Recent Posts

Archive

Tags

No tags yet.

मंत्र सिद्धि व पूजा -पाठ में भय की अनुभूति होने पर सुरक्षा चक्र कैसे बनाये?शाबर मंत्र का सुरक्षा चक्


क्या है सुरक्षा चक्र ?-

03 FACTS;-

1-ऐसी मंत्र सिद्धियाँ , जिनमें किसी भी देव मंत्र को सिद्ध करते समय जब मंत्र सिद्ध होने लगते है तो प्रारम्भ में अधिकतर साधक अपने आस -पास उस दैवीय शक्ति को डर या भय के रूप में देखने लगते है | किन्तु वास्तव में ये शक्तियां साधक को किसी प्रकार का अहित पहुचाने नहीं बल्कि यह अहसास कराना चाहती है कि साधक अपनी साधना में सफलता की ओर बढ़ रहा है |

2-कुछ मंत्र साधनाएँ (सिद्धियाँ ) ऐसी भी होती है तो जो पूर्ण रूप से साधक को साधना करने से रोकती है | ये नकारात्मक प्रकति की हो सकती है | इस प्रकार की साधना में प्रथम दिन से ही भय की अनुभूति होने लगती है | ऐसे में साधक का बिना किसी सुरक्षा चक्र व गुरु की देख -रेख में साधना करना उसके जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है |

3-इन खतरनाक सिद्धियों में वो सभी सिद्धियाँ आती है तो तांत्रिक प्रकति की होती है और जिनको किसी एकांत जगह पर किया जाता हो | इसके अतिरिक्त : तांत्रिक भैरव सिद्धि , महाकाली सिद्धि , यक्षिणी साधना , अप्सरा साधना ऐसी बहुत सिद्धियाँ है जिनको बिना सुरक्षा चक्र और बिना गुरु के करना खतरनाक हो सकता है |

ध्यान में सुरक्षा कवच धारण विधि ;-

05 POINTS;-

1-पद्मासन /या सिद्धासन में बैठे।आंखें अधखुली, यानि आधी खुली आधी बंद।

2-ॐ/इष्टमंत्र/ गुरुमंत्र ..का जप करते हुए आप इस सुरक्षा कवच को निर्मित कर सकते है ताकि बह्म प्रभावों से ‘’स्‍वयं को बचा सकें।भाव कीजिए कि आपके शरीर के चारों और केवल छह इंच की दूरी पर आपके शरीर के आकार का एक प्रभा मंडल है। यह भावना करे की मेरे इष्ट की कृपा का शक्तिशाली प्रवाह मेरे अंदर प्रवेश कर रहा है और मेरे चारो ओर सुदर्शन चक्र जैसा एक इन्द्रधनुषी घेरा बनाकर घूम रहा है।

3-अब इन्द्रधनुषी प्रकाश घना होता जा रहा है।वह अपने दिव्य तेज़ से मेरी रक्षा कर रहा है।दुर्भावनारूपी अंधकार विलीन हो गया है और सात्विक प्रकाश ही प्रकाश छाया है। सूक्ष्म आसुरी शक्तियों से मेरी रक्षा करने के लिए वह चक्र सक्रिय है और मै पूर्णतः निश्चित हूँ ,आश्वस्त हूँ।'' जितनी देर श्वास भीतर रोक सके.. उक्त भावना को दोहराये और मानसिक चित्र बना ले...

4- आकाश के अंदर पृथ्वी है।पृथ्वी के अंदर अनेक देश, अनेक समुद्र, अनेक लोग है।उनमे से एक आपका शरीर आसन पर बैठा हुआ है।आप एक शरीर नहीं हो बल्कि अनेक शरीर ,देश,सागर ,पृथ्वी ,सूर्य ,चंद्र , ग्रह एवं पूरे ब्रह्मांड के दृष्टा हो,साक्षी हो।

5- अब धीरे - धीरे ॐ का दीर्घ उच्चारण करते हुए श्वास बाहर निकाले।मन ही मन भावना करे कि मेरे सारे दोष विकार बाहर निकल गए है।मन, बुद्धि शुद्ध हो गया है।

पूजा -पाठ के समय भय की अनुभूति : –

02 FACTS;-

1-शास्त्रों के अनुसार सभी पूजा -पाठ शुभ फल देने वाले होते है | देवों का आशीर्वाद पाने के साथ -साथ विशेष कार्य की सिद्धि के लिए भक्तों द्वारा समय -समय पर पूजा -पाठ का आयोजन किया जाता है | जब कभी व्यक्ति किसी (बाहरी पीड़ा व बाधा )नकारात्मक शक्ति की गिरफ्त में आ जाता है तो ऐसे में विशेष पूजा -पाठ का आयोजन कर अपने कष्टों का निवारण करता है |

2-इस प्रकार की विशेष पूजा -पाठ में पूजा के समय नकारात्मक शक्ति किसी भी समय अपना प्रभाव दिखा सकती है | इसलिए इस प्रकार की पूजा से पहले सुरक्षा चक्र बनाना अति अनिवार्य हो जाता है |

पूजा -पाठ के समय सुरक्षा चक्र बनाने की विधि :-

02 FACTS;-