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ASTROLOGY OF MAHAVASTU


MAHAVASTU IN NUTSHELL;-

1-मैं योग और सांख्य की पृष्ठभूमि से हूं और मानता हूं कि पूर्वजन्म होता है। योग कहता है। महर्षि पतंजलि कहते हैं। शास्त्र कहता है। ऐसा दर्शनशास्त्र भी कहता है। जब तक उस इच्छा को पूरा नहीं कर लेते, जन्म जन्मांतर तक आप जन्म लेते रहेंगे। सभी धर्मों में यह एक सामान्य अवधारणा है। इसका अर्थ यह है कि जो कार्य हमें सौंपा गया है, उसे जब तक पूरा कर नहीं लिया जाता, हमारा पुनर्जन्म होता रहेगा।

2-इसके सिवाय इसका और कोई हल नहीं है।कौन हूं मैं? मैं उस परमतत्व की इच्छा को धारण किए हुए, उसे व्यक्त करने के लिए यात्रा पर निकला हुआ हूं। मुझे एक कर्तव्य, एक कृत्य, एक ड्यूटी मिली हुई है, और मुझे वह व्यक्त करना है। ये हूं मैं। उसने जो काम दिया है, जब उसे करने के लिए निकल पड़ेंगे तो संसार के जितने भी साधन हैं, वह आपकी सेवा में जुट जाएंगे और अगर वे नहीं जुट रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप गलत दिशा में हैं।

3-इसका मतलब सिर्फ इतना ही है।जो व्यक्ति इच्छा पैदा करने वाली आत्मा की अभिव्यक्ति को जान लेता है, वह आत्म-वास्तविकता के मार्ग से आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त कर लेता है। उसे वह रास्ता भी मिल जाता है और वो उसे साकार भी कर लेता है। नहीं तो वो हर जन्म इज्जत का टोकरा सर पर उठा के घूमता रहता है और बार-बार जन्म लेता रहता है। पीड़ा को भोगता है। तुम्हें उसी क्षण पीड़ाओं से मुक्ति मिल जाती है, जब तुम्हें इतना सा अहसास हो जाए कि मैं एक परमतत्व की इच्छा को ले कर यहां आया हूं और मुझे इसे व्यक्त करना है।

इसे अभिव्यक्त करना है।

4-पतंजलि कह रहे हैं, यह इच्छाएं सदा से हैं। होने की इच्छा, अस्तित्व की इच्छा, शाश्वत इच्छाएं हैं। यह मूल प्रवृत्ति है। आप इच्छाओं से मुक्त नहीं हो सकते। जन्म हुआ है तो मरने तक इच्छाएं बनी रहेंगी, क्योंकि इच्छा ही हैं, जो जीवन को चलाती हैं।

5-ज्योतिष का मतलब इनसाइट्स। ईश यानी डिवाइन। ज्योतिष का अर्थ ही है, डिवाइन इनसाइट्स। दैवीय प्रज्ञा। वह दैवीय स्फूर्त विचार, जो ऊर्जा से भर दे। जो स्पष्टता दे। दे स्पष्टता दे। वह विधा जो मुझे एक ऐसा विचार दे, जो मेरे जीवन को समृद्ध कर दे। जो मुझे यथार्थ का अहसास कराए। यह है ज्योतिष।ज्योतिष सवाल प्रस्तुत करने की कला है तभी आप अपने सवालों का जवाब पा सकते हैं। अगर सवाल नहीं है, तो जवाब भी नहीं हैं। अगर सवाल है तो जवाब भी है। ज्योतिष जवाबों का विज्ञान है, जो आपके ग्रह, नक्षत्रों के आधार पर सटीक समाधान करता है।

6-पांच अंग हैं ज्योतिष के। लेकिन मूल रूप से तीन ही हैं- ग्रह, लक्षण और घर।ज्योतिष पांच कॉन्टेक्स्टस में सोचने का ढंग है। ज्योतिष अपनी इंटेंशन अपनी धारणाओं को करेक्ट करने का विषय है। ज्योतिष में धारणा केतु बताता है। सबसे महत्वपूर्ण प्लानेट कौन सा है? धारणा कैसी है? अटेंशन वैसी ही होगी तुम्हा