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क्या शिवलिंग पर चढ़ी हर वस्तु नकारात्मक हो जाती है ?/क्या मंदिरों में चढ़ाया गया प्रसाद नही खाना चाह


शिवलिंग पर दूध चढ़ाने को लेकर श्रद्धालुओं के प्रति की जाने वाली अपमानजनक टिप्पड़ियों के जवाब में हमने वैज्ञानिक चर्चा की. जिससे प्रमाणित हुआ कि शिवलिंग पर दूध भगवान शिव को खुश करने के लिये नही बल्कि अपनी उर्जाओं और शरीर के पंचतत्व को उपचारित करने के लिये चढ़ाया जाता है. मनौती के प्रसाद के विज्ञान पर भी चर्चा हुई. कई लोगों के मन में इन बातों को लेकर कुछ सवाल हैं. आज हम उनके जवाब जान लेते हैं. 1. क्या शिवलिंग पर चढ़ी हर वस्तु नकारात्मक हो जाती है. ... नहीं, सिर्फ जलहरी में बह रहे तरल पदार्थ ही चढ़ाने वाले की नकारात्मक उर्जायें लेकर बह रहे होते हैं. उन्हें न छुवें. शिवलिंग के शिखर पर चढ़ी ठोस वस्तुओं को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें. 2. क्या शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की बजाय उसे गरीब बच्चों में बांटने से नकारात्मक उर्जाओं की सफाई नही हो जाएगी. ... बिल्कुल हो जाएगी. मगर दूषित उर्जाओं वाला व्यक्ति जिन बच्चों को दूध देगा उनकी उर्जायें बहुत तेजी से बिगड़ेंगी. वे बच्चे कई तरह की मानसिक और भावनात्मक बीमारियों के शिकार हो जाएंगे. उनमें अपराध और नफरत के भाव दूसरों की तुलना में कई गुना अधिक पनपेंगे. सही मायने में ये कृत्य पीढ़ियों को दूषित करने वाला साबित होगा. अध्यात्म के वैज्ञानिक जिन्हें पहले ऋषि कहा जाता था. ऋषि को आज रिसर्चर कहा जाता है. उन्होंने लम्बे शोध के बाद नकारात्मक उर्जाओं को हटाने के लिये शिवलिंग का सहारा लिया. जो लोग गरीब बच्चों की मदद करना चाहते हैं वे दुकानदार को पैसे दे दें. और उससे कहें कि बच्चों को दूध बांटें. लेकिन इससे उस व्यक्ति की उर्जाओं की सफाई नही होगी. दूसरों की मदद करने की खुशी अवश्य मिलेगी. 3. दूध वाले से दूध लेने में उसकी नकारात्मक उर्जायें लोगों पर आ जाती हैं क्या. इनसे कैसे बचें. .... हां, दूध में प्राकृतिक रूप से वायुतत्व व जलतत्व का शोधन करने की क्षमता के कारण एेसा होता है. वे बड़ी कठोरता के साथ गाय या भैंस के बच्चों के हिस्से का दूध छीनकर लोगों तक बहुंचाते हैं. ज्यादातर दूध वाले तो भैंस के मादा बच्चों को मार ही डालते हैं. ताकि उन्हें दूध न पिलाना पड़े. इन सब कारणों से दूध बेचने वालों में बहुत अधिक नकारात्मकता होती है. जिससे अक्सर वे लड़ाई झगड़े और आर्थिक संकट में फंसे रहते हैं. अगर उन्होंने दूध के पात्र में हाथ लगाकर उसे नापा है तो नकारात्मक उर्जायें दूध लेने वाले पर जरूर पहुंचेंगी. जिससे मन में उदासी और चिड़चिड़ान बढ़ता है. इससे बचने के लिये दूध लेने के तुरंत बाद उसे उबाल दें. उसे दूध लेते समय मन में संकल्प करें कि इस दूध की कीमत बहुत जल्दी ही चुका देंगे. 4. क्या शिवलिंग पर अधिक दूध नही च