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शिवसूत्र 12, 13- 17,18-


सूत्र;-12-विस्मय योग की भूमिका है।


13-इच्छाशक्ति की शक्ति चंचल उमा है।


14- दृष्‍टि ही सृष्‍टि है ।


15-मन को उसके मूल में स्थिर करके कोई बोधगम्य और शून्यता को समझ सकता है।


16-या शुद्ध सिद्धांत पर विचार करके कोई उस शक्ति से मुक्त है..जो बांधती है।


17-वितर्क अथार्त विवेक आत्मज्ञान का साधन है।


18-अस्तित्व का आनंद भोगना समाधि है।

''विस्मय योग की भूमिका है। स्वयं में स्थिति ही शक्ति है। वितर्क अर्थात विवेक आत्मज्ञान का साधन है। अस्तित्व का आनंद भोगना समाधि है''।

विस्मय योग की भूमिका है।

इसे थोड़ा समझें।

विस्मय का अर्थ शब्दकोश में दिया है—आश्‍चर्य; पर, आश्‍चर्य और विस्मय में एक बुनियादी भेद है। और वह भेद समझ में न आये तो अलग—अलग यात्राएं शुरू हो जाती है। आश्‍चर्य विज्ञान की भूमिका है, विस्मय योग की; आश्चर्य बहिर्मुखी है, विस्मय अंतर्मुखी; आश्‍चर्य दूसरे के संबंध में होता है, विस्मय स्वयं के संबंध में—स्व बात।