक चित्र बना ले... 4-''आकाश के अंदर पृथ्वी है।पृथ्वी के अंदर अनेक देश, अनेक समुद्र, अनेक लोग है।उनमे से एक आपका शरीर आसन पर बैठा हुआ है।आप एक शरीर नहीं हो बल्कि अनेक शरीर ,देश,सागर ,पृथ्वी ,सूर्य ,चंद्र , ग्रह एवं पूरे ब्रह्मांड के दृष्टा हो,साक्षी हो।'' 5- अब धीरे - धीरे ॐ का दीर्घ उच्चारण करते हुए श्वास बाहर निकाले।मन ही मन भावना करे कि मेरे सारे दोष विकार बाहर निकल गए है।मन, बुद्धि शुद्ध हो गया है। दूसरा चरण ;-

02 POINTS;-

1-हमारे भीतर जो भी शक्ति पड़ी है उसे चोट देकर जगाना है।तो दस मिनट में इतने जोर से श्वास लेनी है कि भीतर कोई गुंजाइश ही न रह जाए कि हम इससे ज्यादा भी ले सकते थे। श्वास की पूरी ताकत लगा देनी है।सख्त होकर खड़े नहीं हो जाना है और जब आप श्वास की पूरी ताकत लगाएंगे, तो जोर से चोट पड़ेगी;उतना ही शरीर डोलेगा। चोट मारनी है

और शरीर को डोलने देना है। और उस चोट के साथ शरीर के साथ डोलने लगना है।

2-दस मिनट में पूरी की पूरी हमारे फेफड़े में जितनी भी वायु है उस सबको रूपांतरित कर लेना है, उस सबको बदल देना है।हमारे फेफड़े में कोई छह हजार छिद्र हैं।जिसमें मुश्किलसे डेढ़ या दो हजार तक हमारी श्वास पहुंचती है, बाकी चार हजार सदा ही बंद पड़े रह जाते हैं, उनमें कार्बन डाय-आक्साइड ही इकट्ठी होती रहती है। पूरे के पूरे फेफड़े के सारे छिद्रों में नई आक्सीजन, नई प्राणवायु पहुंचा देनी है। जैसे ही प्राणवायु की मात्रा भीतर बढ़ती है वैसे ही शरीर की विद्युत जगनी शुरू हो जाती है। आप अनुभव करेंगे कि शरीर इलेक्ट्रिफाइड हो गया, उसमें बिजली दौड़ने लगेगी, रोआं-रोआं कंपने लगेगा ।

तीसरा चरण :-

FIRST STEP;-

साधक अपने सामने जरा हट कर, थोड़ी ऊंचाई पर, एक नीले रंग का प्रकाश--यानी बिजली का बल्ब जलाये या साधारण नीली मोमबत्ती से भी काम चला सकता है।बिलकुल स्थिर बैठें। हलके-हलके, बिना आंखों में कोई तनाव लाए सामने जल रहे प्रकाश को देखें।

SECOND STEP;-

आंखें बंद कर लें और कमर से ऊपर के भाग को हौले-हौले दाएं से बाएं और बाएं से दाएं हिलाएं। और साथ ही साथ यह भी अनुभव करते रहें कि आपकी आंखों ने पहले चरण के समय जो प्रकाश पीया है, वह अब "तीसरी आंख' में प्रवेश कर रहा है।यह सचमुच घटित होता है।दोनों चरणों को बारी-बारी तीन बार दोहराएं।विश्राम में जाएं...आंखे बंद किए हुए ही, शांत और शिथिल होकर लेट जाएं।

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