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क्या है विष्णुसहस्रनाम (विष्णु के एक हजार नाम) की महिमा और लाभ?


श्री विष्णु के 1000 नामों की महिमा;- 02 FACTS;--

1-विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के हजार नामों से युक्त एक प्रमुख स्तोत्र है। इसके अलग अलग संस्करण महाभारत, पद्म पुराण व मत्स्य पुराण में उपलब्ध हैं। स्तोत्र में दिया गया प्रत्येक नाम श्री विष्णु के अनगिनत गुणों में से कुछ को सूचित करता है। विष्णु जी के भक्त प्रात: पूजन में इसका पठन करते है। मान्यता है कि इसके सुनने या पाठ करने से मनुष्य की मनोकामनायें पूर्ण होती हैं।विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता, सफलता, आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्त होता है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

2-भगवान विष्णु के 1000 नामों की महिमा अवर्णनीय है। इन नामों का संस्कृत रूप विष्णुसहस्रनाम के प्रतिरूप में विद्यमान है।वेदों और पुराणों में भगवान विष्णु को श्रृष्टि का पालनहार कहा गया है।मानव जीवन से जुड़े सुख-दुख का चक्र श्री हरि‍ के हाथों में है। भगवान की उपासना में विष्णु सहस्रनाम के पाठ का बहुत महत्व है।यदि प्रतिदिन इन एक हजार नामों का जाप किया जाए तो सभी मुश्किलें हल हो सकती हैं। वैसे वैदिक परंपरा में मंत्रोच्चारण का विशेष महत्व माना गया है, अगर सही तरीके से मंत्रों का उच्चारण किया जाए तो यह जीवन की दिशा ही बदल सकते हैं।

क्या है विष्णु सहस्रनाम उद्ग्म स्रोत ?-

06 FACTS;-

1-भगवान विष्णु के 1000 नाम जाने से पहले हमे ये जरूर जानना चाहिए की ये पहली बार किसने बताया और भगवान विष्णु के 1000 नाम क्या हैं।विष्णु सहस्रनम की उत्पत्ति महाकाव्य महाभारत से मानी जाती हैं। कुरुक्षेत्र युद्ध मे विनाश देख धर्मराज युधिष्ठिर विचलित हुए। बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म भी अपने प्राण त्यागने की प्रतीक्षा कर रहे थे, उसी समय वेदव्यास और श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को समकालीन सर्वोच्च ज्ञानी भीष्म से धर्म व नीति के विषय मे उपदेश लेने की प्रेरणा दी। अपने सभी भाई समेत कृष्ण को साथ लिए युधिष्ठिर पितामह भीष्म के पास पहुँच कर उनका नमन किया और धर्म व नीति के विषय मे विचार करते हुए प्रश्न किये।

2-युधिष्ठिर ने उनसे पूछा, "पितामह! कृपया हमें बताएं कि सभी के लिए सर्वोच्च आश्रय कौन है? जिससे व्यक्ति को शांति प्राप्त हो सके; वह नाम कौन सा है जिससे इस भवसागर से मुक्ति प्राप्त हो सके; कौन ऐसा है, जो सर्व व्याप्त है और सर्व शक्तिमान है? । इस सवाल के जबाब में पितामह भीष्म ने कहा की वह नाम ''विष्णु सहस्रनाम ''है । भीष्म का उत्तर ही यह सहस्रनाम(भगवान विष्णु के 1000 नाम) है। 3-युधिष्ठिर के प्रश्न है:- 3-1-सभी लोकों में सर्वोत्तम देवता कौन है? 3-2-संसारी जीवन का लक्ष्य क्या है? 3-3-किसकी स्तुति व अर्चन से मानव का कल्याण होता है? 3-4-सबसे उत्तम धर्म कौनसा है? 3-5-किसके नाम जपने से जीव को संसार के बंधन से मुक्ति मिलती है? 4-इसके उत्तर में भीष्मजी ने कहा,"जगत के प्रभु, देवों के देव, अनंत व पुरूषोत्तम विष्णु के सहस्रनाम के जपने से, अचल भक्ति से, स्तुति से, आराधना से, ध्यान से, नमन से मनुष्य को संसार के बंधन से मुक्ति मिलती है। यही सर्वोत्तम धर्म है।"भीष्मपितामह ने विष्णु के एक हजार नाम बताने के साथ ही युधिष्ठिर से कहा कि हर युग में मनोकामना पूर्ति के लिए, इन एक हजार नामों को सुनना और पढ़ना सबसे उत्तम होगा। इसका नियमित पाठ करके हर संकट से मुक्ति मिल जाती है।

5-विष्णु सहस्रनाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हिंदू धर्म के दो प्रमुख सम्प्रदाय शैव और वैष्णवों के बीच यह जुड़ाव का काम करता है।विष्णु सहस्रनाम में विष्णु को शम्भु, शिव, ईशान और रुद्र के नाम से बुलाया गया है, जिससे यह साबित होता है कि शिव और विष्णु एक ही है। सनातन सम्प्रदाय में धर्म को कभी भी मानव समाज के रूप में नहीं बताया गया है। सही मायनों में धर्म को मनुष्य के कर्तव्य नियम के रूप में बताया गया है, जिसे हम कर्म भी कहते हैं। विष्णु सहस्रनाम भी कर्म प्रधान है।

6-विष्णु के इन एक हजार नामों में मानव धर्म के बारे में बताया गया है. मनुष्य द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से होने वाले सभी काम और उनके फलों का वर्णन है. जैसे सहस्रनाम में 135वां नाम ‘धर्माध्यक्ष’ है। इसका मतलब है कि कर्म के अनुसार इंसान को पुरस्कार या दंड देने वाले देव। स्तोत्र के तीन प्रमुख भाग;-