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क्या है प्राणमय कोश/BREATH BODY की प्राणायाम ,बंध और मुद्रा साधना?PART-01

प्राणमय कोश;-

02 FACTS;-

1`-प्राणमय कोश आत्मा पर चढ़ा हुआ दूसरा आवरण है। जब हम हमारे शरीर के बारे में सोचते हैं तो यह पृथ्वी तत्व अर्थात जड़ जगत का हिस्सा है। इस शरीर में प्राणवायु का निवास है। प्राण के अलावा शरीर में पाँचों इंद्रिया हैं जिसके माध्यम से हमें 'मन' और मस्तिष्क के होने का पता चलता हैं। मन के अलावा और भी सूक्ष्म चीज होती है जिसे बुद्धि कहते हैं जो गहराई से सब कुछ समझती और अच्छा-बुरा जानने का प्रयास करती है, इसे ही 'सत्यज्ञानमय' कहा गया है।केवल मानना नहीं ..यदि यह जान लिया है कि मैं आत्मा हूँ शरीर नहीं, प्राण नहीं, मन नहीं, विचार नहीं तब ही मोक्ष का द्वार ‍खुलता है। ऐसी आत्मा 'आनंदमय' कोश में स्थित होकर मुक्त हो जाती है।अन्नमय कोश खाने-सोने, काम करने जैसे प्रयोजन पूरे करता है। इसके भीतर जो ऊर्जा, स्फूर्ति, उमंग काम करती है वह प्राण है। प्राण से ही शरीर चलता और जीवित रहता है। जिसका यह कोश जितना समर्थ है वह उतना ही प्रतापी पराक्रमी, साहसी प्रतीत होगा। उसका बढ़ा-चढ़ा चुम्बकत्व दूसरों का सहयोग, सद्भाव अनायास ही आकर्षित करता रहेगा। ओजस्वी, तेजस्वी, मनस्वी व्यक्तियों में यही प्राण प्रखरता आलोकित रहती है।

2-स्थूल अन्नमय कोश के कण-कण में प्राण ऊर्जा संव्याप्त है, पर उसका केन्द्र संस्थान प्रवेश द्वार जननेन्द्रिय मूल में अवस्थित मूलाधार चक्र है। इसकी उमंगें कामेच्छा के रूप में मन को और रति कर्म की ललक बनकर शरीर को उत्तेजित करती रहती है। इसी केन्द्र के रस-रज वीर्य के अन्तर्गत छोटे-छोटे कीटाणुओं में समूचे मनुष्य की आकृति-प्रवृति बीज रूप में विद्यमान रहती है।इसी को कला केन्द्र कहा जाता है। सौन्दर्य बोध से लेकर उल्लास भरे भविष्य की आशा यही से प्रकट होती है। अब इस सूक्ष्म सत्ता के प्रभाव भौतिक विज्ञान के स्थूल उपकरणों की पकड़ में भी आने, लगे हैं। रूस के वैज्ञानिक सेम्योन किर्लियान ने एक ऐसी फोटोग्राफी का आविष्कार किया जो मनुष्य के इर्द-गिर्द होने वाली विद्युतीय हलचलों /Power movements का भी छायांकन करती है। इससे प्रतीत होता है कि स्थूल शरीर के साथ-साथ सूक्ष्म शरीर की भी सत्ता विद्यमान है और वह ऐसे पदार्थो से बनी है जो इलेक्ट्रनों से बने ठोस पदार्