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प्रेम की परिभाषा क्या है? क्या है विज्ञान भैरव तंत्र की ध्यान संबंधित 10वीं विधि(शिथिल होने की )?




विज्ञान भैरव तंत्र की ध्यान विधि10(शिथिल होने की विधि10,11,12);-

भगवान शिव कहते है:-

''प्रिय देवी, प्रेम किए जाने के क्षण में प्रेम में ऐसे प्रवेश करो जैसे कि वह नित्‍य जीवन हो।''

परंतु क्या है प्रेम की परिभाषा ?प्रेम किसे कहा जाता है?वास्तव में,प्रेम वास्तविक या अवास्तविक नहीं होता है; प्रेम (Love) तो बस प्रेम होता है.. या तो प्रेम है या फिर नहीं है।प्रेम निस्वार्थ होता है और ये बिना किसी अपेक्षा के किया जाता है। प्रेम में छल नहीं होता है सच्चा प्रेम तो निश्छल होता है। सच्चा प्रेम क्या है?- 02 FACTS;- 1-सच्चा प्रेम जो चढ़े नहीं, घटे नहीं ;ज्ञानियों का प्रेम ऐसा होता है, जो कम-ज़्यादा नहीं होता और वह प्रेम तो केवल परमात्मा है।संसार में सच्चा प्रेम है ही नहीं। सच्चा प्रेम उसी व्यक्ति में हो सकता है जिसने अपने आत्मा को पूर्ण रूप से जान लिया है। प्रेम ही ईश्वर है और ईश्वर ही प्रेम है।उदाहरण के लिए शुद्ध प्रेम के बारे में संत कबीर कहते हैं कि... ''घड़ी चढ़े, घड़ी उतरे, वह तो प्रेम न होय, अघट प्रेम ही हृदय बसे,