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WHAT IS THE IMPORTANCE OF KAUDI?


आईए जानें कैसे दो कौड़ी के रोडपति से करोड़पति बना जा सकता है- 1. महालक्ष्मी पर चढ़े व अभिमंत्रित कमलगट्टे, कौड़ियां, गोमती चक्र, मोती शंख व काली हल्दी गुलाबी कपड़े में बांधकर घर की उत्तरपश्चिम दिशा में छुपाकर रखें। 2. समृद्धि हेतु शुभ महूर्त में महालक्ष्मी का पूजन कर लाल कपड़े में बंधी 2 अलग अलग पीली कौड़ियां देवी पर चढाएं एक तिजोरी में रखें व दूसरी पर्स में रखें। 3. अटूट धन प्राप्ति हेतु दीपावली की रात्री महालक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन कर केसर से रंगी कौड़ियां समर्पित कर पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। 4. धन कुबेर की प्रसन्नता हेतु किसी श्रवण माह के सोमवार को 12 पीली कौड़ियां हरे कपड़े में बांधकर घर की उत्तर दिशा में छुपाकर रखें। 5. व्यवसायिक सफलता हेतु शरद पूर्णिमा की रात्री महालक्ष्मी का विधिवत पूजन कर 11 पीली कौडियों को चढ़ाकर ऑफिस में स्थापित करें। 6. गुप्त नवरात्र की अष्टमी के महूर्त में पूजा घर में 27 कौड़ियां स्थापित करें इससे हर दिन (नक्षत्र) में घर में लक्ष्मी का वास होता है। 7. नौकरी में सफलता हेतु शुक्रवार के दिन शुभ महूर्त में महालक्ष्मी पर चढ़ी कौड़ियां गुलाबी धागे में पिरोकर कलाई में पहने। 8. जादू टोने से बचने हेतु छिन्नमस्ता बीज से अभिमंत्रित 8 कौड़ियां काले धागे में पिरोकर धारण करें। 9. कार्य सिद्धि हेतु अक्षय तृतीया पर अभिमंत्रित 3 कौड़ियां मौली में बांधकर बाजू में धारण करें। घर में #कौड़ियां रखना बेहद #शुभ होता है किसी #शुभकाल में 11 धनदायक कौड़ियों को #हल्दी से रंगकर पीले #वस्त्र में बांधकर #धन रखने के स्थान पर रखने से #आर्थिक स्थिति में स्थिरता बनी रहती है। मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहें, इसके लिए #धनतेरस के दिन #चांदी की डिब्बी में 5 धनकारक कौड़ियां, कचनार के पत्ते व #शहद के रखने से मां लक्ष्मी व #कुबेर जी कृपा बनी रहती है। यदि आपके #व्यापार पर किसी ने #तान्त्रिक क्रिया करवा रखी है, तो #होली की रात्रि में जिस स्थान पर #होलिका दहन हो उस स्थान पर एक गडडा कर उसमें 11 अभिमंत्रित धनदायक कौड़ियां दबा दें। दूसरे दिन सुबह कौड़ियां निकालकर #व्यवसाय स्थल की मिट्टी के साथ नीले वस्त्र में बांधकर बहते हुये जल में प्रवाहित कर दें। यह क्रिया करने से व्यवसाय का बन्धन हट जायेगा एंव प्रगति होने लगेगी। यदि कोई #व्यक्ति काफी समय से रोगग्रस्त है और #स्वस्थ्य नहीं हो रहा है। तो वह प्रथम सोमवार को सफेद वस्त्र में 3 अभिमंत्रित गोमती चक्र, 11 नागकेसर के जोड़े व 7 धनदायक कौड़ियां बांधकर कपड़ें पर #हरसिंगार का #इत्र लगाकर व्यक्ति के उपर से 9 बार उतार कर किसी #शिव #मन्दिर में अर्पित कर दें। लाभ अवश्य मिलेगा। यदि आप कोई #साक्षात्कार देने जा रहें है, तो 5 अभिमंत्रित कोडि़यों पर हल्दी का #तिलकलगाकर उपने उपर से 7 बार उतार कर किसी हरिजन को 21 रूपये के साथ दे दें। आपको #सफलता अवश्य प्राप्त होगी। अभिमंत्रित कौड़ी में छेद कर #बच्चे के गलें में काले धागे के साथ धारण करवाने से बच्चा सदैव बुरी नजर व उपरी हवा से बचा रहता है।

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एक समुद्री जीव के शरीर का ठोस आवरण कौड़ी कहलाता है। एक समय में इसका व्यापक प्रयोग मुद्रा के चलन के रूप में होता था। समय के साथ-साथ मुद्रा का रूप-रंग बदलता चला गया। तीन-चार दशक पूर्व तक इसका चलन चौसर, चौपड़ आदि खेलों में पासे के रूप में खूब होता था। बच्चों को कौड़ी से खेलते हुए प्रायः देखा जाता था। जीवों के संरक्षण नियमों के कारण धीरे-धीरे कौड़ी आज प्रायः दुर्लभ हो गयी । तंत्र में हो रहे व्यापक प्रयोग के कारण भी अच्छी श्रेणी की कौड़ी की न्यूनता होने लगी। तथापि् सौभाग्य से उच्च श्रेणी की कौड़ियाँ सुलभ हो जाएं तो आप भी सरल उपायों द्वारा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

शास्त्रों के अनुसार कौड़ी के विषय में यह मान्यता है कि लक्ष्मी और कौड़ी दोनों सगी बहने है। कौड़ी धारणकर्ता की माँ के रूप में रक्षा करती है। बुरी नजर व संकटो से बचाने की इसमे अदभुत क्षमता होती है।वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन निर्माण करते समय छत पर पहले कौड़ी डाली जाती है। फिर दरवाजे की चौखट के साथ भी सबसे पहले कौड़ियाँ ही बाँधी जाती है।

रंग : कौड़ी सफेद, पीली, लाल, काली और नीली होती है।

स्वाद : यह बेस्वाद होती है।

स्वरूप : कौड़ी घुमावदार व कठोर होती है जो पानी में रहने वाले एक प्रकार के जीव के ऊपर बवच (खोल) के रूप रहता है। कौड़ी, घोंघा व सीप समान जाति की होती है।

प्रकृति : पीली कौड़ी गर्म होती है और सफेद व लाल कौड़ी शीतल होती है।

हानिकारक : कौड़ी का अधिक मात्रा में उपयोग करना फेफड़ों के लिए हानिकारक हो सकता है।

दोषों को दूर करने वाला : शहद का प्रयोग करने से कौड़ी में मौजूद दोष दूर होते हैं।

तुलना : कौड़ी की तुलना सीप से कर सकते हैं।

मात्रा : यह 2 ग्राम की मात्रा में प्रयोग किया जाता है।

गुण : कौड़ी आंखों के रोग को दूर करती है, कान के बहने को रोकती है, भूख को बढ़ाती है और रक्त, पित्त व कफ को खत्म करती है। मूत्रनली में जख्म होने पर कौड़ी का प्रयोग लाभकारी होता है। इसका प्रकार अनेक प्रकार के तांत्रिक कामों में किया जाता है। पीले रंग की गांठों वाली कौड़ी रस कर्म के लिए बहुत अच्छा होता है। डेढ़ तोले की कौड़ी उत्तम होता है और पौन तोले की कौड़ी सामान्य गुणों का होता है।

विभिन्न रोगों में उपयोग :

1. दांत निकलना: बच्चों को दांत निकलते समय दर्द हो तो कौड़ी को जलाकर उसकी राख को बारीक पीसकर शहद मिलाकर बच्चों के मसूढ़ों पर मलें। इससे दांत आसानी से निकल आते हैं।

2. पेट में दर्द: कौड़ी की राख और कालीमिर्च को पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण नींबू के अन्दर भरकर धीमी आग पर गर्म करके चूसें। इससे पेट का दर्द ठीक होता है।

3. हाथ पैरों में पसीना आना: पीली कौड़ी और कंडी को अलग-अलग जलाकर बारीक चूर्ण बना लें और फिर इसे मिलाकर हाथ-पैरों पर लगाएं। इससे पसीना अधिक आना कम होता है।

कौड़ी का स्वरुप शिव की जटाओं के आकार जैसा है इसी कारण से इसे कपर्दिन भी कहते है जो संस्कृत के शब्द कर्दप का रूप है, जो शिव के श्रंगार का एक अंग भी है। इसके विषय में कई प्रकार की लोकोक्ति और मुहावरें प्रचलन में आज भी है जैसे- कौड़ी-कौड़ी को मोहताज हो जाना, कौड़ी के भाव बिकना, दो कौड़ी का होना, दूर की कौड़ी आदि। कौड़ी हमारे लिए कई प्रकार से उपयोगी है।

# कौड़ी के फायदे :

# रोग को दूर करने में : हसनी कौड़ी जो सफ़ेद छोटी तथा वजन में हल्की होती है इसे हंसपदी में तांबे की मैल के साथ पीसकर ताबीज में भरकर गले में धारण करने से कई प्रकार के रोग दूर होते है।

# स्तंभन : कौड़ी का उपयोग स्तंभन के लिए भी किया जाता है इसके लिए रविवार के दिन किसी घोड़े की पूंछ का बाल को तोड़कर एक कौड़ी में छेद करके उसे उस बाल में डालकर अपने हाँथ की दाएँ भुजा में बाँध लेने से स्त्री संतुष्ट होती है।

# नीव में कौड़ी का प्रयोग : अपना मकान बनवाते समय उसकी नीव में 11 कौड़ियाँ रखने से आपको अपने मकान बनवाने में किसी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

# वाहन में कौड़ी का उपयोग : जब भी आप कोई वाहन खरीदते है उसमे लाल या काले धागे में कौड़ी को पिरोकर बांध देने से बुरी नजर और दुर्घटना की सम्भावना नहीं रहती।

# संतान प्राप्ति के लिए : निःसंतान दम्पति यदि अपने पूजा घर में 11 कौड़ियाँ रखकर गोपाल यंत्र को विधिवत स्थापित कर पुत्र्येष्ठी यज्ञ करवाकर एक पीले धागे में कौड़ी को अपने गले में धारण करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है।

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1. लाल कपड़े में एक बड़ी पीली कौड़ी बांधकर अपने कैश बॉक्स में रख लें, आशातीत धन लाभ होने लगेगा। 2. सात पीली कौड़ी, सात हल्दी की अखण्डित गांठ एक पीले रंग के कपड़े में बांधकर घर में स्थापित कर लें। वहाँ सदैव प्रेम, स्नेह और सौहाद्रपूर्ण वातावरण बना रहेगा। 3.काले रंग के कपड़े में एक पीली कौड़ी बांधकर अपने शत्रु के घर में दबा दें। वह मित्रवत् व्यवहार करने लगेगा। 4. बच्चा यदि सोते समय डरता है अथवा दुःस्वन के कारण बेचैन रहता है तो उसके सिरहाने एक पीली बड़ी कौड़ी रख दें। दुष्प्रभाव से उसकी रक्षा होगी । 5. पूर्णिमा की रात्रि में नौ लाल रंग के गुलाब के फूल, नौ पीली बड़ी कौड़ी के साथ एक लाल रंग के कपड़े में बांधकर अपनी दुकान, कार्यस्थल पर रख लें। आप देखेंगे कि आय और व्यय में सन्तुलन होने लगा है। 6. एक काली कौड़ी तथा हरसिंगार वृक्ष की जड़ पीले कपड़े में बन्द करके ताबीज़ की तरह गले में धारण कर लें। ऋण से उऋण होने का यह एक अच्छा उपक्रम सिद्ध होगा। 7. भवन के बनते समय उसके उत्तर तथा पूर्वी कोने की नीव में ग्यारह पीली बड़ी कौड़ी दबा दें। वास्तु दोष जनित दुष्प्रभावों से भवन की रक्षा बनी रहेगी । 8. लाल कपड़े में 5 पीली बड़ी कौड़ी दीपावली की रात्रि में अपनी पारम्परिक पूजा-मुहूर्त में लक्ष्मी जी के चरणों में रख दें। एक माला मंत्र, 'ऊँ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं'' की जप करें। प्रातः यह पोटली बनाकर अपनी तिजोरी में रख लें। धन लाभ का यह एक अच्छा उपक्रम सिद्ध होगा। 9. भवन निर्माण के समय ग्यारह कौड़ी तथा पांच हल्दी की गांठ एक काले कपड़े में बांधकर भवन के मुख्य द्वार पर लटका दें। नज़र दोष से भवन की रक्षा होगी। 10. एक बड़ी कौड़ी छेदकर के काले धागे में पिरोकर बच्चे के गले में धारण करवा दें, नज़र दोष से हो रहे दुष्परिणामों से उसकी रक्षा होगी। 11. 5, 7 अथवा 11 कौड़ी अपने वाहन में पीले कपड़े में लपेटकर रख लें, यह पोटली एक सुरक्षा कवच का काम करेगी। 12. लाल कपड़े में ग्यारह कौड़ी लपेटकर अपनी पूजा में स्थापित कर लें। नित्य मंत्र, ''ऊँ श्री महालक्ष्म्यै नमः'' का जप किया करें धन लाभ का यह एक अच्छा उपक्रम सिद्ध होगा।

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THE GAME OF KAUDI;-

05 FACTS;-

1-Cowry shells are sometimes used in a way similar to dice, e.g., in board games like Pachisi, Ashta Chamma or in divination . In Nepal cowries are used for a gambling game, where 16 pieces of cowries are tossed by four different bettors (and sub-bettors under them). This game is usually played at homes and in public during the Hindu festival of Tihar or Deepawali. In the same festival these shells are also worshiped as a symbol of Goddess Lakshmi and wealth. 2-In Kendrapara (Odisha) Goddess and cowries are harbinger of peace, prosperity and wealth.Practice of cowries shell gameis in vogue during Laxmi puja for quite a long while.Its ritualistic tradition that has been going on since long. Belief holding firm is that it brings luck and prosperity. Cowries game ritual is still in vogue at the Puri Lord Jagannath temple during Laxmi puja. 3-Cowry game is the major attraction of puja in several villages of Kendrapara. All families regardless of age, caste and creed take part in it. Its a typical game played between four groups with each group comprising three members.Cowries are tossed up on a dice-like sheet. There are points for upward and downward fall of cowry. For each upward fall, there are added points while downward fall negates the scored points. 4-They are organizing competitions for cowries games. The winners in children, boys, girls, women and mens sections were awarded handsomely. This imbibes competitive spirit in the game. 5-For them , shells of cowries are auspicious symbols. After the Laxmi puja, the shells are preserved with care. During pre-independence days,These shinny and egg-shaped shells ( cowries )were being used as some sort of currencies also...

....SHIVOHAM....