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क्या है धन सम्पदा की अधिष्ठात्री देवी ,महाविद्या माँ कमला की साधना?


महाविद्या माँ कमला साधना;-

03 FACTS;- 1-कमला मां कमला धन सम्पदा की अधिष्ठात्री देवी हैं, भौतिक सुख की इच्छा रखने वालों के लिए इनकी आराधना सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।दस महाविद्याओं में दसवें स्थान पर माँ कमला साधना मानी जाती हैं। माँ कमला सती का दशम रूपांतरण हैं जो परम चेतन एवं परमानंद का प्रतीक हैं और शांति एवं सुख के अमृत से स्नान करती हैं। वे ब्रह्म एकत्व का साक्षात्कार हैं, वे स्वयं आनंद एवं आनंद भोगा हैं। दरिद्रता, संकट, गृहकलह और अशांति को दूर करती हैं। इनकी सेवा और भक्ति से व्यक्ति सुख और समृद्धि पूर्ण रहकर शांतिमय जीवन बिताता है।

2-इनकी पूजा करने से व्यक्ति साक्षात कुबेर के समान धनी और विद्यावान होता है। व्यक्ति का यश और व्यापार या प्रभुत्व संसांर भर में प्रचारित हो जाता है।!माँ कमला साधना करने से साधक के जीवन में धन, धान्य, भूमि, वाहन, लक्ष्मी आदि की प्राप्ति होती है ! धन से जुडी सारी समस्या समाप्त हो जाती है ! 2-साधना का समय..समृद्धि, धन, पुत्रादि के लिए इनकी साधना की जाती है। इन महाविद्या की साधना नदी तालाब या समुद्र में गिरने वाले जल में आकंठ डूब कर भी की जाती है। महाविद्या माँ कमला साधना आप नवरात्रि या किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार के दिन से शुरू कर सकते हैं !रात्रि 9 बजे के बाद कर सकते हैं ! माँ कमला साधना पूजा विधि ;-

08 FACTS;- 1-महाविद्या माँ कमला साधना करने वाले साधक को स्नान करके शुद्ध लाल वस्त्र धारण करके अपने घर में किसी एकान्त स्थान या पूजा कक्ष में पूर्व दिशा की तरफ़ मुख करके लाल ऊनी आसन पर बैठ जाए !

2-उसके बाद अपने सामने चौकी रखकर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर ताम्र पत्र की प्लेट में एक कमल का पुष्प रखें उसके बाद उस पुष्प के बीच में सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त “कमला यंत्र” को स्थापित करें ! और उसके दाहिनी तरफ भगवान शिव जी की फोटो स्थापित करें !

3-उसके बाद यन्त्र के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर यंत्र का पूजन करें !साधना जगत में संकल्प और विनियोग के बाद बात आती है न्यास की;तत्पश्चात् ही ध्यान,पटल, कवच, स्तोत्र,हृदयादि-पाठ-जपादि का विधान है। मन्त्र विधान अनुसार संकल्प आदि कर सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े : 4-विनियोग:- ॐ अस्य श्रीमहालक्ष्मी मन्त्रस्य भृगु ऋषि: निच्रच्छन्द: श्रीमहालक्ष्मी र्देवता श्रीं बीजं ह्रीं शक्ति: ऐं कीलकं श्रीमहालक्ष्मी प्रीत्यर्थे जपे विनियोग: !!

5-ऋष्यादि न्यास : - सीधे हाँथ के अंगूठे ओर अनामिका अंगुली को आपस में जोड़ ले। सम्बंधित मंत्र का उच्चारण करते जाये , शरीर के जिन-जिन भागों का नाम लिया जा रहा हैं उन्हें स्पर्श करते हुए यह भावना रखे कि... वे सभी अंग तेजस्वी और पवित्र होते जा रहे हैं ! ऐसा करने से आपके अंग शक्तिशाली बनेंगे और आपमें चेतना प्राप्त होती है । ! मंत्र : भृगुऋषये नम: शिरसि ( सर को स्पर्श करें ) निच्रच्छ्न्दसे नम: मुखे ( मुख को स्पर्श करें ) श्रीमहालक्ष्मीदेवतायै नम: ह्रदये ( ह्रदय को स्पर्श करें ) श्रीं बीजाय नम: गुहे (कामिन्द्रिय स्थान पर...इसकी मुद्रा होगी- दाहिने करतल को पीछे ले जाकर,गुद-प्रान्त का वाह्य स्पर्श। ) ह्रीं शक्तये नम: पादयो: ( दोनों पैरों को स्पर्श करें ) ऐं कीलकाय नम: नाभौ ( नाभि को स्पर्श करें ) विनियोगाय नम: सर्वांगे ( पूरे शरीर को स्पर्श करें ) 6-कर न्यास :-

कर न्यास करने का सही तरीका क्या हैं?-

03 FACTS;-

1-करन्यास की प्रक्रिया को समझने से पहले हमें यह समझना होगा की हम भारतीय किस तरीके से नमस्कार करते हैं । इसमें हमारे दोनों हाँथ की हथेली आपस में जुडी रहती हैं।साथ -साथ दोनों हांथो की हर अंगुली ,ठीक अपने कमांक की दुसरे हाँथ की अंगुली से जुडी होतीहैं। ठीक इसी तरह से यह न्यास की प्रक्रिया भी....

2-यहाँ पर हमें जो प्रक्रिया करना हैं वह कम से धीरे धीरे एक पूर्ण नमस्कार तक जाना हैं। तात्पर्य ये हैं की जव् आप पहली लाइन के मन्त्र का उच्चारण करेंगे तब केबल दोनों हांथो के अंगूठे को आपस में जोड़ देंगे और जब तर्जनीभ्याम वाली लाइन का उच्चारण होगा तब दोनों हांथो की तर्जनी अंगुली को आपस में जोड़ ले।

3-यहाँ पर ध्यान रखे की अभी