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कौन हैं नास्त्रेदमस और क्या हैं उनकी भविष्यवाणियां ?


कौन हैं नास्त्रेदमस और क्या हैं उनकी भविष्यवाणियां ? (अशोक कुमार शर्मा की पुस्तक नास्त्रेदमस की संपूर्ण भविष्यवाणियां )(डायमंड पाकेट बुक्स) 12 FACTS;- 1-नास्त्रेदमस (Nostradamus) फ्रांस के एक 16वीं ( 1503 -1566) सदी के भविष्यवक्ता थे। नास्त्रेदमस केवल भविष्यवक्ता ही नही, डॉक्टर और शिक्षक भी थे। ये प्लेग जैसी बिमारियों का इलाज करते थे। इन्होने ने अपनी कविताओ के द्वारा भविष्य में होने वाली घटनाओ का वर्णन किया था।इसके बावजूद , बीसवीं शताब्दी में नास्त्रेदमस की कथित भविष्यवाणियाँ आम लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गईं और कई प्रमुख विश्व घटनाओं की भविष्यवाणी का श्रेय उन्हें दिया गया।डायना की मौत, एडोल्फ हिटलर का उदय, परमाणु बम, द्वितीय विश्व युद्ध और 9/11 के हमले जैसे अनेक सटीक भविष्यवाणी करने वाले नोस्ट्राडेमस (Nostradamus) ने साल 2019 के बारे में भी भविष्यवाणी की थी। 2-फ्रांस में 16वीं शताब्दी (1503-1566) में जन्मे नोस्ट्राडेमस ने 400 साल पहले ही आने वाली 20 शताब्दियों की भविष्यवाणी कर दी थी। हैं। नास्त्रेदमस का जन्म 14दिसम्बर 1503 को फ्रांस के एक छोटे से गांव सेंट रेमी में हुआ। उनका नाम मिशेल दि नास्त्रेदमस था बचपन से ही उनकी अध्ययन में खास दिलचस्पी रही और उन्होनें लैटिन, यूनानी और हीब्रू भाषाओं के अलावा गणित, शरीर विज्ञान एवं ज्योतिष शास्त्र जैसे गूढ विषयों पर विशेष महारत हासिल कर ली। 3-नास्त्रेदमस का जन्म 14दिसम्बर 1503 को फ्रांस के एक छोटे से गांव सेंट रेमी में हुआ। उनका नाम मिशेल दि नास्त्रेदमस था बचपन से ही उनकी अध्ययन में खास दिलचस्पी रही और उन्होनें लैटिन, यूनानी और हीब्रू भाषाओं के अलावा गणित, शरीर विज्ञान एवं ज्योतिष शास्त्र जैसे गूढ विषयों पर विशेष महारत हासिल कर ली।नास्त्रेदमस ने किशोरावस्था से ही भविष्यवाणियां करना शुरू कर दी थी। ज्योतिष में उनकी बढती दिलचस्पी ने माता-पिता को चिंता में डाल दिया क्योंकि उस समय कट्टरपंथी ईसाई इस विद्या को अच्छी नजर से नहीं देखते थे। ज्योतिष से उनका ध्यान हटाने के लिए उन्हे चिकित्सा विज्ञान पढने मांट पेलियर भेज दिया गया जिसके बाद तीन वर्ष की पढाई पूरी कर नास्त्रेदमस चिकित्सक बन गए। 4-23 अक्टूबर 1529 को उन्होने मांट पोलियर से ही डॉक्टरेट की उपाधि ली और उसी विश्वविद्यालय में शिक्षक बन गए। पहली पत्नी के देहांत के बाद 1547 में यूरोप जाकर उन्होने ऐन से दूसरी शादी कर ली। इस दौरान उन्होनें भविष्यवक्ता के रूप में खास नाम कमाया।एक किंवदंती के अनुसार एक बार नास्त्रेदमस अपने मित्र के साथ इटली की सड़कों पर टहल रहे थे, उन्होनें भीड़ में एक युवक को देखा और जब वह युवक पास आया तो उसे आदर से सिर झुकाकर नमस्कार किया। मित्र ने आश्चर्यचकित होते हुए इसका कारण पुछा तो उन्होने कहा कि यह व्यक्ति आगे जाकर पोप का आसन ग्रहण करेगा। 5-किंवदंती के अनुसार वास्तव में वह व्यक्ति फेलिस पेरेती था जिसने 1585 में पोप चुना गया। नास्त्रेदमस के बारे में ऐसी कई कहानियाँ हैं, लेकिन इनमें से किसी के लिए कोई सबूत नहीं है।नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां की ख्याति सुन फ्रांस की महारानी कैथरीन ने अपने बच्चों का भविष्य जानने की इच्छा जाहिर की। नास्त्रेदमस अपनी इच्छा से यह जान चुके थे कि महारानी के दोनो बच्चे अल्पायु में ही पूरे हो जाएंगे, लेकिन सच कहने की हिम्मत नहीं हो पायी और उन्होंने अपनी बात को प्रतीकात्मक छंदों में पेश किया। इसक प्रकार वह अपनी बात भी कह गए और महारानी के मन को कोई चोट भी नहीं पहुंची। तभी से नास्त्रेदमस ने यह तय कर लिया कि वे अपनी भविष्यवाणीयां को इसी तरह छंदो में ही व्यक्त करेंगें। 6-1550 के बाद नास्त्रेदमस ने चिकित्सक के पेशे को छोड़ अपना पूरा ध्यान ज्योतिष विद्या की साधना पर लगा दिया। उसी साल से अन्होंने अपना वार्षिक पंचाग भी निकालना शुरू कर दिया। उसमें ग्रहों की स्थिति, मौसम और फसलों आदि के बारे में पूर्वानुमान होते थे। कहा जाता है कि उनमें से ज्यादातर सत्य साबित हुई। नास्त्रेदमस ज्योतिष के साथ ही जादू से जुड़ी किताबों में घंटों डूबे रहते थे। 7-नास्त्रेदमस ने 1555 में भविष्यवाणियों से संबंधित अपने पहले ग्रंथ सेंचुरी के प्रथम भाग का लेखन पूरा किया, जो सबसे पहले फ्रेंच और बाद में अंग्रेजी, जर्मन, इटालवी, रोमन, ग्रीक भाषाओं में प्रकाशित हुआ। इस पुस्तक ने फ्रांस में इतना तहलका मचाया कि यह उस समय महंगी होने के बाद भी हाथों-हाथ बिक गई। उनके कुछ व्याख्याकारों क मानना है कि इस किताब के कई छंदो में प्रथम विश्व युद्ध, नेपोलियन, हिटलर और कैनेडी आदि से संबंद्ध घटनाएं स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं। 8-व्याख्याकारों ने नास्त्रेदमस के अनेक छंदो में तीसरे विश्वयुद्ध का पूर्वानुमान और दुनिया के विनाश के संकेत को भी समझ लेने में सफलता प्राप्त कर लेने का दावा किया है। अधिकांश शैक्षणिक और वैज्ञानिक सूत्रों का कहना है कि ये व्याख्याएँ गलत अनुवाद या गलतफ़हमी का परिणाम हैं और कुछ गलतियाँ तो जानबूझकर भी की गईं हैं। 9-नास्त्रेदमस के जीवन के अंतिम साल बहुत कष्ट से गुजरे। फ्रांस का न्याय विभाग उनके विरूद्ध यह जांच कर रहा था कि क्या वह वास्ताव में जादू-टोने का सहारा लेते थे। यदि यह आरोप सिद्ध हो जाता, तो वे दंड के अधिकारी हो जाते। लेकिन जांच का निष्कर्ष यह निकला कि वे कोई जादूगर नहीं बल्कि ज्योतिष विद्या में पारंगत है। उन्हीं दिनों जलोदर रोग से ग्रस्त हो गए। शरीर में एक फोड़ा हो गया जो लाख उपाचार के बाद भी ठीक नहीं हो पाया। 10-उन्हें अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था, इसलिए उन्होंने 17 जून 1566 को अपनी वसीयत तैयार करवाई। एक जुलाई को पादरी को बुलाकर अपने अंतिम संस्कार के निर्देश दिए। 2 जूलाई1566 को इस मशहूर भविष्यवक्ता का निधन हो गया। कहा जाता है कि अपनी मृत्यु की तिथि और समय की भविष्यवाणी वे पहले ही कर चुके थे। 11-एक व्याख्या के अनुसार "नास्त्रेदमस ने अपने संबंध मे जो कुछ गिनी-चुनी भविष्यवाणियां की थी, उनमें से एक यह भी थी कि उनकी मौत के 225 साल बाद कुछ समाजविरोधी तत्व उनकी कब्र खोदेंगे और उनके अवशेषों को निकालने का प्रयास करेंगे लेकिन तुरंत ही उनकी मौत हो जाएगी। वास्तव मे ऐसी ही हुआ। फ्रांसिसी क्रांति के बाद 1791में तीन लोगों ने नास्त्रेदमस की कब्र को खोदा, जिनकी तुरंत मौत हो गयी।" 12-नास्त्रेदमस ने अपनी सेंचुरीज के बारे में बताते हुए लिखा था, जो कुछ मैं कह रहा हूं, आने वाला समय बताएगा कि मैं सही था।मैंने जनहित में अपने भविष्य कथनों को उलझे हुए वाक्यों में लिखा है, जिससे प्रभु इच्छा होने पर लोगों को समझ में आ जाए। मैंने यह दैवी प्रेरणा से प्राप्त किया है। विश्व अनेक त्रासदियों को झेलने वाला है, जैसा कि मैंने अपनी भविष्यवाणियों में स्थान एवं समय को गुप्त रखकर प्रतीकों के द्वारा स्पष्ट किया है। ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; एक नजर भविष्यवाणी पर... धर्म बांटेगा लोगों को। काले और सफेद तथा दोनों के बीच लाल और पीले अपने-अपने अधिकारों के लिए भिड़ेंगे। रक्तपात, बीमारियां, अकाल, सूखा, युद्ध और भूख से मानवता बेहाल होगी।' (vi-10) 'साम्प्रदायिकता और श‍त्रुता के एक लंबे दौर के बाद सभी धर्म तथा जातियां एक ही विचारधारा को मानने लगेंगी।' (6-10) 'अनीश्वरवादी और ईश्वरवादियों के बीच संघर्ष होगा।'- (6-62)। ऐसे माहौल में मुक्तिदाता आएगा शांतिदूत बनकर। 'सागरों के नाम वाला धर्म चांद पर निर्भर रहने वालों के मुकाबले तेजी से पनपेगा और उसे भयभीत कर देंगे, 'ए' तथा 'ए' से घायल दो लोग।' (x-96) चांद पर आधारित धर्म एक ही है इस्लाम और दुनिया में जितने भी सागर हैं उनमें से सिर्फ हिंद महासागर के नाम पर ही एक धर्म है जिसे हिंदू धर्म कहते हैं। आगे के वाक्य की व्याख्या करना कठिन है। 'तीन ओर घिरे समुद्र क्षेत्र में वह जन्म लेगा, जो बृहस्पतिवार को अपना अवकाश दिवस घोषित करेगा। उसकी प्रसंशा और प्रसिद्धि, सत्ता और शक्ति बढ़ती जाएगी और भूमि व समुद्र में उस जैसा शक्तिशाली कोई न होगा।' (सेंचुरी 1-50वां सूत्र) नास्त्रेदमस लिखते हैं कि एक महान व्यक्ति भारत में जन्म लेगा, जो पूर्व के सभी राष्ट्रों पर हावी होगा। उससे भयभीत होकर उसे सत्ता में आने से रोकने के लिए एक महाशक्ति और दो पड़ोसी देश षड्‍यंत्र करेंगे, पर वह सभी के षड्‍यंत्रों को विफल करता हुआ प्रचंड बहुमत से सत्तासीन हो जाएगा। नास्त्रेदमस ने बताया कि यह अजेय शासक यूरोप में जन्म नहीं लेकर भारत में जन्म लेगा। इसके बुद्धि-चातुर्य और ताकत की वजह से यह एशिया पर राज करेगा। नास्त्रेदमस ने यह भी कहा कि उसका जन्म संसार में वहां होगा जहां तीन समुद्र आकर मिलते हैं और उस शासक के लिए पवित्र दिन गुरूवार होगा। विश्व में मात्र एक ही जगह है जहां तीन समुद्र मिलते हैं, वह है हिन्द महासागर। साथ ही गुरूवार का दिन केवल हिन्दू धर्म में ही पवित्र माना जाता है। 2243 से होगा स्वर्ण युग शुरू? नास्त्रेदमस की इस कालगणना के अनुसार हम चन्द्रमा की द्वितीय महान चक्र अवधि से गुजर रहे हैं, जो सन् 1889 से शुरू हुई है और सन् 2243 में समाप्त होगी। नास्त्रेदमस के अनुसार यह अवधि मनुष्य जाति के लिए रजत युग है। नास्त्रेदमस ने ये भविष्यवाणियां लगभग 499 वर्ष पहले की थीं। रजत युग के बाद ही स्वर्ण युग शुरू होगा।

तीसरे विश्व युद्ध की भविष्यवाणी;- 14 दिसंबर 1503 को फ्रांस में जन्मे नास्त्रेदमस ने तीसरे विश्व युद्ध की जो भविष्यवाणी की है वह बहुत ही डराने वाली है।यदि यह सच होता है तो प्रलय जैसा नजारा होगा । नास्त्रेदमस के मुताबिक साल 2019 में धरती के लोगों को भयानक दुख झेलना पड़ेगा। उनकी गणना में कहा गया था कि 2019 में शुरू होने वाला दुख 2046 तक बना रहेगा। '1-धर्म बांटेगा लोगों को। काले और सफेद तथा दोनों के बीच लाल और पीले अपने-अपने अधिकारों के लिए भिड़ेंगे। रक्तपात, बीमारियां, अकाल, सूखा, युद्ध और भूख से मानवता बेहाल होगी।' (vi-10) नास्त्रेदमस अनुसार जब तृतीय युद्ध चल रहा होगा तब एक ओर जहां चीन दुनिया में तबाही मचा रहा होगा तो दूसरी ओर आसमान से भयानक आफत आएगी।आकाश से आग का एक गोला पृथ्वी की ओर बढ़ेगा और हिंद महासागर में आग का एक तूफान खड़ा कर देगा। इस घटना से दुनिया के कई राष्ट्र जलमग्न हो जाएंगे। 2-'एक मील व्यास का एक गोलाकार पर्वत अं‍तरिक्ष से गिरेगा और महान देशों को समुद्री पानी में डुबो देगा। यह घटना तब होगी, जब शांति को हटाकर युद्ध, महामारी और बाढ़ का दबदबा होगा। इस उल्का द्वारा कई प्राचीन अस्तित्व वाले महान राष्ट्र डूब जाएंगे।' I-69 समीक्षक और व्याख्याकार इस उल्का के गिरने का केंद्र हिन्द महासागर को मानते हैं। ऐसे में मालद्वीप, बुनेई, न्यूगिनी, फिली‍पींस, कंबोडिया, थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका के तटवर्ती राष्ट्र तथा अरब सागर से लगे राष्ट्र डूब से प्रभावित होंगे। 3-'लाल के खिलाफ एकजुट होंगे लोग, लेकिन साजिश और धोखे को नाकाम कर दिया जाएगा।' 'पूरब का वह नेता अपने देश को छोड़कर आएगा, पार करता हुआ इटली के पहाड़ों को और फ्रांस को देखेगा। वह वायु, जल और बर्फ से ऊपर जाकर सभी पर अपने दंड का प्रहार करेगा।' नास्त्रेदमस ने अपनी एक भविष्यवाणी में कहा है कि जब तृतीय युद्ध चल रहा होगा उस दौरान चीन के रासायनिक हमले से एशिया में तबाही और मौत का मंजर होगा, ऐसा जो आज तक कभी नहीं हुआ। नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी की पुस्तक में लिखा है- 'एक पनडुब्बी में तमाम हथियार और दस्तावेज लेकर वह व्यक्ति इटली के तट पर पहुंचेगा और युद्ध शुरू करेगा। उसका काफिला बहुत दूर से इतालवी तट तक आएगा।' आगे वे लिखते हैं- मंगोल (चीन) चर्च के खिलाफ युद्ध छेड़ेगा।नया धर्म (इस्लाम) चर्च के खिलाफ भारी मारकाट करते हुए इटली और फ्रांस तक जा पहुंचेगा तब तृतीय युद्ध शुरू होगा। .... SHIVOHAM..