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विज्ञान भैरव तंत्र की ध्यान की ध्‍वनि-संबंधी "ग्यारह" विधियों (38वीं )का विवेचन क्या है?



विज्ञान भैरव तंत्र की ध्यान विधि 38;-

(ध्‍वनि-संबंधी दूसरी विधि)

23 FACTS;- 1-भगवान शिव कहते है:-

''ध्‍वनि के केंद्र में स्‍नान करो, मानो किसी जलप्रपात की अखंड ध्‍वनि में स्‍नान कर रहे हो।या कानों में अंगुली डालकर नांदों के नाद, अनाहत को सुनो।”

2-इस विधि का प्रयोग कई ढंग से क्या जा सकता है।एक ढंग यह है कि कहीं भी बैठकर इसे शुरू कर दो।चाहे बाजार हो या हिमालय की गुफा, घ्वनियां तो सदा सब जगह मौजूद है।ध्‍वनियों के साथ एक बड़ी विशेषता है, कि जहां भी, जब भी कोई

ध्‍वनि होगी, तुम उसके केंद्र होगे। सभी घ्वनियां तुम्‍हारे पास आती है, चाहे वे कहीं से , किसी दिशा से आएं। आँख के साथ, देखने के साथ यह बात नहीं है। दृष्‍टि रेखाबद्ध है।कोई तुम्‍हें देखता है तो उससे तुम तक एक रेखा खिंच जाती है। लेकिन ध्‍वनि Circular/वर्तुलाकार है; वह Linear/रेखाबद्ध नहीं है। सभी घ्वनियां Circular में आती है और तुम उसके केंद्र ,समूचे ब्रह्मांड का केंद्र हो। प्रत्येक ध्‍वनि Circle में तुम्‍हारी तरफ यात्रा कर रही है और यह विधि कहती है: ‘’ध्‍वनि के केंद्र में स्‍नान करो।''

3-अगर तुम इस विधि का प्रयोग कर रहे हो तो तुम जहां भी हो वहीं आंखें बंद कर लो और भाव करो कि सारा ब्रह्मांड ध्‍वनियों से भरा है और प्रत्येक ध्‍वनि तुम्‍हारी ओर बही आ रही है।और तुम उसके केंद्र हो। यह भाव