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WHAT IS TRATAK MEDITATION /SADHANA (IN HINDI ) ?--PRANM--10


शरीर को स्वस्थ्य और शुद्ध करने के लिए छ: क्रियाएँ विशेष रूप से की जाती हैं। जिन्हें षट्‍कर्म कहा जाता है। ये क्रियाएँ हैं:- 1.त्राटक 2.नेती. 3.कपालभाती 4.धौती 5.बस्ती और 6.नौली। क्रियाओं के अभ्यास से संपूर्ण शरीर शुद्ध हो जाता है। किसी भी प्रकार की गंदगी शरीर में स्थान नहीं बना पाती है। बुद्धि और शरीर में सदा स्फूर्ति बनी रहती है। जब साधक किसी वस्तु को अपनी दृष्टि और मन से बांधता है यानि एकटक किसी वस्तु को देखता है, तो वह क्रिया त्र्याटक कहलाती है| त्र्याटक शब्द ही बाद त्राटक हो गया है| त्राटक क्या है? आप इसे कुछ ऐसे समझ सकते हैं कि जब कोई इंसान चरम बिंदु पर एकाग्रचित्त होकर ध्यानस्थ होता है तो वह बोध अवस्था में होकर भी आसपास के वातावरण से निरपेक्ष हो जाता है। ऐसे में उसकी समस्त चेतना का केन्द्र बिंदु अंतः की ओर रूपायित होने लगता है। यही वह उच्चतर अवस्था होती है जबकि साधनारत इंसान की संपूर्ण शक्तियां एकाकार होने लगती हैं और वह दूसरों को आकर्षित और वशीभूत कर सकने में सक्षम होता है। त्राटक साधना सहज सिद्ध होने वाली साधना है किंतु इसके लिए कुछ निर्धारित नियमों का कड़ाई से अनुपालन करना होता है। Tratak Sadhana यानि किसी वस्तु को एक निगाह से देखते रहना| हठयोग में इसे दिव्य साधना से सम्बोधित किया जाता है| इसके द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व् दृष्टि मात्र से व्यक्ति अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है| इसके अभ्यास से मानसिक शांति और आनंद प्राप्त किया जा सकता है| इससे आँख के सभी रोग, मन का विचलन अर्थात मन भटकना, स्मृतिदोष दूर होते है और आँखों की दूर दृष्टि बढ़ती है| किसी वस्तु को जब हम एक बार देखते हैं, तो इस देखने की क्रिया हो एकटक कहा जाता है। उसी वस्तु को जब हम कुछ देर तक देखते हैं, तो वह द्वाटक कहलाती है। परन्तु जब हम किसी वस्तु को एक दृष्टि से लगातार अधिक समय तक देखते रहते हैं, तो यह क्रिया त्र्याटक या त्राटक कहलाती है। दृष्टि की शक्ति को जाग्रत करने और बढ़ाने के लिए हठयोग में इस क्रिया का वर्णन किया गया है। त्राटक क्रिया करने की विधि------- त्राटक का सामान्य अर्थ है किसी वास्तु को टकटकी लगाकर देखना, इस क्रिया से मन की चंचलता को शान्त करने के लिये किया जाता है| यह ध्यान की एक विधि है जिसमें किसी वस्तु को टकटकी लगाकर देखा जाता है| यदि हम अधिक लंबे तक, नियमित कुछ महीनों तक, एक घंटा दीये की लौ को निरन्तर देखते रहें तो हमारी तीसरी आंख पूर्ण रूप से सक्रिय हो जाती है। अर्थात आप अधिक सजग अनुभव करते हैं। त्राटक शब्द का मूल अर्थ है आंसू। इसलिए आपको दीये की लौ को तब तक लगातार देखते रहना है जब तक आंखों से आंसू ना बहने लगें। इसलिए इस क्रिया को बिना पलक झपकाए, एकटक देखते रहें| जिससे आपकी तीसरी आंख सक्रिय होने लगेगी। एकटक देखने की विधि असल में किसी विषय से संबंधित नहीं है, इसका संबंध केवल देखने मात्र से है। क्योंकि जब आप बिना पलक झपकाए एकटक या एक निगाह से देखते हैं, तो आप एकाग्र हो जाते हैं। अर्थात मन एक जगह स्थिर हो जाता है| त्राटक की अन्य क्रिया विधि------------- यह विधि ऊपर बताओ गयी विधि से थोड़ी अलग है| इस क्रिया विधि को हम दो चरण में करेंगे| इस विधि में हमे 1 घंटे का समय देना होगा| जिसका पहला चरण 40 मिनट का तथा दूसरा चरण 20 मिनट का रहेगा| आइये जानते है Tratak Siddhi का--- पहला चरण---- इस क्रिया को करने के लिए कमरे को चारों ओर से बंद कर लेना है और एक बड़े आकार का दर्पण अपने सामने रखना है। ध्यान रहे कमरे में बिलकुल अंधेरा हो किसी तरह की रोशनी यहाँ न आने पाए। अब एक दीपक या मोमबत्ती जलाकर दर्पण के पास इस प्रकार रखें कि उसकी रोशनी सीधी दर्पण पर न पड़े।आप घी के दीपक का प्रयोग करें तो अत्युत्तम होगा। दीपक बड़ा हो और पूर्ण रूप से घी से भरा हो, दीपक में बाती का प्रयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए ताकि वह साधना काल में जलता रहे......... सिर्फ आपका चेहरा ही दर्पण में दिखाई दे, न कि दीपक या मोमबत्ती की लौ। इसके बाद दर्पण में अपनी दोनों आंखों में बिना पलक झपकाए देखते रहें और लगातार चालीस मिनट तक ऐसा करते रहें| अगर आंसू निकलते हो तो उन्हें निकलने दें, लेकिन पूरी कोशिश करें कि पलक गिरने न पाए। आंखों की पुतलियों को भी इधर-उधर न घुमाए, ठीक दोनों आंखों में झांकते रहें।...... अंधेरे कक्ष में आप नितांत अकेले होकर .........दीपक की लौ को निहारने की कोशिश करें.................और गहरे उतरें और गहरे.............लौ के व्यतिक्रम को निहारें......निहारते रहें..............आत्म चिंतन की अवस्था में शून्य की तरफ बढ़ने की कोशिश जारी रखे.............धीरे-धीरे आप स्वयं के आज्ञाचक्र में झांकने की शक्ति अर्जित कर लेंगे हालांकि आरम्भिक दौर में ये शक्ति अल्पकाल के लिए अर्जित होगी किंतु ये क्रिया निरंतर दोहराते रहने से आप इसे स्थायी बना सकते हैं। त्राटक के लाभ:--------- त्राटक का सर्वप्रथम लाभ है कि सिद्धि के पश्चात आपकी तरफ देखने वाला जनसमूह आपका विरोध नहीं कर सकता है। सामने उपस्थित भीड़ आपके अनुकूल होने के लिए बाध्य हो जाती है। दूसरा बड़ा लाभ ये है कि आप भविष्य में घटने वाली किसी भी घटना का पूर्वानुमान लगा सकने में सक्षम हो जाते हैं। दूसरा चरण------- इस चरण में आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है| बस आँखों को बंद करके विश्राम की स्थिति में चले जाएं| त्राटक क्रिया के लाभ------ 1-त्राटक क्रिया आँखों के लिए तो लाभदायक है साथ ही यह आपकी एकाग्रता को बढ़ाने में भी सहायक है। 2-स्थिर आँखें स्थिर चित्त का परिचायक है।इसका नियमित अभ्यास कर मानसिक शां‍ति और निर्भिकता का आनंद लिया जा सकता है। 3-इससे आँख के रोग दूर जाते हैं। साथ ही मानसिक शांति और आनंद की प्राप्ति होती है| यह सभी Tratak Benefits है| Note-आँखों में किसी भी प्रकार का दर्द या जलन हो तो इस क्रिया को न करें| THE KEY POINT---- FOR SADHAKS,,,, FOCUSING ON PICTURE GIVEN BELOW IS MORE IMPORTANT THAN CANDLE------THEY CAN RECEIVE CHAKRA ENLIGHTMENT ; VERY SOON.. ..........................SHIVOHAM.