प्रस्तावना


ॐ गुरवे आदि शंकराचार्य नमः ॐ गं गणपतये नमः ॐ सकारात्मक / नकारात्मक ऊर्जा नमः ॐ कामाख्या देव्यै नमः ॥ऊं ह्रीं दक्षिणामूर्तये नमः ॥

देवत्व का अवतरण ''का उद्देश्य पूरा हो सके इसके चलते ही प्रस्तुत पुस्तक को संकलित किया गया है यह एक भक्त का रचना संकलन है ,विद्वान का नहीं। इसलिए भगवान शिव और उनकी शक्ति को समर्पित है।अपनी त्रुटियों के लिए आपसे क्षमायाचना करती हूँ...यह एक भक्त की विनती है।चेतना की ज्योति सदा अखण्ड बने '' का उद्देश्य पूरा हो सके इसके चलते ही प्रस्तुत पुस्तक को संकलित किया गया है। अपनी त्रुटियों के लिए आपसे क्षमायाचना करती हूँ,यह एक भक्त की विनती है...

... शिवोहम...