दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌ की महिमा


हर श्रद्धालु को प्रतिदिन भगवान शंकर का पूजन करके दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌ का पाठ करना चाहिए। इससे शिव की कृपा प्राप्ति होकर दारिद्रय का नाश होता है तथा अथाह धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम् को महर्षि वशिष्ठ द्वारा लिखा गया है और इस स्त्रोत्र को पढ़ने से भगवान शिव की कृपा पाई जा सकती है। इस स्त्रोत को पढ़ने से गरीबी दूर हो जाती है और धन की प्राप्ति होती है। इसलिए जो लोग अमीर बनना चाहते हैं वो लोग रोज इस पाठ का जाप करें। यह पाठ बेहद ही छोटा है और इसको 20 मिनट के अंदर ही पढ़ा जा सकता है।

ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित....दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌....

विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय। कर्पूरकांतिधवलाय जटाधराय दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥1॥ गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजंगाधिपकङ्कणाय। गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय ॥ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय . ॥2॥ भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय। ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय ॥ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय॥3॥ चर्माम्बराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय। मञ्जीरपादयुगलाय जटाधराय ॥ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय॥4॥ पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय। आनंतभूमिवरदाय तमोमयाय ॥ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥5॥ भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय। नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय ॥ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥6॥ रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय। पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय॥ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥7॥ मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय। मातङग्‌चर्मवसनाय महेश्वराय ॥ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥8॥ वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणम्‌। सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्‌। त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्‌ दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥9॥

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दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र का अर्थ

जो विश्व के स्वामी हैं, जो नरकरूपी संसारसागर से उद्धार करने वाले हैं, जो कानों से श्रवण करने में अमृत के समान नाम वाले हैं, जो अपने भाल पर चन्द्रमा को आभूषणरूप में धारण करने वाले हैं, जो कर्पूर की कांति के समान धवल वर्ण वाले जटाधारी हैं, दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है|॥1॥

जो माता गौरी के अत्यंत प्रिय हैं, जो रजनीश्वर(चन्द्रमा) की कला को धारण करने वाले हैं, जो काल के भी अन्तक (यम) रूप हैं, जो नागराज को कंकणरूप में धारण करने वाले हैं, जो अपने मस्तक पर गंगा को धारण करने वाले हैं, जो गजराज का विमर्दन करने वाले हैं, दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है|॥2॥

जो भक्तिप्रिय, संसाररूपी रोग एवं भय का नाश करने वाले हैं, जो संहार के समय उग्ररूपधारी हैं, जो दुर्गम भवसागर से पार कराने वाले हैं, जो ज्योतिस्वरूप, अपने गुण और नाम के अनुसार सुन्दर नृत्य करने वाले हैं, दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है|॥3॥

जो बाघ के चर्म को धारण करने वाले हैं, जो चिताभस्म को लगाने वाले हैं, जो भाल में तीसरा नेत्र धारण करने वाले हैं, जो मणियों के कुण्डल से सुशोभित हैं, जो अपने चरणों में नूपुर धारण करने वाले जटाधारी हैं, दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है|॥4॥

जो पांच मुख वाले नागराज रूपी आभूषण से सुसज्जित हैं, जो सुवर्ण के समान किरणवाले हैं, जो आनंदभूमि (काशी) को वर प्रदान करने वाले हैं, जो सृष्टि के संहार के लिए तमोगुनाविष्ट होने वाले हैं, दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है|॥5॥

जो सूर्य को अत्यंत प्रिय हैं, जो भवसागर से उद्धार करने वाले हैं, जो काल के लिए भी महाकालस्वरूप, और जिनकी कमलासन (ब्रम्हा) पूजा करते हैं, जो तीन नेत्रों को धारण करने वाले हैं, जो शुभ लक्षणों से युक्त हैं, दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है|॥6॥

जो राम को अत्यंत प्रिय, रघुनाथजी को वर देने वाले हैं, जो सर्पों के अतिप्रिय हैं, जो भवसागररूपी नरक से तारने वाले हैं, जो पुण्यवालों में अत्यंत पुण्य वाले हैं, जिनकी समस्त देवतापूजा करते हैं, दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है|॥7॥

जो मुक्तजनों के स्वामीस्वरूप हैं, जो चारों पुरुषार्थों का फल देने वाले हैं, जिन्हें गीत प्रिय हैं और नंदी जिनका वाहन है, गजचर्म को वस्त्ररूप में धारण करने वाले हैं, महेश्वर हैं, दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है|॥8॥

समस्त रोगों के विनाशक तथा शीघ्र ही समस्त सम्पत्तियों को प्रदान करनेवाले और पुत्र – पौत्रादि वंश परम्परा को बढ़ानेवाले, वसिष्ठ द्वारा निर्मित इस स्तोत्र का जो भक्त नित्य तीनों कालों में पाठ करता है, उसे निश्चय ही स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।॥9॥

...SHIVOHAM.....