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दिल्ली के टॉप 10 मंदिर तथा पांडवों द्वारा बनाए गये 5 मंदिर।


दिल्ली के टॉप 10 मंदिर ;- 1-बिरला मंदिर;- दिल्ली के बिरला मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मेट्रो के इस प्रमुख आकर्षण का निर्माण उद्योगपति जी. डी. बिरला द्वारा किया गया जो 1939 में पूर्ण हुआ और जिसका उद्घाटन महात्मा गाँधी ने किया। दिल्ली के सबसे सुंदर मंदिरों में से एक यह मंदिर देवी लक्ष्मी (धन और संपत्ति की देवी) और नारायण (उनके पति और त्रिमूर्ति के पालक) को समर्पित है। इसके अलावा इस मंदिर के चारों ओर भगवान कृष्ण, शिव, गणेश, हनुमान और बुद्ध को समर्पित छोटे मंदिर भी हैं। यहाँ देवी दुर्गा - शक्ति की देवी, को समर्पित एक मंदिर भी है। हिंदू मंदिर स्थापत्य कला की नगर शैली में बने इस मंदिर का निर्माण पंडित विश्वनाथ शास्त्री नाम के व्यक्ति के मार्गदर्शन में हुआ और इसके पूर्ण होने के बाद महात्मा गाँधी इसके उद्घाटन के लिए इस शर्त पर राज़ी हुए कि इस मंदिर में सभी धर्म और जातियों के लोगों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। कनॉट प्लेस के पास मंदिर मार्ग पर स्थित इस मंदिर तक परिवहन के सभी साधनों द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है और सप्ताह में सात दिन सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। 2-दिगंबर जैन मंदिर;- दिल्ली में लाल किले के पार स्थित दिगंबर जैन मंदिर यहाँ का सबसे पुराना जैन मंदिर है। श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर के नाम से भी प्रसिद्द मंदिर दिल्ली के प्रसिद्द चाँदनी चौक क्षेत्र में भी पाया जा सकत है। सुंदर लाल बलुआ पत्थरों से बना यह मंदिर चाँदनी चौक और नेताजी सुभाष मार्ग के चौराहे पर स्थित है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर है जिसका निर्माण 1656 में किया गया। इस प्रसिद्ध मंदिर को रेड टेम्पल या लाल मंदिर भी कहा जाता है और इसकी स्थापना के बाद से इसमें कई परिवर्तन किये गए हैं। लाल मंदिर के मुख्य देवता भगवान महावीर हैं - जो जैन धर्म के 24 वीं तीर्थंकर थे। इस मंदिर में भगवान आदिनाथ - जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और भगवान पार्श्वनाथ - भगवान महावीर के पूर्ववर्ती की मूर्तियां भी हैं। 3-कालकाजी मंदिर;- प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर, भारत में सबसे अधिक भ्रमण किये जाने वाले प्राचीन एवं श्रद्धेय मंदिरों में से एक है। यह दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास कालकाजी में स्थित है। यह मंदिर माँ दुर्गा की एक अवतार, देवी काली को समर्पित है।यह मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम से भी जाना जाता है। मनोकामना का अर्थ है कि यहाँ भक्तों की सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इस मंदिर के पीछे की पौराणिक कथा भी बहुत रोचक है। यह मंदिर ईटों की चिनाई द्वारा बनाया गया था परन्तु वर्तमान में यह संगमरमर से सजा है एवं यह चारों ओर से पिरामिड के आकार वाले स्तंभ से घिरा हुआ है। मंदिर का गर्भगृह 12 तरफ़ा है जिसमें प्रत्येक पक्ष पर संगमरमर से सुसज्जित एक प्रशस्त गलियारा है। यहाँ गर्भगृह को चारों तरफ से घेरे हुए एक बरामदा है जिसमें 36 धनुषाकार मार्ग हैं।1- 4-स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर;- अक्षरधाम या स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर दिल्ली में स्थित भारतीय संस्कृति, वास्तुकला, और आध्यात्मिकता के लिए एक सच्चा चित्रण है। इस मंदिर परिसर को पूरा बनने में 5 साल का समय लगा जिसे श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख स्वामी महाराज के कुशल नेतृत्व में पूरा किया गया। इस मंदिर को 11,000 कारीगरों ने मिलकर बनाया है जिसमें 3000 से ज्यादा स्वयंसेवक भी शामिल थे, इस मंदिर परिसर का उदघाटन आधिकारिक तौर पर 6 नवम्बर, 2005 को किया गया। गौरतलब है की मंदिर वास्तु शास्त्र और पंचरात्र शास्त्र की बारीकियों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। पूरा मंदिर परिसर 5 प्रमुख भागों में विभाजित है। मुख्य मंदिर परिसर ठीक बीचोंबीच यानी केंद्र में स्थित है। इस 141फीट उच्च संरचना में 234 शानदार नक़्क़ाशीदार खंभे, 9 अलंकृत गुंबदों, 20 शिखर , एक भव्य गजेंद्र 20,000 मूर्तियां शामिल हैं । 5-पूजा का बहाई स्थान : - 1986 में नई दिल्ली में इसकी स्थापना के बाद से पर्यटकों ने स्वयं यह सिद्ध किया है कि यह एक अवश्य घूमने योग्य आकर्षण है । कैसे? पूजा के इस स्थान को लोटस टेंपल (मंदिर) के नाम से जाना जाता है जो प्रतिवर्ष बहुत बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। बहापुर नाम के छोटे से गाँव में स्थित यह स्थान नई दिल्ली का प्रमुख आकर्षण स्थल है और यह भारतीय महाद्वीप में संप्रदाय का प्रमुख मंदिर है तथा इसने अपनी सुंदर स्थापत्य कला के लिए कई पुरस्कार भी जीते हैं। इस स्थान की सुंदरता के कारण अवश्य देखने के अलावा इसका वर्णन कई प्रकाशनों और टी. वी. के कई कार्यक्रमों में किया गया है, तथा इसने विभिन्न कार्यक्षेत्रों में कई पुरस्कार भी जीते हैं। 6-छतरपुर मंदिर;- छतरपुर मंदिर या श्री अध्‍य कात्‍यानी शक्ति पीठ, दक्षिण दिल्‍ली में छतरपुर में स्थित है जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर परिसर है। यह मंदिर देवी कात्‍यायनी, जो देवी दुर्गा का छठां स्‍वरूप है को समर्पित है। अन्‍य मंदिरों के विपरीत इस मंदिर में हर जाति और हर धर्म के श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति है। इस मंदिर को देवी दुर्गा मां के एक उत्‍साही भक्‍त स्‍वामी नागपाल ने बनवाया था। यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है और आसपास खूबसूरत बगीचों से घिरा हुआ है। मंदिर की नक्‍काशी, दक्षिण भारतीय वास्‍तुकला में की गई है। इस विशाल मंदिर परिसर में हमेशा निर्माण चलता रहता है जो कभी समाप्‍त