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दसमहाविद्या मन्त्र/कुंडलिनी और बीज मन्त्र


दसमहाविद्या;-

04 FACTS;-

1-दस महाविद्या के बारे में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। सारी शक्ति एवं सारे ब्रह्मांड की मूल में हैं ये दस महाविद्या। मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक जिन जालों में उलझा रहता है और जिस सुख तथा अंतत: मोक्ष की खोज करता है, उन सभी के मूल में मूल यही दस महाविद्या हैं। दस का सबसे ज्यादा महत्व है। संसार में दस दिशाएं स्पष्ट हैं ही, इसी तरह 1 से 10 तक के बिना अंकों की गणना संभव नहीं है।ये दशों महाविद्याएं आदि शक्ति माता पार्वती की ही रूप मानी जाती हैं।अनेक रूप और उपासना विधि में भेद होते हुए भी फलतः ये एक ही हैं। इनकी साधना से दुर्लभ सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।

2-दशमहाविद्या >>>भैरव/शिव के रूप >>> दशावतार>>> ग्रह

1-माँ काली>>> - महाकाल भैरव>>>- कृष्ण>>> शनि

2-माँ तारा >>>- अक्षोभ्य भैरव >>>- रामचंद्र>>>वृहस्पति

3-माँ त्रिपुरसुन्दरी>>> कामेश्वर भैरव >>>कल्की>>> बुध

4-माँ भुवनेश्वरी >>>महादेव भैरव >>>वराह - चंन्द्र

5-माँ त्रिपुरभैरवी>>> - दक्षिणामूर्ती भैरव>>>नरसिंहा>>> लग्न

6-माँ छिन्नमस्ता>>> विकराल भैरव >>>परसुराम >>> राहु

7-माँ धूमावती >>>- कालभैरव>>> केतु

8-माँ बगलामुखी>>> -मृत्युंजय भैरव>>> - कूर्मा>>> मंगल

9-माँ मातंगी>>> मातंग भैरव >>> बुद्धा >>> सूर्य

10-माँ कमला >>>-श्रीहरी भैरव>>> मत्स्या>>> शुक्र

THE TWELVE HOUSES OF A HOROSCOPE & REMEDY;-- 03 FACTS;- 1-Usually for reducing effects of 9 planets in vedic astrology, remedies like doing mantra japam directly for planet (like for saturn 19,000 times etc) is done.But its not giving desired results because these days 99% vedic astrologers dont know proper vedas.They are just taking the vimsottari dasa years number of each planet and multiplying by 1000....thats wrong ! 2-There are different numbers given for planets like for saturn its 23,000 etc.But remembering dasa number is easy for those people, so they employ such shortcuts and fail. In modern days karma is too strong and in almost all cases we fail to do any proper remedy. 3-Dasa mahavidyas are about outerspace adhi devatas, which are beyond 9 planets and their effects. Entering into this field needs guidance of proper guru and its a mystic area.So it cant be done by everyone. But with the help of Dasa mahavidya sadhna ;we can expect relief.

3-दस महाविद्या की साधना से करें ग्रहों को शांतः- ज्योतिष शास्त्र में दस महाविद्याओं का बहुत महत्व हैं।हर ग्रह का सम्बन्ध किसी एक महाविद्या से हैं। इसलिए जो ग्रह पीडा दे रहा हैं ग्रह सम्बन्धी महाविद्या की आराधना करने से उस ग्रह सम्वन्धी बाधाएँ दूर होते हैं। दस महाविद्या में से किसी एक की नित्य पूजा अर्चना करने से लंबे समय से चली आ रही बिमारियाँ , कलह , क्लेश , बेरोजगारी समस्या ,शनि की साढे साती , ढैया , प्रेत बाधा , बुरी नजर ,जीवन में सफलता न पा पाना आदि सभी तरह के संकट तत्काल ही समाप्त हो जाते हैं।इन माताओं की साधना से मनुष्य को अपार शक्ति और सिद्धियाँ मिलती हैं। 4-सभी महाविद्यायें किसी न किसी ग्रह की स्वामिनी हैं।जानते हैं कौन से ग्रह के लिए कौन सी महाविद्या का आराधना करना चाहिए , जिससे हम उस ग्रह को शुभ कर सकें।अब अगर आप किसी रोग से पीडित़ हैं तो ध्यान दें कि किस महाविद्या की आराधना करनी है।

🔯सूर्य ग्रह के लिए :- माँ मातंगी- उच्च रक्त चाप, हृदय, 🔯चन्द्रमा के लिए :- माँ भुवनेश्वरी- ब्रेन, फेफड़े 🔯मंगल के लिए :- माँ बगलामुखी- स्प्लीन, लिवर, पैंक्रियाज, पाचन तंत्र 🔯बुध के लिए :- माँ त्रिपुरा सुन्दरी-थायराईड ग्लैंड 🔯बृहस्पति के लिए :- तारा माँ- पूर्व जन्म के कर्म फल से मुक्ति 🔯शुक्र के लिए :- कमला माता- गर्भाशय, मूत्र जनन तंत्र 🔯शनि के लिए :-माँ काली- हड्डियां, तंत्रिका तंत्र 🔯राहु के लिए :-माँ छिन्नमस्तिका- पूर्व जन्म कर्मो के परिणाम, ईलाज रहित रोग 🔯केतु के लिए :- माँ धूमावती- सन्यास, समाधि, गृह त्याग

🔯लग्न के लिए :- माता त्रिपुरा भैरवी -कुण्डलिनी चक्रों की स्थिति

NOTE;-

अगर आपका लग्न कमजोर हैं ,या उस पर कोई दुष्प्रभाव हैं तो माता त्रिपुरा भैरवी जी

की आराधना करने पर आपका लग्न मजबूत होगा।अत: अपने ग्रह अनुसार दस महाविद्या का पूजा करने पर आपको हर तरह से शुभता प्राप्ति होगी ।

दसमहाविद्या मन्त्र;-

10 FACTS;-

1-माँ महाकाली मंत्र;-

''ऊं ए क्लीं ह्लीं श्रीं ह्सौ: ऐं ह्सौ: श्रीं ह्लीं क्लीं ऐं जूं क्लीं सं लं श्रीं र: अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ऋं लं लृं एं ऐं ओं औं अं अ: ऊं कं खं गं घं डं ऊं चं छं जं झं त्रं ऊं टं ठं डं ढं णं ऊं तं थं दं धं नं ऊं पं फं बं भं मं ऊं यं रं लं वं ऊं शं षं हं क्षं स्वाहा''।

विधि;-

यह महाकाली का उग्र मंत्र है। इसकी साधना विंध्याचल के अष्टभुजा पर्वत पर त्रिकोण में स्थित काली खोह में करने से शीघ्र सिद्धि होती है अथवा श्मशान में भी साधना की जा सकती है, लेकिन घर में साधना नहीं करनी चाहिए।जप संख्या 1100 है, जिन्हें 90 दिन तक अवश्य करना चाहिए।दिन में महाकाली की पंचोपचार पूजा करके यथासंभव फलाहार करते हुए निर्मलता, सावधानी, निभीर्कता पूर्वक जप करने से महाकाली सिद्धि प्रदान करती हैं।इसमें होमादि की आवश्यकता नहीं होती।यह मंत्र सार्वभौम है।

इससे सभी प्रकार के सुमंगलों तंत्रोक्त षड्कर्म की सिद्धि होती है।

2-माँ तारा मंत्र;-

''ऊं ह्लीं आधारशक्ति तारायै पृथ्वीयां नम: पूजयीतो असि नम:''

इस मंत्र का पुरश्चरण 32 लाख जप है।जपोपरांत होम द्रव्यों से होम करना

चाहिए।सिद्धि प्राप्ति के बाद साधक को तर्कशक्ति, शास्त्र ज्ञान, बुद्धि कौशल आदि की प्राप्ति होती है।

3-माँ छिन्नमस्ता मंत्र;-

''ऊं श्रीं ह्लीं ह्लीं वज्र वैरोचनीये ह्लीं ह्लीं फट् स्वाहा''

इस मंत्र का पुरश्चरण चार लाख जप है।जप का दशांश होम पलाश या बिल्व फलों से करना चाहिए।श्वेत कनेर पुष्पों से होम करने से रोग मुक्ति, मालती पुष्पों के होम से वाचा सिद्धि व चंपा के पुष्पों से होम करने पर सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

4-माँ त्रिपुर सुंदरी मंत्र;-

मंत्र;-

''ॐ श्रीं ह्लीं क्लीं एं सौ: ऊं ह्लीं श्रीं कएइलह्लीं हसकहलह्लीं संकलह्लीं सौ: एं क्लीं ह्लीं श्रीं''

विधि;-

इस मंत्र का पुरश्चरण एक लाख जप है। जप के पश्चात त्रिमधुर (घी, शहद, शक्कर) मिश्रित कनेर के पुष्पों से होम करना चाहिए।कमल पुष्पों के

होम से धन व संपदा प्राप्ति, दही के होम से उपद्रव नाश,अंगूर के होम से वांछित सिद्धि व तिल के होम से मनोभिलाषा पूर्ति व गुग्गुल के होम से दुखों का नाश होता है।कपूर के होमत्व से कवित्व शक्ति आती है

5-माँ भुवनेश्वरी मंत्र;-

'ॐ ह्लीं'

अमावस्या को लकड़ी के पटरे पर उक्त मंत्र लिखकर गर्भवती स्त्री को दिखाने से उसे सुखद प्रसव होता है। गले तक जल में खड़े होकर, जल में ही सूर्यमंडल को देखते हुए तीन हजार बार मंत्र का जप करने वाला मनोनुकूल कन्या का वरण करता है।अभिमंत्रित अन्न का सेवन करने से लक्ष्मी की वृद्धि होती है।

6-माँ त्रिपुर भैरवी मंत्र;-

04 POINTS;-

1-त्रिपुर भैरवी की उपासना से सभी बंधन दूर हो जाते हैं।त्रिपुरा भैरवी ऊर्ध्वान्वय की देवी हैं।माता की चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। इन्हें षोडशी भी कहा जाता है। षोडशी को श्रीविद्या भी माना जाता है। यह साधक को युक्ति और मुक्ति दोनों ही प्रदान करती है।

महा त्रिपुर भैरवी देवी अपने अन्य नामो से भी प्रसिद्ध हैं और सभी सिद्ध योगिनियाँ हैं :

1-त्रिपुर-भैरवी

2-कौलेश भैरवी

3-रुद्र भैरवी

4-चैतन्य भैरवी

5-नित्य भैरवी

6-भद्र भैरवी

7-श्मशान भैरवी

8-सकल सिद्धि भैरवी

9-संपत-प्रदा भैरवी

10-कामेश्वरी भैरवी इत्यादि ।

2-इनकी साधना से षोडश कला निपुण सन्तान की प्राप्ति होती है।जल, थल और नभ में उसका वर्चस्व कायम होता है।आजीविका और व्यापार में इतनी वृद्धि होती है कि व्यक्ति संसार भर में धन श्रेष्ठ यानि सर्वाधिक धनी बनकर सुख भोग करता है।मां त्रिपुर भैरवी

तमोगुण और रजोगुण की देवी हैं।इनकी आराधना विशेष विपत्तियों को शांत करने और सुख पाने के लिए की जाती है।

3-विधि;-

इस मंत्र का पुरश्चरण एक लाख जप है। जप के पश्चात त्रिमधुर (घी, शहद, शक्कर) मिश्रित कनेर के पुष्पों से होम करना चाहिए।

माँ त्रिपुर भैरवी देवी मूल मन्त्र - ‘ ॐ ह्नीं भैरवी क्लौं ह्नीं स्वाहा':

माँ त्रिपुर भैरवी देवी साधना मंत्र - ''ॐ ह्रीं सर्वैश्वर्याकारिणी देव्यै नमो नम:''

4-इनके जाप द्वारा सभी कष्ट एवं संकटों का नाश होता है तथा आजीविका और व्यापार में इतनी वृद्धि होती है कि व्यक्ति संसार भर में धन श्रेष्ठ यानि सर्वाधिक धनी बनकर सुख भोग करता है । जीवन में काम, सौभाग्य और शारीरिक सुख के साथ आरोग्य सिद्धि के लिए इस देवी की आराधना की जाती है। इसकी साधना से धन सम्पदा की प्राप्ति होती है, मनोवांछित वर या कन्या से विवाह होता है ।

7-माँ धूमावती मंत्र;-

इस मंत्र का पुरश्चरण एक लाख जप है। जप का दशांश तिल मिश्रित घृत से होम करना चाहिए।

मंत्र;-

''ऊं धूं धूं धूमावती स्वाहा''

8-माँ बगलामुखी मंत्र;-;-

इस मंत्र का पुरश्चरण एक लाख जप है। जपोपरांत चंपा के पुष्प से दशांश होम करना चाहिए। इस साधना में पीत वर्ण की महत्ता है।

''ऊं ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ऊं स्वाहा''

9-माँ मातंगी मंत्र;-

''ऊं ह्लीं एं श्रीं नमो भगवति उच्छिष्ट चांडालि श्रीमातंगेश्वरि सर्वजन वंशकरि स्वाहा''

इस मंत्र का पुरश्चरण दस हजार जप है।जप का दशांश शहद व महुआ के पुष्पों से होम करना चाहिए।

10-माँ कमला मंत्र;-;-

इस मंत्र का दस लाख जप करें।दशांश शहद, घी व शर्करा युक्त लाल कमलों से होम करें, तो सभी कामनाएं पूर्ण होंगी।समुद्र से गिरने वाली नदी के जल में आकंठ जप करने पर सभी प्रकार की संपदा मिलती है।शहद, घी व शर्करायुक्त बिल्व फलों से दशांश होम करने से साधक के घर में लक्ष्मी वास करती है।

महालक्ष्मी मंत्र;-

1-''ऊं नम: कमलवासिन्यै स्वाहा''

2-''ऊं श्रीं ह्लीं श्रीं कमले कमलालयै प्रसीद प्रसीद ऊं श्रीं ह्लीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:''

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दशमहाविद्या और उनके भैरव मंत्र;-

04 FACTS;-

1-दशमहाविद्या मंत्र जप से पहले ''ओम गं गणपतये नम:'' का जप और फिर... इनके भैरव का दशांस जप किया जाना चाहिए।

भैरव आराधना के विशेष मंत्र

1-1- 'ॐ कालभैरवाय नम:।'

1-2- 'ॐ भयहरणं च भैरव:।'

1-3- 'ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्‍।'

1-4- 'ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:।'

1-5-'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं।'

2-आदिशंकराचार्य ने सौन्दर्यलहरी में षोडशी श्रीविद्या की स्तुति करते हुए कहा है कि' ‘अमृत के समुद्र में एक मणिका द्वीप है, जिसमें कल्पवृक्षों की बारी है, नवरत्नों के नौ परकोटे हैं, उस वन में चिन्तामणि से निर्मित महल में ब्रह्ममय सिंहासन है, जिसमें पंचकृत्य के देवता ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र और ईश्वर आसन के पाये हैं और सदाशिव फलक हैं।सदाशिव के नाभि से निर्गत कमल पर विराजमान भगवती षोडशी त्रिपुरसुन्दरी का जो ध्यान करते हैं, वे धन्य हैं। भगवती के प्रभाव से उन्हें भोग और मोक्ष दोनों सहज ही उपलब्ध हो जाते हैं।’' दुर्वासा इनके परम अराधक थे।इनकी उपासना श्रीचक्र में होती है।

3-दस महाविद्या की साधना 2 कुलों के रूप में की जाती है। श्री कुल और काली कुल।कुछ ऋषियों ने इन्हें तीन रूपों में माना है। उग्र, सौम्य और सौम्य-उग्र। उग्र में काली, छिन्नमस्ता, धूमावती और बगलामुखी है। सौम्य में त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी और महालक्ष्मी (कमला) है।तारा तथा भैरवी को उग्र तथा सौम्य दोनों माना गया हैं देवी के वैसे तो अनंत रूप है।

दस महाविद्या विभिन्न दिशाओं की अधिष्ठातृ शक्तियां हैं...

4-दस महाविद्या>>> दसदिशा >>>नवग्रह 1-MA Kālī >>> WEST---SATURN>>> THE SEVENTH HOUSE 2-MA Tārā >>> NORTH EAST CORNER>>> CONTROLS JUPITER 3-MA Chinnamastā >>> SOUTH WEST CORNER>>> CONTROLS -RAHU 4-MA Tripurasundarī >>>NORTH + URDHWA / Akash (Skywards)>>> CONTROLS MERCURY 5-MA Bhuvaneśvarī >>>NORTH WEST CORNER>>> CONTROLS MOON 6-MA Bhairavī >>> PATAL (Downwards)>>> REPRESENTS LAGNA & CONTROLS EARTH ELEMENT 7-MA Dhūmāvatī >>> SOUTH WEST CORNER >>>CONTROLS KETU 8-MA Bagalāmukhī >>> SOUTH>>> CONTROLS MARS 9-MA Mātangī >>> EAST>>> CONTROLS SUN>>> 10-MA Kamala >>>SOUTH EAST CORNER>>> CONTROLS VENUS

दशमहाविद्या के अन्य मंत्र;-

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1-माँ भद्रकाली मंत्र;-

1-ॐ ह्रीं ॐ भद्रकाल्यै नमः॥

2-ॐ ह्रौं काली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा॥

3-ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं कालिके क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं॥

4-ॐ क्रीं क्रीं महाकालिके क्रीं क्रीं फट् स्वाहा॥

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माँ दक्षिणकाली मंत्र;- 2-1- (22 Syllables Mantra) ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥ 2-2- (1 Syllable Mantra) ॐ क्रीं 2-3- (3 Syllables Mantra) ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं॥ 2-4- (5 Syllables Mantra) ॐ क्रीं ह्रुं ह्रीं हूँ फट्॥ 2-5-(6 Syllables Mantra) ॐ क्रीं कालिके स्वाहा॥ 2-6-(7 Syllables Mantra) ॐ हूँ ह्रीं हूँ फट् स्वाहा॥ ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; 2- 7-ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं॥ 2- 8-ॐक्रीं ह्रुं ह्रीं दक्षिणेकालिके क्रीं ह्रुं ह्रीं स्वाहा॥ 2- 9-ॐ ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके ह्रुं ह्रुं क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥ 2-10-ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रुं ह्रुं ह्रीं ह्रीं दक्षिणकालिके स्वाहा॥ -------------------------------------------------------

2-माँ तारा मंत्र;- 2-1- (1 Syllable Mantra) ॐ त्रीं 2-2-(3 Syllables Mantra)

ॐ ह्रुं स्त्रीं ह्रुं ॥ 2-3- (4 Syllables Mantra) ॐ ह्रीं ह्रीं स्त्रीं ह्रुं॥ 2-4- (5 Syllables Mantra) ॐ ह्रीं त्रीं ह्रुं फट् 2-5-॥- (5 Syllables Mantra) ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्॥ 2-6- (6 Syllables Mantra) ऐं ॐ ह्रीं क्रीं ह्रुं फट्॥ 2-7- (7 Syllables Mantra) ॐ त्रीं ह्रीं, ह्रुं , ह्रीं, हुं फट्॥ 2-8- ऐं स्त्रीं ॐ ऐं ह्रीं फट् स्वाहा॥ ------------------------------------------------------------------

3-माँ छिन्नमस्ता मंत्र;- 3-1- (1 Syllable Mantra) ह्रुं॥ 3-2- (3 Syllables Mantra) ॐ ह्रुं ॐ॥ 3-3-ॐ ह्रुं स्वाहा॥ 3-4- (5 Syllables Mantra) ॐ ह्रुं स्वाहा ॐ॥ 3-5-(6 Syllables Mantra) ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्रुं फट्॥

3-6-

ॐश्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीयै ह्रुं ह्रुं फट् स्वाहा॥ 3-7- ॐ वैरोचन्ये विद्महे छिन्नमस्तायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्॥ -------------------------------------------------------------------

4-माँ त्रिपुर सुंदरी मंत्र;- 4-1- ॐ ऐं सौः क्लीं॥ 4-2- (5 Syllables Mantra) ॐ ऐं क्लीं सौः सौः क्लीं॥ 4-3- (6 Syllables Mantra) ॐ ऐं क्लीं सौः सौः क्लीं ऐं॥ 4-4- (18 Syllables Mantra) ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं त्रिपुरामदने सर्वशुभं साधय स्वाहा॥ 4-5- (20 Syllables Mantra) ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं परापरे त्रिपुरे सर्वमीप्सितं साधय स्वाहा॥ 4-6-ॐ क्लीं त्रिपुरादेवि विद्महे कामेश्वरि धीमहि। तन्नः क्लिन्ने प्रचोदयात्॥

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श्री विद्या -पंचदशी :-

1- बाल सुंदरी- 8 वर्षीया कन्या रूप में 2- षोडशी त्रिपुर सुंदरी- 16 वर्षीया सुंदरी

3-त्रिपुर सुंदरी-युवा स्वरूप 4- ललिता त्रिपुर सुंदरी- वृद्धा रूप

श्री विद्या -पंचदशी मंत्र:-

1-श्रीबाला-त्रिपुर-सुंदरी मंत्र:-ॐ ऐं क्लीं सौः॥ 2-षोडशी त्रिपुर सुंदरी -''क ए इ ल ह्रीं ।ह स क ह ल ह्रीं।स क ल ह्रीं ''॥

3- त्रिपुर सुंदरी -''क ए इ ल ह्रीं ।ह स क ह ल ह्रीं।स क ल ह्रीं श्रीं''॥

4-ललिता त्रिपुर सुंदरी-''ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।'' //////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////

5-माँ भुवनेश्वरी मंत्र;- 5-1- (1 Syllable Mantra) ॐ ह्रीं॥ 5-2- (3 Syllables Mantra) ॐ आं ह्रीं क्रों॥ 5-3- (8 Syllables Mantra) ॐ आं श्रीं ह्रीं क्लीं क्लीं ह्रीं श्रीं क्रों॥ 5-4- ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-5- ॐ श्रीं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-6- ॐ श्रीं क्लीं भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-7- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-8- ॐ श्रीं ऐं क्लीं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-9- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौंः भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-10- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौंः ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-11- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौंः क्लीं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-12- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं क्लीं सौंः ऐं सौंः भुवनेश्वर्यै नमः॥ 5-13- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौंः क्रीं हूं ह्रीं ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥ -----------------------------------------------------------------------

6-माँ त्रिपुरभैरवी मंत्र;-

6-1-ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा॥ 6-2- (3 Syllables Mantra) ॐ ह्स्त्रैं ह्स्क्ल्रीं ह्स्त्रौंः॥ 6-3- (8 Syllables Mantra) ॐ हसैं हसकरीं हसैं॥ 6-4- ॐश्मशान भैरवि नररुधिरास्थि - वसाभक्षिणि सिद्धिं मे देहि मम मनोरथान् पूरय हुं फट् स्वाहा॥ 6-5- ॐ त्रिपुरायै विद्महे महाभैरव्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

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7-माँ धूमावती मंत्र ;- 7-1- (7 Syllables Mantra) ॐ धूं धूमावती स्वाहा॥ 7-2-(8 Syllables Mantra) ॐ धूं धूं धूमावती स्वाहा॥ 7-3- (10 Syllables Mantra) ॐ धूं धूं धूं धूमावती स्वाहा॥ 7-4- (14 Syllables Mantra) ॐ धूं धूं धुर धुर धूमावती क्रों फट् स्वाहा॥ 7-5- (15 Syllables Mantra) ॐ धूं धूमावती देवदत्त धावति स्वाहा॥

7-6-ॐ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: 7-7-ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात्॥ -----------------------------------------------------------

8-माँ बगलामुखी मंत्र ;- - 8-1- (1 Syllable Mantra) ॐ ह्लीं॥ 8-2-(3 Syllables Mantra) ॐ ह्लीं ॐ॥ 8-3- (4 Syllables Mantra) ॐ आं ह्लीं क्रों॥ 8-4- (8 Syllables Mantra) ॐ आं ह्लीं क्रों हुं फट् स्वाहा॥ 8-5- (9 Syllables Mantra) ॐ ह्रीं क्लीं ह्रीं बगलामुखि ठः॥ 8-6- (11 Syllables Mantra) ॐ ह्लीं क्लीं ह्लीं बगलामुखि ठः ठः॥ 8-7- ॐ ह्लीं बगलामुखी विद्महे दुष्टस्तंभनी धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्॥ ----------------------------------------------------

9-माँ मातंगी मंत्र ;- 9-1- (8 Syllables Mantra) ॐ कामिनी रञ्जिनी स्वाहा॥ 9-2- (10 Syllables Mantra) ॐ ह्रीं क्लीं हुं मातंग्यै फट् स्वाहा॥ 9-3- ॐ शुक्रप्रियायै विद्महे श्रीकामेश्वर्यै धीमहि तन्नः श्यामा प्रचोदयात्॥ ---------------------------------------------

10-माँ कमला मंत्र ;- 10- (1 Syllable Mantra) ॐ श्रीं॥ 10-1- (2 Syllables Mantra) ॐ स्ह्क्ल्रीं हं॥ Shklreem Ham॥ 10-2- (3 Syllables Mantra) ॐ श्रीं क्लीं श्रीं॥ 10-3- (4 Syllables Mantra) ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं॥ 10-4- (5 Syllables Mantra) ॐ श्रीं क्लीं श्रीं नमः॥ 10-5- (9 Syllables Mantra) ॐ ह्रीं हुं हां ग्रें क्षों क्रों नमः॥ 10-6- (10 Syllables Mantra) ॐ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा॥

पूर्ण दशमहाविद्या मंत्र;-

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1-'ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौ: क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं श्रीं स्त्रीं ऐं क्रौं क्रीं इम हुं।''

2-'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ।''

मंत्र का विवेचन;-

1-‘क्लीं ’- ‘k’ represents Brahman, which is also represented by ‘h’. So substituting this we will find this to beMA BAGALAMUKHI , the eighth Maha Vidya as ‘hlim’. The ‘r’ deficient bija of Bagala is also accepted by tantras. 2-'ह्रीं ’- the Maya bija will represent MA BHUVANESHWARI , the

fifth Maha Vidya 3-‘ऐं क्लीं सौ: ’ will correspond to the sixth MA TRIPURA BHAIRAVI Maha Vidya since Her seed lies in the Bala mantra, which is seen here. 4-‘क ए ई ल ह्रींह स क ह ल ह्रीं ’ will correspond to the MA TRIPUR-SUNDARI , the fourth Maha Vidya and also the Shodashi by adding the third bija ‘shrim’. 5-‘स्त्रीं ’ is the special bija of MA TARA , the second Maha Vidya 6-‘ऐं ’ will represent the matangi the ninth Maha Vidya 7-‘क्रौं ' will symbolize ‘ Vikral Bhairava’ the consort of the third Maha Vidya , MA CHINAMASTA . 8-‘क्रीं ’ directly refers to the Adya dakshina MA KALIKA,the first Maha Vidya. 9- 'इम्'– this is the last Maha Vidya MA KAMALA , Shri Suktam unfolds her as ‘tam padminim im saranamaham prapadye’ 10-‘हुं ’ is the seventh Maha Vidya, MA DHUMAVATI . Her seed sound ‘u’ is there.

11- श्रीं ह्रीं क्लीं– The first three bijas( दूसरे मंत्र मे) are found in the beginning of Maha Ganapati mantra and hence a benevolent and obstacle removing power of this mantra is unfolded.