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क्या हैं तत्व दर्शन?क्या भूतशुद्धि... एक बुनियादी साधना है?PART-02

CONTD...

क्या है पंच तत्व?-

04 FACTS;-

1-मानव शरीर पांच तत्वों से बना होता है; मिट्टी, पानी, अग्नि, वायु और शून्य। इन्हें पंच महाभूत या पंच तत्व भी कहा जाता है। ये सभी तत्व शरीर के सात प्रमुख चक्रों में बंटे हैं। सात चक्र और पांच तत्वों का संतुलन ही हमारे तन व मन को स्वस्थ रखता है।

2-यदि चेहरे पर धूमिलता छाई हो, आकर्षण क्षमता की कमी हो गयी हो, मोटापा या दुबलापन आ गया हो,ऑफिस में परिस्थितियां अनुकूल नहीं रह रही हो,पति या प्रेमी,प्रेमिका या पत्नी से सम्बन्ध ठीक नहीं रह पा रहे हो तो इसका सीधा अर्थ होता है की अग्नि तत्व न्यून हो गया है.. क्यूंकि समस्त आकर्षण का आधार है अग्नि तत्व। यदि घर में धन नहीं रुक रहा हो,काम बिगड रहे हो,खून पतला हो गया हो ,गर्भ नहीं ठहर रहा हो तो ,ये सभी विकृतियाँ जल तत्व से सम्बंधित होती हैं। इस प्रकार जीवन की सभी स्थिति के लिए इन तत्वों की विकृति ही उत्तरदायी है।

3-भूत अर्थात् जिसकी सत्ता हो या जो विद्यमान रहता हो, उसे भूत कहते हैं।महान् भूतों को

महाभूत कहते हैं ।भूत किसी के कार्य नहीं होते- अर्थात् किसी से उत्पन्न नहीं होते, अपितु

महाभूतों के ये उपादान कारण होते हैं ।किन्तु पंचभूत स्वयं किसी से उत्पन्न नहीं होते,

इसलिए ये नित्य हैं ।महाभूत संसार के सभी चल-अचल वस्तुओं में व्याप्त है, अतः

इन्हें महाभूत कहते हैं ।इस पृथ्वी के समस्त जीवों का शरीर और निजीर्व सभी पदार्थ पंच महाभूतों द्वारा निमिर्त हैं ।