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दक्षिण भारत के कौन से पंचभूत स्थल हैं अथार्त पांच तत्वों की शुद्धि के लिए कौन से पांच चमत्कारी शि


पंचभूत स्थल;-

08 FACTS;-

1-भगवान शिव की हिंदू धर्म में बहुत मान्यता है. पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा भक्त भी इन्ही के होते हैं। संसार का निर्माण भी भगवान शिव द्वारा किया गया है। शिवजी को लोग अनेकों नाम से जानते हैं जैसे- भैरव, आशुतोष, भोलेनाथ, कैलाशनाथ, महादेव, महेश, रूद्र आदि। भगवान शिव इतने रूप होने के कारण इनकी पूजा-अर्चना भी लोग अलग-अलग तरीके से करते हैं। 2-शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को त्रिदेव कहा गया है. शिवजी की कल्पना एक ऐसे देव के रूप में की जाती है जो कभी संहारक तो कभी पालक होते हैं। भस्म, नाग, मृग चर्म, रुद्राक्ष आदि भगवान शिव की वेष-भूषा व आभूषण हैं। इन्हें संहार का देव भी माना गया है। दक्षिण भारत के शिव के ये पंचमहाभूत मंदिर बहुत प्रसिद्द है। इन प्राचीन मंदिरों से पता चलता है कि सनातन धर्म में देव पूजा का चलन तो बहुत बाद में हुआ पहले तो प्रकृति और इन पंच तत्व को ही पूजा जाता था। इसका कारण ये था कि सृष्टि का निर्माण और संहार इन्ही पंच तत्व से होता है..उन्ही पांच तत्वों पर आधारित हैं ये मंदिर...। 3- पूरे देश भर में भोलेनाथ के हजारों मंदिर हैं पर कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जिनका उल्लेख हमें पुराणों में ही सुनने को मिलेगा. पुराणों में उल्लेख होने का अर्थ हैं की ये मंदिर आज से कई हज़ार साल पुराने होंगे। इन मंदिरों का हिन्दू धर्म में अपना एक अलग ही महत्व और विशेषता

है।पांच भूतों से बने इस शरीर को शुद्ध करने के लिए दक्षिण भारत के योगियों ने पांच मंदिर

बनाये थे - एक मंदिर हर तत्व के लिए।

4-हर आध्यात्मिक प्रक्रिया का आधार इस स्थूल शरीर से परे जाना है। स्थूल शरीर से परे जाने का मतलब है जीवन के पांच तत्वों से परे जाना। आप जो भी अनुभव करते हैं, उस पर इन पांच तत्वों की जबर्दस्त पकड़ होती है। इनके परे जाने के लिए जो मौलिक योग किया जाता है उसे भूत शुद्धि कहा जाता है।भूत शुद्धि के अभ्यास के लिए पांच अलग-अलग लिंगों की रचना की गई। विशालकाय शानदार मंदिरों का निर्माण किया गया, जहां जाकर आप साधना कर सकते हैं।

5-दक्षिण भारतीय प्रायद्वीप आध्यात्मिकता के विशिष्ट और शक्तिशाली रूप का गढ़ है। दक्षिण भारत की आकर्षक और शानदार संस्कृति में इसका प्रभाव साफ तौर से देखा जा सकता है। इस क्षेत्र के योगियों और आध्यात्मिक गुरुओं ने ऐसे कई तरीके खोजे हैं जिनके माध्यम से एक आम इंसान अपनी परम प्रकृति को हासिल कर सकता है।इनमें सबसे मशहूर है मंदिरों और पवित्र स्थानों का एक जटिल सा तंत्र।

6-पंचभूत स्थल दक्षिण भारत में पांच शानदार प्राचीन मंदिर हैं, जिनका निर्माण मानव चेतना को विकसित करने के एक माध्यम के रूप में किया गया। हर मंदिर का निर्माण पांच तत्वों में से एक तत्व के लिए किया गया और योगिक विज्ञान के अनुसार किया गया। ये मंदिर एक दूसरे के साथ एक खास किस्म के भौगोलिक संरेखण में हैं, जिससे कि उनके द्वारा पैदा की जाने वाली अपार संभावनाओं का असर पूरे क्षेत्र पर हो सके।

7-उस स्थान की ऊर्जा और ढांचे की वास्तुशिल्पीय आभा के मामले में हर मंदिर किसी चमत्कार से कम नहीं है। इन मंदिरों का स्तर और मकसद हर इंसान की कल्पना को हैरान करता है। मंदिरों का निर्माण करने में हजारों पुरुषों और महिलाओं ने हिस्सा लिया ;जो मजदूर और कामगार नहीं थे .. भक्त थे। उनके प्रेम और समर्पण ने पर्वतों को हटाकर सैकड़ों टन के पत्थरों के बड़े-बड़े खंड खड़े कर दिए। यह वह समय था, जब आजकल की तरह निर्माण कार्यों में प्रयोग होने वाली शक्तिशाली मशीनें न थीं।पत्थरों के गगनचुंबी स्तंभ, हजारों खंभों वाले कक्ष, नाजुक तरीके से नक्काशी की गई दीवारें एक ऐसी संस्कृति की प्रतिभा और दूरदर्शिता को दिखाती