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तंत्र साधना के 10 रहस्य/सम्मोहन


हमारे मानव समाज में हजारों तरह की साधनाओं और विद्याओं के बारे में वर्णन मिलता है.

साधना से व्यक्ति सिद्धियां प्राप्त करता है. इसके पीछे उनका उद्देश्य आध्यात्मिक लाभ या सांसारिक लाभ प्राप्त करना होता है. मुख्य तौर पर साधना चार प्रकार के माने जाते हैं.

1. मंत्र साधना 2. तंत्र साधना 3. यंत्र साधना 4. योग साधना

इन चारों साधना के कई प्रकार भी हैं.

यहां सवाल ये उठता है कि तंत्र साधना लोगों में भय पैदा करती है, क्योंकि मान्यता है कि ये साधना अघोरियों की साधना या भयानक विद्या होती है. जबकि ऐसा है नहीं.

तंत्र साधना अलग होती है और अघोर साधना अलग.

मंत्र तंत्र और यंत्र में तंत्र को सबसे पहले रखा है. तंत्र एक रहस्यमयी विद्या होती है. हिंदू धर्म के साथ जैन धर्म और बौद्ध धर्म में भी तंत्र विद्या का प्रचलन है.

1. तंत्र में शरीर महत्वपूर्ण है

साधारण शब्द में कहें तो तंत्र का मतलब तन से, मंत्र का अर्थ मन से और यंत्र का अर्थ किसी वस्तु या मशीन से होता है. तंत्र का एक दूसरा मतलब होता है व्यवस्था. तंत्र इस बात को मानता है कि हम शरीर में हैं और यही एक वास्तविकता है. भौतिक शरीर हमारे सारे कार्यों का केंद्र होता है. इसलिए इस शरीर को पूरी तरह स्वस्थ और तृप्त रखना अत्यंत आवश्यक है. शरीर की क्षमता को बढ़ाना आवश्यक है, क्योंकि शरीर से हीं अध्यात्म को साधा जाना संभव है.

तंत्र का संभोग और मांस मदिरा से कोई संबंध नहीं होता. जो व्यक्ति इस तरह के कर्मों में लिप्त होता है वो किसी भी तरह से तांत्रिक नहीं बन सकता. तंत्र को इसी तरह के लोगों ने बदनाम किया है. तांत्रिक साधना का मुख्य उद्देश्य सिद्धि से साक्षात्कार करना होता है. इस विद्या को प्राप्त करने के लिए अंतर्मुखी होकर साधना की जाती है.

2. तंत्र के ग्रंथ

तंत्र को मुख्य रुप से शैव आगम शास्त्रों से जोड़ा जाता है. लेकिन इसका मूल अथर्ववेद में ही पाया जाता है. तंत्र शास्त्र तीन भागों में बंटा हुआ है. यामल तंत्र, आगम तंत्र और मुख्य तंत्र. आगम में रुद्रागम, शैवागम और भैरवागमन मुख्य है.

वाराही तंत्र के अनुसार जिसमें देवताओं की पूजा, सृष्टि प्रलय, सत्कर्यों के साधन, षट्कर्मसाधन, पुरश्चरण और चार प्रकार के ध्यान योग का वर्णन हो उसे ‘आगम’ कहा जाता है. जिसमें सृष्टितत्व, नित्य कृत्य, ज्योतिष, सूत्र, क्रम, युगधर्म और वर्णभेद का वर्णन हो उसे ‘यामल’ कहा जाता है. इसी तरह जिसमें लय, सृष्टि निर्णय, मंत्र, प्रेम, आश्रमधर्म, कल्प, व्रतकथा, ज्योतिषसंस्थान, शौच – अशौच, राजधर्म, स्त्रीपुरुष लक्षण, दानधर्म, राजधर्म, युगधर्म, व्यवहार तथा आध्यात्मिक नियमों का वर्णन हो उसे ‘मुख्य तंत्र’ कहा जाता है.

वाराही तंत्र के अनुसार 9 लाख श्लोकों में से 1 लाख श्लोक भारत में है. विस्मृति के कारण तंत्र साहित्य उपेक्षा और विनाश का शिकार हो गया है. आज के समय में तंत्र शास्त्र के अनेकों ग्रंथ लुप्त हो गए हैं.

वर्तमान में मिली जानकारी के अनुसार 199 तंत्र ग्रंथ मौजूद हैं.

3. रहस्यमई विद्याएं

तंत्र में बहुत सारी विद्याएं शामिल हैं. उसी में से एक है गुह्य- विद्या, गुह्य का मतलब होता है रहस्य. तंत्र विद्या से व्यक्ति अपनी आत्मशक्ति को बढ़ा कर कई तरह की शक्तियों से संपन्न बन सकता है और यही होता है तंत्र का मूल उद्देश्य. इसी तरह तंत्र विद्या से हीं त्राटक, सम्मोहन, इंद्रजाल, त्रिकाल, अपरा, परा और प्राण विद्या का जन्म हुआ. तंत्र से उच्चाटन, विद्वेषण, मोहन, वशीकरण और स्तंभन क्रियाएं की जाती है.

इसी तरह मनुष्य से जानवर बन जाना, एक साथ 5-5 रूप बना लेना, गायब हो जाना, विशाल पर्वतों को उठाना, समुंद्र को लांघ जाना, करोड़ों मील दूर के व्यक्ति को देख लेना और उससे बात कर लेने जैसे कई कार्य तंत्र विद्या की वजह से ही संभव होता है.

4. तांत्रिक गुरु

तंत्र के प्रथम उपदेशक भगवान शंकर हुए और उनके बाद भगवान दत्तात्रेय बाद में सिद्ध योगी शाक्त और नाथ परंपरा का चलन है. तंत्र साधना के प्रणेता भगवान शंकर और दत्तात्रेय के अलावा परशुराम, नारद, पिप्लादि, वसिष्ठ, शुक, सनक, भैरव, भैरवी, सनतकुमार, सन्दन, काली, भैरवी इत्यादि कई ऋषि मुनि उपासक रहे हैं.

ब्राह्मयामल में अनेकों ऋषियों के उल्लेख हैं. इसमें शिव ज्ञान के प्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं. उनमें वृहस्पति, उशना, सनत्कुमार, दधीचि आदि के नामों के उल्लेख मिलते हैं. जयद्रथयामल के मंगलाष्टक प्रकरण में बहुत सारे ऋषियों के नाम तंत्र प्रवर्तक के रूप में है. जैसे सनक दुर्वासा कश्यप और विश्वामित्र जैसे ऋषि.

5. तंत्र हथियार

प्राचीन काल में तंत्र के माध्यम से ही घातक हथियारों को तैयार किया जाता था. जैसे नागपाश, पाशुपतास्त्र और ब्रह्मास्त्र इत्यादि. पदार्थों की रचना, विनाश का भारी काम और परिवर्तन बिना किसी यंत्र की सहायता से तंत्र के द्वारा किया जा सकता है. विज्ञान के इस तंत्र भाग को ‘सावित्री विज्ञान’ वाममार्ग, तंत्रसाधना जैसे नामों से पुकारा जाता है.

6. तांत्रिक साधना

तांत्रिक साधनाओं को मुख्य रूप से तीन मार्ग – वाम मार्ग, मध्यम मार्ग और दक्षिण मार्ग बताया गया है. हालांकि ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं. एक वाम मार्गी तथा दूसरा दक्षिण मार्गी.

7. तंत्र के प्रतीक

आंगन द्वारों पर चित्रित की जाने वाली अल्पना, हाथों में लगाई जाने वाली मेहंदी, त्रिकोण से बनाए गए स्टार के बीच स्वास्तिक या ओम का चिन्ह इत्यादि तंत्र के प्रतीक होते हैं. तंत्र के दूसरे प्रतीक भी होते हैं. जैसे योग की कुछ मुद्राएं, क्रियाएं इत्यादि.

8. तांत्रिक मंत्र

तांत्रिक मंत्र मुख्यतौर भर्ती तरह के होते हैं.

  • शाबर मंत्र

  • तांत्रिक मंत्र

  • वैदिक मंत्र

तांत्रिकों के बीच मंत्रों में ह्रीं, क्लीं, श्रीं, ऐं, क्रूं इत्यादि अक्षरों का प्रयोग होता है. जिन मंत्रों में शुरुआत में इस तरह के अक्षर होते हैं वो सभी तांत्रिक मंत्र हैं. एक अक्षर से पता चल जाता है ये मंत्र किस देवता का है. जैसे काली माता के लिए क्रीं का प्रयोग करते हैं. और लक्ष्मी माता के लिए श्रीं का प्रयोग किया जाता है.

9. तंत्र साधना के देवी और देवता

तंत्र साधना में अष्ट भैरवी, देवी काली, दस महाविद्या, नवदुर्गा, 64 योगिनी देवियों की साधना होती है इसी तरह देवताओं में काल भैरव, भकूट भैरव, नाग महाराज की साधना होती है. इन सब की साधना को छोड़कर जो पिशाचिनी, यक्षिणी, वीर साधना, अप्सरा, किन्नर साधना, गंधर्व साधना, नायक नायिका साधना, वेताल, भूत, राक्षस, दानव इत्यादि की साधनाएं निषेद होती हैं.

10. कैसे करें तांत्रिक साधना

अगर आप तांत्रिक साधना करना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले आपको इस बात को स्पष्ट करना होगा कि आप ये साधना क्यों करना चाहते हैं.

जब आपको अपने सवाल के जवाब मिल जाए, तो उससे संबंधित किताबों का अध्ययन करें और इसके बाद किसी योग्य तंत्र साधक को खोज कर उनसे शिक्षा लें. हो सकता है कि ये आपको हिंदू धर्म के संन्यासी समाज के 13 अखाड़ों के सन्यासियों में हीं मिल जाएं.

तो दोस्तों ये हैं तंत्र साधना के कुछ रहस्य, जो वाकई में चौकाने वाले हैं. जरा सोचिए कि इस तंत्र साधना में कितनी शक्ति है. लेकिन अगर आप भी इस विद्या को सीखना चाहते हैं और कुछ किताबें पढ़कर साधना करते हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि इसके बुरे परिणाम भी हो सकते हैं.

अगर आप का उद्देश्य इस साधनों के माध्यम से किसी ओर का बुरा करना है, तब भी आपको सावधान हो जाना चाहिए. क्योंकि इसका परिणाम भी आपको हीं भुगतना पड़ सकता है.

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सम्मोहन के क्या लाभ होते है–

  1. रोजगार के क्षेत्र में व्यक्ति सम्मोहन के जरिए अपने उच्च अधिकारियों को अपने अनुकूल कर सकता है और अपने से छोटे अधिकारियों को प्रभावित कर उन्हें भी अनुकूल कर सकता है।

  2. सम्मोहन से व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को अपने अनुकूल बना सकता है।

  3. सम्मोहन विद्या का प्रयोग कर व्यवसाय को तेजी से बढ़ाया जा सकता है और कहीं अटकी पेमेंट भी आसानी से हासिल की जा सकती है।

  4. प्रेम के क्षेत्र में तो सम्मोहन ही सब कुछ है। इसके जरिए आप सामने वाले स्त्री अथवा पुरुष को आसानी से आकर्षित कर सकते हैं।

  5. घरेलू कलह रहती हो तो सम्मोहन इन मामलों में बहुत तेजी से काम करता हैं और पति-पत्नी के मध्य संबंध भी सदा के लिए मधुर बनाएं जा सकते हैं।

  6. पढ़ाई के क्षेत्र में भी सम्मोहन अपना एक अलग महत्व रखता है, क्योंकि सम्मोहन के जरिए बच्चों के दिमाग में जल्दी याद करने का गुण बढ़ाया जा सकता है और अगर किसी बच्चे का दिमाग पढ़ाई में नहीं लगता तो सम्मोहन के जरिए उसकी रुचि पढ़ाई के क्षेत्र में भी बढ़ाई भी जा सकती है।

जानिए, सम्मोहन करने की विधि

सम्मोहन के लिए अनेक विधियां हैं। सम्मोहन के लिए मन को ताकतवर बनाने के अगर कुछ साधारण उपाय बताए गए हैं। तंत्र, मंत्र और यंत्र को भी इसके लिए उपयोगी बताया गया है। इसका सबसे सरल तरीका योग है, जिसमें प्राणायाम से मन की स्थिरता हासिल की जा सकती है। इसके साथ ही सभी इन्द्रियों में एक अद्भुत शक्ति हासिल करने के लिए स्थिर मन को एक दिशा में केन्द्रित किया जाता है। सम्मोहन वैसे ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक से संभव है।

एक अन्य तरीका शवासन का है। इस स्थिति में लेटकर आंखें बंद किए हुए ध्यान करना होता है। ऐसा करने वाले व्यक्ति को योग निद्रा में जाने का अभ्यास करना चााहिए। इस अवस्था में शरीर का चेतन मन सुसुक्तावस्ता में आ जाता है, जबकि अवचेतना जागृत रहती है।

यह स्थिति ठीक उसी तरह की होती है, जिसमें शरीर और मन के सुव्यवस्थित होने बावजूद व्यक्ति का चेतन जागृत रहता है। इस स्थिति में वह खुद को निर्देशित भी कर सकता है। यह कहें कि जागा हुआ व्यक्ति भी नींद में सोया रहता है।सम्मोहन की अन्य अपनाई जानेवाली साधारण विधियों में अंगूठे, पेंडुलम या किसी अन्य वस्तु को कुछ समय तक एकटक देखना भी है, वह भी बिना पलक झपकाए। यह एक साधना है।

जैसे आंखों के ठीक सामने जलती हुई मोमबत्ती, पेंडुलम या लाल बल्ब को देखते रहने से एक सम्मोहन चक्र का एहसास किया जा सकता है। इसमें जरा भी विचलन की स्थिति नहीं आए, इसके लिए ध्यान और मंत्रोच्चारण का भी सहारा लिया जाता है। यह व्यक्ति के स्व-सम्मोहन की स्थिति होती है, जिससे उसमें मन-मस्तिष्क को नियंत्रित करने की रहस्यमयी शक्ति आ जाती है, जो कि अदभुत व प्रबल होती हैं।

सम्मोहन के लिए अपनायी जाने वाला प्रगतिशील विश्राम विधि भी काफी आसान है। इसके लिए सम्मोहित किए जाने वाले व्यक्ति को एक वैसे कमरे में तनावमुक्त अवस्था में बिठाएं, जिस स्थान पर बहुत कम रोशनी होनी चाहिए। व्यक्ति को आरामदायक अवस्था में बैठाने के बाद उसके सामने से मन को भ्रमित करने या भटकाने वाले सामान तत्काल वहां से हटा दें। उदाहरण के रूप में टीवी, कोई आवाज या फिर कोई इलेक्ट्रानिक डिवाइस इत्यादि वहां से हटा देनी चाहिए।

कमरे की तमाम खिड़िकियां और दरवाजे बंद कर दें, ताकि जिससे मन की स्थिरता प्रभावित हो। सम्मोहन शुरू करने से पहले व्यक्ति को इस बारे में भी अच्छी तरह बताना चाहिए। उसे यह भी बताना श्रेयस्कर रहता है कि इससे उसके शरीर और मन-मस्तिष्क पर किसी भी तरह का दुष्प्रभाव नहीं पड़ने वाला है और यह एक तरह से उनको एक आरामदायक विश्राम की अवस्था में ले जाने के लिए किया जा रहा है। इसे आप निश्चित तौर बेहोशी नहीं कह सकते हैं, और न ही इससे आपके ऊपर कोई जादू किया जाने वाला है। इससे व्यक्ति के दिमाग में एक स्वप्न जैसी आभा बनेगी, जिससे आपमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो जाएगा। उन्हें इस बात को लेकर भी यह आश्वस्त किया जाना चाहिए कि यह उनको चिंतामुक्त बनाएगा और इसी के साथ उस व्यक्ति से सम्मोहित करने के कारण और उसके लक्ष्य के बारे में भी पूछा जाना चाहिए, जिससे उसके भाव-समाधि के एक आभामंडल की सकारात्मक परिणाम देने वाली अवस्था बने। पूरी प्रक्रिया के दौरान बेहद धीमे और मधुर स्वर में बोलें। जिससे ऐसा प्रतीत हो कि आपके शब्द उसके मन के भाव को एक आवरण दे रहे हों।

शरीर की मांशपेशियों को पूरी तरह से ढीला छोड़ते हुए विश्राम करने को कहें। अच्छी तरह से सांस लेने और छोड़ने को कहें। ऐसा करने से ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा मस्तिष्क तक पहुंचती है और इस तरह से बनी शिथिलता बनने पर धीर-धीरे व्यक्ति की आंखें बंद होने के बावजूद वह नियंत्रण में रहता है। इसके साथ ही सम्मोन के कुछ गुप्त उपाय भी अपनाए जा सकते हैं, जिससे अपने भीतर सम्मोहन की शक्ति बढ़ाई जा सकती है। जैसे बनस्पति श्वेत अपामार्ग की जड़ को घिसकर तिलक लगाने या मोर की कलगी को रेश्मी कपड़े में बांधकर रखने से सम्मोहन शक्ति बढ़ाई जा सकती है। स्त्रियां सम्मोहन शक्ति अपने मस्तक पर लगे लाल बिंदी के जरिए भी प्राप्त कर सकती है।

आंखों के बीच लगे सिंदूर या रोली की बिंदी यदि खुद देख पाएं, तो समझें आपमें सम्मोहन शक्ति जागृत हो चुकी है। गुरुवार के दिन मूल नक्षत्र में केले की जड़ को सिंदूर के साथ पीसकर उसका तिलक लगाने से सम्मोहन शक्ति बढ़ती है।

सम्मोहन का यह प्रयोग मन की ताकत का एहसास करवाता है तो कल्पनाशीलता और वैचारिकता के भाव को सुदृढ़ कर देता है। इसके परिणामस्वरूप शारीरिक बदलाव को सहजता से महसूस किया जा सकता है, यानी सम्मोहन से काफी हद तक यदि मानसिक रोगों को ठीक किया जा सकता है तो एक सीमा तक शारीरिक विकार को भी दूर किया जा सकता है। मन में गहराई तक बैठे डर को दूर करने का यह यह एक कारगर उपाय है, जिससे आत्मविश्वास की भावना का विकास संभव हो पाता है। मुश्किल से मुश्किल या असंभव कार्य करने की निडरता आती है। सम्मोहन से न केवल अपने दुख-दर्द को दूर किया जा सकता है, बल्कि भूत, भविष्य और वर्तमान की घटनाओं को भी देखा जाना जा सकता है, या फिर मानवहित में किसी के प्राण बचाने तक में इसकी मदद ली जा सकती है। साथ ही बुरी आदतों से छुटकारा पाने का यह तरीका काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

किसी को सम्मोहित करने के लिए कैसे और क्या किया जाये? चरणवार जानकारी

जानिए, सम्मोहन का पहला चरण

हमेशा ही ऐसे व्यक्ति की खोजा जाए जो वास्तव में सम्मोहित होना चाहता हो । जो सम्मोहित नहीं होना चाहता हो, या इस पर विश्वास नहीं करता हो, उसको सम्मोहित करने पर यह काम नही करेगा और उसे कृत्रिम निद्रावस्था में लाना बहुत मुश्किल हो जाता है। मानसिक या मानसिक विकारों की पृष्ठभूमि वाले के साथ किसी को सम्मोहित नहीं करें, क्योंकि इसके अनायास, अहितकारी और खतरनाक परिणाम हो सकता है, इसलिए एक स्वस्थ व्यक्ति चयन करे, जो सम्मोहित होने को तैयार हो। इससे आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे।

जानिए, सम्मोहन का दूसरा चरण

आरामदायक और शांत कमरे को चुनाव करें, यह महत्वपूर्ण पहलू है। जिसका सम्मोहन आप करना चाहते हैं, उसे स्वतंत्र और सुरक्षित महसूस करवाए, उसका स्वयं को सुरक्षित महसूस करना भी उतना ही आवश्यक है। जिस कमरे में आप सम्मोहन क्रिया का प्रयोग कर रहे हैं, वहां बहुत ही हल्की रोशनी होनी आवश्यक है। कमरे का साफ-सुथरा होना भी उतना ही आवश्यक है। सम्मोहन के दौराना आरामदायक सोफा या कुर्सी होनी चाहिए, जिसमें सम्मोहित होने वाले व्यक्ति को बैठना है। इस बीच कोई भी व्यक्ति बीच में आपको परेशान न करे,यह जरुरी है, जब तक आप दोनों बाहर न आ जाये । अन्य कोई ध्यान भंग करने वाला तत्व भी नहीं होना चाहिए।

जानिए, सम्मोहन का तीसरा चरण

जब आप सम्मोहन की प्रक्रिया में प्रवेश कर रहे हो तो सम्मोहित करने से पहले अपने व उसके लक्ष्यों और सवालों को निर्धारित कर लीजिए, इससे आपका व सम्मोहित होने वाले व्यक्ति का उत्साह बढ़ता है, जो बेहतर परिणाम देता है । बेहतर परिणाम के लिए यह जरुरी भी है। यह प्रक्रिया ध्यान में वृद्धि करने वाली है। सम्मोहन के साथ अपने विषयों के लक्ष्यों को जानने के बाद आपको उनकी स्थिति जानने में मदद मिलेगी। सम्मोहन की प्रक्रिया प्रभावी रहेगी, अवरोध नहीं होगा।

सम्मोहन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद साथी से पूछें कि जब उसे सम्मोहित कर दिया गया था। उस समय का उसे क्या कुछ याद है? उन्हें पूछना कि उन्हें क्या करने के लिए कहा गया था? क्या और कैसे उसने जवाब दिया? उस आधार पर आप अगली बार जो कमी रह गयी उन में सुधार कर सकते है। जो आपके लिए उपयोगी होगी। आमतौर पर जो लोग पहले सम्मोहित हो चुके होते हैं, उन्हें फिर से आसानी से सम्मोहित किये जा सकता है। जो और अधिक प्रभावी होता है।

जानिए, सम्मोहन के दौरान कैसे क्या करे?

क्या बोले,कैसे बोले और कब बोले: सम्मोहन के लिए कम, धीमी गति से, सुखदायक, आवाज में बोलते हैं। अपने वाक्य सामान्य से थोड़ा ज्यादा देर के लिए लम्बा खींचे।आहिस्ता आहिस्ता बोलना चाहिए, कल्पना कीजिए कि आप अपनी आवाज से डर या चिंता युक्त व्यक्ति को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी बातचीत के दौरान अपनी आवाज का एक ही स्वर रखें। कुछ अच्छे शब्दों के साथ सम्मोहन के लिए वार्ता इस तरह से करें।

उदाहरण स्वरूप- यहाँ पर सब कुछ शांत है, आप सुरक्षित है और शांतिपूर्ण है। आप अपने आप को कुर्सी यों सोफे में आराम करने के लिए गहराई से आराम कर रहे हैं। अब आपकी आँखे थोड़ी भारी हो रही है, आपकी आंखें में भारीपन महसूस हो रहा है और अब आप उसे बंद करना चाहते हैं। इस समय आप अपने शरीर को स्वाभाविक रूप से ढीला छोड़कर अपनी मांसपेशियों को आराम करवा रहे हैं। मेरी आवाज सुनकर आपका शरीर और दिमाग शांत महसूस करने लगा हैं। आप इस समय का पूरा नियंत्रण में कर रहे हैं। आप केवल उन सुझावों को जो आपके लाभ के लिए है, उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार हो रहे हैं, जो आपके लिए निश्चित तौर पर लाभकारी रहेगी ।

सम्मोहन प्रक्रिया के दौरान सम्मोहित होने वाले व्यक्ति को उसकी गहरी सांस पर ध्यान केंद्रित कराएं

सम्मोहन की इस प्रक्रिया के तहत नियमित रूप से गहरी सांस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सम्मोहित होने वाले व्यक्ति को प्रेरित कीजिये। उन्हें अंदर और बाहर गहरी, संगठित सांस लेने की कोशिश करवाये। इस तरह से सांस लेने से मस्तिष्क को आक्सीजन ज्यादा मिलती है और मानसिक शक्ति प्रबल होती है, जो कि सम्मोहन प्रक्रिया में सहयोगी साबित होती है, अच्छे परिणाम मिलने में कारगर होती है और ऐसा करने से सम्मोहन, तनाव, या अपने वातावरण के अलावा अन्य के बारे में सोचने के लिए व्यक्ति तैयार हो जाता है।

सम्मोहन प्रक्रिया के दौरान निश्चित केंद्रबिंदु पर आँखे केंद्रित करवाए

सम्मोहन के इस चरण में एक निश्चित केंद्रबिंदु पर नेत्रों के माध्यम से ध्यान कंेद्रित करवाया जाता है। उनसे कहो कि किसी भी वस्तु का चयन करे और उस पर उनकी आंखों को आराम से टिकाये। अगर उनको आंखे बंद करके पर्याप्त आराम मिलता है तो आंखे बंद भी करवा सकते हैं। ध्यान देने योग्य पहलू यह है कि आप सम्मोहित होने वाले व्यक्ति से संवाद करते रहे, इससे यह पता लगता रहेगा कही वह सो तो नहीं गया है। समय-समय पर उनकी आंखों पर ध्यान दे। अगर लगता है कि जैसे वे चारों ओर तेज कर रहे हैं, उन्हें कुछ मार्गदर्शन दे। इस अवधि में उन्हें बताइए कि उनकी आंखों और पलकों को आराम मिल रहा है, उनकी आंखे भारी हो रही हैं।

आप उन्हें अपेक्षाकृत शांत नियमित रूप से श्वास और धुन में अपनी आवाज के साथ उन्हें अपने पैर की उंगलियों और पैरों को आराम करने के लिए कहे और उन्हें अपने पैर, फिर उनके ऊपरी पैर, और इतने पर चेहरे की मांसपेशियों को आराम करने के लिए ऊपर से पूछो। वहां से आपअपनी पीठ, कंधे, हाथ, और उंगलियों के लिए चारों ओर वापस चक्र कर सकते हैं। अपनी आवाज धीमी और शांत रखने के लिए अपना समय ले लो। अगर व्यक्ति तनाव में लग रहा है तो पूरी प्रक्रिया को फिर से करे। अपने पैरों और टखनों को बिलकुल शांत करे। लगातार संवाद के जरिये मन शांत करते रहिये।

मानसिक स्थिति के अनुसार ही प्रतिक्रिया कीजिए

उनकी मानसिक स्थिति के अनुसार ही एक गाइड के रूप में अपने साथी की सांस लेने और शरीर की भाषा का प्रयोग करें। आप किसी छंद और एक गीत को धीमे स्वर में दोहरा सकते है, जब तक कि आपके साथी को पूरी तरह से आराम प्रतीत नहीं होता है। इस दौरान उनकी मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रिया पर पूर्ण ध्यान दे जैसे -उनकी आँखों (वे तेज कर रहे हैं?), उनकी उंगलियों और पैर की उंगलियों में तनाव के लक्षण देखने के (वे गतिशील है क्या?) और उनकी सांस लेने (यह उथले और अनियमित है) और जब तक वे शांत और आराम न हो, उनको विश्राम और आराम देने की तकनीकों पर काम करते रहिये

क्या है कृत्रिम निद्रावस्था सीढ़ी?

इस तकनीक को गहरी समाधि की स्थिति भी कहा जा सकता है। अपने विषय की खोज के लिए खुद को एक गर्म, शांत कमरे में एक लंबी सीढ़ी के शीर्ष पर कल्पना कीजिये। सीढ़ी के शीर्ष से नीचे की ओर हर कदम से खुद को विश्राम में गहराई में उतरता हुआ महसूस कीजिये । हर कदम अपने स्वयं के मन में गहराई में उतरना महसूस होने लगता है। पहला कदम नीचे ले जाओ तो लगता है की आप अपनी स्थिति में गहरे डूबने लगे है। हर एक कदम अपने अवचेतन मन में आगे की ओर कदम बढ़ाना है। आप दूसरे नीचे कदम में अपने आप को और ज्यादा शांत महसूस करने लगते हैं। जब आप तीसरे चरण तक पहुंचते हैं तो आपको लगेगा कि आपका शरीर मन से बिल्कुल दूर चल रहा है। इस तरह आप कृत्रिम निद्रावस्था की स्थिति में पहुंच जायेंगे।

गुप्त दृश्य-

सम्मोहन से तनाव और चिंता को कम करने की कोशिश की जाती है, लेकिन दैनिक जीवन परिप्रेक्ष्य में समस्याओं और चिंताओं को दूर करने के लिए सम्मोहन उचित नहीं है। इसलिए संभव समस्याओं का समाधान करने के लिए ही कल्पना करवानी चाहिए । कल्पना की गहराइयो में पहुंचने पर आप उनके अंदर के तनाव को सवाल और जवाबो की सहायता से बाहर निकाल सकते है ।

सम्मोहन मानसिक वेदनाओं की एक किस्म के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आपको एक प्रशिक्षित पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य की सलाह लेनी चाहिए। सम्मोहन को हीपणो थेरेपी की लत, दर्द से राहत, भय और आत्म सम्मान आदि मुद्दों के लिए अधिक इस्तेमाल किया जाता है । हमे पता है कि सम्मोहन केवल किसी भी मानसिक स्वास्थ्य के समाधान का एक छोटा सा हिस्सा है। हालांकि, सम्मोहन एक चमत्कार इलाज या जल्दी ठीक करने वाला नहीं है, यह केवल एक तरह से लोगों को मदद करने के लिए अपने ही मन में गहरा गोता है। आत्म प्रतिबिंब के इस तरह के सम्मोहन मजबूत मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन गंभीर या पुरानी मुद्दों को हमेशा एक प्रशिक्षित और प्रमाणित पेशेवर द्बारा इलाज किया जाना चाहिए।

सम्मोहन के सत्र का समापन

जब भी आप सम्मोहन का सत्र समापन करे तो धीरे-धीरे उन्हें अपने ट्रान्स स्थिति से बाहर ले। उन्हें पता चलने लगेगा कि वे एक ट्रान्स में गहरा रहे हैं, उन्हें वापस ऊपर आप के साथ सीढ़ी चलना है, हर कदम के साथ जागने आसपास के वातावरण के प्रति और अधिक जागरूक होते जा रहे हैं। उन्हें बताना है कि वे वापस पूर्ण जागरूकता, सतर्क और जागने की स्थिति में पहुंच गए है। आप इस तरह से बोल सकते है कि मैं एक से पांच से गिनती करने के लिए जा रहा हूं, और पांच की गिनती में सीढ़ी से एक एक कदम ऊपर चढ़ते हुए आप व्यापक, जाग पूरी तरह से सतर्क और पूरी तरह से ताजा महसूस करने लगेंगे।

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तुरंत बात करने के लिए किसी पर भी दबाव मत करो। अगर वे आराम से लग रहे हैं तो बस एक बातचीत खोलने के लिए बात कीजिये और कुछ समय शांत रहना चाहते है तो बाद में बात करने तक के लिए प्रतीक्षा करें।

भविष्य में सुधार के लिए मदद देखने के लिए आप साथी के साथ सम्मोहन चर्चा कीजिये । उनसे जानिए कि क्या उन्हें सही लगा?, क्या उन्हें सम्मोहन से बाहर लेने की धमकी दी?, और उन्होंने क्या महसूस किया ?और अगली बार अधिक प्रभावी ढंग से सम्मोहन क्रिया में मदद मिलेगी ।

क्या ये सुरक्षित है?

सम्मोहन मनुष्य के अवचेतन मन का एक अनुभव है। इसमें आपको अपनी इच्छा के विरुद्ध विचारों के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। सत्र के समापन होते ही हम वापस अपनी आम जिंदगी में लोट आते है। सम्मोहन अंदर के तनाव को काम करने का बेहद अच्छा तरीका है। सर्वाधिक लाभ मानसिक शक्तियों को बढ़ने में हो सकता है।

जरूरी सलाह

याद रखिये कि सम्मोहन कृत्रिम निद्रावस्था है। यदि कोई एक व्यक्ति आपकी इस आराम में मदद कर सकता है, तो ही आपको ऐसा करने के लिए तैयार होना चाहिए।

....SHIVOHAM....