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पूर्णमासी..अमवस्या..अध्यात्म विज्ञान की सरल तकनीक /चीनी से बने शिवलिंग पर पूजा से घर में सुख समृद्


हमारे तिथि त्योहार महज किसी की याद में या शक्ति प्रदर्शन के लिये नही बनाये गये. उनके पीछे गहरा विज्ञान है. सभी तिथि-त्योहार अध्यात्म विज्ञान की वो सरल तकनीक हैं, जो जीवन में उत्साह और सुख स्थापित करते हैं. उदाहरण के लिये पूर्णमासी को ले लें. इस तिथि में धरती पर चंद्रमा की सर्वाधिक प्रभावशाली उर्जायें पहुंचती हैं. जो समुद्रों को उत्तेजित करके उनमें ज्वार भाटा पैदा कर देती हैं. इसी तरह ये उर्जायें जल तत्व से भरे स्वाधिष्ठान चक्र को भी उत्तेजित करती हैं. जल तत्व की उत्तेजित उर्जायें नियंत्रित करके उपयोग में लायी जायें तो कामनायें पूरी करने में सक्षम होती हैं. उर्जाओं द्वारा कामनायें कैसे पूरी की जाती हैं, इस विज्ञान पर हम फिर कभी चर्चा करेंगे. आज उनके उपयोग की बात कर लेते हैं. चंद्रमा द्वारा आंदोलित स्वाधिष्ठान चक्र की उर्जाओं को नियंत्रित करके उन्हें सकारात्मक गाइड लाइन देने के लिये ही पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सहित कई तरह के विशेष पूजा पाठ, व्रत आदि के विधान हैं. ये दो तरह से हमें लाभ पहुंचाते हैं. 1. पूजा पाठ की भावना के कारण उस दिन लोग अपनी काम भावनाओं पर नियंत्रण रखते हैं. जिससे स्वाधिष्ठान चक्र की उर्जायें विशुद्धि चक्र के जरिये सौभाग्य चक्र में पहुंचकर कामनायें पूरी करती हैं. 2. पूजा पाठ की क्रियाओं के दौरान मन में भक्ति और देव आशीर्वाद से कामना पूूर्ति के विचार लगातार चलते हैं, जिन्हें अवचेतन मन स्वीकार करके साकार कर देता है. इसी तरह अमावस्या की तिथि का उदाहरण देखें. उस दिन नकारात्मक उर्जाओं का शोधन प्राकृतिक रूप से होता है. खासतौर से मूलाधार चक्र, कटि चक्र और प्रारब्ध चक्र पर जमा स्मोकी उर्जायें ब्रह्मांड की तरफ खीच रही होती हैं. जिससे इन चक्रों की सफाई होती है. एेसे में यदि एकाग्रता बढ़ाई जाये तो चक्रों की बीमार उर्जाओं को सरलता से ब्रह्मांड अग्नि के हवाले किया जा सकता है. एकाग्रता बढ़ाने के लिये ही अमावस्या पर ध्यान-साधनाओं का विधान है. अमवस्या के दिन नकारात्मकता लोगों के सूक्ष्म शरीर से निकलकर बाहर जा रही होती है. जिसमें कुछ नकारात्मक शक्तियां भी होती हैं. उनसे बचने के लिये अपनी उर्जाओं को सशक्त बनाने हेतु पूजा-अनुष्ठान आदि का सहारा लिया जाता है. इसके साथ ही चक्रों में जमी उर्जाओं को निकालने के लिये विभिन्न वस्तुओं का उपयोग किया जाता है. वे वस्तुवें चक्रमें में फंसी समधर्मी नकारात्मक उर्ओं को अपने साथ लेकर निकल जाती हैं. इसी कारण अमवस्या के दिन भोजन, वस्त्र व अन्य वस्तुओं का दान करने का विधान बनाया गया. उससे उर्जाओं की तीब्र सफाई होती है. होली पर तन-मन की उर्जायें साफ होती हैं. दीपावली पर स्थान व वास्तु की उर्जायें साफ होकर धन-धान्य बढ़ाती हैं. इसी तरह अन्य सभी तिथि-त्योहार की मान्यतायें भी वैज्ञानिक हैं. वे सुखी जीवन के लिये आभामंडल व उर्जा चक्रों की सफाई व उर्जीकरण के निमित्त बनीं. जिनसे हम दैवीय शक्तियों का भरपूर लाभ उठाने में सक्षम होते हैं. जब इन मान्यताओं का वैज्ञानिक कारण नही बताया जाता. उन्हें भगवान को खुश करने का नाम दिया जाता है. या भगवान की लीला बता दिया जाता है तो पढ़े लिखे लोगों के मन में आशंका उत्पन्न होती है. वे इन्हें रूढ़ियों के रूप में देखने लगते हैं. खुद पर बोझ की तरह परम्परायें लादी जाती महसूश करते हैं.

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साधकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मै यहां सुख समृद्धि का सरल उपाय दे रहा हूं. इसे अपनाकर अब तक अनगिनत लोग लाभ उठा चुके हैं. कोई भी इसे कर सकता है. *उपाय...* शर्करा अर्थात् शक्कर अर्थात चीनी से बने शिवलिंग पर पूजा अर्चन से घर में सुख समृद्धि स्थापित होता है. शास्त्रों के मुताबिक इससे दरिद्रता के सभी लक्षण समाप्त हो जाते हैं. शक्कर से बने शिवलिंग में उर्जाओं के शोधन का विशेष गुण होता है. साथ ही ये शिवलिंग साधक के मूलाधार, अनाहत और आज्ञा चक्र को पोषित करते हैं. मैने सैकड़ों प्रयोगों में इसे अकाट्य पाया है. *विधान....* 1. शिवगुरू को नमन करके साक्षी बनायें. कहें- *देवों के देव महादेव मेरे गुरूदेव भगवान शिव आपको साक्षी बनाकर मै सुख समृद्धि हेतु शर्करा शिवलिंग पर अर्चना कर रहा हूं. आप इसे स्वीकार करें. साकार करें.* 2. शक्कर का शिवलिंग बनायें. इनसे लक्ष्मी आकर्षण का आग्रह करें. *कहें-दिव्य शिवलिंग आपको मेरा प्रणाम है. आप मेरी भावनाओं से जुड़कर मेरे लिये सिद्ध हो जायें. मुझे सुख समृद्धि सिद्धि प्रदान करें.* 3. सरसों के तेल का दीपक जला लें. सुगंध के लिये सूखी धूप जलायें. फिर शर्करा शिवलिंग का पंचोपचार पूजन करें. 4. पंचोपचार के बाद शिवलिंग को एकटक देखते हुए 30 मिनट *ऊं. शं शंकराय धनम् देहि देहि ऊं.* मंत्र का जप करें. 5. पूजा पूर्ण होने के बाद शिवलिंग को विसर्जित करें. विसर्जन के लिये हाथ जोड़कर घर में उर्जा स्थापन का आग्रह करें. कहें- *हे दिव्य शिवलिंग आप अपने भीतर अर्जित सुखकारी उर्जाओं को मेरे घर के कोने कोने में फैला दें. मेरे घर के हर व्यक्ति के जीवन में फैला दें. मेरे परिवार में सुख समृद्धि स्थापित करें.* 6. उक्त प्रार्थना के बाद शिवलिंग को कम से कम 10 मिनट वहीं रहने दें. उसके बाद जब भी सुविधा हो शिवलिंग की शक्कर को समेटकर किसी पेड़ की छाया में चीटियों के भोजन हेतु डाल दें. 7. यह प्रयोग लगातार 1 माह करें. महिलायें माहवारी के दिनों में इसे न करें. हर दिन किसी बुजुर्ग या भिखारी को भोजन अवश्य दें. आलोचना से बचें. शिवगुरू आपके घर परिवार में सुख समृद्धि अवश्य स्थापित करेंगे.

पंचोपचार पूजन...... 1. स्नान.... चम्मच से जल डालकर स्नान करायें. कहें- प्रभु स्नान ग्रहण करके मेरे लिये कल्याणकारी बने रहें. 2. वस्त्र..... वस्त्र के रूप में कलावा (मौली) का टुकड़ा अर्पित करें. कहें- प्रभु वस्त्र ग्रहण करके मेरे लिये कल्याणकारी बने रहें. 3. दीप...... दीपक पर चावल छिड़ककर कहें- प्रभु दीप दर्शन करके मेरे लिये कल्याणकारी बने रहें. धूप....... धूप दिखाकर कहें- प्रभु धूप सुगंध ग्रहण करके मेरे लिये कल्याणकारी बने रहें. 4. पुष्प-माला.... पुष्प माला अर्पित करके कहें- प्रभु पुष्पांजली स्वीकार करके मेरे लिये कल्याणकारी बने रहें. 5. नैवेध.... मिठाई फल अर्पित करके कहें- प्रभु नैवेध ग्रहण करें और मेरे लिये सदैव कल्याणकारी बने रहें. दक्षिणा.... दक्षिणा के रूप में सुपारी अर्पित करें. कहें- दक्षिणा स्वीकारें और मुझे परिवार सहित सुख समृद्धि प्रदान करें. इस तरह पंचोपचार पूजन करके मंत्र का जप शुरू करें.

चीनी का शिवलिंग... चीनी में थोड़ा सा शहद या घी मिलाकर उसे गीली मिट्टी की तरह नम कर लें. उसके बाद उसे शिवलिंग के आकार में स्थापित कर लें.