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विज्ञान भैरव तंत्र की ध्यान संबंधित 72,73वीं, (प्रकाश-संबंधी छह विधियां ) विधियां क्या है?


विज्ञान भैरव तंत्र की ध्यान विधि 72 ;-

(प्रकाश-संबंधी तीसरी विधि)

10 FACTS;-

1-भगवान शिव कहते है:-—

‘’भाव करो कि ब्रह्मांड एक पारदर्शी शाश्‍वत उपस्‍थिति है।‘’

2-यह विधि आंतरिक संवेदनशीलता पर आधारित है।इसलिए पहले अपनी संवेदनशीलता को बढ़ाना पड़ेगा। अपने द्वार-दरवाजे बंद कर लो। कमरे में अँधेरा कर लो, और फिर एक छोटी सी मोमबत्‍ती (त्राटक साधना )जलाओ। और उस मोमबत्‍ती के पास प्रेमपूर्ण मुद्रा में बल्‍कि प्रार्थना पूर्ण भाव दशा में बैठो और ज्‍योति से प्रार्थना करो: ‘’अपने रहस्‍य को मुझ पर प्रकट करो।‘’ स्‍नान कर लो, अपनी आंखों पर ठंडा पानी छिड़क लो और फिर ज्‍योति के सामने अत्‍यंत प्रार्थना पूर्ण भाव दशा में होकर बैठो।

3-ज्‍योति को देखो ओर शेष सब चीजें भूल जाओ। सिर्फ ज्‍योति को देखो। ज्‍योति को देखते रहो।पाँच मिनट बाद तुम्‍हें अनुभव होगा कि ज्‍योति में बहुत चीजें बदल रही है। लेकिन स्‍मरण रहे, यह बदलाहट ज्‍योति में नहीं हो रही है; दरअसल तुम्‍हारी दृष्‍टि बदल रही है।प्रेमपूर्ण भाव दशा में सारे जगत को भूलकर, समग्र एकाग्रता के साथ, भावपूर्ण ह्रदय के साथ ज्‍योति को देखते रहो, तुम्‍हें ज्‍योति के चारों और नए रंग, नई छटाएं दिखाई देंगी। जो पहले कभी नही दिखाई दी थी। वे रंग, वे छटाएं सब वहां मौजूद है; पूरा इंद्रधनुष वहां उपस्‍थिति है।

4-जहां-जहां भी प्रकाश है, वहां-वहां इंद्रधनुष है। क्‍योंकि प्रकाश बहुरंगी है उसमें सब रंग है। लेकिन उन्‍हें देखने के लिए सूक्ष्‍म संवेदना की जरूरत है। उसे अनुभव करो और देखते रहो। यदि आंसू भी बहने लगें तो भी देखते रहो। वे आंसू तुम्‍हारी आंखों को निखार देंगे, ज्‍यादा ताजा बना जायेंगे।कभी-कभी तुम्‍हें प्रतीत होगा कि मोमबत्‍ती या ज्‍योति बहुत रहस्‍यपूर्ण हो गई है। तुम्‍हें लगेगा कि यह वही साधारण मोमबत्ती नहीं है जो मैं आपने साथ लाया था। उसने एक नई आभा एक सूक्ष्‍म दिव्‍यता, एक भगवत्‍ता प्राप्‍त कर ली है। इस प्रयोग को जारी रखो। कई अन्‍य चीजों के साथ भी तुम इसे कर सकते हो।

5-उदाहरण के लिए,आजकल के बढ़ते तनाव और फैशन ने युवाओं को नशीली दवाओं का आदी बना दिया है।ड्रग या मादक द्रव्‍य का सेवन करने वालो के लिए चारों ओर का जगत ..प्रकाश और रंगों के जगत में बदल जाता है ;जो कि बहुत पारदर्शी और जीवंत मालूम पड़ता है।परंतु यह ड्रग के कारण नहीं है। जगत ऐसा ही है। लेकिन तुम्‍हारी दृष्‍टि धूमिल और मंद पड़ गई है।ड्रग तुम्‍हारे चारों ओर रंगीन जगत नहीं निर्मित करता है;जगत पहले से ही रंगीन है, उसमें कोई भूल नहीं है। यह रंगों के इंद्रधनुष जैसा है; इसीलिए तुम्‍हें कभी नहीं प्रतीत होता है कि जगत इतना रंग-भरा है। यह सिर्फ तुम्‍हारी आंखों से धुंध को हटा देता है। वह जगत को रंगीन नहीं बनाता।

6-तब एक बिलकुल नया जगत तुम्‍हारे सामने होता है। एक मामूली कुर्सी भी चमत्‍कार बन जाती है। फर्श पर पडा जूता नए रंगों से, नई आभा से भर जाता है। सज जाता है; तब यातायात का मामूली शोर गूल भी संगीत पूर्ण हो उठता है। जिन वृक्षों को तुमने बहुत बार देखा होगा और फिर भी नहीं देखा होगा, वे मानों नया जन्‍म ग्रहण कर लेते है। यद्यपि तुम बहुत बार उनके पास गुजरें हो और तुम्‍हें ख्‍याल है कि तुमने उन्‍हें देखा है। वृक्ष का पत्‍ता-पत्‍ता एक