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क्या है प्राचीन ,दुर्लभ एवं गुहय स्वरोदय विज्ञान?(301-395 )


301 – चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को विद्वान लोग प्रातःकाल उठकर तत्व- -विचार करते हुए और सूर्य के दक्षिणायन तथा उत्तरायण को ध्यान में रखते हुए वर्षफल से सम्बन्धित प्रश्नों का उत्तर दें। 302 -303 – उस समय यदि चन्द्र स्वर का प्रवाह हो तथा उसमें पृथ्वी, जल या वायु तत्व सक्रिय हो, तो आनेवाला वर्ष सम्पन्नता और प्रचुर उपज से भरा होगा। लेकिन उस समय चन्द्र-स्वर में अग्नि अथवा आकाश तत्व की प्रधानता हो, तो समझना चाहिए कि आनेवाले वर्ष में, महीने मे एवं दिनों में अकाल पड़ेगा, बाढ़ से नुकसान होगा एवं दुख की अधिकता रहेगी। 304– लेकिन उस समय सुषुम्ना नाड़ी सक्रिय होना सभी कार्यों में क्रूरता तथा भयावह परिस्थियों के आगम का संकेत है, अर्थात् देश का विभाजन, महामारी, कष्ट, पीड़ा, अभाव आदि की बहुलता देखने को मिलेगी। 305– मेष संक्रान्ति के समय (जब सूर्य मीन राशि से मेष राशि में संक्रमण करता है) तत्व- चिन्तक को अपने प्रवाहित स्वर पर विचार करे और उसके अनुसार लोगों के लिए वर्ष-फल बताए। 306– स्वर में पृथ्वी आदि तत्वों की प्रधानता के आधार पर किसी दिन, मास और वर्ष का फल समझना चाहिए। यदि पृथ्वी या जल तत्व की प्रधानता हो, तो सुख-समृद्धि का संकेत समझना चाहिए। लेकिन वायु, अग्नि अथवा आकाश तत्वों की प्रधानता होने पर इसके बिलकुल विपरीत समझना चाहिए। 307– वर्ष के प्रथम दिन प्रातःकाल स्वर में पृथ्वी ) तत्व- के सक्रिय होने पर समझना चाहिए कि आनेवाले वर्ष में सुभिक्ष रहेगा, पर्याप्त वर्षा होगी, प्रचुर अनाज पैदा होगा, हर प्रकार का सुख मिलेगा और राष्ट्र की हर तरह से वृद्धि होगी। SPECIAL NOTE;- यहाँ यह याद दिलाना आवश्यक है कि भारतीय उपमहाद्वीप में सभी राज्यों में, कुछ राज्यों को छोड़कर, वर्ष का प्रारम्भ चैत्र माह के शुक्लपक्ष के प्रथम दिन से प्रारम्भ होता है। इसे पूरे देश में भिन्न-भिन्न नामों से जानते हैं- वर्ष-प्रतिपदा, गुडीपरवा, उगादि आदि। यह भी याद रखना आवश्यक है कि शुक्लपक्ष में प्रथम तीन दिनतक प्रातःकाल चन्द्रस्वर प्रवाहित होता है। इसलिए इस दिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय या अन्य प्रान्तों में जहाँ नववर्ष जिस दिन प्रारम्भ होता है, उस दिन कौन सा पक्ष, कौन सी तिथि है और उसके अनुसार कौन सा स्वर चलना चाहिए, इसका निर्णयकर अपने स्वर की परीक्षा करके स्वर में उदित तत्त्व के अनुसार वर्षफल का कथन करना चाहिए। सूर्य का मेषराशि में प्रवेश-काल को भी कहीं-कहीं वर्ष का प्रारम्भ माना जाता है। अतः उसके अनुसार वर्षफल समझने की विधि भी बताई गयी है। 308– यदि स्वर (चन्द्र स्वर) में जल तत्व प्रवाहित हो, तो अच्छी वर्षा, अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और शान्ति के संकेत समझना चाहिए। 309– यदि अग्नितत्व प्रवाहित हो, तो दुर्भिक्ष, युद्ध, बहुत मामूली वर्षा आदि की सम्भावना समझनी चाहिए। 310 – मेष संक्रान्ति के समय यदि स्वर में वायु तत्व के प्रवाहित होनेपर अनेक प्रकार के उत्पात, उपद्रव, भय, अल्प वृष्टि आदि की आशंका समझनी चाहिए। (यहाँ से मेष संक्रान्ति के समय स्वर और उसमें सक्रिय तत्व के अनुसार वर्षफल कथन का विधान किया गया है।) 311– मेष संक्रान्ति के समय यदि स्वर में आकाश तत्व प्रवाहित हो, तो सुख-सम्पन्नता का सर्वथा अभाव समझना चाहिए। 312– स्वर का पूर्ण रूप से प्रवाह और उसमें उचित तत्व की उपस्थिति सुख-सम्पन्नता के द्योतक हैं। जब सूर्य-स्वर और चन्द्र स्वर बारी-बारी से प्रवाहित हों, तो उत्तम फसल का संकेत समझना चाहिए। 313– यदि सूर्य स्वर में अग्नि तत्व या केवल आकाश तत्व प्रवाहित हो, तो वस्तुओं के मूल्य में बढ़ोत्तरी की आशंका होती है और इसलिए समय से अनाज आदि की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। 314 – यदि मेष संक्रान्ति रात में होती है तथा उसके अगले प्रातःकाल में सूर्य स्वर में अग्नि तत्व , वायु तत्व अथवा आकाश तत्व का प्रवाह हो, तो संसार में रौरव नरक के समान दुख के आने की आशंका रहती है। 315 – रोग सम्बन्धी प्रश्न के समय स्वर में पृथ्वी तत्व तत्त्व प्रवाहित होने पर रोग का कारण प्रारब्ध होता है, जल तत्व प्रवाहित होने पर त्रिदोष (वात, पित्त व कफ) और अग्नि तत्व प्रवाहित होने पर शाकिनी या पितृदोष होता है। 316 – प्रश्नकर्त्ता यदि अप्रवाहित स्वर की ओर से आकर प्रवाहित स्वर की ओर बैठ जाय और किसी रोग के सम्बन्ध में प्रश्न करे, तो अन्तिम साँस गिनता हुआ मूर्च्छित रोगी भी रोगी भी ठीक हो जाएगा। 317 – प्रश्नकर्त्ता सक्रिय स्वर की ओर से किसी रोग के विषय में प्रश्न करे, तो रोग किसी भी स्टेज पर क्यों न हो ठीक हो जाएगा। 318 –दूत (रोगी का सम्बन्धी प्रश्नकर्त्ता) हड़बड़ाहट में बड़बड़ाता हुआ आए और रोग के सम्बन्ध में प्रश्न करे तथा उस समय सूर्य स्वर प्रवाहित हो रहा हो, तो समझना चाहिए कि रोगी स्वस्थ हो जाएगा। परन्तु यदि उस समय चन्द्र स्वर प्रवाहित हो, तो समझना चाहिए कि रोगी बीमारी में होगा। 319– जिस व्यक्ति का स्वर नियंत्रण में हो या उसका मन एकाग्रचित्त हो और वह सक्रिय स्वर की ओर से अपने जीवन के विषय में प्रश्न पूछे, तो उसका उत्तर शुभ फल देनेवाला समझना चाहिए। 320 – बाईं अथवा दाहिनी नाक से साँस लेते समय यदि कोई किसी के रोगी के सम्बन्ध में प्रश्न करे, तो समझना चाह