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विज्ञान भैरव तंत्र की ध्यान संबंधित 59,60वीं, विधियां(साक्षित्व की तेरह विधियां )– क्या है?


विज्ञान भैरव तंत्र की ध्यान विधि 59;-

(साक्षित्व की तीसरी विधि)

09 FACTS;-

1-भगवान शिव कहते है:-

’’प्रिय, न सुख में और न दुःख में, बल्‍कि दोनों के मध्‍य में अवधान को स्‍थित करो।‘’

2-प्रत्‍येक चीज ध्रुवीय है। अपने विपरीत के साथ है। और मन एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव पर डोलता रहता है। कभी मध्‍य में नहीं

ठहरता।क्‍या तुमने कोई ऐसा क्षण जाना है जब तुम न सुखीहो और न दुखी? क्‍या तुमने कोई ऐसा क्षण जाना है जब तुम न

स्‍वस्‍थ थे न बीमार? क्‍या तुमने कोई ऐसा क्षण जाना है जब तुम न यह थे न वह। जब तुम ठीक मध्‍य में थे, ठीक बीच में थे?मन अविलंब एक अति से दूसरी अति पर चला जाता है। अगर तुम सुखी हो तो देर-अबेर तुम दुःख की तरफ गति कर जाओगे और शीध्र गति कर जाओगे। सुख विदा हो जाएगा और तुम दुःख में हो जाओगे। अगर तुम्‍हें अभी अच्‍छा लग रहा है तो देर अबेर तुम्‍हें बुरा लगने लगेगा। और तुम बीच में कहीं नहीं रुकते, इस छोर से सीधे उस छोर पर चले जाते हो। घड़ी के पैंडुलम की तरह तुम बांए से दाएं और बाएं डोलते रहते हो और पैंडुलम डोलता ही रहता है।

3-एक गुह्म नियम है। जब पैंडुलम बायी ओर जाता है तो लगता तो है कि बायी ओर जा रहा है। लेकिन सच में तब वह दायी ओर जाने के लिए शक्‍ति जुटा रहा है। और वैसे ही जब वह दायी ओर जा रहा है तो बायी ओर जाने के लिए शक्‍ति जुटा रहा है। तो जैसा दिखाई पड़ता है वैसा ही नहीं है। जब तुम सुखी हो रहे हो तो तुम दुःखी होने के लिए शक्‍ति जुटा रहे हो। और जब तुम

हंस रहे हो तो रोने का क्षण दूर नहीं है।भारत के गांवों में माताएं यह जानती है। जब कोई बच्‍चा बहुत हंसने लगता है तो वे कहती है कि उसका हंसना बंद करो, अन्‍यथा वह रोएगा। अगर कोई बच्‍चा बेहद खुश हो तो उसका अगला कदम दुःख में पड़ने ही वाला है। इसलिए माताएं उसे रोकती है, अन्‍यथा वह दुःखी होगा।

4-लेकिन यही नियम विपरीत ढंग से भी लागू होता है। और लोग यह नहीं जानते है। कोई बच्‍चा रोता है तो तुम उसे रोने से रोकते हो तो तुम उसका रोना ही नहीं रोकते हो,बल्कि तुम उसका अगला कदम भी रोक रहे हो। अब वह सुखी भी नहीं हो पाएगा। बच्‍चा जब रोता है तो उसे रोने दो। बच्‍चा जब रोता है तो उसे मदद दो कि और रोंए। जब तक उसका रोना समाप्‍त

होगा ..वह शक्‍ति जुटा लेगा। वह सुखी हो सकेगा।अब मनोवैज्ञानिक कहते है कि जब बच्‍चा रोता-चीखता हो तो उसे रोको मत, उसे मनाओ मत, उसे बहलाओ मत। उसके ध्‍यान को रोने से हटाकर कहीं अन्‍यत्र ले जाने की कोशिश मत करो, उसे रोना बंद करने के लिए रिश्‍वत मत दो। कुछ मत करो; बस उसके पास मौन बैठे रहो और उसे रोने दो। चिल्‍लाने दो। तब वह आसानी से सुख की और गति कर पाएगा। अन्‍यथा न वह रो सकेगा और न सुखी हो सकेगा।

5-हमारी यहीं स्‍थिति है। हम कुछ नहीं कर पाते है। हम हंसते है तो आधे दिल से और रोते है तो आधे दिल से। लेकिन यही मन का प्राकृतिक नियम है; वह एक छोर से दूसरे छोर पर गति करता रहता है। यह विधि इस प्राकृतिक नियम को बदलने के

लिए है।‘’प्रिये, न सुख में और न दुःख म