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कुंडली आरोहण: अपने भीतर दैवीय शक्तियों का जागरण/दीपावली पूजन केे मंत्र


कुंडली शक्ति का चौकाने वाला रहस्य खुला हर उस व्यक्ति की कुंडली जाग्रत है जो मशहूर है. जिनकी बातों का प्रभाव लोगों पर या किसी समूह विशेष पर पड़ता है. दरअसल जब तक किसी व्यक्ति की कुंडली जाग्रत होकर नाभि चक्र का भेदन नही कर लेती तब तक वो व्यक्ति प्रसिद्ध नही हो सकता. तब तक उसकी बातों का सामूहिक रूप से लोगों पर प्रभाव नही पड़ता. तब तक लोगों के बीच उसे मान्यता नही मिलती. समृद्धि उसके जीवन में नही टिक सकती. इससे कोई फर्क नही पड़ता कि वो व्यक्ति काम क्या करता है, नैतिक है या अनैतिक है, सच्चा है या झूठा है, ईमानदार है या बेइमान है, संत है या असंत है... गुरुदेव ने रहस्य खोला तो हम सब चकित रह गये.

जिन 18 सन्यासियों की उर्जा कुंडली जागरण के लिये तैयार नही थी. उनमें एक सीतारमणम् जी भी थे. वे तुल्सीयायन महाराज के बहुत ही प्रिय शिष्यों में से थे. वे एक अच्छे योगी थे. कई कई घंटे ध्यान लगाने में समर्थ थे. उनकी अयोग्यता ने तुल्सीयायन महाराज को विचलित किया. पहली बार मैने संत मोह देखा. अपने शिष्य के प्रति मोह. मेरी नजर में तुल्सीयायन महाराज की छवि एक बड़े त्यागी की भी थी. मगर उस दिन मै एक त्यागी को भी मोह ग्रस्त देख रहा था. तब मै समझ पा रहा था कि गुरुदेव शिष्यों के प्रति खुद को निर्मोही सा बनाकर क्यों रखते हैं. उन्हें भगवान शिव का निर्मोही स्वरूप ही क्यों सबसे ज्यादा पसंद है. उच्च कोटि के संत होते हुए भी तुल्सीयायन महाराज सीतारमणम् जी की पात्रता न होने से खुद को विचलन से रोक नही पा रहे थे. उनके चेहरे पर पहली बार मै उलझन देख रहा था. योगी के चेहरे पर बेचैनी भा नही रही थी. फिर भी वे बेचैन थे. वे गुरुदेव के सिद्धांतों से परिचित थे. जानते थे कि उर्जा नायक जी उर्जा के स्तर पर कमजोर मिले लोगों को कुंडली आरोहण साधना में शामिल होने की इजाजत बिल्कुल नही देंगे. इसलिये उन्होंने गुरुदेव पर सीतारमणम् जी या किसी अन्य को साधना में शामिल करने का दबाव नही बनाया. मगर विचलित इतने थे कि साधना की पात्रता न रखने वाले लोगों की घोषणा खुद नही की. बल्कि गुरुदेव से आग्रह किया कि वे लोगों को इसकी जानकारी दें. मुझे याद है गुरुवर उस समय बड़े ही अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कराये थे. जैसे कह रहे हों मोह की अधिकता तनाव का कारण बनती है. फिर गुरुवर ने मेरी तरफ देखा. ये मेरे लिये इशारा था कि मै एकांत में जाकर तुल्सीयायन महाराज की संजीवनी हीलिंग करके उनके मन से विचलन की नकारात्मक उर्जायें निकाल दूं. मै धीरे से उठा और पंडाल के पीछे एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया. वहां बैठकर मैने तुल्सीयायन महाराज का संजीवनी उपचार किया. जब लौटा तब तक साधना में शामिल किये जाने वाले नामों की घोषणा हो चुकी थी. अब गुरुदेव एक सवाल का जवाब दे रहे थे. सवाल पूछा था पंचानन जी ने. उनका नाम भी उन 18 सन्यासियों में था जिन्हें साधना से अलग रखा गया था. उन्होंने अपने गुरु तुल्सीयायन महाराज से आज्ञा लेकर गुरुदेव से पूछा था कि हम कई वर्षों से योग और ध्यान कर रहे हैं. ब्रह्मचर्य सहित उन सभी नियमों का पालन कर रहे हैं, जो कुंडली आरोहण के लिये जरूरी हैं. गुरु महाराज (तुल्सीयायन महाराज को वे लोग गुरु महाराज कहते हैं) ने हम पर अथक परिश्रम किया है. फिर हमारी उर्जायें इस योग्य क्यों नही बन पायीं. आप कारण बतायें तो हम आगे सुधार और एहतियात बरतते चलेंगे. जवाब में गुरुदेव ने कुंडली शक्ति का रहस्य खोला. जिसकी जानकारी मुझे भी पहले नही थी. तुल्सीयायन महाराज की प्रतिक्रिया से एेसा प्रतीत हो रहा था जैसे वे भी इस सत्य से पहली बार रुबरू हो रहे थे. गुरुदेव ने बताया कि कुंडली जागरण की प्रक्रिया किसी साधना, योग, त्याग, नैतिकता या सदाचरण की मोहताज नहीं. ये एक प्राकृतिक अवस्था है. तमाम लोगों के जीवन में ये अवस्था खुद उत्पन्न हो जाती है. मगर जानकारी न होने के कारण वे कुंडली शक्ति का उपयोग नही कर पाते. सो उन्हें इसका व्यापक लाभ नही मिलता. जैसे अधिकांश नेताओं, प्रसाशनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, फिल्मी कलाकारों, खिलाड़ियों की कुंडली जाग्रत होती है. लेकिन ये बात उन्हें नही पता क्योंकि उन्होंने कुंडली जागरण के लिये कभी कोई प्रयास ही नही किया. न कोई साधना की, न इसके लिये योग किया. बल्कि उनमें से ज्यादातर ने तो इस बारे में सोचा भी नहीं. फिर भी जब मै टी वी चैनलों पर उनको देखकर उनकी कुंडली रीड करता हूं तो वो जाग्रत मिलती है. यहां तक कि कई कुख्यात अपराधियों, आतंकवादियों की भी कुंडली जाग्रत मिलती है. जबकि वे नैतिकता, सदाचरण से कोसों दूर हैं. हर उस व्यक्ति की कुंडली जाग्रत है जो मशहूर है. जिनकी बातों का प्रभाव लोगों पर या किसी समूह विशेष पर पड़ता है. दरअसल जब तक किसी व्यक्ति की कुंडली जाग्रत होकर नाभि चक्र का भेदन नही कर लेती तब तक वो व्यक्ति प्रसिद्ध नही हो सकता. तब तक उसकी बातों का सामूहिक रूप से लोगों पर प्रभाव नही पड़ता. तब तक लोगों के बीच उसे मान्यता नही मिलती. समृद्धि उसके जीवन में नही टिक सकती. इससे कोई फर्क नही पड़ता कि वो व्यक्ति काम क्या करता है, नैतिक है या अनैतिक है, सच्चा है या झूठा है, ईमानदार है या बेइमान है, संत है या असंत है... गुरुदेव ने रहस्य खोला तो हम सब चकित रह गये. मित्र इस बारे में इन लोगों को विस्तार से बतायें. तुल्सीयायन महाराज ने गुरुदेव से कहा. कुंडली के इस रहस्य को जानने के लिये हम सबकी जिज्ञासा चरम सीमा पर थी. गुरुदेव बताते जा रहे थे हम सुनते जा रहे थे. …. क्रमशः ।

कुंडली आरोहण का मतलब है, अपनी कुंडली को जगाकर उसे ऊपर के चक्रों की तरफ ले जाना. इससे कुंडली ऊर्जा चक्रों में मौजूद पंचतत्वों की शक्तिओं का उपयोग करके साधक के जीवन में सिद्धि, प्रसिद्धि, समृद्धि की स्थापना करती है.

ग्रुप में जो साथी नए जुड़े हैं, उनकी सुविधा के लिये हम दोबारा बताते चलें कि कुंडली जब मूलाधार चक्र का भेदन करती है तो पृथ्वी तत्व का उपयोग करती है. जिससे साधक के जीवन में समृद्धि स्थापित होने लगती है. इससे कोई फर्क नही पड़ता कि साधक के सामने धनागमन के प्रत्यक्ष साधन हैं या नहीं. कुंडली शक्ति इसके साधन खुद आकर्षित करके साधक के सामने ला खड़े करती है. जब कुंडली स्वाधिष्ठान चक्र का भेदन करती है तब जीवन में सफल योजनाओं की स्थापना करती है. क्योकिं ये क्षेत्र सृजन का होता है. इसके भेदन से ही कलाकारों को सफलताएं मिलने लगती हैं. उन्हें फिल्मों, टी.वी. सीरियल, रंगमंच, गायन व् कला के अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाने के ब्रेक मिलते हैं. जिसमें वे खुद को फ्रूफ भी करते हैं. कुंडली के इसी क्षेत्र के भेदन से लोग बिना भ्रमित हुए सफल योजनाएं लागू करने में सक्षम बनते हैं. इससे कोई फर्क नही पड़ता कि ऐसे व्यक्ति का बैकग्राउंड सफलता लायक है या नही. उसका कोई गॉड फादर है या नही. कुंडली खुद ही बड़े से बड़ा सहयोग करने वालों को आकर्षित करके सामने ला खड़ा करती है. जब कुंडली नाभि के बीच स्थित नाभि चक्र का भेदन करती है तो साधक के जीवन में प्रसिद्धि स्थापित होने लगती है. ऐसा व्यक्ति अपनी सफलताओं के कारण मशहूर होता है. नाभि क्षेत्र हमारी ऊर्जाओं का भंडारण क्षेत्र होता है. यहां इकट्ठी ऊर्जाएं अवचेतन शक्तियों का पोषण करती हैं. जिससे कामनाएं पूरी होती हैं. इसी कारण कामना पूर्ति के लिये व्रत रखे जाते हैं. व्रत रखने या संतुलित खाने से नाभि चक्र पुष्ट होता है, जो कामना पूर्ति में सहायक होता है. नाभि क्षेत्र में ऊर्जा भंडार का उपयोग करके कुंडली जैसे ही ऊपर की तरफ आरोहित होती है वैसे ही साधक की कामनाएं सोचने मात्र से पूरी होने लगती हैं. इससे कोई फर्क नही पड़ता कि साधक के पास कामना पूरी करने के साधन हैं या नही. कुंडली सभी जरूरी साधन खुद ही आकर्षित करके जीवन में ला देती है. ऐसे व्यक्ति का लोगों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है. लोग उसकी बातें अपनाने लगते हैं. दूसरे शब्दों में ऐसा व्यक्ति दूसरों के लिये प्रेरणा का स्रोत बन जाता है.

जब कुंडली मणिपुर चक्र का भेदन करती है तो साधक बहुत तेजस्वी हो जाता है. उससे राजा, मंत्री, नेता भी प्रभावित होते हैं. उसमें राजाओं की तरह जीतने की क्षमता पैदा हो जाती है.

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छोटी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

आज संध्या काल के समय सभी साधक शिवगुरु को साक्षी बनाकर अपने घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं. इससे मृत्यु के देवता की सकारात्मक ऊर्जाएं प्राप्त होती हैं और मृत्यु तुल्य कष्टों से भी राहत मिल जाती है, परिवार सुरक्षित रहता है। दीप प्रज्वलन के समय ॐ नमो भगवते यम देवाय मन्त्र का मानसिक जप करते रहें। दीप जलने के बाद दक्षिण दिशा में मुंह करके कहें- हे मृत्यु के देव मुझे और मेरे परिजनों को संरक्षण प्रदान करें, मैं आपसे शपथ पूर्वक वादा करता हूँ कि भविष्य में कभी किसी पर अन्याय नही करूंगा. छोटी दीपावली पर प्रज्वलित ये दीपक वास्तव में अभेद सुरक्षा उत्पन्न करता है

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दीपावली की सभी को दिल से शुभकामनायें. आज मां लक्ष्मी आपके घर आएंगी. उन्हें रोक लेना. अपनेपन से, विनम्रता से, सरलता से और समर्पण से. मां लक्ष्मी सदैव आपके जीवन में बस जायें. इसके लिये लक्ष्मी गुटिका आपके पास है. दीपावली पूजन का मुहूर्त शाम 6.55 बजे से रात 8.55 बजे तक है. इसी बीच मृत्युंजय योग द्वारा दी गई दीपावली पूजा की विधि से पूजा सम्पन्न करें. उसके बाद लक्ष्मी गुटिका भी पूजाा स्थल पर स्थापित कर लें. दीपावली पूजन केे बाद जब फुर्सत मिले तब दियेे गये मंत्र ऊं. श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मी दाारिद्रय नाशय नाशय श्रीं ह्रींं श्रीं ऊं. का कम से कम 20 मिनट जाप करें. जो लोग देवी प्रत्यक्षीकरण के लिये ऊं ह्रीं नमः मंत्र का जाप कर रहें हैं. वे गुटिका के समक्ष बैठकर कम से कम 4 घंटे जप करें. बाद में प्रतिदिन कम से कम दो घंटे इसी मंत्र का जप करते रहें. (प्रत्यक्षीकरण के लिये अगले निर्देशों का इंतजार करें.) आज की रात सिद्धी की रात है, जो साधक आज जागकर अधिक से अधिक साधना करते हैं, उनकी कामनायें जजरूर पूरी होती है. इसलिये इस मंत्र का अधिक से अधिक जप करें तो और अच्छा रहेगा. आपने वादा किया है मुस्कराते रहने का और आलोचना से बचने का. मेरा वादा है एेसा कर लिया तो मां लक्ष्मी जीवन भर आपको अपना बनाकर रखेंगी. किसी वजह से जिन्हें लक्ष्मी गुटिका अभी प्राप्त नही हो सकी है, वे निराश न हों. उनकी गुटिका की सिद्धी आज आश्रम में कर ली जाएगी. बााद में भेज जाएगी. जब प्रााप्त हो, तब लाकर मेें स्थापित कर लें. आपका जीवन सुखी हो यही हमारी कामना हैै.

दीपावली की रात लक्ष्मी साधना का विधान…. मंत्र- जय माँ लक्ष्मी

1. दीपावली पूजन के बाद रात्रि में स्नान करके साफ सुथरे स्थान पर उत्तर मुख होकर आराम से बैठ जायें. भगवान गणेश का स्मरण करें. सामने लाल वस्त्र बिछा लें. उस पर सिद्ध लक्ष्मी-कुबेर यंत्र स्थापित करें. सरसों के तेल का दीपक जला लें. उसमें थोड़ा कपूर चूरा करके डाल लें. धूप आदि की सुगंध कर लें. फूल चढ़ायें. भोग अर्पित करें. पश्चात इलाइची अर्पित करें.

2. अपने आभामंडल और उर्जा चक्रों को साधना सिद्धी के लिये तैयार करें. कहें- मेरे दिव्य आभामंडल, उर्जा चक्रों और कुंडलिनी आप सब ब्रह्मांड में संजीवनी शक्ति के स्रोत के साथ जुड़ जायें. वहां से दैवीय उर्जाओं को ग्रहण करके खुद को उपचारित करें. स्वस्थ होकर साधना सिद्धी हेतु सक्षम बनें. मुझे सिद्ध साधक की क्षमतायें प्रदान करें. आपका धन्यवाद. उसके बाद 5 बार गायत्री मंत्र का जप करते हुए 10 बार प्राणायाम करें.

3. दिव्य संजीवनी शक्ति से शक्तिपात का आग्रह करें. कहें- हे दिव्य संजीवनी शक्ति मुझ पर दैवीय उर्जाओं का शक्तिपात करके मेरे तन मन मस्तिष्क आभामंडल उर्जा चक्र और कुंडलिनी का जागरण करें. मुझे साधना सिद्धी हेतु सक्षम बनायें. आपका धन्यवाद. उसके बाद 5 मिनट ऊं. ह्रौं.जूं. सः मंत्र का जप करते हुए प्राणायाम करें.

4. शिवगुरू से साक्षी बनने का आग्रह करें. कहें- देवों के देव महादेव मेरे मन कोे सुखमय शिवाश्रम बनाकर इसमें सपरिवार विराजमान हों. आपको साक्षी बनाकर मै लक्ष्मी साधना सिद्ध कर रहा हूं. साधना सिद्धी हेतु मुझे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें. फिर 3 बार कहें- हे शिव आप मेरे गुरू हैं मै आपका शिष्य हूं मुझ शिष्य पर दया करें. आपको साक्षी बनाकर लक्ष्मी साधना कर रहा हूं. आप मुझे लक्ष्मी सिद्धि प्रदान करे. आपका धन्यवाद.

5. माँ लक्ष्मी से समृद्धि का आग्रह करें. कहें- हे माँ लक्ष्मी मेरे मन मंदिर में विराजमान होकर मेरे द्वारा किये जा रहे साधना मंत्र जप को स्वीकार करें साकार करें. आपका धन्यवाद.

6. यंत्र से सिद्धी का आग्रह करें. कहें- हे दिव्य लक्ष्मी-कुबेर यंत्र आपको मेरे लिये सिद्ध किया गया है. आप मेरी भावनाओं से जुड़कर मुझे माँ लक्ष्मी की समृद्धिदायी उर्जाओं के साथ जोड़ें रखें. लक्ष्मी सिद्धी प्राप्त करने में मेरी सहायता करें.

7. मंत्र से आग्रह करें. कहें- हे दिव्य लक्ष्मी मंत्र जय माँ लक्ष्मी आप मेरी भावनाओं से जुड़कर अपने बीज मंत्रों को मेरे रोम रोम में स्थापित करें और मेरे लिये सिद्ध हो जायें. ब्रह्मांड से माँ लक्ष्मी की समृद्धिदायी उर्जाओं से मुझे अच्छादित करें. और लक्ष्मी सिद्धी प्रदान करें. आपका धन्यवाद.

8. उसके पश्चात् मंत्र का 2 घंटे लगातार जप करें. यदि बीच में लघुशंका या दीर्घशंका के लिये उठना पड़े तो स्नान करके दोबारा बैठें. श्रद्धा विश्वास को बनायें रखें. जीवन में समृद्धि व्याप्त होने का प्रशन्नता पूर्वक इंतजार करें.

सबका जीवन सुखी हो यही हमारी कामना है.