गुवाहाटी का रहस्यमयी गांव मायोंग....



08 FACTS;-

1-जादू हाथ की सफाई है,या भ्रम है यह कहना मुश्‍किल है। जादू अनंतकाल से किया जाने वाला सम्मोहन भरा प्रदर्शन है। भारत में बंगाल और दुनिया में एक से एक बढ़कर जादूगर हुए हैं। उनके जादू देखकर लोग हैरत में पड़ जाते थे। लेकिन भारतीय राज्य असम की राजधानी गुवाहाटी शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर जिला मोरिगांव में पबित्रा सेंक्चुअरी के पास स्थित है कालेजादू का गांव मायोंग।काले जादू का गांव मायोंग में, आज भी रहस्य का आवरण रहता है।'मायोंग' शब्द संस्कृत शब्द 'माया' से बना है जिसका अर्थ होता है भ्रम। यहां के लोग भ्रम पैदा करने में उस्ताद हैं। कहते हैं कि यहां के लोग गायब करने और गायब होने का जादू जानते हैं। यहां के लोग खुद को जानवरों में भी बदलने की शक्ति रखते हैं और यहां पर जंगली जानवरों को अपनी जादू की शक्ति से पालतू बना लिया जाता है।जंगली जानवरों को मंत्र से पकड़ते हैं और कई तरह के जादू के प्रदर्शन भी करते है।ऐसा भी माना जाता है काले जादू की शुरुआत इसी गांव से हुई थी। यहां के लोग मानते हैं कि यह गांव भीम के बेटे घटोत्कच का है । हालांकि वर्तमान में यहां काला जादू कम ही किया जाता है।

2-पीठ का दर्द दूर करने के लिए ये रोगी की पीठ पर ताम्बे की थाली रख कर मंत्र पढ़ते हैं। माना जाता है कि यह थाली दर्द को खींच लेती है। यदि दर्द ज्यादा गम्भीर हो तो माना जाता है कि थाली बेहद गर्म होकर जमीन पर गिर जाती है।कहा जाता है कि ये बीमारियों को दूर करने का पारंपरिक तरीका है। हाथ देख कर भविष्य कथन करने से लेकर उपचार तक लगता है कि जैसे ये लोग सभी कुछ कर सकते हैं। कहते हैं कि इस गांव में वशीकरण मंत्र, काला जादू और तंत्र-मंत्र से जीते-जागते लोगों को भेड़-बकरी बना दिया जाता है।साइंस और तकनीक के ज़माने में यहां जादू के ज़ोर से चोर पकड़े जाते हैं। मंत्रों से ज़हरीले सांपों का ज़हर उतारा जाता है और होता है रोगों का उपचार।आज भी इस गांव में देश के कई हिस्सों से लोग असाध्य रोगों के उपचार के लिए आते हैं।ऐसे मंत्र भी हैं, जिनके जरिए आप तीन घंटे का रास्ता एक घंटे में तय कर सकते हैं।यहां नदी किनारे एक 3.85 मीटर शिला लिपि है, जिस पर तीन तरह की लिपियों में मंत्र लिखे हैं, जिन्हें आज तक कोई पढ़ नहीं पाया। असम में ये कहानी प्रचलित हैकि 1332 ईस्वीं में असम पर कब्जा जमाने के लिए मुगल बादशाह मोहम्मद घुड़सवारों के साथ चढ़ाई की थी। उस समय असम में हजारों जादूगर मौजूद थे और उन्होंने मायोंग को बचा दीवार खड़ी कर दी थी जिसे पार करते ही शाह की पूरी सेना गायब हो गई थी। सेना का क्या हुआ, किसी को नहीं पता।

3-मायोंग में बूढ़ा मायोंग नाम की एक जगह है जहाँ काले जादू के केंद्र.. दो कुंड हैं- एक अष्टदल कुंड व दूसरा योनि कुंड।नदी के किनारे काशा हिला (कच्छप पहाड़ी) है, जिसकी चट्टानों पर रहस्यमयी मंत्रों के शिला लेख हैं। शिला पर डमरू, त्रिशूल, देवी का प्रतीक, अष्टभुजी चक्र अंकित है।इन्हें कोई जानकार ही पढ़ और समझ सकता है। यहां एक अर्द्धवृत्ताकार योनि कुंड है, जिसमें सालभर पानी भरा रहता है। आज भी देश के विभिन्न भागों से साधक यहां तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए आते हैं। कहा जाता है कि मंत्र साधना की शक्ति के कारण यह कुंड सदा भरा रहता है।योनि कुंड पर हिन्दू व अष्टदल कुंड पर बौद्ध अपनी तंत्र विद्या लिए साधना किया करते थे। इसके अलावा यहां पर भगवान शिव व पार्वती के अलावा गणेश जी की भी प्रतिमा हैं ।कहते है कि कालेजादू की मंत्र शक्ति के कारण ये कुंड हमेशा पानी से लबालब भरा रहता है।मायोंग गांव को काला जादू का गढ़ माना जाता है, यहां के लोगों को इंसान से जानवर बनाने की कला मालूम है। यही नहीं ऐसा भी कहा जाता है कि अपनी जादुई शक्ति से लोगों को यहां हवा में गायब कर दिया जाता है।

4-इन्हीं रहस्यमय बातों के कारण यात्री यहां आना पसंद करते हैं। एडवेंचर के शौकीन लोग इस जगह को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। हालांकि, इस जगह को काला जादू के अलावा प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से काफी पसंद किया जाता हैं। इस गांव से जुड़ी ऐसी कई कहानियां हैं, जिसका अनुसरण आज भी वहां के लोग करते हैं।प्रारंभिक आधुनिक काल तक इस गांव में शक्ति पूजा की जाती थी, जहां लोगों की बलि दी जाती थी। मायोंग गांव का इतिहास महाभारत से जुड़ा है। ऐसा कहा जाता है कि ये गांव भीम के बेटे घटोत्कच का है। उसे इस गांव का राजा माना जाता है।इसके अलावा कुछ लोग यह भी मानते हैं कि मणिपुर के मोइरंग के मूल निवासी इस गांव में बसे हुए थे, जिसके कारण इसे मायंक(मायोंग) कहा जाने लगा।इस गांव में जाते ही यात्रियों को काला जादू से जुड़ी कहानियां सुनने को मिल जाएंगी।यहां के तांत्रिकों का दावा है कि वो मंत्रों के सहारे से खोई हुई चीज़ ढूंढ लाते हैं, वो बस एक कटोरे में कुछ फूल डाल कर मंत्रोच्चारण करेंगे और कटोरा ख़ुद-ब-ख़ुद लुढ़कता ..चोर/खोई हुई वस्तु तक पहुंच जाएगी।ये लोग बीमारियों को ठीक करने के लिए भी काले जादू का प्रयोग करते हैं क्योंकि माना जाता है कि इन्हें आयुर्वेद का भी गहन ज्ञान होता है।

5-मायोंग गांव के लोग अपने बच्चों को विरासत में काला जादू दे जाते हैं गावं वालों के अनुसार वो इससे समाज की भलाई के लिए उपयोग करते हैं।कहा जाता है यहां हर घर में गुप्त तंत्र साधनाएं चलती हैं।मायोंग में अविश्वसनीय जादू के टोटके और अजीब कहानियों को सुनने के अलावा आप यहां कई चीजें एक्सप्लोर करते सकते हैं। मायोंग अभी भी उन जादूगरों का घर है, जिन्हें मंत्रों के जरिए ना सिर्फ काला जादू बल्कि आयुर्वेद, हस्तरेखा और भविष्यवाणी का ज्ञान है। इन सभी चीजों में रुचि रखते हैं तो इस गांव में घूम सकते है। यह प्राचीन भूमि वन्य जीवन में भी समृद्ध है।गांव में जादूगिरी को समर्पित एक म्यूजियम है। यहां कालेजादू से संबंधित कई दुर्लभ व प्राचीन 12वीं शताब्दी की कई पांडुलिपियां मौजूद हैं। ये तंत्र के वे कीमती दस्तावेज़ हैं, जिनका मूल्य केवल इस भाषा को समझने वाले ही बता सकते हैं।मायोंग के लोग अपनी इस कला पर गर्व करते हैं। एक जानकार के अनुसार इन लिपियों में उड़ने, किसी को मारने और वश में करने के लिए काला जादू किस तरह किया जाए ये सारी जानकारियां मौजूद हैं।मायोंग सेंट्रल म्युजियम में आयुर्वेद और कालेजादू के बहुत से प्राचीन अवशेष और पांडुलिपियां आज भी हैं।

6-खास बात है कि इस संग्रहालय को नेशनल जियोग्राफिक ने दुनिया के 10 अनोखे म्यूजियम की लिस्ट में रखा है।मायोंग से नजदीक पोबित्र वन्यजीव उद्यान में भारतीय गैंडों की सर्वाधिक सघन संख्या है जो इस गांव का एक अन्य आकर्षण है।गांव में ट्रैकिंग और कई वॉटर स्पोर्ट्स हैं जिसका लुत्फ़ यात्री उठा सकते हैं।मायोंग गांव पहुंचने के लिए आपको गुवाहाटी आना होगा। इसके लिए आप ट्रेन या फिर फ्लाइट दोनों का सहारा लें सकते हैं।गुवाहाटी से कई लोकल गाड़ियां या फिर बस मिल जाएंगे, जो आपको मायोंग गांव तक छोड़ देंगे। कहते हैं कि पहले दूर-दूर से लोग यहां काला जादू सीखने आते थे।आज भी गांव में 100 जादूगरों का समुदाय है परंतु उनमें ज्यादातर गुजारे के लिए खेतों में काम करने को मजबूर हैं। अफसोस की बात है कि सदियों से जादूगिरी के लिए प्रसिद्ध रहे इस गांव को वह आकर्षण नहीं मिल सका जो मिलना चाहिए था। फंड्स तथा अवसरों की कमी की वजह से इस गांव में जादूगिरी की कला पहले वाली लोकप्रियता खो रही है।

7-जानकारों का मानना है ये जादू और कुछ नहीं बस एक बंच ऑफ एनर्जी है। जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है या कहें एक इंसान के द्वारा दूसरे इंसान पर भेजा जाता है। इसे Law of Conservation of Energy से समझा जा सकता है। जिसके अनुसार‘’Energy may be transformed from one form to another, but it can not be created or destroyed’’.अथार्त ऊर्जा को न ही पैदा किया जा सकता है और न ही इसे खत्म किया जा सकता है।सिर्फ इसके स्वरूप को दूसरे स्वरूप मे बदला जा सकता है। यदि ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल है, तो नकारात्मक इस्तेमाल भी है। सनातन धर्म का अथर्ववेद सिर्फ सकारात्मक और नकारात्मक चीजों के लिए ऊर्जाओं के इस्तेमाल को ही समर्पित है। आपको यह समझना होगा कि ऊर्जा सिर्फ ऊर्जा होती है, वह न तो दैवीय होती है, न शैतानी। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं – देवता या शैतान। यह बिजली की तरह होती है। बिजली दैवीय या शैतानी नहीं होती बल्कि जब वह आपके घर को रोशन करती है, तो वह दिव्य होती है।

8-अर्जुन ने भी श्रीकृष्ण से यही सवाल पूछा था कि आपका यह कहना है कि हर चीज एक ही ऊर्जा से बनी है और हर एक चीज दैवीय है, अगर वही देवत्व दुर्योधन में भी है, तो वह ऐसे काम क्यों कर रहा है? श्रीकृष्ण ने जवाब दिया, ‘ईश्वर निर्गुण है,दिव्यता निर्गुण है। उसका अपना कोई गुण नहीं है।’ इसका अर्थ है कि वह बस विशुद्ध ऊर्जा है। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं। जो बाघ आपको खाने आता है, उसमें भी वही ऊर्जा है और कोई देवता, जो आकर आपको बचा सकता है, उसमें भी वही ऊर्जा है। बस वे अलग-अलग तरीकों से काम कर रहे हैं।कुछ स्वार्थी लोगों ने इस प्राचीन विधा को समाज के सामने गलत रूप में स्थापित किया। तभी से इसे काला जादू नाम दिया जाने लगा। दरअसल, उन्होंने अपनी ऊर्जा का उपयोग समाज को नुकसान पहुंचाने के लिए किया। जिस तरह सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाकर किसी के रोग व परेशानी को दूर किया जा सकता है। ठीक उसी तरह अपनी नकारात्मक ऊर्जा पहुंचाकर उसे तकलीफ भी दी जा सकती है।वास्तव में, ये तंत्र की एक विधा है ;जिसे भगवान शिव ने अपने भक्तों को दिया था।अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा की सहायता से किसी को जीवन दिया जा सकता है लेकिन नकारात्मक ऊर्जा का प्रयोग विनाशकारी होता है।

....SHIVOHAM....