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कौन हैं अष्ट चिरंजीवी?


कौन हैं अष्ट चिरंजीवी?-

03 FACTS;- 1-चिरंजीवी का अर्थ होता है चीर काल तक जीवित रहने वाला यानी बहुत लम्बे अरसे तक या किसी निश्चित अवधि तक जीवित रहने वाले। हिंदू इतिहास और पुराण अनुसार ऐसे सात व्यक्ति हैं, जो चिरंजीवी हैं। यह सब किसी न किसी वचन, नियम या शाप से बंधे हुए हैं और यह सभी दिव्य शक्तियों से संपन्न है। योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई है वे सारी शक्तियाँ इनमें विद्यमान है। यह परामनोविज्ञान जैसा है, जो परामनोविज्ञान और टेलीपैथी विद्या जैसी आज के आधुनिक साइंस की विद्या को जानते हैं वही इस पर विश्वास कर सकते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार यह सात जीवित महामानव हैं ... अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:। कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥ सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।। 2-प्राचीन मान्यताओं के आधार पर यदि कोई व्यक्ति हर रोज इन आठ अमर लोगों (अष्ट चिरंजीवी) के नाम भी लेता है तो उसकी उम्र लंबी होती है।अर्थात इन आठ लोगों (अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि) का स्मरण सुबह-सुबह करने से सारी बीमारियां समाप्त होती हैं और मनुष्य 100 वर्ष की आयु को प्राप्त करता है। 3-राजा बलि पाताल लोक में, वेदव्यास जी काशी में, अश्वत्थामा असीरगढ़ (मध्यप्रदेश) में, विभीषण लंका में, मार्कण्डेय और हनुमान उत्तराखंड की कंदराओं में, परशुराम जी महेन्द्रपर्वत (ओडिशा) पर तो कृपाचार्य कुरुक्षेत्र में अदृश्य रूप में तपस्या कर रहे है जो की कलियुग के अंत में सबके सामने आएंगे.। अष्ट चिरंजीवी;- 08 FACTS;- 1-हनुमान ;- कलियुग में हनुमानजी सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं और हनुमानजी भी इन अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं। सीता जी ने हनुमान को लंका की अशोक वाटिका में राम का संदेश सुनने के बाद आशीर्वाद दिया था कि वे अजर-अमर रहेंगे। अजर-अमर का अर्थ है कि जिसे ना कभी मौत आएगी और ना ही कभी बुढ़ापा। इस कारण भगवान हनुमान को हमेशा शक्ति का स्रोत माना गया है क्योंकि वे चीरयुवा हैं। 2- कृपाचार्य;- महाभारत के अनुसार कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के कुलगुरु थे। कृपाचार्य गौतम ऋषि पुत्र हैं और