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क्या है आद्यशक्ति भगवती श्री राधा जी के जन्मोत्सव की कथा ?

श्री राधा क्या है ?-

11 FACTS;-

1-श्रीराधा मात्र एक नाम नहीं जो श्रीकृष्ण के पूर्व हैं। श्रीराधा मात्र एक प्रेम स्तम्भ नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक पृष्ठ है, जहां द्वैत से अद्वैत का मिलन है। श्रीराधा एक सम्पूर्ण काल का उद्गम हैं, जो श्रीकृष्ण रुपी समुद्र से मिलती हैं। श्रीकृष्ण के जीवन में श्रीराधा प्रेम की मूर्ति बनकर आईं और विश्व में प्रेम का प्रतिमान बनकर बस गईं। जिस प्रेम को कोई नाप नहीं सका, उसकी आधारशिला श्रीराधा ने ही रखी थी। यही वजह है कि आज भी हर जगह श्रीकृष्ण राधारानी के संग ही नज़र आते हैं।

2-श्रीराधा को ही ब्रज की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, पूरे ब्रज क्षेत्र में लोग राधे-राधे कहते ही नज़र आते हैं। श्रीराधा श्रीकृष्ण से पूर्व याद की जाती हैं। कहते हैं कि ये श्रीकृष्ण की ही इच्छा थी कि उनके नाम से पूर्व जो श्रीराधा का नाम लेता है या उनके बिना भी जो श्रीराधा को याद करता है, वो स्वयं उस पर कृपा करते हैं। ऐसे अद्भुत प्रेम का उदाहरण पूरे ब्रह्माण्ड में दूसरा नहीं मिलता। एक ऐसा प्रेम, जो कभी नहीं मिटा, सदियां भी इसे धूमिल न कर सकीं, बल्कि उस प्रेम की लोग पूजा करने लगे, जिसमें कुछ भी पाना न था, सिर्फ़ और सिर्फ़ खोना था। उन्होंने खोकर भी एक-दूजे को पा लिया।

3-श्री माँ राधा रानी जो श्री कृष्ण जी की आल्हादिनी शक्ति है, इस

मृत्युलोक में अवतरित हुई थीं।राधा और कृष्ण दोनों अभेद्य आत्मा “अवांगमनसगोचर”, परब्रह्म-परमात्मा हैं।श्रीराधा भगवान श्री कृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी हैं. इसलिए भगवान इनके अधीन रहते हैं।एक आद्या शक्ति (प्रकृति) हैं दूसरे परम पुरुष भगवान् ।

4-श्रीराधा कृष्ण तो एक आत्मा और दो शरीर हैं।एक सुर है तो दूसरे उस सुर की राग रागिनी, एक प्यास है तो दूसरे उस प्यास को शांत करने वाले जल की बूँद हैं।राधा कृष्ण दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। जो हर समय नित्य वृन्दावन धाम में रास लीला करते हैं।

5-श्री कृष्ण और राधा का प्रेम कोई शारीरिक प्रेम नहीं बल्कि, आत्मा से आत्मा का प्रेम था।द