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क्यों होता है साइटिका का दर्द और क्या है इलाज?


कमर और पैरों में अक्सर होने वाले तेज दर्द को साइटिका कहते हैं। साइटिक नामक तंत्रिका(नर्व) पर दबाव के कारण इस मर्ज का नाम साइटिका पड़ा है। साइटिक तंत्रिका हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में से गुजरने वाली प्रमुख तंत्रिका है। यह शरीर की सबसे बड़ी और चौड़ी तंत्रिका है। यह कमर के निचले हिस्से से निकलती है और कूल्हे से होकर घुटने के नीचे तक जाती है। यह तंत्रिका नीचे पैर में कई मांसपेशियों को नियंत्रित करती है और पैरों की त्वचा को संवेदना (सेंसेशन) देती है। साइटिका कोई बीमारी नहीं बल्कि साइटिक तंत्रिका से जुड़ी एक अन्य समस्या का लक्षण है।

क्या है साइटिका ?-

कमर और पैरों में अक्सर होने वाले तेज दर्द को साइटिका कहते हैं।

साइटिक तंत्रिका शरीर की सबसे बड़ी और चौड़ी तंत्रिका है।

यह कमर के निचले हिस्से से निकलती है।

कमर और पैरों में अक्सर होने वाले तेज दर्द को साइटिका कहते हैं। साइटिक नामक तंत्रिका(नर्व) पर दबाव के कारण इस मर्ज का नाम साइटिका पड़ा है। साइटिक तंत्रिका हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में से गुजरने वाली प्रमुख तंत्रिका है। यह शरीर की सबसे बड़ी और चौड़ी तंत्रिका है। यह कमर के निचले हिस्से से निकलती है और कूल्हे से होकर घुटने के नीचे तक जाती है। यह तंत्रिका नीचे पैर में कई मांसपेशियों को नियंत्रित करती है और पैरों की त्वचा को संवेदना (सेंसेशन) देती है। साइटिका कोई बीमारी नहीं बल्कि साइटिक तंत्रिका से जुड़ी एक अन्य समस्या का लक्षण है। अगर हम अपनी जीवनशैली में सही पोस्चर्स को शामिल कर लें तो, सियाटिका की समस्या से काफी हद तक बचाव कर सकते हैं।

क्या हैं इसके लक्षण;-

06 FACTS;-

1-कमर के निचले हिस्से से लेकर कूल्हे और घुटने के पीछे की तरफ पैर तक खिंचाव महसूस होना और झनझनाहट होना।

2-कूल्हे से लेकर पैर तक लगातार दर्द का बना रहना, जो बैठने और खड़े होने पर ज्यादा होता है और लेटने पर कम होता है।

3-पैरों, अंगूठे एवं उंगलियों में सुन्नपन और कमजोरी महसूस होना।

4-साइटिका अधिकतर उन लोगों में जल्दी होता है, जो एक जगह पर बैठकर लंबे समय तक काम करते हैं। जैसे कि आजकल कंप्यूटर आईटी जॉब्स और सिटिंग्स जॉब्स वालों को इसका सामना करना पड़ रहा है। शारीरिक व्यायाम की कमी भी इसको बढ़ावा देती है।

बचाव;-

इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि प्रकृति के नियम को कभी बदला नहीं जा सकता। अर्थात बढ़ती उम्र पर किसी भी व्यक्ति का बस नहीं है। अत: उम्र से जुड़ी ‘सायटिका’ जैसी समस्या को भी रोक पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। हां, लेकिन इसके लिए सुरक्षात्मक उपाय जरूर अपनाएं जा सकते हैं, जिससे कि समस्या विकराल रूप न धारण कर सके।

06 FACTS;-

1-लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहने से बचें। हर आधे-एक घंटे में कुछ देर के लिए खड़े रहने की कोशिश करें। इससे कमर की हड्डियों को आराम मिलता है।

2-झुककर भारी वस्तुओं को उठाने की आदत से भी बचने की कोशिश करें। इससे रीढ़ की हड्डियों के जोड़ों पर अधिक जोर पड़ता है।

3-भारी वजन उठाकर लंबी दूर तय न करें। अगर ऐसा करना जरूरी हो भी तो बीच-बीच में कहीं बैठकर थोड़ी देर के लिए आराम कर लें।

4-अगर आपका पेशा ऐसा हो कि आपको घंटों कुर्सी पर बैठा रहना पड़ता हो या कंप्यूटर पर काफी देर तक काम करना पड़ता हो तो कुर्सी में कमर के हिस्से पर एक छोटा सा तकिया लगा लें व सीधे बैठने की कोशिश करें।

5-चिकित्सक से सलाह लेकर कमर और रीढ़ की हड्डी से संबंधित कसरत नियमित रूप से करें।

6-चिकित्सक की सलाह अनुसार कमर का बेल्ट भी उपयोग कर सकते हैं। याद रखें कि लंबे समय तक बेल्ट पहनने से कमर का स्नायु तंत्र कमजोर होता है। इसलिए बेल्ट का उपयोग यदा-कदा ही करें।

उपचार;-

यूं तो साइटिका के दर्द के लिए एलोपैथी में कई तरह के उपचार मौजूद हैं जो दर्द से तुरंत निजात दिलाने में तो कारगर हैं लेकिन इसके दीर्घकालिक उपचार में नाकाम हैं। साथ ही साथ इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स बाद में नजर आते हैं। लेकिन आयुर्वेद में इस रोग को जड़ से खत्म करने के लिए उपचार मौजूद हैं।आयुर्वेदिक नुस्खों से साइटिका से निजात पाया जा सकता है...

1. हरसिंगार – हरसिंगार के फूल, पत्ते और छाल भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। साइटिका के लिए हरसिंगार के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। हरसिंगार के पत्तों को साफ कर एक लीटर पानी में उबाल लें। फिर ठंडा कर छान लें और एक दो रत्ती केसर मिला लें। अब इसे रोजाना सुबह शाम एक कप पिएं।

2. अजवाइन – अजवाइन के रस में एंटी-इन्फ्लेमेंट्री गुण पाए जाते हैं जो साइटिका में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में लाभकारी होते हैं। इसके जूस को पीने से साइटिका में काफी लाभ होता है।

3. मेथी – मेथी के बीज में काफी मात्रा में प्रोटीन होता है। ये आर्थराइटिस और साइटिका के दर्द से निजात दिलाने में काफी असरदार होते हैं। रोजाना सुबह बासी मुंह एक चम्मच मेथी दाना पानी के साथ निगलना साइटिका के लिए काफी फायदेमंद होता है।

एक्सरसाइज भी है जरूरी – साइटिका पर किए गए शोध बताते हैं कि इसका सबसे बेहतर उपचार व्यायाम होता है। नियमित व्यायाम करने से कमर की मांसपेशियों में मजबूती आती है साथ ही साथ दर्दनिवारक हार्मोंन्स का स्राव भी बढ़ता है। इसके अलावा अगर आपको दिनभर कुर्सी पर बैठना होता है तो हमेशा सीधे बैठने की कोशिश करें, या फिर कुर्सी में कमर के हिस्से पर तकिया लगा लें।