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क्या है दसमहाविद्या मन्त्र/कुंडलिनी और बीज मन्त्र?


दसमहाविद्या;-

04 FACTS;-

1-दस महाविद्या के बारे में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। सारी शक्ति एवं सारे ब्रह्मांड की मूल में हैं ये दस महाविद्या। मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक जिन जालों में उलझा रहता है और जिस सुख तथा अंतत: मोक्ष की खोज करता है, उन सभी के मूल में मूल यही दस महाविद्या हैं। दस का सबसे ज्यादा महत्व है। संसार में दस दिशाएं स्पष्ट हैं ही, इसी तरह 1 से 10 तक के बिना अंकों की गणना संभव नहीं है।ये दशों महाविद्याएं आदि शक्ति माता पार्वती की ही रूप मानी जाती हैं।अनेक रूप और उपासना विधि में भेद होते हुए भी फलतः ये एक ही हैं। इनकी साधना से दुर्लभ सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।

2-दशमहाविद्या >>>भैरव/शिव के रूप >>> दशावतार>>> ग्रह

1-माँ काली>>>-मृत्युंजय भैरव>>> - कूर्मा>>> मंगल

2-माँ तारा >>>- अक्षोभ्य भैरव >>>- रामचंद्र>>>वृहस्पति

3-माँ त्रिपुरसुन्दरी>>> कामेश्वर भैरव >>>कल्की>>> बुध

4-माँ भुवनेश्वरी >>>महादेव भैरव >>>वराह - चंन्द्र

5-माँ त्रिपुरभैरवी>>> - दक्षिणामूर्ती भैरव>>>नरसिंहा>>> लग्न

6-माँ छिन्नमस्ता>>> विकराल भैरव >>>परसुराम >>> राहु

7-माँ धूमावती >>>- कालभैरव>>> केतु