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क्या महत्व है मृत संजीवनी मंत्र का?

मृत संजीवनी मंत्र का महत्व ;-

04 FACTS;-

1-हमारे शास्त्रों और पुराणों में गायत्री मंत्र और महा मृत्युंजय मंत्र का सबसे अधिक महत्व है, इन दोनों मंत्र को बहुत बड़े मंत्रो में से एक माना जाता है क्यूंकि यह दोनों मंत्र से आपको सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिल जाती है।हमारे शास्त्रों में ऐसे कई सारे उल्लेख मिलते है जिनमे यही दो मंत्र सबसे प्रमुख स्थान में आते है क्यूंकि इनसे अधिक शक्तिशाली और कोई मंत्र नहीं है।माना जाता है की कोई सच्चे दिल से निरंतर इस मंत्र का जाप करता है तो कई सारे बड़े-बड़े संकटों से आसानी से मुक्ति पायी जा सकती है।वैसे तो भगवान शिव के कई सारे मंत्र है पर अपनी सभी तरह की इच्छाओं को पूरी करने के लिए सबसे शक्तिशाली मंत्र है "महामृत्युंजय मंत्र"।शिवजी के मृत संजीवनी मंत्र में काल को भी रोकने की शक्ति है;जिसका जाप रावण करता था।मृत्युंजय मंत्र पांच प्रकार के हैं- जो उपरोक्त चित्र में दिए है।पांचवा संजीवनी मंत्र और छठवा महामृत्युंजय गायत्री का निम्न महत्व है।


2-पांचवा महामृत्युंजय मंत्र;-

''त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥''

इस महामंत्र 32 शब्द हैं। ॐ' लगा देने से 33 शब्द हो जाते हैं। इसे'त्रयस्त्रिशाक्षरी या तैंतीस अक्षरी मंत्र कहते हैं। मुनि वशिष्ठजी ने इन 33शब्दों के 33 देवता अर्थात्‌शक्तियाँ परिभाषित की हैं। इस मंत्र में आठ वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य और एक वषट हैं।त्रयंबकम् = त्रि-ने