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WHAT IS NADISHODHAN PRANAYAMA?(IN HINDI)---PRANAYAMA--08


नाड़ीशोधन प्राणायाम----- 1- प्रातः काल पूर्व को मुख करके कमर सीधी रखकर सुखासन से, पालथी मार कर बैठिये । नेत्रों को अधखुले रखिए । 2-दाहिना नासिका का छिद्र बन्द कीजिए । बाएँ छिद्र से साँस खींचिए और उसे नाभिचक्र तक खींचते जाइए । 3- ध्यान कीजिए कि नाभि के स्थान में पूर्णिमा के पूर्ण चन्द्रमा के समान पीतवर्ण शीतल प्रकाश विद्यमान है । खींचा हुआ साँस उसे स्पर्श कर रहा है ‍। 4- जितने समय में साँस खींचा गया था, उतने ही समय भीतर रोकिए और ध्यान करते रहिए कि नाभिचक्र में स्थित पूर्ण चन्द्र के प्रकाश को खींचा, प्रकाशवान् बन रहा है । 5- जिस नथुने से साँस खींचा था, उसी बायें छिद्र से बाहर निकालिये और ध्यान कीजिए कि नाभिचक्र के चन्द्रमा को छूकर वापिस लौटने वाली प्रकाशवान् एवं शीतल वायु इड़ा नाड़ी की छिद्र नलिका को शीतल एवं प्रकाशवान् बनाती हुई वापिस लौट रही है । 6-कुछ देर साँस बाहर रोकिए और फिर उपरोक्त क्रिया आरम्भ कीजिए । बायें नथुने से ही साँस खींचिए और उसी से निकालिए । दाहिने छिद्र को अँगूठे से बन्द रखिए । इसी को तीन बार कीजिए । 7- जिस प्रकार बायें नथुने से पूरक, कुम्भक, रेचक, बाह्य कुम्भक किया था, उसी प्रकार दाहिने नथुने से भी कीजिए । नाभिचक्र में चन्द्रमा के स्थान पर सूर्य का ध्यान कीजिए और साँस छोड़ते समय भावना कीजिए कि नाभि स्थित सूर्य को छूकर वापिस लौटने वाली वायु श्वास नली के भीतर उष्णता और प्रकाश उत्पन्न करती हुई लौट रही है । 8-बायें नासिका स्वर को बन्द रखकर दाहिना छिद्र से भी इस क्रिया को तीन बार कीजिए । 9--अब नासिका के दोनों छिद्र खोल दीजिए । दोनों से साँस खींचिए और भीतर रोकिए और मुँह खोलकर साँस बाहर निकाल दीजिए । यह विधि एक बार ही करना चाहिए । 10- तीन बार बायें नासिका छिद्र से साँस खींचते और छोड़ते हुए नाभि चक्र के चन्द्रमा का शीतल ध्यान, तीन बार दाहिने नासिका छिद्र से साँस खींचते छोड़ते हुए सूर्य का उष्ण प्रकाश वाला ध्यान, एक बार दोनों छिद्रों से साँस खींचते हुए मुख से साँस निकालने की क्रिया यह सात विधान मिलकर एक नाड़ी शोधन प्राणायाम बनता है । ,,,,,,,,,SHIVOHAM,,,,,,,,.