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विभिन्न भक्ति सम्प्रदाय/प्रेम/SEVEN STATES OF MATTER ;-


विभिन्न भक्ति सम्प्रदाय

1-: यह द्विज या दीक्षित उच्च वर्णीय का धार्मिक सम्प्रदाय है।

2-अद्वैतवाद : आठवीं शताब्दी में शंकराचार्य द्वारा अद्वैत सम्प्रदाय की स्थापना

3-वैष्णव धर्म की स्थापना करने वाले चार आचार्यों ने चार सम्प्रदायों की स्थापना की।इनसे सबसे पहले शंकराचार्य ने अद्वैत सम्प्रदाय की स्थापना की थी, जो अद्वैतवाद कहलाता है। उन आचार्यों के नाम सम्प्रदायों हैं;-

1-रामानुजाचार्य>श्री सम्प्रदाय

2-मध्वाचार्य,> ब्रह्म सम्प्रदाय

3-विष्णुस्वामी> शुद्धाद्वैतवाद

4-निम्बार्काचार्य>‘द्वैताद्वैतवाद’

4-रामानुजाचार्य (1017-1137 ई॰): रामानुजाचार्य ने श्री सम्प्रदाय की स्थापना की। इन्होंने हिन्दी को अपने प्रचार का माध्यम बनाया। उनका दर्शन विशिष्टाद्वैत है, इसलिए विशिष्टाद्वैतवाद कहलाता है।

मध्वाचार्य (13वीं शताब्दी) ने ब्रह्म सम्प्रदाय की स्थापना की। उनका दार्शनिक मत है ..द्वैतवाद।विष्णु स्वामी ने रुद्र सम्प्रदाय का प्रर्वतन

किया। उनका दार्शनिक मत शुद्धाद्वैतवाद कहलाता है।

5-निम्बार्कचार्या ने हंस या सनकादि सम्प्रदाय की स्थापना की। उनका दार्शनिक मत ‘द्वैताद्वैतवाद’ कहलाता है, जिसे भेदाभेदवाद भी कहा जाता है। उन्होंने कृष्ण को विष्णु का अवतार माना है। रचनाएँ : ब्रह्मसूत्रा, उपनिषद् और गीता की टीका।

6-रामानन्द (1399-1137 ई॰): रामानन्दचार्य ने भक्ति को दक्षिण से उत्तर लाया और यहां स्थापित किया। इन्होंने रामावत सम्प्रदाय का प्रवर्तन किया। इनके लिखे तीन संस्कृत ग्रंथ मिलते हैं पहला वेदान्तसूत्रों पर आनन्दभाष्य, दूसरा श्रीरामार्चन पद्धति और तीसरा वैष्णव मताब्जभास्कर और हिन्दी में रामरक्षा स्रोत, ज्ञानलीला, योगचिन्तामणि और ज्ञान तिलक।