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क्या है योग निद्रा?


योगनिद्रा का क्या अर्थ है ?-

07 FACTS;-

1-योगनिद्रा का अर्थ है- आध्यात्मिक नींद। यह वह नींद है, जिसमें जागते हुए सोना है। सोने व जागने के बीच की स्थिति है योग निद्रा। इसे स्वप्न और जागरण के बीच ही स्थिति मान सकते हैं। यह झपकी जैसा है या कहें कि अर्धचेतन जैसा है। देवता इसी निद्रा में सोते हैं।

ईश्वर का अनासक्त भाव से संसार की रचना, पालन और संहार का कार्य योग निद्रा कहा जाता है।

2-मनुष्य के सन्दर्भ में अनासक्त हो संसार में व्यवहार करना योग निद्रा है।किसी भी

प्रकार के रोग या तनाव में योग निद्रा एक चमत्कारिक औषधि की तरह काम करती है। इसके अलावा योग निद्रा के निरंतर अभ्यास से आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है। 3-योग निद्रा एक प्राचीन ध्यान तकनीक है। योग निद्रा सही मायने में तनाव और चिंता से पीड़ित लोगों के लिए एक वरदान है। यह अशांत मन को शांत और तरोताजा करने का आसान तरीका है।योगनिद्रा मन को चिंता मुक्त करने की एक अनोखी विधि है’।

4-योग निद्रा वह नींद है, जिसमें जागते हुए सोना है। सोने व जागने के बीच की स्थिति ही योग निद्रा है । इसे स्वप्न और जाग्रत के बीच ही स्थिति मान सकते हैं। यह झपकी जैसा है या कहें कि अर्धचेतन जैसा है। योगाभ्यास आम तौर से जागृत अवस्था में किया जाता है परंतु योग निद्रा विशेष है, इसे लेट कर किया जाता है।

5-आमतौर से मनुष्य की दो अवस्था होती हैं - आप या तो जागते हैं या फिर गहरी नींद में सो जाते हैं। लेकिन योगनिद्रा में आप पूर्ण रूप से जागृत होते हुए भी शरीर और मन पर गहरी नींद के तमाम लक्षण अनुभव कर पाते हैं।

6-योगनिद्रा लें ..और दिनभर तरोताजा रहें ,परन्तु प्रारंभ में यह किसी योग विशेषज्ञ से सीखकर करें तो अधिक लाभ होगा। योगनिद्रा द्वारा शरीर व मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं। यह नींद की कमी को भी पूरा कर देती है। इससे थकान, तनाव व अवसाद भी दूर हो जाता है। राज योग में भी इसे प्रत्याहार कहा जाता है। जब मन इन्द्रियों से विमुख हो जाता है।

प्रत्याहार की सफलता एकाग्रता लाती है।

7-योगनिद्रा में सोना नहीं है। योगनिद्रा द्वारा मनुष्य से अच्छे काम भी कराए जा सकते हैं। बुरी आदतें भी इससे छूट जाती हैं। योगनिद्रा का प्रयोग रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, सिरदर्द, तनाव, पेट में घाव, दमे की बीमारी, गर्दन दर्द, कमर दर्द, घुटनों, जोड़ों का दर्द, साइटिका, अनिद्रा, अवसाद और अन्य मनोवैज्ञानिक बीमारियों, स्त्री रोग में प्रसवकाल की

पीड़ा में बहुत ही लाभदायक है।योगनिद्रा का संकल्प प्रयोग पशुओं पर भी किया जा सकता है। खिलाड़ी भी मैदान में खेलों में विजय प्राप्त करने के लिए योगनिद्रा लेते हैं।योगनिद्रा 10 से 45 मिनट तक की जा सकती है।

योगनिद्रा लेने का तरीका ;-

03 FACTS;-

1-योग निद्रा काफी हद तक शवासन से मिलती जुलती कही जा सकती है। जहां एक ओर योग के अन्य आसनों को कुछ मिनटों के लिए किया जाता है, वहीं योग निद्रा को आप लंबे समय तक कर सकते हैं। इसको करते समय जब आप पीठ के बल जमीन पर लेटते हैं तो आपको इस बात का ध्यान देना होगा कि आपकी हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए।

2-योग निद्रा की गहराई में आपके शरीर का तापमान कम हो जाता है। इस दौरान जमीन की ठंडक से शरीर को परेशानी न हो व शरीर का तापमान सामान्य बना रहे, इसलिए आपको लेटने से पहले नीचे कोई कपड़ा या कंबल बिछा लेना जरूरी होता है।जमीन पर दरी बिछाकर उस पर एक कंबल बिछाएं।योगनिद्रा प्रारंभ करने के लिए खुली जगह का चयन किया जाए। यदि किसी बंद कमरे में करते हैं तो उसके दरवाजे, खिड़की खुले रहना चाहिए। ढीले कपड़े पहनकर शवासन करें।

3-दोनों पैर लगभग एक फुट की दूरी पर हों, हथेली कमर से छह इंच दूरी पर हो। आँखे बंद रहें।शरीर को हिलाना नहीं है, नींद में नहीं जाना है, यह एक