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प्रस्तावना


ॐ गुरवे आदि शंकराचार्य नमः ॐ गं गणपतये नमः ॐ सकारात्मक / नकारात्मक ऊर्जा नमः ॐ कामाख्या देव्यै नमः ॥ऊं ह्रीं दक्षिणामूर्तये नमः ॥

07 FACTS;- 1-विज्ञान भैरव तन्त्र काश्मीरी शैव सम्प्रदाय के त्रिक उप-सम्प्रदाय का मुख्य ग्रन्थ है। यह भगवान शिव और शक्ति के संवाद के रूप में है। इसमें संक्षेप में 112 धारणाओं (Meditation Methods) का वर्णन किया गया है। 2-विज्ञान का अर्थ है चेतना, भैरव का अर्थ वह अवस्था है, जो चेतना से भी परे है और तंत्र का अर्थ विधि है, चेतना के पार जाने की विधि।विज्ञान का मतलब है चेतना। और भैरव एक विशेष शब्द है, तांत्रिक शब्द, जो पारगामी के लिए कहा गया है। इसलिए भगवान शिव को भैरव कहते हैं और देवी को भैरवी- वे जो समस्त द्वैत के पार चले गए हैं। 3-भगवान शिव के उत्तर में केवल विधियाँ हैं। सबसे पुरानी, सबसे प्राचीन विधियाँ। लेकिन, तुम उन्हें अत्याधुनिक भी कह सकते हो, क्योंकि उनमें कुछ भी जोड़ा नहीं जा सकता। वे पूर्ण हैं- 112 विधियाँ। उनमें सभी संभावनाओं का समावेश है, मन को शुद्ध करने के, मन के अतिक्रमण के सभी उपाय उनमें समाए हुए हैं। 4-विज्ञान भैरव तंत्र देवी के प्रश्नों से शुरू होता है। देवी ऐसे प्रश्न पूछती हैं, जो दार्शनिक मालूम होते हैं। लेकिन भगवान शिव उत्तर उसी ढंग से नहीं देते। देवी पूछती हैं- प्रभो आपका सत्य क्या है?भगवान शिव इस प्रश्न का उत्तर न देकर उसके बदले में एक 'विधि' देते हैं। अगर देवी इस विधि से गुजर जाएँ तो वे उत्तर पा जाएँगी। इसलिए उत्तर परोक्ष है, प्रत्यक्ष नहीं।भगवान शिव नहीं बताते कि मैं कौन हूँ, वे एक विधि भर बताते हैं। वे कहते हैं : यह करो और तुम जान जाओगे। तंत्र के लिए करना ही जानना है। 5-भगवान शिव के ये वचन अति संक्षिप्त हैं, सूत्र रूप में हैं। उनका एक अकेला वाक्य एक महान शास्त्र का, धर्मग्रंथ का आधार बन सकता है। विज्ञान भैरव तंत्र का अर्थ ही है- चेतना के पार जाने की विधि। 6-विज्ञान भैरव तंत्र, हजारों वर्ष पुराना है। उसमें कुछ भी नहीं जोड़ा जा सकता, कुछ जोड़ने की गुंजाइश ही नहीं है। यह सर्वांगीण है, संपूर्ण है, अंतिम है। यह सबसे प्राचीन है और साथ ही सबसे आधुनिक, सबसे नवीन। ध्यान की इन 112 विधियों से मन के रूपांतरण का पूरा विज्ञान निर्मित हुआ है। 7-ह्रदय की बात ...

ये 112 सूत्र ,मूल संस्कृत ग्रन्थ से तथा विवेचन ज्ञानी ,संत-साधक के संकलन से लिया गया है।भगवान शिव की विधियाँ मानव-कल्याण के लिए है।यह एक भक्त का रचना संकलन है ,विद्वान का नहीं। इसलिए भगवान भोलेनाथ को समर्पित है।त्रुटियों के लिए आपसे क्षमायाचना करती हूँ...

यह एक भक्त की विनती है।

1-(श्‍वास-क्रिया से संबंधित नौ विधियां)-1,2,3,4,5,6,7,8,9, 2-(शिथिल होने की तीन विधियां)-10,11,12 3- (केंद्रित होने की बारह विधियां )-13,14,15,16,17,18,19 20,21,22,23,24 3- (अचानक रूकने की पाँच विधियां)-25,26,27,28,29 4- (देखने के संबंध में सात विधियां)

-30,31,32,33,34,35,36 5-(ध्‍वनि-संबंधी "ग्यारह" विधियों )37,38,39,40,41,42,43,44,45,46,47 6-(ऊर्ध्वगमन सम्बन्धी पाँच विधियां)48,49,50,51,52 7-(आत्‍म-स्‍मरण की चार विधियां)53,54,55,56 8-(साक्षित्व की तेरह विधियां) –57,58,59,60,61,62 63,64,65,66,67,68,69 9-(प्रकाश-संबंधी छह विधियां —70,71,72,73,74,75 10-(अंधकार संबंधी तीन विधियां)76,77,78 11--(अग्‍नि संबंधी दो विधियां )79,80,81

12-(अहंकार —संबंधी तीनविधियां )..,82,83 13-(अनासक्‍ति—संबंधी छह विधियां ).. 84,85,86,87,88,89 14-(तीसरी आँख के जागरण संबंधी छह विधियां ) -90,91,93,94

15-एकांत से संबंधित दो विधियां )96,97

16-(ह्रदय संबंधी दो विधियां )—98,99

17-(गुणधर्म संबंधी दो विधियां)-- 100,101

18-( आत्मा संबंधी चार विधियां) -102,103,104,105

19-( चेतना संबंधी तीन विधियां )--106,107,108

20- ( निष्क्रिय रूप संबंधी चार विधियां)-- 109,110,111,112

...शिवोहम ...