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ॐ मन्त्र का क्या महत्व है?क्या रहस्य है ॐ के उच्चारण का ?


ॐ मन्त्र का रहस्य/महत्व;-

05 FACTS;-

1-मंत्र, यंत्र और तंत्र एक ही शक्ति के तीन रुप हैं। इनमें से मंत्र का संसार सबसे प्राचीनतम, विचित्र और प्रभावशाली है। सृष्टि से पहले जब कुछ भी नहीं था तब वहॉ एक ध्वनि मात्र ही सब जगह व्याप्त थी। वह ध्वनि, प्रतिध्वनि, नाद आदि एक शब्द था, एक स्वर था। वह शब्द एक स्वर-लय पर आधारित था। वह ध्वनि अथवा नाद आदि और कुछ नहीं वस्तुतः ओउम् था।

2-ओउम् में कुल तीन अक्षर हैं - अ, उ और म। आकार से विराट अग्नि, विष्णु आदि से अर्थ लिया जाता है। उकार से हिरण्य गर्भ, शंकर, तेजस आदि का अभिप्राय है। मकार ईश्वर की प्राप्ति , प्रकृति आदि का बोध करवाता है। शास्त्रों के अनुसार इसका स्थूल अर्थ इस प्रकार से समझा जा सकता है - अ से सृष्टि की उत्पत्ति, उ से स्थिति और म से प्रलय का अर्थ ध्वनित होता है।

3-स्वभाविक दृष्टिकोण से देखें तो अ उच्चारण करने से मॅुह खुल जाता है। उ से वह और भी अधिक विस्तार ले लेता है और म से वह स्वतः बंद हो जाता है। ऐसी ध्वनि और ऐसी मुद्रा अन्य सैकड़ों शब्दों से भी ध्वनित होती है। फिर ओउम् में ही ऐसी क्या विशेषता है?

4-यह प्रश्न अनेक जिज्ञासु मन में उत्पन्न हो सकता है। सटीक उत्तर के लिए इस शब्द की होने वाली ध्वनि, नाद, निनाद आदि में जाना पड़ेगा। क्योंकि इस प्रश्न का सार-सत शब्द के अर्थ, उसकी तदनुसार चर्चा और तर्क-कुतर्क में नहीें वरन उसकी ध्वनि और नाद में निहित है। समस्त ब्रह्माण्ड का प्रतीक चिन्ह ॐ अपने में अदभुत है।