क्या 'प्रार्थना ध्‍यान' का अर्थ Energy का Alignment करना है?

प्रार्थना का क्या महत्त्व है?-

02 FACTS;- 1-भक्तियोग के आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होने हेतु प्रार्थना, साधना का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।प्रार्थना शब्द ‘प्र’ और ‘अर्थ’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है पूर्ण तल्लीनता के साथ निवेदन करना अथार्त ईश्‍वर से किसी वस्तु के लिए तीव्र उत्कंठा से निवेदन करना।प्रार्थना में आदर, प्रेम, आवेदन एवं विश्‍वास समाहित हैं।प्रार्थना के माध्यम से भक्त अपनी

असमर्थता को स्वीकार करते हुए ईश्‍वर को कर्ता मान लेता है।यह अपने अहं को चोट देने समान है।इस प्रकार व्यक्ति अपने से उच्च मन तथा बुद्धिवाले से सहायता मांगता है और पुनः-पुनः प्रार्थना करने से हम अपने सीमित मन तथा बुद्धि से निकलकर उच्चतर विश्वमन तथा विश्वबुद्धि से संपर्क कर पाते हैं।इस प्रकार आध्यात्मिक प्रगति के लिए पुनः-पुनः तथा निष्ठापूर्ण प्रार्थना से कालांतर में मन, बुद्धि तथा अहं के लय में सहायता मिलती है।

2- प्रार्थना हमारी साधना को तीन स्तरों पर प्रभावित करती है... कर्म, विचार और भाव। जब कोई साधक ईश्‍वर से निष्ठा पूर्वक प्रार्थना करता है तब असाध्य प्रतीत होने वाला कार्य भी सहज संपन्न हो जाता है।उसे बोध हो जाता है कि वह मात्र निमित्त है ..कर्ता नहीं ;इसलिए उसे कार्य को संभव होने में निमित्त बनना है। कर्ता भाव जैसे ही समाप्त होता है, वैसे ही निष्काम कर्म योग सिद्ध हो जाता है।व्यर्थ के विचार ऊर्जा का भी अपव्यय करते हैं और जब तक मन सक्रिय रहता है, विचारों की श्रृंखला बनी रहती है।वे मन के विलय में बाधक हैं।प्रार्थना चिन्ता घटाती है।

भावपूर्ण प्रार्थना से साधक में चिंतन प्रक्रिया आरंभ होती है और उसे अंतर्मुख बनने में सहायता करती है ।








क्या है प्रार्थना ध्‍यान?-

Energy bathing or Submersion/ ऊर्जा में डूबने की क्रिया ही प्रार्थना ध्‍यान है। यह प्रार्थना ध्‍यान आप रात में कर सकते हो।यह प्रार्थना ध्‍यान तुम्‍हें बदल डालती है और जब तुम बदलते हो तो पूरा अस्‍तित्‍व भी बदल जाता है।कमरे में अंधकार कर ले और ध्‍यान खत्‍म होने के तुरंत बाद सो जाये।सुबह भी यह ध्‍यान किया जा सकता है, परंतु उसके बाद पंद्रह मिनट का विश्राम करना अनिवार्य है।

STEP 1-

सुखासन में बैठ जाये और दोनों हाथ ऊपर की ओर उठा ले ।हथेलियां खुली हुई हों और सिर सीधा उठा हुआ रहे।मन के अंदर ही अंदर मंत्र का जाप करते रहे ... ''ॐ सत्- चित् -एकम ब्रह्म;'' या केवल ओम का ही जाप करें।अनुभव करें कि Space से Divine Energy/Existence/अस्‍तित्‍व तुम्हारी खुली हुई हथेलियो से आकर तुममें प्रवाहित हो रहा है। जैसे ही

ऊर्जा तुम्‍हारी बाँहों से होकर नीचे बहेगी ..तुम्‍हें हलके-हलके Vibration/कंपन का अनुभव होगा। तुम हवा में कंपते हुए पत्‍ते की भांति हो जाओगे । उस Vibration को पूरे शरीर में होने दो,उसका सहयोग करो और जो होता हो उसे होने दो।तुम्‍हें केवल Witness होना है।

STEP 2-

अब अनुभव करें कि Earth से Divine Energy/Existence/अस्‍तित्‍व तुम्हारे दोनों पैर से आकर तुम्हारे दोनों अंगूठे में

प्रवाहित हो रहा है।जैसे ही ऊर्जा तुम्हारे दोनों अंगूठे से होकर ऊपर की ओर बहेगी ..तुम्‍हें Vibration/ का अनुभव होगा।अब तुम Earth Energy के साथ प्रवाहित होने का अनुभव करो।फिर आकाश की Divine Energy के साथ प्रवाहित होने का अनुभव करो।इसके बाद पृथ्‍वी और स्‍वर्ग, ऊपर और नीचे, यिन और यांग ,इड़ा और पिंगला दोनों Energy के साथ 'समभाव' में प्रवाहित होने का अनुभव करो ।

STEP 3-

अब तुम्‍हें Energy का Alignment करना है।पहले तुम स्‍वयं को पूरी तरह Relaxed Feel करो ..तुम बहो, तुम घुलो..डू जाओ। वास्तव में,तुम दो नहीं हो...तुम एक हो।दो या तीन मिनट बाद या जब तुम पूरी तरह Aligned हो जाओ तब तुम धरती की और झुक जाओ और हथेलियों और माथे से उसे स्‍पर्श करो।तुम्‍हें केवल Vehicle/वाहन बनना है जिससे दिव्‍य ऊर्जा/Divine Energyअथार्त Earth Energy और Space Energy की दोनों ऊर्जा का मिलन हो सके और 'समभाव' में Alignment हो सके ।

NOTE;-

इन दोनों Steps को 6 Times Repeat करो ताकि सभी चक्र खुल सकें। इन्‍हें अधिक बार भी किया जा सकता है। लेकिन

कम करोगे तो बेचैन अनुभव करोगे और सो नहीं पाओगे।प्रार्थना की उस भाव दशा में ही सो जाओओ ताकि ऊर्जा बनी रहे। नींद की गहराई में उतरते हुए भी तुम उस ऊर्जा के साथ बहते रहोगे।यह गहन रूप से सहयोगी होगा क्‍योंकि फिर ऊर्जा तुम्‍हें सारी रात घेरे रहेगी और भीतर कार्य करती रहेगी।सुबह होते-होते तुम इतने ज्‍यादा प्राणवान अनुभव करोगे, जितना तुमने पहले कभी भी अनुभव नहीं किया होगा ।एक नई सजीवता, एक नया जीवन तुममें प्रवेश करने लगेगा और पूरे दिन तुम एक नई ऊर्जा से भरे हुए अनुभव करोगे।

...SHIVOHAM...