Recent Posts

Archive

Tags

No tags yet.

मंत्र सिद्धि व पूजा -पाठ में भय की अनुभूति होने पर सुरक्षा चक्र कैसे बनाये?शाबर मंत्र का सुरक्षा चक्


क्या है सुरक्षा चक्र ?-

03 FACTS;-

1-ऐसी मंत्र सिद्धियाँ , जिनमें किसी भी देव मंत्र को सिद्ध करते समय जब मंत्र सिद्ध होने लगते है तो प्रारम्भ में अधिकतर साधक अपने आस -पास उस दैवीय शक्ति को डर या भय के रूप में देखने लगते है | किन्तु वास्तव में ये शक्तियां साधक को किसी प्रकार का अहित पहुचाने नहीं बल्कि यह अहसास कराना चाहती है कि साधक अपनी साधना में सफलता की ओर बढ़ रहा है |

2-कुछ मंत्र साधनाएँ (सिद्धियाँ ) ऐसी भी होती है तो जो पूर्ण रूप से साधक को साधना करने से रोकती है | ये नकारात्मक प्रकति की हो सकती है | इस प्रकार की साधना में प्रथम दिन से ही भय की अनुभूति होने लगती है | ऐसे में साधक का बिना किसी सुरक्षा चक्र व गुरु की देख -रेख में साधना करना उसके जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है |

3-इन खतरनाक सिद्धियों में वो सभी सिद्धियाँ आती है तो तांत्रिक प्रकति की होती है और जिनको किसी एकांत जगह पर किया जाता हो | इसके अतिरिक्त : तांत्रिक भैरव सिद्धि , महाकाली सिद्धि , यक्षिणी साधना , अप्सरा साधना ऐसी बहुत सिद्धियाँ है जिनको बिना सुरक्षा चक्र और बिना गुरु के करना खतरनाक हो सकता है |

ध्यान में सुरक्षा कवच धारण विधि ;-

05 POINTS;-

1-पद्मासन /या सिद्धासन में बैठे।आंखें अधखुली, यानि आधी खुली आधी बंद।

2-ॐ/इष्टमंत्र/ गुरुमंत्र ..का जप करते हुए आप इस सुरक्षा कवच को निर्मित कर सकते है ताकि बह्म प्रभावों से ‘’स्‍वयं को बचा सकें।भाव कीजिए कि आपके शरीर के चारों और केवल छह इंच की दूरी पर आपके शरीर के आकार का एक प्रभा मंडल है। यह भावना करे की मेरे इष्ट की कृपा का शक्तिशाली प्रवाह मेरे अंदर प्रवेश कर रहा है और मेरे चारो ओर सुदर्शन चक्र जैसा एक इन्द्रधनुषी घेरा बनाकर घूम रहा है।

3-अब इन्द्रधनुषी प्रकाश घना होता जा रहा है।वह अपने दिव्य तेज़ से मेरी रक्षा कर रहा है।दुर्भावनारूपी अंधकार विलीन हो गया है और सात्विक प्रकाश ही प्रकाश छाया है। सूक्ष्म आसुरी शक्तियों से मेरी रक्षा करने के लिए वह चक्र सक्रिय है और मै पूर्णतः निश्चित हूँ ,आश्वस्त हूँ।'' जितनी देर श्वास भीतर रोक सके.. उक्त भावना को दोहराये और मानसिक चित्र बना ले...

4- आकाश के अंदर पृथ्वी है।पृथ्वी के अंदर अनेक देश, अनेक समुद्र, अनेक लोग है।उनमे से एक आपका शरीर आसन पर बैठा हुआ है।आप एक शरीर नहीं हो बल्कि अनेक शरीर ,देश,सागर ,पृथ्वी ,सूर्य ,चंद्र , ग्रह एवं पूरे ब्रह्मांड के दृष्टा हो,साक्षी हो।

5- अब धीरे - धीरे ॐ का दीर्घ उच्चारण करते हुए श्वास बाहर निकाले।मन ही मन भावना करे कि मेरे सारे दोष विकार बाहर निकल गए है।मन, बुद्धि शुद्ध हो गया है।

पूजा -पाठ के समय भय की अनुभूति : –

02 FACTS;-

1-शास्त्रों के अनुसार सभी पूजा -पाठ शुभ फल देने वाले होते है | देवों का आशीर्वाद पाने के साथ -साथ विशेष कार्य की सिद्धि के लिए भक्तों द्वारा समय -समय पर पूजा -पाठ का आयोजन किया जाता है | जब कभी व्यक्ति किसी (बाहरी पीड़ा व बाधा )नकारात्मक शक्ति की गिरफ्त में आ जाता है तो ऐसे में विशेष पूजा -पाठ का आयोजन कर अपने कष्टों का निवारण करता है |

2-इस प्रकार की विशेष पूजा -पाठ में पूजा के समय नकारात्मक शक्ति किसी भी समय अपना प्रभाव दिखा सकती है | इसलिए इस प्रकार की पूजा से पहले सुरक्षा चक्र बनाना अति अनिवार्य हो जाता है |

पूजा -पाठ के समय सुरक्षा चक्र बनाने की विधि :-

02 FACTS;-

1-मंत्र सिद्ध करते समय या पूजा -पाठ से समय सुरक्षा चक्र बनाने के लिए पूजा पर बैठने से पहले एक बताशे में छोटा सा छेद करके उसमें पूजा में प्रयोग होने वाला सिन्दूर डाल ले | अब इस बताशे को अपने आसन के नीचे रख दे | और फिर आसन पर बैठ जाये , आपके बैठने से बताशा टूट जायेगा, यह ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है | आसन पर बैठने के पश्चात् हाथ में थोडा जल लेकर अपने चारों तरफ घुमा कर डाल दे | अब आप पूजा शुरू कर सकते है | किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति अब आपको परेशान नहीं करेगी |

2-पूजा से उठने के पश्चात् इस टूटे हुए बताशे और सिन्दूर को एक गिलास पानी में डालकर घर से बाहर डाल दे | मंत्र सिद्धि और पूजा -पाठ में भय की अनुभूति होने पर इस सुरक्षा चक्र का प्रयोग साधक को अवश्य करना चाहिए | मंत्र सिद्धि और विशेष पूजा -पाठ को किसी अनुभवी गुरु की देख -रेख में करना अधिक उचित होता है |

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

टोना टोटका का क्या अर्थ है ?-

02 FACTS;-

1-दूसरों को अहित पहुचानें के उद्देश्य से की गयी तांत्रिक क्रियाएं जो की पूरी तरह नकरात्मक शक्तियों द्वारा संचालित होती है टोना या टोटका कहलाती है | इसे हम दूसरी भाषा में “किया कराया” भी कह देते है |

आज के समय में एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति की तरक्की देख कर खुश नही है | जिसके फलस्वरूप उनके अंदर हीन भावना पनपनी शुरू हो जाती है | और वे पहुँच जाते है किसी तांत्रिक या ओझा के पास उस व्यक्ति को अहित पहुचाने के लिए |

2-तांत्रिक पैसे के लालच में अपनी तांत्रिक क्रियाओं की सहायता से उस व्यक्ति को अहित पहुचाना शुरू कर देता है |व्यक्ति के निजी और परिचित

ही इस प्रकार के तांत्रिक कार्य करवाते है | क्योंकि आपके निजी और मिलनसार व्यक्ति ही आपकी तरक्की से खुश नही होते, यह एक प्रकार की मानवीय प्रकति है किन्तु ऐसे में तांत्रिक क्रियाओं का सहारा लेकर पीड़ित व्यक्ति के जीवन को खतरे में डालना एक दंडनीय अपराध है |

टोने -टोटके या किये -कराये के लक्षण : –

02 FACTS;-

1-टोने -टोटके पूरे परिवार पर भी हो सकते है, किसी परिवार एक सदस्य पर भी या फिर व्यक्ति के व्यवसाय पर भी | यदि टोटका पूरे परिवार पर हुआ है तो परिवार के सदस्यों में बिना किसी वजह के लड़ाई होना , बीमारी का घर से न जाना – (ऐसे में परिवार का एक सदस्य किसी बीमारी से ठीक होता है तो दूसरा बीमार हो जाता है, इस प्रकार बीमारी उस परिवार का पीछा नही छोडती), परिवार में खर्चे, आय से अधिक होना चाहे आय के स्त्रोत काफी हो, परिवार के किसी सदस्य की आकस्मिक मृत्यु हो जाना , व्यवसाय में अचानक से भारी नुक्सान हो जाना, इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने लगते है |

2-यदि टोने -टोटके का प्रयोग किसी एक व्यक्ति पर किया गया है तो ऐसे में इसका असर सबसे पहले उसके मानसिक संतुलन पर होता है | ऐसा व्यक्ति स्वाभाव से चिडचिडा हो जाता है | सांस में भारीपन महसूर करना, रक्तचाप का सामान्य से अधिक या कम हो जाना , गले में खिचाव महसूर करना, बिना किसी वजह के शरीर का वजन लगातार कम होना, अपने आप से बाते करना या किसी ऐसी बीमारी से पीड़ित हो जाना जो डॉक्टर्स की रिपोर्ट्स में नही आती हो, इस प्रकार के लक्षण यदि किसी व्यक्ति में दिखाई देने लगे तो हो सकता है कि वह व्यक्ति इस प्रकार की नकारात्मक क्रियाओं का शिकार हुआ हो |

टोने -टोटके या किये -कराये का निवारण : –

ऐसे दो शाबर मंत्र है जिनके प्रयोग से किसी भी व्यक्ति पर किये गये टोने -टोटके और किये -कराये के असर को खत्म किया जा सकता है...

मंत्र इस प्रकार है..

शाबर मंत्र 01: –

सोम शनिश्चर भौम अगारी |

कहां चललि देई अंधारी |

चारि जटा वज्र के वार |

दीनहि बाँधों सोम दुवार |

उत्तर बाँधों कोइला दानव |

दक्षिण बाँधों क्षेत्रपाल |

चारि विद्या बाँधि के |

देउ विशेष भवर -भवर |

दिधिल भवर गये |

चलु उत्तरापथ योगिनी |

चलु पाताल से वासुकी |

चलु रामचंद्र के पायक |

अन्न्जनी के चीर लागे |

ईश्वर महादेव गौरा पार्वती की दुहाई |

जो टोना रहे एदी पिंड |

मन्त्र पढि फूंकै, टोना कइल न रहे |

NOTE;-

शाबर मंत्र अपने आप में सिद्ध मंत्र होने के कारण बहुत ही प्रभावशाली होते है और तुरंत प्रभाव दिखाते है | इन्हें सिद्ध करने की आवश्यकता नही होती है | कोई भी व्यक्ति इन मन्त्रों का प्रयोग कर अपने जीवन को सुखमय बनाने के साथ – साथ दूसरों का भी भला कर सकता है |इस शाबर मंत्र का उच्चारण करते हुए यदि किये -कराये या टोने -टोटके से पीड़ित व्यक्ति को 7 बार फूँक लगायी जाये तो पीड़ित व्यक्ति से किये -कराये का असर ख़त्म हो जाता है |

शाबर मंत्र 02 :-

ॐ नमो आदेश गुरु का |

अपर कोष |

बिगड़ कोष |

प्रहलाद राख |

पाताल राख |

पांव दे बीज |

जंघा देवे कालिका |

मस्तक राखे महादेव |

जो कोई इस पिंड -प्राण को छेदे छेदे |

देव, देवता, भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी |

कंठमाला , तिजारी |

एक पहर |

दोपहर |

साँझ सवेरे को |

किये – कराये को स्वाहा पड़े |

इसकी रक्षा नरसिंह जी करें |

NOTE;-

1-यह एक बहुत ही प्रभावी मंत्र है | इस शाबर मंत्र का जाप करते हुए रोगी को सात बार झाड़ा दे | रोगी को झाडा मोरपंख या फिर चाक़ू द्वारा दिया जा सकता है | यदि झाडा मोरपंख से देते है तो इसके लिए पहले आप 10 या 15 मोरपंख को एक साथ बाँध ले | अब इस मोरपंख की झाड़ू से पीड़ित व्यक्ति को उपर से नीचे की तरफ झाडा करते जाये और मंत्र का जाप

करते रहे |चाकू द्वारा झाड़ा देने के लिए चाक़ू को पीड़ित व्यक्ति के सिर से लगाये और 7 बार मंत्र का जाप करें |

2-इसके अतिरिक्त : पीड़ित व्यक्ति के सिर से पाँव तक एक धागा नाप ले अब इस धागे में थोड़ी -थोड़ी दूरी पर सात गाँठ लगाये | धागे में गाँठ लगाये समय उपरोक्त शाबर मंत्र का उच्चारण करते जाये | अब इस धागे को गूगल की धूनी देकर पीड़ित व्यक्ति को गले में धारण करवा दे | इस प्रकार करने से किये – कराये के सभी दोष तुरंत समाप्त हो जाते है|

भूत -प्रेत और बुरी आत्माओं से बचने के उपाय ;-

04 FACTS;-

1-शास्त्रों के अनुसार मनुष्य अपने कर्मो के अनुसार मरने के पश्चात् (भूत -प्रेत) – जिन्न- पित्र -चुड़ैल – डाकिनी -शाकिनी आदि इन सब योनियों को प्राप्त होते है |इन सभी योनियों में मनुष्य तभी जाता है जब उसकी मृत्यु किसी दुर्घटना के कारण समय से पहले हुई हो|असामयिक या किसी दुर्घटना के कारण किसी जातक की मृत्यु होने पर वह इस लोक और परलोक के बीच भटकता रहता है | उसके कर्मो के अनुसार वह पितृ योनी या भूत योनी को प्राप्त होता है |पितृ योनी को प्राप्त होने के पश्चात् वह देव बनकर अपने परिवार की रक्षा करता है | किन्तु भूत योनी को प्राप्त होने वाले प्राणी अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किसी ऐसे शरीर की तलाश करते रहते है जिन पर वे अपना प्रभाव दिखा कर अपनी इच्छाएं पूरी कर सके |

2-पुराण अनुसार अपने कर्मों के आधार पर भूत योनी को प्राप्त होने वाली बुरी आत्माएं इसी लोक में रहती है | जो व्यक्ति आत्मबल से कमजोर होते है या इच्छा शक्ति कमजोर होती है तो भूत -प्रेत उस पर अपना प्रभाव दिखाना आरम्भ कर देते है | उन्हें इन बुरी आत्माओं का अभास भी समय -समय पर होता रहता है | यदि एक बार ये बुरी आत्माएं किसी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाये तो बहुत ही मुश्किल से पीछा छोडती है|

3-हिन्दू धर्म के साथ -साथ बाकी सभी धर्म भी अच्छी और बुरी आत्माओं की इस सच्चाई को स्वीकार करते है | धर्म ग्रंथों के अनुसार भूत -प्रेत इसी लोक में रहते हुए भी मनुष्यों से एक दूरी बनाये रखते है | किन्तु कभी -कभी न चाहते हुए भी मनुष्य अपनी कुछ गलतियों द्वारा इन बुरी आत्माओं (भूत -प्रेतों ) को निमंत्रण दे बैठता है |उदाहरण के लिए...

3-1-किसी भी दोस्त या सगे संबधी की आकस्मिक मृत्यु हो जाने के पश्चात् जिनता जल्दी हो सके उसे भूला देना चाहिए | उसकी स्मृति उसे आपके पास आने का निमंत्रण दे सकती है |

3-2-रात के समय विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार की रात को किसी भी सुनसान चौराहे को पार करते समय ध्यान दे उस जगह कहीं कोई टोना -टोटका तो नहीं किया हुआ है | ऐसे में आप उस टोटके के उपर से या उसे साइड से तब तक पार न करें जब तक कोई अन्य व्यक्ति उसे पार न कर ले | और उस टोटके को अनदेखा करते हुए बड़ी ही सावधानी से वहां से निकल जाएँ | इस प्रकार के टोने -टोटके के प्रभाव में आने से व्यक्ति पर बुरी आत्माओं का प्रभाव भी शुरू हो जाता है |

3-3-तेज गंध वाले परफ्यूम या इत्र को शमशान जैसी जगहों पर लगाकर जाने से भूत -प्रेत का डर बना रहता है | जहाँ तक संभव हो सके रात को सोते समय या बाहर जाते समय भी तेज गंध वाले परफ्यूम नहीं लगाने चाहिए |

3-4-गर्भवती महिलाएं बुरी आत्माओं के प्रभाव में बहुत ही शीघ्र आ जाती है | इसीलिए उन्हें गर्भ के समय बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए | रात को उन्हें कहीं बाहर नहीं जाना चाहिए |

3-5-हाथ में या सर पर महेंदी लगाकर घर से बाहर जाने पर भी बुरी आत्माएं उस व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले सकती है |

3-6-बीमार व्यक्ति या जिस व्यक्ति का आत्मबल बहुत ही कमजोर हो उन्हें भी बुरी आत्माओं का भय बना रहता है | किन्तु यदि बीमार होने पर भी जिस व्यक्ति का आत्मबल मजबूत है उन्हें बुरी आत्माएं कोई हानि नही पहुंचा सकती |

3-7-ऐसे स्थान जो अब खंडहर बन चुके है जहाँ कोई रहता न हो, ऐसे स्थान पर बुरी आत्माओं का निवास हो सकता है | रात के समय ऐसे स्थान पर जाने से बचे |

3-8-खाने की मीठी वस्तुएं भूत -प्रेतों को बहुत प्रिय होती है | इसलिए घर से निकलते समय अपने साथ मीठी वस्तुएं ले जाने से जहाँ तक संभव हो सके बचना चाहिए | रात के समय विशेष रूप से इसका ध्यान रखे |

4-जब कभी भी कोई पुरुष या महिला किसी बुरी शक्ति का शिकार हो जाती है तो उसके बोलने का , बात करने का या फिर उसके शारीरिक भाव बिलकुल ही बदल जाते है | आपने भी अपने जीवन में किसी न किसी को इस प्रकार की हरकते करते देखा होगा जो सामान्य भाव से बिलकुल ही भिन्न हो | कुछ लोग ऐसे लोगो को मानसिक बीमारी का नाम देकर इन बुरी व अद्रश्य शक्तियों को सिरे से नकार देते है | और जो लोग इन शक्तियों को स्वीकार करते है उनका परिचय काफी करीब से हुआ है |इन्ही बुरी शक्तियों को भूत - प्रेत की संज्ञा दी गयी है |

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

बुरी आत्माओं (भूत -प्रेत ) से बचने के उपाय;-

बुरी आत्माओं, भूत -प्रेतसे बचने के ये उपाय बिलकुल ही साधारण और सरल है किन्तु बहुत ही असरदार है ....

04 FACTS;-

1-रुद्राक्ष :-

आपने पढ़ा होगा कि रुद्राक्ष को गले में पहनने से भूत-प्रेत और बुरी शक्तियां दूर रहती है | यह सत्य है किन्तु रुद्राक्ष को मात्र एक वस्तु के रूप में गले में धारण करने आपको पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती है | इसके लिए आपको रुद्राक्ष की पूजा कर ;सावन मास में या शिवरात्रि के दिन धारण करना चाहिए और समय -समय पर इसे पंचामृत से स्नान करा कर पवित्र भी रखना चाहिए |

2-हनुमान उपासना :-

अपने भक्तों के सभी कष्टों और भय को हरने वाले भगवान श्री राम भक्त हनुमान जी की उपासना करने से बुरी शक्तियों का भय समाप्त हो जाता है | किसी भी सुनसान जगह पर जाते समय यदि भय का आभास होने लगे तो हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए | यदि आपको अहसास होने लगे कि कोई बुरी शक्ति आपके आस -पास है और आप पर अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश कर रही है तब आप हनुमान चालीसा का पाठ थोड़े ऊँचे स्वर में करने लग जाये | हनुमान जी नियमित उपासना करें |

3-रात के समय सुनसान स्थान या किसी ऐसे स्थान जहाँ पर तांत्रिक क्रियाएं होती हो वहाँ जाने से बचे | और रात को सोते समय भूत -प्रेत आदि विषय पर बातें न करें |

4-किसी के दाह संस्कार से आने के पश्चात् घर में अन्दर जाने से पहले ही अच्छी तरह से हाथ पैर और मुह धो लेने चाहिए और अन्दर जाते ही तुरंत स्नान करना चाहिए | अन्यथा मृत व्यक्ति की आत्मा आप पर अपना प्रभाव दिखा सकती है |

भूत -प्रेत भगाने का मंत्र;-

ये एक प्रभावशाली शाबर मंत्र है जिसका प्रयोग कर यदि रोगी व्यक्ति (जिस पर भूत -प्रेत का साया हो ) को झाडा दिया जाये तो भूत-प्रेत तुरन्त उसका शरीर को छोड़ देते है..

बाधा को दूर करने का मंत्र इस प्रकार है :-

ॐ नमो आदेश गुरु का

मंत्र साँचा कंठ काँचा

दुहाई हनुमान वीर को जामे लफ्जारी | पलंका मजारी

आन लक्ष्मणा वीर की आन माने जाके तीर की दुहाई

मेमना की बादशाह जावा काम में रहे आमदा |

दुहाई कालिकामाई की

धौला गिरी वारो चंडै सिंह की सवारी

जाके लांगुर है अगारी

प्याला पिए रक्त को चंडिका भवानी

वेदबानी में बखानी

भूत नाचे बेताल लज्जा रखे

अपने भक्त की काली महर काली

आरी कोलकाता वाली

हाथ कंचन की थारी

लिए हाथ भक्त बालिका दुष्टन प्रहारी

सदा संतन हितकारी

उतर मूल राज जल्दी नहीं भखै तोय

कालिकामाई की दुहाई

करें भक्त की सहाई

आत असने में माई तेरी ज्योति रही जाग के |

पकड़ के पछाड़ भातकर

मत अबार तेरे हाथ में कपाल

भक्षण करले जल्दी आइके

जाय नाहीं भूत पकड़ मारे जाँय

भूत उतर उतर उतर तो

राम की दुहाई गुरु गोरख का फंदा करेगा तोये अंधा

फुरो फुरो मंत्र स्वाहा |

NOTE;-

1-जब भी किसी व्यक्ति या महिला पर भूत -प्रेत का असर आना शुरू होता है तो इस मंत्र को पढ़ते हुए रोगी को सिर से पाँव की तरफ नीम की टहनी द्वारा 11 बार झाड़ा दिया जाना चाहिए | इस झाडे का प्रयोग केवल शनिवार को ही करें तो उत्तम होता है |

2-इस प्रकार से रोगी को झाडा देने से रोगी से भूत -प्रेत दूर भाग जाता है और रोगी स्वस्थ हो जाता है | किन्तु इस झाडे का असर एक निश्चत समय के लिए ही होता है | क्योंकि झाडा कोई भी हो उसकी समय अवधि पूरी होने पर उसका असर धीरे धीरे समाप्त होने लगता है |

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

बुरी नजर क्या है?-

02 FACTS;-

1-जब कभी कोई महिला या पुरुष किसी बच्चे की तरफ असामान्य भाव से देखती/देखता है या उसे देखकर अंदर ही अंदर किसी हीन भावना को विकसित कर लेती/लेता है तो समझ लीजिये उस बच्चे को बुरी नजर लग गयी है | और इसका पता आपको उस महिला के आपके घर से जाते ही लग जाता है | बच्चा अचानक से बीमार हो जाता है या पेट दर्द हो जाता है या फिर बच्चा बिना किसी वजह के जोर जोर से रोने लग जाता है | ये सब लक्षण नजर के दोष के होते है |

2-यह जरुरी नहीं की नजर बच्चों को ही लगती है नजर किसी को भी लग सकती है चाहे वह छोटा बच्चा हो या बड़ा हो या फिर घर की कोई वस्तु ही क्यों न हो जैसे : गाडी, घर,या फिर व्यवसाय | बुरी नजर का दोष वैसे तो बहुत ही साधारण से मात्र घरेलु उपायों से ही ठीक हो जाता है | किन्तु कभी कभी समश्या तब गंभीर हो जाती है जब परिवार वाले इस बुरी नजर के दोष से अनजान होते है या फिर इन्हें फालतू की बाते समझ कर अनदेखा कर देते है | वैसे सबसे अधिक नजर का दोष बच्चों और घर के पशुओ (गाय, भैंस ) पर अधिक होता है |बुरी नजर का दोष सामान्यत घरेलु उपायों से ठीक हो जाता है | इसलिए जब कभी भी आपको संदेह हो की आपके परिवार पर या परिवार के किसी सदस्य पर बुरी नजर लगी है | तो आप इन उपायों का प्रयोग कर ले ...

बुरी नजर उतारने के घरेलु टोटके : –

08 FACTS;-

1-नमक, राई, लहसुन , प्याज के छिलके व सूखी मिर्च को आप गोबर के कंडे(उपले ) की आंच करके इस आंच पर इन सभी को थोड़ी थोड़ी मात्र में डाल कर रोगी (जिस पर नजर का दोष हुआ है ) पर 7 बार घुमा दे | ऐसा करने से नजर का दोष तुरंत समाप्त हो जाता है |

2-बच्चों को नजर व भूत -प्रेत से बचाने के लिए उनके गले में काले रंग के धागे में रुद्राक्ष , चांदी का चंद्रमा या ताम्बे का सूर्य पहनाया जा सकता है |