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सम्मोहन(HYPNOTISM) क्या है?क्या है त्राटक सम्मोहन साधना ?क्या सम्मोहन का प्रयोग साधना के लिए खतरनाक


सम्मोहन क्या है?

05 FACTS;-

1-सम्मोहन शब्द अपने आप में काफी रहस्यपूर्ण है। सम्मोहन भारत की प्रचीनतम विद्याओ में एक है।युगों से इस परामनोविज्ञान की एक श्रेष्ठ विद्या का उपयोग होता रहा है। सामान्य तौर पर किसी को अपने आचरण, बात-व्यवहार, रूप-रंग व सौंदर्य से आकर्षित तो किया जा सकता है, लेकिन इससे उसे तत्काल अपने सम्मोहन में कदापि बांधा नहीं जा सकता है।

2-सम्मोहन विद्या को ही प्राचीनकाल से प्राण विद्या अथवा त्रिकालविद्या के नाम से भी जाना जाता था। इसे मोहिनी और वशीकरण विद्या के नाम से भी जाना जाता हैं। पूर्व काल में साधु-संत और ऋषि-मुनि इस विद्या का प्रयोग सिद्धियां और मोक्ष प्राप्त करने के लिए भी करते थे। त्रिकाल विद्या इसको इसलिए माना जाता है, क्योंकि सम्मोहन विद्या से आखिर में व्यक्ति या साधक भूत भविष्य वर्तमान देखने की क्षमता प्राप्त कर लेता है, जो उसे सर्व सामाथ्र्यवान बनाती है।

3-अंग्रेजी में इसे हिप्नोटिज्म कहते हैं। हिप्नोटिज्म मेस्मेरिज्म का ही सुधरा रूप है। यूनानी भाषा हिप्नॉज से बना है हिप्नोटिज्म जिसका अर्थ होता है निद्रा। 'सम्मोहन' शब्द 'हिप्नोटिज्म' से कहीं ज्यादा व्यापक और सूक्ष्म है। पहले इस विद्या का इस्तेमाल भारतीय साधु-संत सिद्धियां और मोक्ष प्राप्त करने के लिए करते थे। जब यह विद्या गलत लोगों के हाथ लगी तो उन्होंने इसके माध्यम से काला जादू और लोगों को वश में करने का रास्ता अपनाया। मध्यकाल में इस विद्या का भयानक रूप देखने को मिला। फिर यह विद्या खो-सी गई थी।

4-सम्मोहन व्यक्ति के मन की वह अवस्था है जिसमें उसका चेतन मन धीरे-धीरे निद्रा की अवस्था में चला जाता है और अर्धचेतन मन सम्मोहन की प्रक्रिया द्वारा निर्धारित कर दिया जाता है। साधारण नींद और सम्मोहन की नींद में अंतर होता है। साधारण नींद में हमारा चेतन मन अपने आप सो जाता है तथा अर्धचेतन मन जागृत हो जाता है। 5-दुनिया का प्रत्येक धर्म व्यक्ति को बचपन से ही बार-बार दिए जाने वाले सुझाव और निर्देश द्वारा ही नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करता है। धर्म इसके लिए ईश्वर का भय और लालच का सहारा लेता है।सम्मोहन निद्रा में सम्मोहनकर्ता चेतन मन को सुलाकर अवचेतन को आगे लाता है और उसे सुझाव के अनुसार कार्य करने के लिए तैयार करता है। हर व्यक्ति का जीवन उसके या किसी और व्यक्ति के सुझावों पर चलता है। व्यक्ति को सम्मोहित करने के लिए उसकी पांचों इंद्रियों के माध्यम से जो प्रभाव उसके मन पर डाला जाता है उसे ही यहां सुझाव कहते हैं।

मन के प्रकार;-

02 FACTS;-

1-मनोविज्ञान के अनुसार हमारे मन के 3 प्रकार है ... 1- चेतन मन (Conscious mind)

2- अवचेतन मन (आदिम आत्मचेतन मन)(Sub Conscious Mind )

3-अचेत मन (Unconscious Mind)

2-हमारे मन की मुख्यतः दो अवस्थाएं (कई स्तर) होती हैं- 2-1- चेतन मन( Conscious Mind) :-

इसे जाग्रत मन भी मान सकते हैं। चेतन मन में रहकर ही हम दैनिक कार्यों को निपटाते हैं अर्थात खुली आंखों से हम कार्य करते हैं। विज्ञान के अनुसार मस्तिष्क का वह भाग जिसमें होने वाली क्रियाओं की जानकारी हमें होती है। यह वस्तुनिष्ठ एवं तर्क पर आधारित होता है। 2-2- अवचेतन मन(Sub Conscious Mind) :-

04 POINTS;-

1-जो मन सपने देख रहा है वह अवचेतन मन है। इसे अर्धचेतन मन भी कहते हैं। गहरी सुसुप्ति अवस्था में भी यह मन जाग्रत रहता है। विज्ञान के अनुसार जाग्रत मस्तिष्क के परे मस्तिष्क का हिस्सा अवचेतन मन होता है। हमें इसकी जानकारी नहीं होती।सम्मोहन के दौरान अवचेतन मन को जाग्रत किया जाता है। ऐसी अवस्था में व्यक्ति की शक्ति बढ़ जाती है लेकिन उसका उसे आभास नहीं होता, क्योंकि उस वक्त वह सम्मोहनकर्ता के निर्देशों का ही पालन कर रहा होता है।

2-अचेतन मन जो हमारी इच्छाशक्ति और चेतन स्वरुप से परे है और उससे सम्पर्क सामान्य अवस्था में नहीं किया जा सकता।अचेतन मन को सुप्त या अचेत [ अन्-कांशियस ] मन भी कहा जा सकता है।इसी अचेतन सुप्त मन के चार विभाग हैं:

2-1-एक मन जो आत्मा को परमेश्वर से जोड़ता है।

2-2-एक मन जो परमेश्वर के प्रतिरूप की ज्योति में आत्मा के अंतकरण में विद्यमान रहता है ।

2-3-एक मन जो सब प्राचीन जीवन कालों, कृत्यों, कर्मों और संचित व्यवहार और ज्ञान को सूचक पुरालेख के सयोंजन में सलंग्न है।

2-4-एक मन जो संचित भावों, नकारात्मक या सकारात्मक का लेख जोखा रखता है।

3-चेतन मन पूरे दिमाग का केवल 10% होता है। जिसमे –-इच्छा शक्ति (Will Power)-याददाश्त (Memory)-तर्क शक्ति (Logical power )-गंभीर सोच (Critical Thinking )होतें है।

4-अवचेतन मन पूरे दिमाग का केवल 90% होता है। जिसमे –-आदतें (Habits)-मान्यताएं (Beliefs )-भावनाएँ (Emotions)-प्रतिक्रियाओं (Reactions)-मजबूत मेमोरी (Strong Memory)-अंतर्ज्ञान आदि (Intuition etc)होतें है।

अवचेतन मन की शक्ति : -

03 FACTS;-

1-हमारा अवचेतन मन चेतन मन की अपेक्षा अधिक याद रखता है एवं सुझावों को ग्रहण करता है। आदिम आत्मचेतन मन न तो विचार करता है और न ही निर्णय लेता है। उक्त मन का संबंध हमारे सूक्ष्म शरीर से होता है। 2-यह मन हमें आने वाले खतरे या उक्त खतरों से बचने के तरीके बताता है। इसे आप छठी इंद्री भी कह सकते हैं। यह मन लगातार हमारी रक्षा करता रहता है। हमें होने वाली बीमारी की यह मन 6 माह पूर्व ही सूचना दे देता है और यदि हम बीमार हैं तो यह हमें स्वस्थ रखने का प्रयास भी करता है। बौद्धिकता और अहंकार के चलते हम उक्त मन की सुनी-अनसुनी कर देते हैं। उक्त मन को साधना ही सम्मोहन है।

3-अवचेतन को साधने का असर ..सम्मोहन द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है। इससे विचारों का संप्रेषण (टेलीपैथिक), दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, अदृश्य वस्तु या आत्मा को देखना और दूरस्थ दृश्यों को जाना जा सकता है। इसके सधने से व्यक्ति को बीमारी या रोग के होने का पूर्वाभास हो जाता है।

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सम्मोहन के प्रकार :-

1-वैसे सम्मोहन के कई प्रकार हैं, लेकिन मुख्‍यत: 5 प्रकार माने गए हैं-

1-1-1. आत्म सम्मोहन

1-2. पर सम्मोहन

1-3. समूह सम्मोहन

1-4. प्राणी सम्मोहन

1-5. परामनोविज्ञान सम्मोहन 1- आत्म सम्मोहन क्या है?

वास्तव में सभी प्रकार के सम्मोहनों का मूल आत्म सम्मोहन ही है। इसमें व्यक्ति खुद को सुझाव या निर्देश देकर तन और मन में मनोवांछित प्रभाव डालता है। 2- पर सम्मोहन क्या है?

पर सम्मोहन का अर्थ है दूसरे को सम्मोहित करना। इसमें सम्मोहनकर्ता दूसरे व्यक्ति को सम्मोहित कर उसके मनोविकारों को दूर कर उसके व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक निर्देश दे सकता है या उसके माध्यम से लोगों को चमत्कार भी दिखा सकता है।

सम्मोहन में सुझाव या निर्देश का प्रभाव :-

02 FACTS;-

1-व्यक्ति को सम्मोहित करने के लिए उसकी पांचों इंद्रियों के माध्यम से उसे जो सुझाव प्रभाव, वस्तु, आवाज, सुगंधी, खाने वाली वस्तु के स्वाद, स्पर्श, आदि द्वारा दिया जा सकता है, वह देते हैं। सुझावों द्वारा व्यक्ति सम्मोहित हो जाता है। 2-एक कहावत है- 'करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात है सिल पर पड़त निशान' अर्थात बार-बार प्रयास करने से बुद्धिहीन मस्तिष्क भी काम करने लगता है। सम्मोहन में यही किया जाता है। विशेष सुझाव और निर्देश को बार-बार दोहराया जाता है। इस दोहराव से ही व्यक्ति अपने अवचेतन मन में चला जाता है और फिर वह उन सुझावों को सत्य मानने लगता है।

सम्मोहन करने या सीखने के पूर्व :-

02 FACTS;-

1-सम्मोहन करने से पूर्व सम्मोहन सीखना होगा। सम्मोहन सीखने के लिए आत्म सम्मोहन को करना होगा। आत्म सम्मोहन को करने के लिए अवचेतन मन को समझना होगा और इसे शक्तिशाली बनाना होगा। 2-चेतन मन से अवचेतन मन में जाकर उस मन में चेतना को जाग्रत रखना ही आत्म सम्मोहन है। जैसे कभी-कभी सपनों में आपको इस बात का भान हो जाता है कि सपने चल रहे हैं। इसका मतलब यह है कि आप चेतन और अवचेतन मन के बीच अचेतन मन में हैं। इसे अर्धचेतन मन भी कह सकते हैं।

कैसे साधें इस मन को : 03 FACTS;- 1-पहला तरीका : -

वैसे इस मन को साधने के बहुत से तरीके या विधियां हैं, लेकिन सीधा रास्ता है कि प्राणायाम से सीधे प्रत्याहार और प्रत्याहार से धारणा को साधें। जब आपका मन स्थिर चित्त हो, एक ही दिशा में गमन करे और इसका अभ्यास गहराने लगे तब आप अपनी इंद्रियों में ऐसी शक्ति का अनुभव करने लगेंगे जिसको आम इंसान अनुभव नहीं कर सकता। इसको साधने के लिए त्राटक भी कर सकते हैं। त्राटक भी कई प्रकार से किया जाता है। ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा आत्म सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है। दूसरा तरीका :-

शवासन में लेट जाएं और आंखें बंद कर ध्यान करें। लगातार इसका अभ्यास करें और योग निद्रा में जाने का प्रयास करें। योग निद्रा अर्थात शरीर और चेतन मन इस अवस्था में सो जाता है लेकिन अवचेतन मन जाग्रत रहता है। समझाने के लिए कहना होगा कि शरीर और मन सो जाता है लेकिन आप जागे रहते हैं। यह जाग्रत अवस्था जब गहराने लगती है तो आप ईथर माध्‍यम से जुड़ जाते हैं और फिर खुद को निर्देश देकर कुछ भी करने की क्षमता रखते हैं। 3-अन्य तरीके :

कुछ लोग अंगूठे को आंखों की सीध में रखकर, तो कुछ लोग स्पाइरल (सम्मोहन चक्र), कुछ लोग घड़ी के पेंडुलम को हिलाते हुए, कुछ लोग लाल बल्ब को एकटक देखते हुए और कुछ लोग मोमबत्ती को एकटक देखते हुए भी उक्त साधना को करते हैं, लेकिन हम नहीं जानते...यह कितना सही है।

सम्मोहित करने के प्रकार (TYPES OF HYPNOSIS);-

05 FACTS;-

सम्मोहित करने के प्रकार निम्नवत है-

1-साधारण सम्मोहन- इस तरह के सम्मोहन में व्यक्ति सिर्फ उपर से सम्मोहित होता है। वो आपकी सिर्फ वही बाते मानेगा जो उसको उचित लगेगी।

2-दूसरे स्तर का सम्मोहन- इसमें व्यक्ति आपकी जादातर बाते मानता है पर सभी नही। यदि आप उससे किसी का कुछ बुरा करने को कहेंगे तो वो नही करेगा।

3-तीसरे स्तर का सम्मोहन- इसके द्वारा किसी व्यक्ति को पूरी तरह से सम्मोहित कर सकते है। व्यक्ति के मन में दूसरी बाते भी डाल सकते है।

4-पोस्ट हिप्टोनिस्म- इसमें व्यक्ति किसी वस्तु की मदद से लोगो को सम्मोहित करता है। उदाहरण के तौर पर – रुमाल, पेन आदि।

5-स्व: सम्मोहन- इसमें व्यक्ति खुद को ही सम्मोहित कर लेता है। अपने मन, मस्तिष्क पर कंट्रोल कर लेता है।

साधारण सम्मोहन क्या है?

यह मात्र सतही सम्मोहन होता है, इसमें व्यक्ति केवल उपरी तौर पर ही सम्मोहित होता है और सम्मोहित व्यक्ति आपकी वही बातें मानेगा जो उसके अनुकूल होगी, जो बात उसके आचरण, धर्म व विश्वास के विपरीत होगी, ऐसी बात वह कभी नहीं मानेगा, यानी कहने का आशय यह हुआ कि वह स्वयं के हित को सर्वोपरि रखेगा, वह आपके सम्मोहन में तो जरूर होगा, लेकिन करेगा अपने हित को ध्यान में रखकर।

2 -क्या है दूसरे स्तर का सम्मोहन क्या है?

दूसरे स्तर पर सम्मोहित किया गया व्यक्ति आपकी आज्ञा के अनुसार कार्य करने लगता है, लेकिन इस स्तर पर भी वह सम्मोहनकर्ता की सभी बातें नहीं मानता। कल्पना कर लीजिए, अगर सम्मोहनकर्ता सम्मोहित व्यक्ति से कहता है कि वह किसी का हत्या कर दे या फिर उसके किसी प्रिय का अपमान कर दे, तो सम्मोहित व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा। वह ऐसा कोई अन्य कार्य भी नहीं करेगा तो उनके व्यवहार, संस्कार व आचरण के प्रतिकूल होगा। वह वहीं करेगा, जो उसके आचरण के अनुकूल होगा।

3- तीसरे स्तर का सम्मोहन क्या है?

इस स्तर पर सम्मोहित व्यक्ति पूरी तरह से सम्मोहनकर्ता के वश में होता है। सम्मोहनकर्ता जो भी उस व्यक्ति को आज्ञा देगा, वह व्यक्ति उसकी बात अवश्य मान लेता है। इस स्तर पर सम्मोहित व्यक्ति के मन में कोई बात भी डाली जा सकती है। जिसे वह व्यक्ति मानने लगता है। उदाहरण स्वरूप अब से आपको मिर्ची मीठी लगने लगेगी, अचार फीका लगेगा और इसके बाद अगर सम्मोहन तोड़ दिया जाए तो आपको बहुत ज्यादा हैरानी होगी कि सम्मोहित व्यक्ति को मिर्ची मीठी लगने लग जाएगी और आचार फीका लगने लगेगा।

4-पोस्ट हिप्नोटिज्म क्या है?

सम्मोहन का एक अन्य तरीका भी है, जिसे पोस्ट हिप्नोटिज्म कहा जाता है, इस सम्मोहन के तहत व्यक्ति सीधे तौर पर किसी दूसरे व्यक्ति को सम्मोहित नहीं करता है, बल्कि वह किसी वस्तु के माध्यम से दूसरे व्यक्ति को सम्मोहित करता है। उदाहरण स्वरूप सम्मोहनकर्ता एक रुमाल पर सम्मोहन करता है और उसे भावना देता है कि जो भी व्यक्ति इस रुमाल को देखेगा, वह उसके अनुकूल हो जाएगा।

यह बहुत हैरान कर देने वाला तथ्य यह है कि इस प्रकार का सम्मोहन भी पूरी तरह से काम करता है। यह सम्मोहन का काफी प्रभावी तरीका है।

5-स्व: सम्मोहन क्या है?

इस प्रक्रिया में सम्मोहन कर्ता स्वयं का सम्मोहन करता है। सम्मोहन की इस प्रक्रिया में व्यक्ति का उसके मस्तिष्क पर नियंत्रण बढ़ जाता है और इससे उसका मस्तिष्क सशक्त हो जाता है। यह विद्या आत्मोत्थान के लिए प्रभावी मानी गई है।

सम्मोहन से लाभ;-

12 FACTS;-

सम्मोहन से निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं- 1. किसी भी शारीरिक रोग को कुछ हद तक ठीक किया जा सकता है। 2. किसी भी मानसिक रोग को बहुत हद तक ठीक किया जा सकता है। 3. इसके माध्यम से किसी भी प्रकार का डर या फोबिया दूर किया जा सकता है। 4. इससे व्यक्ति का विकास कर सफलता अर्जित की जा सकती है। 5. सम्मोहन से दूर बैठे किसी भी व्यक्ति की स्थिति जानी जा सकती है।6. इसके माध्यम से शरीर से बाहर निकलकर हवा में घूमा जा सकता है। 7. इसके माध्यम से भूत, भविष्य और वर्तमान की घटनाओं को जाना जा सकता है। 8. इससे अपने पिछले जन्म को जाना जा सकता है। 9. इसके माध्यम से किसी की भी जान बचाई जा सकती है। 10. इसके माध्यम से लोगों का दु:ख-दर्द दूर किया जा सकता है। 11. इसके माध्यम से खुद की बुरी आदतों से छुटकारा पाया जा सकता है।

12. इसके माध्यम से भरपूर आत्मविश्वास और निडरता हासिल की जा सकती है।

कैसे काम करता है सम्मोहन?-

असलियत में सम्मोहन हमारी मानसिक शक्ति पर निर्भर करता है। सम्मोहन पूरी तरह से हमारे अचेतन मस्तिष्क पर आधारित होता है, हमारा अवचेतन मस्तिष्क जितना ही शक्तिशाली व एकाग्र होगा, उतनी हमारी सम्मोहन शक्ति प्रबल होती जाएगी। यूं तो हमारे अवचेतन मस्तिष्क को शक्तिशाली व एकाग्र करने की अनेक विधियां शास्त्रों में बताई गई है, लेकिन उन विधियों में भी दो विधियां प्रमुख है। पहली है त्राटक तो दूसरी है ध्यान।

त्राटक क्या है?–

किसी वस्तु अथवा बिंदु को एकटक बिना पलक झपकाए देखने को त्राटक कहते हैं। त्राटक ही सम्मोहन की पहली सीढ़ी हैं। इस सीढ़ी पर चल कर साधक मन और इंद्रियों को वश में करने का प्रयास करता है। विशेष तौर पर मन और नेत्रों को वश में करने का प्रयास करते है।

ध्यान क्या है?–

आंखें बंद कर किसी व्यक्ति, वस्तु या निराकार तत्व के बारे में बिना कोई अन्य विचार लाए सोचने को ध्यान कहते हैं। ध्यान के माध्यम से मानसिक शक्तियां प्रबल होती है, यह सर्वाधिक प्रभावी साधना है। ये दोनों विद्याएं ही अत्यंत शक्तिशाली है। आप त्राटक के माध्यम से एक सफल सम्मोहनकर्ता बन सकते हैं। यह विद्या अपेक्षित रूप से सहज भी होती है, क्योकि ध्यान के माध्यम से मन और मस्तिष्क को साधना हर व्यक्ति के बस की बात नहीं होती है।

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क्या है त्राटक सम्मोहन साधना ?-

02 FACTS;-

1-जिस प्रकार आम जीवन में इंसान तरक्की के लिए विभिन्न क्षेत्रों को अपनाता है उसी प्रकार आध्यात्मिक जीवन के उत्थान हेतु भी इंसान अपनी रुचि के अनुसार क्षेत्र चुनता है| जैसे – तंत्र-मंत्र, ज्योतिष, भक्ति, योग| त्राटक सिद्धि योग का एक हिस्सा है जो विशेष प्रकार की ध्यान विधि पर आधारित है|

2-यद्यपि आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए सभी क्षेत्रों में ध्यान पर बल दिया गया है| जैसे भक्ति में भी भक्ति ईश्वर के ध्यान में लीन रहता है| तंत्र मंत्र में मंत्र सिद्धि हेतु किसी निश्चित विषय पर ध्यान केन्द्रित करना होता है| ध्यान की अवस्था में मनुष्य की समस्त ऊर्जा एक दिशा में प्रवाहित होने लगती है और वही साधना को परिणाम तक पहुंचाती है|

त्राटक सम्मोहन साधना;-

04 FACTS;-

1-त्राटक साधना पूरी तरह ध्यान पर ही आध्रारित है| शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से किसी विषय पर एकटक दृष्टि रखना त्राटक कहलाता है| अष्टांगिक योग के आठ चरणों में सबसे अंतिम ध्यान है| ध्यान के कई प्रकार बताए गए हैं, इनमे त्राटक सर्वोत्कृष्ट माना जाता है क्योंकि आम जीवन जीने वाले भी इस विधि से अनेक विशेष गुणो से सम्पन्न हो सकते हैं| ध्यान नेत्र खोलकर भी की जा सकती है और नेत्र बंद करके भी|

2-बंद नेत्र द्वारा किए जाने वाले ध्यान में किसी आराध्य छवि की कल्पना होती है| परंतु नेत्र खोलकर किए जाने वाले ध्यान में किसी आराध्य को होना आवश्यक नहीं है| बल्कि अपने सामने किसी वस्तु को एकटक देखते हुए उसके द्वारा मूर्त से अमूर्त तक पहुँचते हैं|

3-सांख्य-योग दर्शन शास्त्र के अनुसार मनुष्य के शरीर में ही ब्रम्ह का वास है, जिन्हें प्राप्त करने के लिए योग क्रिया की जाती है| कुंडली जागृत होते ही इंसान ‘अहम ब्रम्हास्मि’ का बोध कर लेता है| ठीक उसी प्रकार त्राटक द्वारा साधक उस दिव्य दृष्टि को प्राप्त करता है, जो सूक्ष्म रूप से प्रत्येक मनुष्य में है परंतु सुप्त रूप में|

4-त्राटक साधना अत्यंत सरल है परंतु साधक में कुछ विशेष गुणो का होना आवश्यक है जैसे ....

4-1-साधना के प्रति निष्ठा हो

4-2-शारीरिक रूप से स्वस्थ हो

4-3-व्यभिचारी न हो

4-4-यम, नियम का पालन करने वाला हो

4-5-तामसिक भोजन का रसिक न हो

त्राटक साधना कैसे करें?-

05 FACTS;-

इस साधना के कई प्रकार है| कुछ प्रमुख प्रकारों का वर्णन नीचे दिया जा रहा है| आप अपनी रुचि के अनुसार इनमे से कोई एक चुन सकते हैं| एक बार मे एक ही विधि चुने| उक्त विधि कष्टप्रद हो तो कुछ दिन विश्राम करें| पुनः अन्य विधि से प्रारम्भ करें|

1-एकान्त कक्ष में एक ऐसा कैनवास रखें जिसमे काले पृष्ठभुमि पर लाल अथवा सफ़ेद बिन्दु हो| स्नान के बाद प्रातः काल स्वच्छ आसन पर बैठें तथा उस बिन्दु पर अपना ध्यान केन्द्रित करें| कुछ देर बार वह बिन्दु चमकीली नज़र आएगी| आपको अपने शरीर का भान समाप्त हो जाएगा| प्रारम्भ में एक मिनट का लक्ष्य रखें| फिर इसे धीरे धीरे बढ़ा दें|

2-दूसरी विधि में ध्यान के लिए दीपक का सहारा लिया जा सकता है| आकार में बड़े दीपक को जलाकर उसके समक्ष बैठ जाएँ तथा उस पर ध्यान केन्द्रित करें| ध्यान से पहले कक्ष की बत्ती बुझा दें| ध्यान रखें लौ में किसी प्रकार का कंपन न हो| प्रारम्भ में ध्यान भटकते ही छोड़ दें| अगले दिन पुनः प्रयास करें|

3-तीसरी विधि में आईने की सहाता से त्राटक साधना की जा सकती है| आईना कम से कम 6 इंच चौड़ा तथा 8 इंच लंबा हो तो अति उत्तम| एकांत कक्ष में बैठकर आईना अपने सामने रखें तथा खुद से नज़र मिलाएँ| धीरे-धीरे अपनी ही आँखों की पुतलियों पर ध्यान केन्द्रित करें| एक स्थिति ऐसी आएगी जिसमे आपको खुद का चेहरा दिखाई देना बंद हो जाएगा| अंत में वह पुतली भी नहीं दिखेगी|

4-चौथी विधि में सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उगते हुए सूर्य पर ध्यान केन्द्रित करें| स्मरण रखें ध्यान केन्द्रित करें का आशय उसे एकटक देखते रहने से हैं| इस त्राटक विधि से सूर्य की लालिमा साधक को कान्ति प्रदान करती है तथा स्वाभाविक ऊर्जा से भर देती है|

5-इसके अलावा सरलता से उपलब्ध किसी भी वस्तु को एकटक देखते हुए यह साधना की जा सकती है| जैसे दीवार पर टंगी कोई तस्वीर, गमला आदि|

सावधानी;-

05 FACTS;-

1-किसी भी विधि से यह साधना करें लेकिन ध्यान रखे साधना के लिए बैठते वक्त पेट न तो पूरी तरह खाली हो.. ना पूरी तरह भरा हो| खाली पेट गैस बनाता है, पेट दर्द की शिकायत हो सकती है| इसलिए थोड़ा बहुत खाकर बैठना नुकसान नहीं करता| परंतु पूरी तरह भरे पेट से बैठना और एकाग्र होना भी संभव नहीं होता|

2-यदि परिवार के मध्य रहते हो तो घर के सभी सदस्यों को पता होना चाहिए कि इस वक्त आपको आवाज नहीं देना है| फोन अलार्म आदि बंद रखें| यहाँ तक कि दरवाजे पर दस्तक होने पर कौन द्वार खोलेगा यह भी सुनिचित कर लें|

3-जल्दी जल्दी साधना विधि न बदले| जिस विधि का चुनाव करें उस पर कम से कम छह महीने परिश्रम करें|

त्राटक साधना से लाभ;-

05 FACTS;-

1-त्राटक साधना तंत्र- मंत्र से सर्वथा भिन्न मार्ग है| इसे किसी निश्चित दिन, निश्चित रंग के कपड़े ,प्रसाद, धूप- दीप, अगरबत्ती से कुछ भी लेना देना नहीं है| इसकी सफलता आत्म शक्ति पर निर्भर करती है.. जिसे अंग्रेजी में विल पावर कहा जाता है| यह एक सतत प्रक्रिया है| इसलिए दो-माह चार माह