Recent Posts

Archive

Tags

No tags yet.

प्राचीन एवं गुहय स्वरोदय विज्ञान क्या है ?क्या महासाधना स्वरोदय विज्ञान के बिना .. संभव नहीं?क्या है


जीवन में स्वर का महत्व ;- 07 FACTS;- 1-विश्वपिता विधाता ने मनुष्य के जन्म के समय में ही देह के साथ एक ऐसा आश्चर्यजनक कौशलपूर्ण अपूर्व उपाय रच दिया है जिसे जान लेने पर सांसारिक, वैषयिक किसी भी कार्य में असफलता का दु:ख नहीं हो सकता। हम इस अपूर्व कौशल को नहीं जानते, इसी कारण हमारा कार्य असफल हो जाता है, आशा भंग हो जाती है, हमें मनसंताप और रोग भोगना पड़ता है। यह विषय जिस शास्त्र में है, उसे स्वरोदय शास्त्र कहते हैं। 2-यह स्वरशास्त्र जैसा दुर्लभ है, स्वरज्ञ गुरु का भी उतना ही अभाव है। स्वरशास्त्र प्रत्यक्ष फल देने वाला है। पद-पद कर इसका प्रत्यक्ष फल देखकर आश्चर्यचकित होना पड़ता है। समग्र स्वरशास्त्र को ठीक-ठीक लिपिबद्ध करना बिलकुल असंभव है। केवल साधकों के काम की कुछ बातें यहां संक्षेप में दी जा रही हैं। स्वरशास्त्र सीखने के लिए श्वास-प्रश्वास की गति के संबंध में सम्यक् ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है। 3-देहरूपी नगर में वायु राजा के समान है। प्राणवायु नि:श्वास और प्रश्वास इन दो नामों से पुकारा जाता है। वायु ग्रहण करने का नाम नि:श्वास और वायु के परित्याग करने का नाम प्रश्वास है। जीव के जन्म से मृत्यु के अंतिम क्षण तक निरंतर श्वास-प्रश्वास की क्रिया होती रहती है और यह नि:श्वास नासिका के दोनों छेदों से एक ही समय एकसाथ समान रूप से नहीं चला करता, कभी बाएं और कभी दाहिने पुट से चलता है। कभी-कभी एकाध घड़ी तक एक ही समय दोनों नाकों से समान भाव से श्वास प्रवाहित होता है। 4-स्वर विज्ञान इस संसार का बहुत ही महत्वपूर्ण और आसान ज्योतिष विज्ञान है जिसके बताये गए संकेत बिलकुल सही माने जाते है और इसकी सहायता से हम अपने जीवन कि दिशा और दशा को बदल सकते है।हमारे शरीर की मानसिक और शारीरिक क्रियाओं, संसार के सभी व्यक्तियों से लेकर दैवीय सम्पर्कों तक को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाला स्वर विज्ञान दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण साबित हो सकता है। 5-स्वर विज्ञान कि सहायता से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में मनचाही सफलता हासिल कर सकता है। इसकी मदद से व्यक्ति अपने सम्पर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति और परिस्तिथियों को अपने पक्ष में कर सकता है। 6-हमारी नाक में दो छिद्र होते हैं। सामान्य अवस्था में इनमें से एक ही छिद्र से हवा का आवागमन होता रहता है। कभी दायें से तो कभी बाएं से इसे ही हम दायाँ और बायाँ स्वर का चलना कहते है। लेकिन जिस समय स्वर बदलता है तो उस समय कुछ पल के लिए दोनों छिद्रों से में हवा निकलती हुई महसूस होती है। इसके अलावा कभी - कभी सुषुम्ना नाड़ी के चलते समय हमारे दोनों नाक के छिद्रों से हवा निकलती है। 7-बांयी तरफ से सांस लेने का मतलब है कि हमारे शरीर की इड़ा नाड़ी में वायु का प्रवाह है।इसके विपरीत दायीं तरफ से सांस लेने का मतलब है कि हमारे शरीर की पिंगला नाड़ी में वायु का प्रवाह है।लेकिन दोनों के मध्य में सुषुम्ना नाड़ी का स्वर प्रवाह होता है। स्वर को पहचानने की सरल विधियाँ;- 03 FACTS;- ==================== (1) शांत भाव से मन एकाग्र करके बैठ जाएँ। अपने दाएँ हाथ को नाक छिद्रों के पास ले जाएँ। तर्जनी अँगुली छिद्रों के नीचे रखकर श्वास बाहर फेंकिए। ऐसा करने पर आपको किसी एक छिद्र से श्वास का अधिक स्पर्श होगा। जिस तरफ के छिद्र से श्वास निकले, बस वही स्वर चल रहा है। (2) एक छिद्र से अधिक एवं दूसरे छिद्र से कम वेग का श्वास निकलता प्रतीत हो तो यह सुषुम्ना के साथ मुख्य स्वर कहलाएगा। (3) एक अन्य विधि के अनुसार आईने को नासाछिद्रों के नीचे रखें। जिस तरफ के छिद्र के नीचे काँच पर वाष्प के कण दिखाई दें, वही स्वर चालू समझें।

स्वरशास्त्र (IN NUTSHELL);- 11 FACTS;- 1-जब तक गहन साधना करने की उत्कण्ठा न हो, इस विज्ञान में बताई गयी निम्नलिखित बातों का नियमित पालन किया जा सकता है। इससे आपको दैनिक जीवन के कार्यों में सफलता मिलेगी, आपके आत्मविश्वास का स्तर काफी ऊँचा रहेगा, हीन भावना से मुक्त रहेंगे और आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। 2-हम अपनी नाक से निकलने वाली साँस के संकेतो को समझ कर अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में मनचाहा परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। जिस तिथि या वार को जिस छिद्र से साँस लेनी चाहिए, अगर वही होता है तो हमें उस दिन अच्छे परिणाम मिलेंगे । लेकिन अगर उल्टा हुआ तो हमें उस दिन निराशा मिल सकती है। इसलिये किस दिन किस छिद्र से साँस चलनी चाहिए हम इसका ज्ञान हासिल करके जीवन में लगातार उन्नति के पथ पर चल सकते है जो कि सभी के लिए बहुत ही आसान है। 3-बाएं नासापुट के श्वास को इडा में चलना, दाहिनी नासिका के श्वास को पिंगला में चलना और दोनों पुटों से एक समान चलने पर उसे सुषुम्ना में चलना कहते हैं। एक नासापुट को दबाकर दूसरे के द्वारा श्वास को बाहर निकालने पर यह साफ मालूम हो जाता है कि एक नासिका से सरलतापूर्वक श्वास प्रवाह चल रहा है और दूस