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व्यभिचार तंत्र से मुक्ति/इलेक्ट्रिक वायलेट ऊर्जा


स्वर्णेस्वरी यक्षिणी वर्ग की देवी हैं. वे सिद्ध होने पर साधक के जीवन में चौतरफा सोना भर देती हैं. इसीलिये कुछ विद्वान इन्हें धनदा देवी भी कहते हैं. गुरुजी के निकट शिष्य शिवांशु जी ने जब पहली बार स्वर्णेश्वरी सिद्धी की. तो उन्हें किन अड़चनों का सामना करना पड़ा. देवी सिद्धी के अपने अनुभवों को उन्होंने प्रस्तावित ई बुक में लिखा है.हम यहां उनके अनुभव के कुछ अंश उन्हीं के शब्दों में लिख रहे हैं. ताकि साधक लाभ उठा सकें. धनदा सिद्धी कर सकें.... मेरी स्वर्णेस्वरी साधना... सुबह हो गई. मुझे नींद के झोके आने लगे. दरअसल उड़ीसा से दिल्ली आने की ललक में मै दो दिन से सोया नही था. एेसी स्थिति में आमतौर पर मै रात में तो जाग लेता हूं. मगर सुबह सूरज की किरणें चेहरे पर पड़ते ही नींद हावी होने लगती हैं. गुरुवर समझ गये. उन्होंने एक जगह गाड़ी रोकने को कहा. मैने रोक दी. पीछे से उतरे और वे खुद ड्राइविंग सीट पर आ गये. मुझसे पीछे जाने का इशारा किया. गुरुदेव और सईद भाई पर नींद का प्रभाव बिल्कुल नही था. मै पीछे की सीट पर चला गया. मन में अफसोस हो रहा था कि मेरे रहते गाड़ी गुरुवर को ड्राइव करनी पड़ रही है. सईद भाई को पता चल गया कि मै नींद में हूं. उन्होंने मेरा सिर पकड़कर अपनी गोद में रख लिया. सहलाते हुए सिर पर हल्के हल्के थपकी देने लगे. मै कब सो गया पता ही नही चला. जब उठा तब हम देहरादून में थे. देहरादून में सईद भाई के एक रिश्तेदार रहते हैं. हम वहीं गये. उनके रिश्तेदार अलीगढ़ के एक नवाबी खानदान से ताल्लुक रखते थे. उनका बेटा प्रशासनिक अधिकारी था. उस परिवार में 4 बेटे 2 बेटियां थीं. हम कुछ समय के लिये वहां रुके. उसी बीच देहरादून आने का कारण पता चला. दरअसल सईद भाई के रिश्तेदार की एक बेटी ऊपरी बाधा की शिकार थी. उसी के उपचार के लिये हम साधना की तरफ बढ़ते हुए देहरादून को मुड़ गये. गुरुवर की ये पुरानी आदत हैं. चाहे जितने जरूरी अध्यात्मिक काम से निकले हों. अगर बीच में उन्हें पता चले कि कोई समस्याग्रस्त है, और उनके पास उसकी समस्या का हल है. तो वे उस तरफ मुड़ जाते हैं. कहते हैं *ये शिव काज है. इसे अधूरा नही छोड़ा जाना चाहिये*. हलांकि सईद भाई के साथ यहां आना, उनकी यात्रा का एक हिस्सा था. सईद भाई के रिश्तेदार प्रतिष्ठित होने के साथ ही बहुत भले लोग थे. वहां पता ही नही चल रहा था कि हम किसी दूसरे के घर में हैं. यहां मै उस लड़की का नाम नही लिखुंगा जो ऊपरी बाधा से ग्रसित थी. उस पर विचित्र बाधा थी. रात में उसका खुद पर नियंत्रण नही रहता था. अक्सर आधी रात के बाद वो घर से निकल जाती थी. और सुबह होते होते घर वापस आ जाती थी. कई बार वापस आने पर वो नशे में होती थी. पूछने पर कहती कि उसे जिन्न आकर ले गया था. उस जगह का नाम भी बताती थी. साथ ही कहती थी कि जिन्न ने वहां उसके साथ शारीरिक सम्बंध बनाये. अक्सर वह उस पर जगह पर अपना कोई अंडर गारमेंट छोड़कर आती थी. बाद में घर वालों को साथ ले जाकर वहां से अपने कपड़े बरामद कराती. घर के लोग डरे हुए थे. बदनामी के डर से बात को दबाये रहते थे. समस्या डेढ़ साल से थी. तमाम झाड़ फूंक का भी कोई फायदा नही हुआ था. जब लड़की सामने आयी तो मै दंग रह गया. दिखने में वह सीधी साधी और बड़े तहजीब वाली लड़की थी. उम्र 23 साल के भीतर रही होगी. उसके बारे में सईद भाई जो बता रहे थे. वे बातें देखकर उसकी पर्सनालिटी से मैच नही कर रही थीं. उसकी मुस्कान में भोलापन और जबरदस्त सम्मोहन था. उसका रंग दूध की तरह सफेद था. उसमें अप्सराओं सी खूबसूरती थी. मै उसे देखता ही रह गया. वो मुश्किल से 5 मिनट ही हमारे बीच बैठी. उसके बाद गुरुदेव ने उससे कहा बेटा आप जाओ. वह वहां से चली गई. कमरे में मेरे अलावा गुरुवर, सईद भाई, लड़की के दो भाई और मां बचे. लड़की के पिता का दो साल पहले स्वर्गवास हो चुका था. लड़की के जाने के बाद सईद भाई और उनके रिश्तेदार उम्मीद भरी निगाहों से गुरुदेव की तरफ देखने लगे. मै भी. उत्सुकता हो रही थी कि एेसी लड़की को बाधा मुक्त करने का क्या उपाय सामने आएगा. कुछ देर चुप रहने के बाद गुरुदेव ने सईद भाई से पूछा आपके शागिर्द तो बहुत सक्षम हैं. उन्होंने इसे क्यों नही ठीक किया. पता नही क्या बात है. सईद भाई के शब्दों में बेबसी दिखी. वे कह रहे थे मेरे शागिर्दों के सामने जिन्नातों की बिल्कुल नही चलने वाली. मगर मै इसे नही ठीक कर पाया. तो क्या आपके शागिर्दों ने बताया नही कि इस पर जिन्नात नही हैं. गुरुदेव ने पूछा तो सईद भाई ने हां में सिर हिलाया. मगर असमंजस में बोले तो बला क्या है. गुरुदेव ने कहा कि कुछ बातें एेसी हैं जो घर के लोगों के सामने नही कही जा सकतीं. सईद भाई गुरुदेव का मतलब समझ गये. उन्होंने घर के लोगों को वहां से जाने को कहा. लड़की के भाई तो चले गये. मगर उसकी मां वहीं बैठी रही. उसने कहा सईद भाई मेंरे भाई जैसे हैं. घर की हर बात मैं इनके सामने कह सकती हूं. और सुन भी सकती हूं. आप बेझिझक मुझे भी सब कुछ बताइये. इतनी तकलीफें झेल रही हूं कि अब किसी परदादारी की जरूरत नहीं. गुरुवर ने सईद भाई की तरफ देखा. उन्होंने हां में सिर हिला दिया. गुरुदेव ने बताया लड़की पर जिन्नातों का साया नही है. वह अपनी मर्जी से जाती है. जिन्नातों की बात घर के लोगों को डराने के लिये करती है. वह व्यभिचार तंत्र की शिकार है. जिसके प्रभाव से खुद पर कंट्रोल नही कर पाती. अौर बुरी संगत के दोस्तों से मिलने घर से निकल जाती है. उस समय अगर घर के लोग उसे बल पूर्वक रोकना चाहें तो भारी उत्पात करना चाहेगी. हां एेसा ही करती है. उसकी मां ने पुष्टि की. तभी मेरे शागिर्द जानकारी देते थे कि वो किसी लड़के से मिलने गई है. सईद भाई ने कहा. मगर मै सोचता था कि जिन्नात उन लड़कों का रूप लेकर उसे ले जाते होंगे. हाय अल्ला, किसने मेरी लड़की को तंत्र में डाल दिया. उसकी मां रो पड़ी. ऊपर वाला उसे बख्सेगा नहीं. व्यभिचार तंत्र क्या होता है और इससे कैसे निजात मिले. सईद भाई ने गुरुदेव से पूछा. पहली बात तो लड़की पर किसी ने तंत्र नही किया है. गुरुदेव ने बताया. वो खुद ही तंत्र की शिकार हो गई है. वो कैसे सईद भाई के साथ लड़की की मां ने भी पूछा. गुरुदेव ने व्यभिचार तंत्र की जो जानकारी दी वो बहुत चौंकाने वाली थी. उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति किसी के साथ नाजायज सम्बंध बनाता है, तब इसका खतरा रहता है. उदाहरण के लिये यदि कोई पुरुष शमशानी तंत्र से ग्रसित है. उन्हीं दिनों उसके किसी महिला से ताल्लुकात स्थापित होते हैं. तो व्यभिचार तंत्र का खतरा रहता है. क्योंकि शमशानी तंत्र की उर्जायें बहुत तीक्ष्ण होती हैं. वे डी.एन.ए. तक घुसपैठ करती हैं. वीर्य में डी.एन.ए. होता है. जो उन घुसपैठी उर्जाओं को लेकर महिला तक पहुंचता है. जिसके दुष्प्रभाव से महिला व्यभिचार की तरफ अग्रसर होती है. इसके लिये वो किसी भी स्तर तक जाने का दुस्साहस करती है. कई बार एेसी महिलायें जीवन भर भटकाव की शिकार रहती हैं. इनका उपचार अत्यधिक सावधानी का विषय होता है. क्योंकि झाड़ फूंक से ये प्राब्लम और बढ़ जाती है. मगर एेसे मामले लाखों में एक आध ही होते हैं. दुर्भाग्य की बात है कि आपकी बेटी उन लाखों में से एक निकली. लड़की की मां बहुत डरी हुई थी. उसने याचना भाव से गुरुवर की तरफ देखा. फिर सईद भाई से बोली भाई जान चाहे लाखों खर्च हो जायें. मेरी बेटी को बचा लो. फिर उसने कहा कई बार मुझे एेसा लगता था. मगर किसी से कह न पाई. वर्ना इसके भाई इसका कत्ल कर देते. गुरुवर ने कहा आप परेशान न हों. कोई खर्च नही होगा. बेटी ठीक हो जाएगी, ये मेरा वादा है. फिर गुरुदेव ने लड़की को बुलवाया. उससे 5 मिनट अलग बात की. लड़की ने स्वीकारा कि वो जिन्नातों वाली बात घर के लोगों को डराने के लिये कहती है. उसे अपने दोस्तों से मिलने जाना होता है. गुरुदेव ने उससे पूछा कि डेढ़ साल पहले उसका कौन दोस्त था. जिससे उसके करीबी रिश्ते थे. लड़की ने बताया कि उन दिनों वह इंजीनियरिंग कालेज में थी. वहां दोस्तों के साथ नशा करने लगी. वे लोग अक्सर शराब और कभी कभी सिगरेट में नशा लेते थे. उसे इसकी आदत पड़ गई. उन्हीं दिनों लड़कों के सम्पर्क में आई. तभी से रात होते ही मन के भीतर इस सबके लिये छटपटाहत पैदा होने लगती है. और खुद को रोक नही पाती. गुरुदेव ने सईद भाई को व्यभिचार तंत्र खत्म करने का उपाय बताया. हम तो अब तक लाखों रुपये खर्च चुके हैं. मगर कोई फायदा नही हुआ. लड़की की मां ने उपाय सुनकर कहा. क्या इससे सब ठीक हो जाएगा. दरअसल गुरुदेव ने जो उपाय बताया था उसमें 10-20 रुपये का ही खर्च था. इसलिये उन्हें यकीन नही हो रहा था. बुखार के मरीज को कैंसर की दवा देने से क्या फायदा. गुरुवर ने कहा जो समस्या है उसका ही समाधान हो तो बात बन जाती है. आप निश्चिंत रहें. आपकी बेटी ठीक होगी. इसके साथ ही गुरुवर ने लड़की की बुरी संगत छुड़ाने के लिये मुझे उसकी संजीवनी हीलिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी. जिसे मुझे 6 माह तक करना था. फिर हम सईद भाई को वहीं छोड़कर हिमालय की तरफ चल दिये. तय ये हुआ कि सईद भाई लड़की को व्यभिचार तंत्र से मुक्त कराने का उपाय 4 दिन कराएंगे. उसके बाद टैक्सी से देव प्रयाग पहुंचेंगे. हमारी उनसे अगली मुलाकात वहीं होने वाली थी. गाड़ी ड्राइव करते हुए मैने रिलैक्स मूड में देखकर गुरुवर से सईद भाई के शागिर्दों के बारे में पूछा. जिनकी मदद से वे जिन्नात हटाते हैं. लोगों के बारे में सब कुछ जान लेते हैं. यहां तक कि मेरी जेब में कितने रुपये हैं, ये भी जान लिया. जेब में पड़े डेविट कार्ड का नं. भी जान लिया. एक सवाल और था जब उनके अदृश्य शागिर्द सब कुछ जान लेते हैं तो उनके रिश्तेदार की लड़की के बारे में व्यभिचार तंत्र की बात क्यों नही जान पाये. इस बार गुरुदेव ने मेरे सवालों के जवाब दे दिये.

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इलेक्ट्रिक वायलेट ऊर्जा का उत्सर्जन;-

आज मै आपको इलेक्ट्रिक वायलेट ऊर्जा का उत्सर्जन सिखा रहा हूँ. जिससे आप ग्रह नक्षत्रों के दुष्प्रभाव, कला जादू की मार, भूत प्रेत के उत्पात को खत्म कर सकते हैं. गुरुदेव द्वारा सिखाई बातें बता रहा हूँ. ध्यान से सीखें. साथ में दिये चित्र को देखें. दोनों हाथों की उँगलियों से जो ऊर्जा निकल रही है, वो इलेक्ट्रिक वायलेट है. इसमें सभी तरह की नकारात्मकता को समाप्त करने की दैवीय शक्ति होती है. गुस्सा अधिक आ रहा हो तो मणिपुर चक्र को साफ कर दें. तत्काल लाभ दिखेगा. तनाव बेकाबू हो तो मणिपुर और अनाहत चक्र को इससे साफ कर दें. तुरन्त आराम मिलेगा. किसी पर ब्लैक मैजिक की मार हो तो आभामण्डल व् ऊर्जा चक्रों को इससे साफ कर दें. तुरत फायदा मिल जायेगा. किसी को ग्रह नक्षत्र की ऊर्जाएं का दुष्प्रभाव बर्बाद किये जा रहा हो, तो उसके आभामण्डल व् ऊर्जा नाफ़ियों को इससे साफ कर दें. चमत्कारिक नतीजे दिखेंगे. किसी अंग का इंफेक्शन बीमारी से उबरने न दे रहा हो, तो उन अंगों को इलेक्ट्रिक वायलेट ऊर्जा से साफ कर दें. उसी वक्त आराम मिल जायेगा. किसी बच्चे का पढ़ाई में मन न लग रहा हो, तो उसके आज्ञा चक्र, थर्ड आई चक्र और अनाहत चक्र को साफ कर दें. और उसी से उर्जित कर दें. वह मेघावी होता जायेगा. अगर पूजा पाठ, उपाय फलित न हो रहे हों तो. अपने मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि और सहस्रार चक्र को इलेक्ट्रिक वायलेट से साफ़ करें. पूरा फल मिलने लगेगा. साधनाएं फल न दे पा रही हों तो इन्हीं चक्रों को इसी ऊर्जा से साफ व् उर्जित करें. सिद्धियां पास आने लगेंगी. घर या प्रतिष्ठान का वास्तुदोष या बाधा परेशान कर रही हो तो, संजीवनी उपचार विधि का उपयोग करके इलेक्ट्रिक वायलेट ऊर्जा से उस जगह की सफाई करें. और इसी ऊर्जा की वहां स्थापना भी करें. तत्काल राहत मिलेगी.

उपयोग की विधि... इलेक्ट्रिक वायलेट ऊर्जा को कुछ विद्वान दैवीय ऊर्जा के समकक्ष मानते हैं. संजीवनी रुद्राक्ष के जरिये आप इसे आसानी से उत्सर्जित कर सकते हैं. और इसे आसानी से उपयोग में ला सकते हैं. ये सरल व् सुरक्षित तरीका है. संजीवनी रुद्राक्ष को हाथ में लेकर उससे इलेक्ट्रिक वायलेट ऊर्जा की मांग करें. फिर उसका मनचाहा उपयोग करें. चित्र को देखें. संजीवनी रुद्राक्ष द्वारा दी गयी

को चेक करने के लिये हाथों को चित्र वाली पोजीशन में लाएं. कुछ देर में उँगलियों के पोरों पर स्पार्किंग सी होती प्रतीत होगी. तब उपयोग शुरू कर दें.